आश्चर्यजनक रूप से पेट को गर्भाशय में बदल मादा गैस्ट्रिक-ब्रूडिंग मेंढक देती मुंह से अपने बच्चे को जन्म

लखनऊ

 06-08-2021 10:11 AM
मछलियाँ व उभयचर

दक्षिणी गैस्ट्रिक ब्रूडिंग मेंढक (Gastric brooding frog - Rhebatrachus silus) की खोज 1972 में क्वींसलैंड (Queensland), ऑस्ट्रेलिया (Australia) के पहाड़ों में की गई थी। लेकिन इस प्रजाति ने विश्व का ध्यान अपनी तरफ तब आकर्षित किया जब1974में माइक टायलर ने पता लगाया कि यह कैसे पुनरुत्पादित करते हैं।सीधे शब्दों में कहें तो मादा मेंढक अपने पेट को गर्भाशय में बदल देती है। वह अपने अंडे निगलती है और अपने बच्चे को पचाने से बचने के लिए अपने पेट में हाइड्रोक्लोरिक एसिड (Hydrochloric acid) बनाना बंद कर देती है।मादाओं में पाए जाने वाले अंडे व्यास में 5.1 मिमी तक मापे गए, ज्यादातर मादा मेंढकों द्वारा लगभग 40 अंडे दिये जाते थे, जो पेट में पाए जाने वाले डिंभकीट की संख्या से लगभग दोगुना (21-26) होते थे। मादा मेंढक के पेट के अंदर लगभग 20 से 25 डिंभकीट फूटते हैं और उनके गलफड़ों से निकलने वाला बलगम एसिड को दूर रखता है। जबकि डिंभकीट अगले छह हफ्तों में बढ़ते हैं और मादा मेंढक इन्हें बिल्कुल भी नहीं खाती हैं।डिंभकीट के बढ़े होने के साथ मादा मेंढक का पेट इतना फूल जाता है कि उसके फेफड़े सिकुड़ जाते हैं, जिससे उसे अपनी त्वचा से सांस लेने के लिए मजबूर होना पड़ता है। आखिरकार, वह "प्रणोदक उल्टी" के माध्यम से अपने बच्चे को जन्म देती है, उन्हें पूरी तरह से विकसित मेंढक के रूप में बाहर निकालती है।
लेकिन मुंह से जन्म देने के लिए मशहूर इस मेंढक की प्रजाति 1983 से विलुप्त हो चुकी है।शोधकर्ता 40 वर्षों तक एक पारंपरिक फ्रीजर (Freezer) में संग्रहीत जमे हुए मेंढक के ऊतकों से डीएनए (DNA) एकत्र करने में सक्षम थे।न्यूकैसल विश्वविद्यालय(University of Newcastle) और न्यू साउथ वेल्स विश्वविद्यालय(University of New South Wales) के वैज्ञानिकों ने मार्च 2013 में घोषणा की कि वे विलुप्त मेंढक का प्रतिरूपण करने का प्रयास करेंगे, जिसे प्रजातियों को पुनर्जीवित करने के लिए "लाजरस प्रोजेक्ट (Lazarus Project)" कहा जाता है। भ्रूण को सफलतापूर्वक क्लोन किया गया था, और परियोजना अंततः एक जीवित मेंढक पैदा करने की उम्मीद में थी।दैहिक कोशिका परमाणु प्रत्यारोपण के रूप में जानी जाने वाली एक प्रक्रिया का उपयोग करते हुए, शोधकर्ताओं द्वारा गैस्ट्रिक ब्रूडिंग मेंढक से दूर से संबंधित ग्रेट-बार्ड मेंढक (Great-barred frog) के अंडों को निष्क्रिय कर दिया और नाभिक को गैस्ट्रिक-ब्रूडिंग मेंढक के साथ बदला था।हालांकि 2009 में बनाए गए मेंढक भ्रूणों में से कोई भी कुछ दिनों से अधिक जीवित नहीं रहे, आनुवंशिक परीक्षणों ने पुष्टि की कि विभाजित कोशिकाओं में विलुप्त मेंढक से आनुवंशिक सामग्री शामिल है। उन्होंने भ्रूण में मेजबान मेंढक से कुछ डीएनए भी शामिल किए थे, इसलिए टीम के सदस्य इस बात पर भी काम कर रहे हैं कि डी-न्यूक्लिएशन (de- nucleation) प्रक्रिया में सुधार करके इससे कैसे बचा जाए।
गैस्ट्रिक-ब्रूडिंग मेंढकों की संयुक्त श्रेणी में 2,000 वर्ग किलोमीटर से कम शामिल थे। दोनों प्रजातियाँ 350 और 1,400 मीटर की ऊँचाई पर वर्षावनों में नदिका प्रणाली से जुड़ी थीं। गैस्ट्रिक-ब्रूडिंग मेंढकों के विलुप्त होने के कारणों को स्पष्ट रूप से समझा नहीं गया है, लेकिन ऐसा माना जाता है कि इनके निवास स्थान की हानि और गिरावट, प्रदूषण और कुछ बीमारियों ने योगदान दिया हो सकता है।साथ ही ऐसा भी माना जाता है कि गैस्ट्रिक- ब्रूडिंग मेंढक कि ये अद्वितीय प्रजाति मानव द्वारा रोगजनक कुकुरमुत्ता को इनके निवास स्थल में लाने के कारण से विलुप्त हुई थी।दोनों प्रजातियों को अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ की संकट सूची और ऑस्ट्रेलिया के पर्यावरण संरक्षण और जैव विविधता संरक्षण अधिनियम 1999 के तहत विलुप्त के रूप में सूचीबद्ध किया गया है; हालाँकि, वे अभी भी क्वींसलैंड के प्रकृति संरक्षण अधिनियम 1992 के तहत लुप्तप्राय के रूप में सूचीबद्ध हैं।अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ का यह अनुमान है कि कम से कम एक तिहाई ज्ञात उभयचर प्रजातियों को विलुप्त होने का खतरा है, जो पक्षियों या स्तनधारियों की तुलना में अधिक है।
उभयचरों के विलुप्त होने के पीछे का सबसे बड़ा कारण है उनके निवास स्थान की क्षति या पतन और तेजी से फैलने वाली संक्रामक बीमारी कईट्रीडिओमैक्सिस (Chytridiycycosis)।कईट्रीडिओमैक्सिस का प्रकोप दुनिया भर के स्थलों पर मेंढकों और अन्य उभयचरों को मार रहा है। जबकि बीमारी का सटीक कारण अज्ञात है, इसके प्रसार का कारण यात्रियों और शोधकर्ताओं को माना जाता है, जो अपने जूते के धागों में फफूंदीय बीजाणुओं को ले जाते हैं। उभयचर की व्यवस्थित आबादी विलुप्त होने वाली कई प्रजातियों के लिए एकमात्र संरक्षण की उम्मीद बन सकती है। AZA’sका एम्फ़िबियन टैक्सोन एडवाइजरी ग्रुप (Amphibian Taxon Advisory Group), AZA से मान्यता प्राप्त चिड़ियाघरों और एक्वैरियम (Aquarium) को उभयचरों के संरक्षण और संरक्षण की दिशा में रणनीतिक, टिकाऊ और प्रभावी कार्रवाई करने में मदद करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

संदर्भ :-
https://on.natgeo.com/3jtI13Y
https://bit.ly/3xoiJJs
https://bit.ly/3Agzvfr
https://bit.ly/37n9kau

चित्र संदर्भ
1. मुँह से बच्चे को जन्म देती मादा गैस्ट्रिक-ब्रूडिंग मेंढक का एक चित्रण (Nationalgeographic)
2. रियोबट्राचस सिलस, दक्षिणी गैस्ट्रिक ब्रूडिंग मेंढक का एक चित्रण (wikimedia)
3. गैस्ट्रिक-ब्रूडिंग मेंढक के पूर्व वितरण एक चित्रण (wikimedia)



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