Post Viewership from Post Date to 21-Feb-2022
City Subscribers (FB+App) Website (Direct+Google) Email Instagram Total
230 33 263

***Scroll down to the bottom of the page for above post viewership metric definitions

विश्व भर की पौराणिक कथाओं और धर्मों में प्रतीकात्मक महत्व रखते हैं, सरीसृप

मेरठ

 22-01-2022 10:21 AM
रेंगने वाले जीव

पौराणिक कथाओं और धर्म में सरीसृपों और सांपों को या तो द्वेषपूर्ण या फिर परोपकारी बताया गया है। चूंकि सांप को पश्चिमी और पूर्वी दोनों संस्कृतियों में कई रूपों में देखा गया है, इसलिए यह कहा जा सकता है, कि सबसे प्रतीकात्मक सरीसृप सांप रहा होगा।ये रूप या तो एक नए पौराणिक प्राणी को प्रस्तुत कर सकते हैं अथवा नया पौराणिक प्राणी जैसे कि गोरगन (Gorgon) या अमूर्त प्रतीक जैसे कि कैडियस (Caduceus) को निर्मित कर सकते हैं।प्राचीन काल मेंइन ठंडे खून वाले जीवों को उनकी दिखावट, प्रकृति, देवताओं, और अन्य पवित्र व्यक्तियों के साथ उनके संबंध के कारण रहस्यमय प्राणियों के रूप में सम्मानित किया गया था।कुछ सरीसृपों में जहर होता है, उनका बड़ा आकार और लंबे समय तक जीवित रहने की उनकी क्षमता मनुष्य को सर्वोच्च शिकारी के रूप में चुनौती देती है। इस कारण विभिन्न संस्कृतियों में उनकी पूजाकी गई, पौराणिक सरीसृपों के रूप में कहानियाँ लिखी गई और अन्य सरीसृप प्रतीकों का निर्माण किया गया। प्रतीकात्मकता लंबे समय से कल्पना या जानवरों के साथ हावी रही है। प्रतीकात्मकता में सरीसृप सबसे सामान्य रूप से देखने को मिलते हैं और आदिकालीन सभ्यताओं से प्रचलित हैं, फिर चाहे वे नकारात्मक रूप में हों या फिर सकारात्मक।यह हिंदू धर्म, चीन (China) और अमेरिका (America) की पौराणिक कथाओं में पाए जाते हैं।रोमुलो अल्वेस (Romulo Alves) और उनके सहयोगियों ने ब्राजील (Brazil) मेंजादुई धार्मिक उद्देश्यों जैसे कि जादू मंत्र, यौन भागीदारों को आकर्षित करने, और बुरी नजर से बचाने के लिए ताबीज के रूप मेंसरीसृपों की 13 प्रजातियों के उपयोग को दर्ज किया था।यूरोपीय और चीनी संस्कृतियों के मिथकों में एक ड्रेगन जो कि सांप जैसा पौराणिक प्राणीहै, शामिल है।हिंदू धर्म मेंवरुण देवता मगरमच्छ की तरह दिखने वाले जलीय जानवर मकर की सवारी करते हैं,और उन्हें नागराज कहा जाता है। जहां भगवान शिव के गले में कोबरा सांप को लिपटे हुए दिखाया जाता है, वहीं भगवान विष्णु को अक्सर सात सिर वाले सांप पर या सर्प के कुंडल के भीतर सोते हुए दिखाया जाता है।नागया सांपसबसे पुराना और सबसे आम पौराणिक प्रतीक है। प्राचीन मिस्र (Egypt) के समय से ही सरीसृप प्रतीक के रूप में सामान्य रूप से देखे जा रहे हैं।कुछ संस्कृतियों में, जैसे कि उत्तरी अमेरिका के होपी (Hopi) लोगों के बीच सांप लंबे समय से प्रजनन क्षमता से जुड़े हुए हैं। प्रकृति की उर्वरता के नवीनीकरण का जश्न मनाने के लिए उन्होंने एक वार्षिक सांप नृत्य का आयोजन भी किया।अन्य संस्कृतियों ने सांपों को गर्भनाल से जोड़ा है।सांपों को अक्सर देवी के गले में दुपट्टे की तरह लपेटा हुआ दिखाया जाता था और उन्हें जन्म और उत्थान के रहस्यों के संरक्षक के रूप में पूजा जाता था। यह प्राचीन क्रीट (Crete) में आम था।सर्प प्रतीकवाद धार्मिक मान्यताओं मेंभी व्यापक है। उदाहरण के लिएहिंदू धर्म मेंसांपों को शक्ति और शुद्ध इच्छा से जोड़ा जाता है। इसी प्रकार अब्राहमिकधर्म सर्प को यौन इच्छा के प्रतीक के रूप में देखते हैं।चूंकि सांप किसी हमले से खुद को बचाने में सक्षम होते हैं, इसलिए उन्हें इस गुण के कारण संरक्षकता और सुरक्षा से जोड़ा गया है। मंदिर और अन्य पवित्र स्थानों में अक्सर नागों को प्रतीकों और खजाने के प्राकृतिक संरक्षक के रूप में दर्शाया जाता है।सांपों को उनके जहर और इसके गुणों के लिए लंबे समय से पूजा जाता है चूंकि इनका जहर किसी को नुकसान पहुंचा सकता है, तो किसी को ठीक भी कर सकता है। कुछ संस्कृतियों का मानना ​​​​है कि जहर जीवन का अमृत है और अमरता की कुंजी है जिसे 'दिव्य नशा' के रूप में जाना जाता है।माना जाता है कि चिकित्सा और उपचार के प्राचीन यूनानी देवता एस्क्लेपियस (Asclepius) के पास एक लाठी थी, जिसके चारों ओर एक सर्प लिपटा हुआ था, जिसे आमतौर पर एसक्लपियस की छड़ के रूप में जाना जाता था। आज यह आधुनिक चिकित्सा का प्रतीक बन गया है।सांप के साथ एक और जुड़ाव बदला और द्वेष का है। ऐसा इसलिए है, क्यों कि सांप अपने जहरीले बाइट के कारण खुद की रक्षा करने में सक्षम है। अधिकांश समय, सांप बिना किसी चेतावनी या सूचना के हमला करते हैं और यही कारण है कि उन्हें धूर्त और प्रतिशोधी जीव के रूप में भी दिखाया जाता है।पूर्वी धर्मों में सांपों को अनंत और श्रेष्ठता के प्रतीक के रूप में पूजा जाता है।उदाहरण के लिए, हिंदू ब्रह्मांड विज्ञान या धर्म मेंअनंत नाम की एक इकाई है, संस्कृत में, इसके नाम का अर्थ है अनंत, शाश्वत, असीम। यह ब्रह्मांडीय नाग है और हिंदू धर्म के निर्माता भगवान विष्णु का साथी है।मिस्र की पौराणिक कथाओं में वाडजेट (Wadjet) नाम के एक देवता हैं। उन्हें फिरौन (Pharaoh's) के मुकुट में एक आकृति के रूप में दर्शाया गया है और उनकी दिखावट कोबरा के समान है। वह फिरौन की आध्यात्मिक रक्षक मानी जाती है।सांप के समान अन्य सरीसृपों को भी प्रतीक के रूप में इस्तेमाल किया गया है।प्राचीन मिस्र और ग्रीस (Greece) में, छिपकलियों को सौभाग्य और ज्ञान के प्रतीक के रूप में देखा जाता था।लेकिन ईसाई धर्म में उन्हें बुराई और शैतान से जोड़ा गया है।हालाँकि, रोमन (Roman) पौराणिक कथाओं में, छिपकली मृत्यु और पुनरुत्थान की प्रतीक थी।पश्चिम अफ्रीका (Africa) में, छिपकलियों को सुरक्षा के प्रतीक के रूप में देखा जाता था और अक्सर आत्माओं को भगाने के लिए लोगों के घरों के बाहर उन्हें रखा जाताथा।छिपकली सपनों का भी प्रतीक है। यह अधिक-जागरूकता, छलावरण, विश्राम, दिवास्वप्न, लक्ष्यों, इच्छाओं और दृष्टि से भी सम्बंधित है। इसी प्रकार मगरमच्छ को भी प्रतीकवाद में उपयोग किया गया था। यह जीव लंबे समय से सभी बुराईयों से जुड़ा हुआ है। इसे सबसे घातक, विश्वासघाती और दुष्ट हृदय वाला सरीसृप माना जाता है।मिस्र की भूमि के विभिन्न जिलों में मगरमच्छ को सूर्योदय और नील नदी के बढ़ते पानी के प्रतीक के रूप में पूजा जाता था।आधुनिक दुनिया में “मगरमच्छ के आंसू” मुहावरा बहुत आम है और इसका इस्तेमाल उन लोगों के लिए किया जाता है जो प्रतिक्रिया का नाटक करते हैं।कुछ संस्कृतियों में सरीसृपों को देवताओं के रूप में सम्मानित किया गया था, जैसे मिस्र में मगरमच्छ देवता सोबेक (Sobek), मेसो-अमेरिकी (Meso-American) सभ्यताओं में पंख वाले सर्प क्वेटज़ालकोट (Quetzalcoatl) या अफ्रीकीऔर वूडू (Voodoo) धर्मों में साँप देवता दंबल्लाह (Damballah)।अन्य स्थानों पर सरीसृपों को दैवीय दर्जा प्राप्त नहीं था लेकिन उन्हें प्रकृति की शक्तिशाली शक्तियों के रूप में देखा जाता था। उदाहरण के लिए चीन की पौराणिक कथाओं में सर्पेंटाइन ड्रेगन (Serpentine dragons)। भारत में नागों को ब्रह्मांडीय शक्ति के रूप में देखा जाता था। ग्रीक पौराणिक कथाओं में भी सरीसृपों का प्रतीक के रूप में वर्णन मिलता है, जैसे कि हाइड्रा (Hydra) या गोरगन मेडुसा (Gorgon Medusa) जिसका सिर सांपों से घिरा हुआ था।भगवान विष्णु के अकुपरा नामक अवतार ने कछुए का रूप धारण किया और स्वर्ग को अपनी पीठ पर रखा। पूर्वी दर्शन में कछुओं को उनके लंबे जीवनकाल के कारण सम्मानित किया गया था जो सैकड़ों वर्षों तक जीवित रह सकते हैं।

संदर्भ:
https://bit.ly/3Kor0EM
https://bit.ly/3tGwxk5
https://bit.ly/3KnvwU7
https://bit.ly/3qJHz6t
https://bit.ly/3IkQSiY
https://bit.ly/3Acftng

चित्र संदर्भ   
1. लोंगशान मंदिर, ताइवान के ऊपर ड्रैगन की मूर्ति को दर्शाता एक चित्रण (wikimedia)
2. समुद्र मंथन के अपने कछुआ अवतार, कूर्म के ऊपर केंद्र में विष्णु को दर्शाता एक चित्रण (wikimedia)
3. गले में नाग को धारण किये भगवान शिव को दर्शाता एक चित्रण (wikimedia)
4. प्राचीन मिस्र के मगरमच्छ के सिर वाले देवता, सोबेकी को दर्शाता एक चित्रण (wikimedia)
5. सबरीमला में नागराजव (कोबरा भगवान) मंदिर को दर्शाता एक चित्रण (wikimedia)

***Definitions of the post viewership metrics on top of the page:
A. City Subscribers (FB + App) -This is the Total city-based unique subscribers from the Prarang Hindi FB page and the Prarang App who reached this specific post. Do note that any Prarang subscribers who visited this post from outside (Pin-Code range) the city OR did not login to their Facebook account during this time, are NOT included in this total.
B. Website (Google + Direct) -This is the Total viewership of readers who reached this post directly through their browsers and via Google search.
C. Total Viewership —This is the Sum of all Subscribers(FB+App), Website(Google+Direct), Email and Instagram who reached this Prarang post/page.
D. The Reach (Viewership) on the post is updated either on the 6th day from the day of posting or on the completion ( Day 31 or 32) of One Month from the day of posting. The numbers displayed are indicative of the cumulative count of each metric at the end of 5 DAYS or a FULL MONTH, from the day of Posting to respective hyper-local Prarang subscribers, in the city.

RECENT POST

  • हिन्द महासागर के हरे-भरे मॉरीशस द्वीप में हुआ भारतीय व्यंजनों का महत्वपूर्ण प्रभाव
    स्वाद- खाद्य का इतिहास

     26-05-2022 08:28 AM


  • देखते ही देखते विलुप्त हो गए हैं, मेरठ शहर के जल निकाय
    नदियाँ

     25-05-2022 08:12 AM


  • कवक बुद्धि व जागरूकता के साक्ष्य, अल्पकालिक स्मृति, सीखने, निर्णय लेने में हैं सक्षम
    पेड़, झाड़ियाँ, बेल व लतायें

     24-05-2022 07:35 AM


  • मेरे देश की धरती है दुर्लभ पृथ्वी खनिजों का पांचवां सबसे बड़ा भंडार, फिर भी इनका आयात क्यों?
    खनिज

     23-05-2022 08:43 AM


  • जमीन पर सबसे तेजी से दौड़ने वाला जानवर है चीता
    व्यवहारिक

     22-05-2022 03:34 PM


  • महान गणितज्ञों के देश में, गणित में रूचि क्यों कम हो रही है?
    विचार 2 दर्शनशास्त्र, गणित व दवा

     21-05-2022 11:18 AM


  • आध्यात्मिकता के आधार पर प्रकृति से संबंध बनाने की संभावना देती है, बायोडायनामिक कृषि
    भूमि प्रकार (खेतिहर व बंजर)

     20-05-2022 10:02 AM


  • हरियाली की कमी और बढ़ते कांक्रीटीकरण से एकदम बढ़ जाता है, शहरों का तापमान
    नगरीकरण- शहर व शक्ति

     19-05-2022 09:45 AM


  • खेती से भी पुराना है, मिट्टी के बर्तनों का इतिहास, कलात्मक अभिव्यक्ति का भी रहा यह साधन
    म्रिदभाण्ड से काँच व आभूषण

     18-05-2022 08:46 AM


  • भगवान गौतम बुद्ध के जन्म से सम्बंधित जातक कथाएं सिखाती हैं बौद्ध साहित्य के सिद्धांत
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     17-05-2022 09:49 AM






  • © - 2017 All content on this website, such as text, graphics, logos, button icons, software, images and its selection, arrangement, presentation & overall design, is the property of Indoeuropeans India Pvt. Ltd. and protected by international copyright laws.

    login_user_id