मेसोपोटामिया की कला और वास्तुकला

लखनऊ

 06-01-2022 10:03 AM
द्रिश्य 3 कला व सौन्दर्य

मेसोपोटामिया उन महत्वपूर्ण इलाकों में से एक है, जिनकी गिनती महत्वपूर्ण प्राचीन सभ्यताओं में की जाती है।निचले मेसोपोटामिया के सुमेरियों ने पहले शहरों की स्थापना की, लेखन का आविष्कार किया, कविता का विकास किया और विशाल स्थापत्य संरचनाओं का निर्माण किया। इस सभ्यता से उत्पन्न हुई कलाकृति इसके समृद्ध इतिहास को दर्शाती है, जिसकी विषय वस्तु इसकी सामाजिक-राजनीतिक संरचना, सैन्य विजय, संगठित धर्म और प्राकृतिक वातावरण से काफी प्रभावित थी।पुरापाषाण युग में लगभग 14,000 ईसा पूर्व इस क्षेत्र में पहले मानव बसे थे, उस समय लोग यहां छोटी बस्तियों में रहते थे। इसके बाद के पाँच हज़ार वर्षों के भीतर, कृषि के विकास और जानवरों को पालतू बनाने के बाद ये बस्तियाँ बड़े कृषक समुदायों में बदल गईं।उन्होंने विशेष रूप से सिंचाई तकनीक विकसित की जो नदियों की निकटता पर पूंजीकृत है।जैसे-जैसे ये समुदाय बढ़ते गए, वे बड़े शहरों में बदल गए,(इसके प्रारंभिक उदाहरणों में बड़े पैमाने पर सुमेर को विशेष स्थान दिया जाता है)।मेसोपोटामिया की कला प्रारंभिक शिकारी-संग्रहकर्ता समाजों से सुमेरियन (Sumerian), अक्कादियन (Akkadian), बेबीलोनियन (Babylonian) और असीरियन (Assyrian) साम्राज्यों की कांस्य युग संस्कृतियों तक के पुरातात्विक रिकॉर्ड में संग्रहित है। इस समय बनाई गई पेंटिंग का उपयोग मुख्य रूप से ज्यामितीय और वनस्पति-आधारित सजावटी योजनाओं के लिए किया गया था। इसके अलावा मूर्ति निर्माण भी इस समय की कला की विशेषता थी। उत्खनन से कई सिलिंडर सीलें प्राप्त हुई हैं,जिनमें अनेकों सीलों का आकार छोटा है, लेकिन उनमें जटिल और विस्तृत दृश्य बनाए गए हैं।मेसोपोटामिया कला के कई रूपों में सिलेंडर सील, गोल और छोटी मूर्तियां,विभिन्न आकार की उभरी हुई नक्काशियां आदि शामिल हैं।इन सभी के लिए पसंदीदा विषय-वस्तुओं में देवताओं के चित्र (या तो अकेले या उपासकों के साथ) तथा जानवरों के चित्र शामिल थे, जो या तो अकेले, या एक-दूसरे से या एक इंसान से लड़ते हुए पंक्तियों में क्रमबद्ध किए गए थे। इसके अलावा मास्टर ऑफ एनीमल्स मोटिफ (Master of Animals motif) और ट्री ऑफ लाइफ (Tree of Life) भी पसंदीदा विषयों में शामिल थे।यूं तो कला निर्माण का कार्य मेसोपोटामिया की सभ्यता से पहले से ही किया जा रहा है, लेकिन इस दौरान इस क्षेत्र में जो शुरूआती कार्य किए गए और जो नवाचार हुए वे सभी बहुत महत्वपूर्ण हैं।भव्य वास्तुकला और धातु के काम के रूप में मेसोपोटामिया के लोगों ने बड़े पैमाने पर कला का निर्माण शुरू किया।सुमेरियन काल (लगभग 4500–1750 ईसा पूर्व) के समय स्मारकीय धार्मिक संरचनाओं के उदय की शुरुआत हुई। इस समय आम तौर पर दो प्रकार के मंदिरों का निर्माण किया गया था, एक प्रकार में मंदिर मंच के साथ बनाए गए थे तथा दूसरे में वे जमीनी स्तर पर निर्मित संरचना के रूप में थे। मंच के साथ बने मंदिरों में पुजारियों के ठहरने की व्यवस्था भी थी। जो मंदिर जमीनी स्तर पर बने थे वे अधिकतर आयताकार थे।मंदिर के अंदरूनी भाग टेरा-कोटा शंकु के पैटर्न वाले मोज़ेक (Mosaic) से सजाए गए थे। कुछ हिस्सों को चमकीले रंगों से या कांस्य में लिपटाकर भी सजाया गया था। इस समय के चित्रित भित्ति चित्र पौराणिक दृश्यों को चित्रित करते हैं। इस समय निर्मित की गई मूर्तियां मंदिरों के लिए अलंकरण या अनुष्ठान उपकरण के रूप में कार्य करती हैं।पुरुष मूर्तियाँ आम तौर पर प्रार्थना में हाथ जोड़े खड़ी थीं और ऊनी स्कर्ट पहने हुए थी,जबकि महिला मूर्तियाँ विविधता में मौजूद थीं। कई महिला मूर्तियों को कान में एक भारी कुंडल और एक चिगोन (Chignon)के साथ दर्शाया गया था। उपलब्ध पत्थर की कमी के कारण, सुमेरियन काल के दौरान मूर्तियों ने वैकल्पिक सामग्रियों का उपयोग किया। मेटल कास्टिंग इस काल की विशेषता है।सुमेरियन कलाकार समग्र आकृतियों को बनाने में भी कुशल थे, और इनके उल्लेखनीय उदाहरण उर (Ur) में कब्रों के भीतर पाए गए हैं।उरुक (Uruk - सुमेर का एक प्राचीन शहर) सबसे पहले 3200 ईसा पूर्व के आसपास बनाया गया था। लगभग 50,000 नागरिकों की आबादी के साथ, यह शहर सार्वजनिक कला, बड़े स्तंभ और मंदिरों से समृद्ध था। 3000 ईसा पूर्व तक, सुमेरियन लोगों का कई शहर-राज्यों के तहत मेसोपोटामिया पर दृढ़ नियंत्रण था। इस क्षेत्र पर कई राजाओं का शासन था, जिनमें से एक गिलगमेश (Gilgamesh) था, जिसका जन्म 2700 ईसा पूर्व के आसपास हुआ था। गिलगमेश का महाकाव्य (एक प्राचीन महाकाव्य), साहित्य का सबसे प्रारंभिक महान कार्य माना जाता है।पुराना बेबीलोन काल (लगभग 2000-1600 ईसा पूर्व) मूर्तिकला के लिए विशेष रूप से जाना जाता है। इस समय मूर्तियों को मुक्त रूप से खड़ी अवस्था में बनाया गया था। यह त्रि-आयामी थीं,और काफी हद तक यथार्थवादी भी थी। कुछ सबसे प्रसिद्ध उदाहरण गुडिया (Gudea) की मूर्तियाँ हैं, जो लगभग सत्ताईस मूर्तियों का एक समूह है जो लगश राज्य के शासकको दर्शाती हैं। मूर्तियों को मुख्य रूप से डायराइट (Diorite) से उकेरा गया था, लेकिन इसमें अलबास्टर (Alabaster), स्टीटाइट (Steatite) और चूना पत्थर का भी इस्तेमाल किया गया था और उन्हें उस समय के शिल्प कौशल का सबसे परिष्कृत स्तर माना जाता था। इसके अलावा जिगगुराट-आयताकार सीढ़ीदार टॉवर (Ziggurat—rectangular stepped tower), जो सुमेरियन काल की विशेषता थी, की संरचनाओं का निर्माण भी इस काल में जारी रहा। दीवारों को कला के विस्तृत कार्यों से सजाया गया था, जिसकी विषय वस्तु अक्सर अच्छी फसल या उर्वरता की कामना थी। इस अवधि के दौरान, घरेलू सामान जैसे फूलदान और सील सिलेंडर भी बनाए गए, जिन्हें अक्सर मानव या जानवररूपों से सजाया गया था।असीरियन काल (लगभग 1365-609 ईसा पूर्व) की वास्तुकला में पुराने बेबीलोन काल की वास्तुकला का ही विस्तार दिखाई देता है। इस समय कुछ नवाचार भी हुए जिनमें एकल मंदिर के डिजाइन में छोटे, जुड़वां ज़िगगुराटों को शामिल करना,मूर्तियों को मुख्य धुरी पर लंबा करना आदि शामिल है।इस समय के दौरान की कला ने शासन करने वाले शासकों की शानदार भव्यता को भी दर्शाया। महलों के द्वारों में पत्थरों से निर्मित विशाल पोर्टल मूर्तियां और चित्रात्मक उभरी हुई नक्काशियां बनाई गईं।बाद की अवधि में मूर्तिकला में एक लोकप्रिय विषय सैन्य विजय और विद्रोह का निर्मम दमन था। इन्हें आम तौर पर क्रमिक घटनाओं का प्रतिनिधित्व करने के लिए प्रासंगिक रूप से व्यवस्थित किया गया था।कई मामलों में, भित्ति चित्रों ने एक सजावटी तत्व के रूप में उभरी हुई नक्काशियों का स्थान ले लिया। इसके अतिरिक्त, असीरियन महल फर्नीचर से सुसज्जित थे, और हाथी दांत के आभूषण का बड़ी मात्रा उपयोग किया गया था।नव-बेबीलोनियन काल (लगभग 626-539 ईसा पूर्व) में कला, वास्तुकला और विज्ञान का एक बड़ा उत्कर्ष देखा गया। इस समय कई भव्य स्थापत्य उपलब्धियां शहर के आंतरिक द्वारों में दिखाई दीं। इसका सबसे विस्तृत उदाहरण ईशर गेट (Ishtar Gate) है, जो आज बर्लिन (Berlin) में पेर्गमोन (Pergamon) संग्रहालय में मौजूद है। 575 ईसा पूर्व में बनाया गया, गेट अपने बेस-रिलीफ ड्रेगन (Bas-relief dragons) और साथ में जुलूस से सम्बंधित मार्ग के लिए जाना जाता है, जो अतिरिक्त रूप से ड्रेगन की मूर्तियों के साथ पंक्तिबद्ध था। यह लैपिस लाजुली-ग्लेज्ड (Lapis lazuli-glazed) ईंटों से आवरित था, जिसने एक चमकदार, नीली सतह बनाई। इस काल की एक और उल्लेखनीय स्थापत्य उपलब्धि जिगगुराट एटेमेनाकी (Ziggurat Etemenaki) है।

संदर्भ:
https://bit.ly/3FX86SP
https://bit.ly/32KlfQQ
https://bit.ly/3mTUPmy
https://bit.ly/3HyWeXs

चित्र संदर्भ   
1. एक अक्कादियन शासक का कांस्य सिर, 1931 में नीनवे में खोजा गया जिसको दर्शाता एक चित्रण (wikimedia)
2. एक आधुनिक छाप के साथ मुहर जिसमें दो मादा पंखों वाले राक्षसों से लड़ने वाले नायक को चित्रित किया गया है; 8वीं-7वीं शताब्दी ईसा पूर्व; चैलेडोनी; ल्यों के ललित कला संग्रहालय (फ्रांस) को दर्शाता एक चित्रण (wikimedia)
3. राजाओं के निजी अपार्टमेंट के प्रवेश द्वार से एक लामासु; 865-860 ईसा पूर्व; को दर्शाता एक चित्रण (wikimedia)
4. प्रसाद के लिए एक बक्सा ले जाने वाला आदमी। मेटलवर्क, सीए। 2900-2600 ईसा पूर्व, सुमेर। राजधानी कला को दर्शाता एक चित्रण (wikimedia)



RECENT POST

  • लखनऊ के निकट कुकरैल रिजर्व मगरमच्छों की लुप्तप्राय प्रजातियों को संरक्षण प्रदान कर रहा है
    रेंगने वाले जीव

     22-01-2022 10:26 AM


  • कैसे शहरीकरण से परिणामी भीड़ भाड़ को शहरी नियोजन की मदद से कम किया जा सकता है?
    नगरीकरण- शहर व शक्ति

     21-01-2022 10:05 AM


  • भारवहन करने वाले जानवरों का मानवीय जीवन में महत्‍व
    स्तनधारी

     20-01-2022 11:46 AM


  • भारत में कुर्सी अथवा सिंहासन के प्रयोग एवं प्रयोजन
    घर- आन्तरिक साज सज्जा, कुर्सियाँ तथा दरियाँ

     19-01-2022 11:08 AM


  • केरल के मछुआरों को अतिरिक्त आय प्रदान करती है, करीमीन मछली
    मछलियाँ व उभयचर

     17-01-2022 10:52 AM


  • भगवान अयप्पा की उत्पत्ति की पौराणिक कथा, हमारे लखनऊ में दक्षिण भारतीय शैली में इनका मंदिर
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     17-01-2022 05:37 AM


  • स्नोबोर्डिंग के लिए बुनियादी सुविधाएं और प्रशिक्षण प्रदान करते हैं, भारत के कुछ स्थान
    हथियार व खिलौने

     16-01-2022 12:47 PM


  • कौन से हैं हमारे लखनऊ शहर के प्रसिद्ध, 100 वर्ष से अधिक पुराने कॉलेज?
    सिद्धान्त 2 व्यक्ति की पहचान

     15-01-2022 06:36 AM


  • भारत में कैसे मनाया जाता है धार्मिक और मौसमी बदलाव का प्रतीक पर्व , मकर संक्रांति?
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     14-01-2022 02:45 PM


  • लखनऊ में बढ़ रही है, विदेशी सब्जियों की लोकप्रियता तथा खेती
    साग-सब्जियाँ

     13-01-2022 06:58 AM






  • © - 2017 All content on this website, such as text, graphics, logos, button icons, software, images and its selection, arrangement, presentation & overall design, is the property of Indoeuropeans India Pvt. Ltd. and protected by international copyright laws.

    login_user_id