परमाणु बम बनाने वाला वैज्ञानिक भगवद गीता के इस श्लोक से था प्रभावित

लखनऊ

 11-11-2018 10:00 AM
विचार 2 दर्शनशास्त्र, गणित व दवा

हम में से कोई भी वेदों, पुराणों की शक्तियों और उनमें मौजूद महत्वपूर्ण जानकारियों से अभी तक अच्छी तरह से वाकिफ़ नहीं हो पाया है। जब भी कोई इंसान मुसीबत में होता है वह ईश्वर को याद करता है और उसे किसी भी परेशानी से निपटने की शक्ति और मार्ग का ज्ञान होने लगता है। हमारा देश तो हमेशा से ही आध्यात्मिकता से जुड़ा रहा है। हमारे देश में विश्वभर से लोग आध्यात्म की शिक्षा लेने आते रहें हैं।

उन्हीं में से एक है परमाणु बम के जनक जूलियस रॉबर्ट ओपेनहाइमर, जिन्होंने परमाणु बम का परीक्षण करने से पहले भारत में एक साल बिताया था। भारत आने का उनका मकसद भगवत गीता से आध्यात्मिक शिक्षा को ग्रहण करना था जिसके लिये उन्होंने संस्कृत भी सीखी थी। 1933 में जब ओपेनहाइमर बर्कले (Berkeley) में थे तब उनकी मुलाकात संस्कृत के प्रोफेसर आर्थर डब्लू. राइडर से हुई। रॉबर्ट आर्थर से इतने प्रभावित हुए थे कि वे उनके छात्र बन गये। इसी दौरान रॉबर्ट ने आर्थर से बार-बार भगवत गीता का ज़िक्र सुना था।

रॉबर्ट ओपेनहाइमर मैनहट्टन प्रोजेक्ट (Manhattan Project) की टीम के प्रमुख थें। यह टीम एक ऐसी वस्तु बनाने जा रही थी जो पल भर में दुनिया को तबाह कर सकती थी। इस बात से रोबर्ट अच्छे से परिचित भी थे और दुखी भी। उन्हें इस विनाशकारी वस्तु को परीक्षण के लिये देने से पहले हिम्मत और आंतरिक मजबूती की जरुरत थी। जिसके लिये उन्होंने भगवत गीता का सहारा लिया था।

ओपेनहाइमर ने संस्कृत सीखने के बाद गीता को भी संस्कृत में पढ़ा तथा अर्जुन और कृष्ण के उस संवाद से वे बड़े प्रभावित हुए थे जिसमें अर्जुन कृष्ण से बार-बार सवाल पूछते हैं कि क्यों उन्हें कौरवों के साथ युद्ध शुरू करना चाहिये जबकि वे उनके भाई ही थें। इसके जवाब में कृष्ण उनको तर्क देते हैं कि, “अर्जुन तुम एक सिपाही हो और तुम्हें अपना कर्तव्य अच्छे से करना होगा। तुम्हारा भाग्य तय करना मेरा कार्य है, तुम्हारा नहीं, तुम्हारा फ़र्ज़ है कर्म करना। और अंत में तुम्हें मुझ पर भरोसा रखना चाहिए।”


रोबर्ट इस किस्से से काफी प्रभावित हुए थे। रोबर्ट को साहस भगवत गीता के इस श्लोक ने दिया था तथा ऊपर दिए गए वीडियो में वे इस श्लोक को अंग्रेज़ी में दोहराते भी हैं।

श्रीभगवानुवाच।
कालोऽस्मि लोकक्षयकृत्प्रवृद्धो
लोकान्समाहर्तुमिह प्रवृत्त:।
ऋतेऽपि त्वां न भविष्यन्ति सर्वे
येऽवस्थिता: प्रत्यनीकेषु योधा:।।

संदर्भ:
1.https://www.speakingtree.in/blog/julius-robert-oppenheimerbhagavad-gita
2.http://blog.nuclearsecrecy.com/2014/05/23/oppenheimer-gita/
3.https://timesofindia.indiatimes.com/india/When-Oppenheimer-the-father-of-the-atomic-bomb-quoted-the-Bhagwad-Gita/articleshow/52465022.cms



RECENT POST

  • विश्व भर में मांस के विकल्प के तौर पर उपयोग किया जा रहा है. भारतीय कटहल
    साग-सब्जियाँ

     22-06-2021 08:17 AM


  • सदियों पुराना पारिजात वृक्ष जिसका संबंध महाभारत काल से है
    पेड़, झाड़ियाँ, बेल व लतायें

     21-06-2021 07:26 AM


  • कार्टूनों के साथ संगी का शास्त्रिय संगीत का अनोखा संबंध
    ध्वनि 1- स्पन्दन से ध्वनि

     20-06-2021 12:28 PM


  • क्या बदलाव आए हैं शहरीकरण की वजह से जानवरों के जीवन पर?
    स्तनधारी

     19-06-2021 02:08 PM


  • प्रतिकूल मौसम में आउटडोर खेलों के लिए उपयुक्त वातावरण उपलब्ध करवाते हैं. रिट्रैक्टेबल रूफ
    वास्तुकला 1 वाह्य भवन नगरीकरण- शहर व शक्ति

     18-06-2021 09:35 AM


  • लखनऊ की सफेद बारादरी का रोचक इतिहास जो शोक स्थल से समारोह स्थल में बदल गई
    वास्तुकला 1 वाह्य भवन

     17-06-2021 10:45 AM


  • महामारी के कारण स्थगित क्रिकेट टूर्नामेंट का क्रिकेट अर्थव्यवस्था पर गंभीर प्रभाव
    य़ातायात और व्यायाम व व्यायामशाला

     15-06-2021 08:49 PM


  • कोरोना के दौरान उभरे नए शब्‍दों का एतिहासिक परिदृश्‍य
    ध्वनि 2- भाषायें

     15-06-2021 12:16 PM


  • बढती जनसँख्या के आर्थिक प्रभाव तथा महामारी से बच्चों की शिक्षा पर असर
    नगरीकरण- शहर व शक्ति

     14-06-2021 09:20 AM


  • लम्बवत दीवारों पर चढ़ने की अद्भुत क्षमता के लिए जाना जाता है, आइबेक्स
    व्यवहारिक

     13-06-2021 11:37 AM






  • © - 2017 All content on this website, such as text, graphics, logos, button icons, software, images and its selection, arrangement, presentation & overall design, is the property of Indoeuropeans India Pvt. Ltd. and protected by international copyright laws.

    login_user_id