भारत का प्राचीनतम इस्लामिक मानचित्र

जौनपुर

 02-06-2017 12:00 PM
सिद्धान्त I-अवधारणा माप उपकरण (कागज/घड़ी)
ब्रह्माण्ड मे व्याप्त समस्त ग्रहों, उपग्रहों व पिण्डों का एक निश्चित आकार व स्थान होता है, पृथ्वी भी उनमे से एक है। पृथ्वी कई भूःभागों मे विभाजित है जिन्हे हम महाद्वीप की संज्ञा देते हैं जैसे, एशिया, युरोप इत्यादि। प्रत्येक महाद्वीप कई देशों के जोड़ से बना है जिनका एक मानचित्र होता है। मानचित्रों से ही हम आसानी से पूरे पृथ्वी को देख सकते हैं। प्राचीनकाल से ही विश्व के विभिन्न मनीषियों व दर्शन शास्त्रियों ने कई मानचित्रावलियों का निर्माण किया। इसी कड़ी मे भारत की प्राचीनतम् इन्डो-इस्लामिक मानचित्रावली को बनाने का श्रेय मोहम्मद सादिक इब्न मोहम्मद सलीह उर्फ़ सादिक इस्फ़हानी को जाता है। यह मानचित्रावली सन् 1646-47 के दौरान जौनपुर मे बनायी गयी थी, इसमे कुल 33 क्षेत्रिय मानचित्र तथा विश्व मानचित्र का समागम है। विश्व मानचित्रावली मे विषुवत रेखा, अक्षांश व देशान्तर रेखाओं का रेखांकन किया गया है। उपरोक्त चित्र मे विश्व मानचित्र को दिखाया गया है जिसका अध्ययन करने पर यह पता चलता है कि इसमे कैस्पियन सागर और फारस को बीच मे अंकित किया गया है। ऊपरी पश्चिमी भाग मे अफ्रिका और आंदालुसिया प्रदर्शित हैं तथा निचले पूर्वी भाग मे भारत, तुर्किस्तान और चीन को दिखाया गया है। मानचित्र मे समुद्र को लाल व जमीन को सफेद रंग मे दर्शाया गया है। इस मानचित्रावली का निर्माण कागज पर हुआ है तथा इसपर स्याही से लिखा व चित्रण किया गया है। वर्तमान समय मे यह मानचित्रावली ब्रिटिश पुस्तकालय लंदन मे स्थित है। 1. हिस्ट्री ऑफ़ सिविलाइजेशन्स इन सेन्ट्रल एशिया, वॉल्यूम- 5: एडिटर- इरफान हबीब 2. अर्ली मैप्स ऑफ़ इंडिया: सुजैन गोले 3. इण्डियन कार्टोग्राफी- ए हिस्टोरिकल पर्सपेक्टिव: पी.एल. मदन

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