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भाग्य का अर्थ तथा भाग्य और तक़दीर में अंतर

रामपुर

 27-11-2021 10:12 AM
विचार 2 दर्शनशास्त्र, गणित व दवा

भाग्य (Luck) वह घटना या विश्वास है‚ जो विशेष रूप से सकारात्मक‚ नकारात्मक या असंभव घटनाओं के अनुभव को परिभाषित करता है। प्राकृतिक व्याख्या के रूप में‚ नियमित और अनियमित प्राकृतिक और कृत्रिम प्रक्रियाओं के कारण सकारात्मक‚ नकारात्मक तथा असंभव घटनाएं किसी भी समय या संयोग से हो सकती हैं। इस दृष्टिकोण में “भाग्यशाली” (lucky) या “दुर्भाग्यपूर्ण” (unlucky) एक विवरणात्मक लेबल है‚ जो किसी घटना की सकारात्मकता‚ नकारात्मकता या असंभवता को दर्शाता है। भाग्य की अलौकिक व्याख्या इसे किसी व्यक्ति या वस्तु का गुण बनाती है‚ या किसी व्यक्ति पर भगवान के अनुकूल या प्रतिकूल दृष्टिकोण का परिणाम दर्शाती है। ये व्याख्याएं अक्सर बताती हैं कि भाग्य या दुर्भाग्य कैसे प्राप्त किया जा सकता है‚ जैसे कि एक भाग्यशाली आकर्षण या किसी देवता की प्रार्थना करना।
भाग्य के पर्यायवाची के रूप में‚ फायदा‚ आशीर्वाद‚ संयोग‚ सौभाग्य‚ आकस्मिक लाभ‚ सुअवसर‚ किस्मत‚ अप्रत्याशित आदि शब्दों का उपयोग किया जा सकता है। ऐसा माना जाता है कि भाग्य संस्कृत शब्द “लक्ष्मी” (“Lakshmi”) की व्युत्पत्ति है। वह मूल “लेडी लक” (“Lady Luck”) है‚ जो धन और भाग्य की एक हिंदू देवी हैं। यह आध्यात्मिक प्रथाओं की एक विस्तृत प्रणाली है‚ जिसका लोग ईश्वरीय अनुग्रह प्राप्त करने के लिए अनुसरण करते हैं। ईश्वरीय कृपा का दूसरा नाम भाग्य है। जन्म कुंडली में नौवां घर भाग्य या तक़दीर के लिए प्रासंगिक है। ऐसा माना जाता है कि नौवें स्वामी द्वारा दर्शाए गए देवता की प्रसन्नता भाग्य की वृद्धि में मदद करती है। भाग्य एक व्यक्तिगत मौका घटना को समझने का एक तरीका है‚ जिसमें तीन पहलू हैं जो इसे संयोग या संभावना से अलग करते हैं: 1- भाग्य अच्छा है या बुरा‚ 2- भाग्य दुर्घटना या संयोग से है‚ 3- भाग्य किसी व्यक्ति या लोगों के समूह पर लागू होता है। भाग्य का उपयोग आमतौर पर संयोग की बात के रूप में किया जाता है‚ जैसे यदि कोई व्यक्ति लॉटरी जीत जाता है तो उसे भाग्यशाली माना जाता है‚ या यदि क्रिकेट टीम का कप्तान टॉस जीत जाता है तो उसे भाग्यशाली माना जा सकता है। कई बहुदेववादी धर्मों में विशिष्ट देवी-देवता होते हैं‚ जो अच्छे और बुरे दोनों भाग्य से जुड़े होते हैं। जैसे प्राचीन रोमन धर्म में फोर्टुना (Fortuna) और फेलिसिटास (Felicitas)‚ न्युबियन (Nubian) धर्म में डेडुन (Dedun)‚ जापानी पौराणिक कथाओं में सात भाग्यशाली देवता (Seven Lucky Gods) तथा पॉलिनेशियन कार्गो पंथों (Polynesian cargo cults) में पौराणिक अमेरिकी सैनिक जॉन फ्रुम (John Frum) शामिल हैं। भाग्य के बारे में हिंदू दृष्टिकोण अलग है। हिंदू धर्म में भगवद-गीता (Bhagavad-Gita) केवल भाग्य या तक़दीर से अधिक “पुरुषार्थ” (Purushartha) को महत्व देती है। भगवद-गीता कहती है: “अपने प्राकृतिक कर्तव्य के निस्वार्थ प्रदर्शन पर अपना दिल लगाओ‚ इसके प्रतिफल पर नहीं। पुरस्कार के लिए काम मत करो‚ लेकिन अपना काम करना कभी बंद मत करो”। हिंदू धर्म में हर जीव की एक आत्मा होती है और भगवद-गीता के अनुसार यह आत्मा कभी नहीं मरती। यह रूप धारण करती है और पुनर्जन्म लेती है। एक जन्म में रहते हुए‚ आत्मा अच्छे और बुरे कर्मों में लिप्त रहती है। अगले जन्म में आत्मा का पुनर्जन्म उसके पिछले जन्म के कर्मों की गुणवत्ता और भार से निर्धारित होता है। महाभारत (Mahabharata) में एक उद्धरण प्रासंगिक है: “मनुष्य अपने भाग्य का स्वयं विनिर्माता है। पूर्व जन्म में किए गए कर्म इसमें फल देते नजर आते हैं। आत्मा अपने संचित कर्म भार के साथ फिर से जन्म लेती है। केवल पुण्य कर्म करने से वह दिव्य अवस्था को प्राप्त होता है। अच्छे और बुरे कर्मों के योग से यह मनुष्य की अवस्था को प्राप्त करता है। कामुकता और इसी तरह के दोषों में लिप्त होने से यह निचले जानवरों के बीच पैदा होता है।” इस कथन में स्पष्ट है कि मानव जाति का पुनर्जन्म भी भाग्य का विषय है। यह उसके पिछले जन्मों के संचित कर्मों पर निर्भर करता है। यदि वह किसी बहुत अमीर परिवार में जन्म लेता है तो उसे भाग्यशाली माना जाता है और यदि वह किसी याचक के परिवार में पैदा होता है तो उसे बदकिस्मत माना जाता है। ये दोनों ही मानव जाति के जन्म हैं‚ लेकिन दोनों में बड़ा अंतर है। इसलिए‚ भगवान कृष्ण (lord Krishna) कहते हैं‚ कि पिछले जन्मों के कर्म बाद के जन्मों में व्यक्ति के भाग्य‚ तक़दीर या नियति को दर्शाते हैं। भाग्य और तक़दीर दो अवधारणाएं हैं‚ जिनका उपयोग अक्सर उन आयोजनों या घटनाओं का वर्णन करने के लिए किया जाता है जो हमारे नियंत्रण से बाहर हैं। तक़दीर या नियति‚ घटनाओं का एक पूर्व निर्धारित पाठ्यक्रम है‚ जिसे अक्सर एक अप्रतिरोध्य शक्ति या माध्यम माना जाता है। भाग्य सफलता या असफलता है‚ जो स्पष्ट रूप से किसी के अपने कार्यों के बजाय संयोग से लाई गई है। तक़दीर और भाग्य के बीच महत्वपूर्ण अंतर यह है‚ कि तक़दीर हमारे पूरे जीवन को प्रभावित करती है‚ जबकि भाग्य हमारे जीवन में किसी एक घटना या आयोजन को प्रभावित करता है। तक़दीर इस विश्वास पर आधारित है कि ब्रह्मांड के लिए एक निश्चित प्राकृतिक व्यवस्था है। तक़दीर को नियति या किस्मत के रूप में भी जाना जाता है और आमतौर पर इसे अपरिहार्य‚ अनिवार्य या अटल माना जाता है। हालांकि‚ कुछ लोगों का मानना है कि कड़ी मेहनत‚ प्रयास‚ धैर्य और साहस जैसे गुणों से किसी की किस्मत बदली जा सकती है। तक़दीर या नियति भी कुछ धर्मों में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। कई धर्मों का मानना है कि मनुष्य की तक़दीर भगवान के हाथ में होती है। उनका मानना है कि मानव द्वारा किए गए निर्णय तथा कार्य‚ ईश्वर द्वारा तैयार की गई दैवीय योजना के अनुसार चलते हैं। ओडिपस रेक्स (Oedipus Rex)‚ इलियड (Iliad)‚ ओडिसी (Odyssey)‚ रोमियो और जूलियट (Romeo and Juliet) और मैकबेथ (Macbeth) जैसे कई प्रसिद्ध साहित्यिक कार्यों में तक़दीर या नियति भी एक प्रमुख भूमिका निभाती है। भाग्य केवल एक आकस्मिक तरीका है‚ जो बिना योजना के घटित होता है। जब भाग्य हमें सफलता देता है‚ तो हम इसे “सौभाग्य” कहते हैं‚ और जब यह असफलताएँ लाता है‚ तो हम इसे “दुर्भाग्य” कहते हैं।

संदर्भ:
https://bit.ly/312KY5W
https://bit.ly/3l6Pvvm
https://bit.ly/3I51mE2
https://bit.ly/3l9w0lR
https://bit.ly/3DWsTor
https://bit.ly/32B2rmI
https://bit.ly/3DVUMx9

चित्र संदर्भ   
1. सौभाग्य का प्रतीक माने जाने वाले मुस्कुराते बुद्ध को दर्शाता एक चित्रण (housing)
2. हिंदू भाग्य की देवी माता लक्ष्मी को दर्शाता एक चित्रण (wikimedia)
3. पुरुषार्थ का संदेश देते भगवत गीता के श्लोक को दर्शाता एक चित्रण (facebook)



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