संगीत और गणित के बीच संबंध, भविष्य में कृत्रिम बुद्धिमत्ता भी संगीत की रचना कर सकती है

लखनऊ

 13-11-2021 09:25 AM
विचार 2 दर्शनशास्त्र, गणित व दवा

यदि हम चिराग लेकर भी निकले तो संभव है की, ऐसे बहुत कम लोग मिलें जो “संगीत से प्रेम नहीं करते हों। अथवा ऐसे लोग मिलना भी बड़ा दुर्लभ है, जिन्हे “गणित से लगाव” हो।
हालांकि पहली नज़र में यह प्रतीत हो सकता है की गणित और संगीत दोनों का एक-दूसरे से दूर-दूर कोई संबंध ही न हो, किंतु वास्तव में गणित के आभाव में संगीत फीका-फीका सा है। संगीत की कोई धुन कितनी शानदार होगी यह संभवतः इस बात पर निर्भर करता है की, संगीतकार धुनों के गणित को कितना समझता है?
प्राचीन भारतीय, चीनी, मिस्र और मेसोपोटामिया के लोग ध्वनि के गणितीय सिद्धांतों का अध्ययन करने के लिए विख्यात हैं। प्राचीन ग्रीस के पाइथागोरस (Pythagoreans) (विशेष रूप से फिलोलॉस और आर्किटास "(Philolaus and Architas") संगीत की अभिव्यक्ति की जांच करने वाले पहले शोधकर्ता माने जाते थे। उनका केंद्रीय सिद्धांत यह था कि "संपूर्ण प्रकृति में संख्याओं से उत्पन्न सामंजस्य होता है"। प्लेटो के समय के दौरान, सद्भाव को भौतिकी की एक मौलिक शाखा माना जाता था, जिसे अब संगीत ध्वनिकी (musical acoustics) के रूप में जाना जाता है। प्रारंभिक भारतीय और चीनी सिद्धांतकार भी प्लेटो के समान दृष्टिकोण रखते हैं। सभी ने यह दिखाने की कोशिश की कि हार्मोनिक्स और लय के गणितीय नियम न केवल दुनिया की हमारी समझ के लिए बल्कि मानव कल्याण के लिए जरूरी थे। संगीत की पिच, समय और संरचना का विश्लेषण करने के लिए संगीत सिद्धांत का प्रयोग किया जाता है। इस सिद्धांत के अंतर्गत संगीत के तत्वों जैसे टेम्पो, कॉर्ड प्रोग्रेस, फॉर्म और मीटर (tempo, chord progression, form and meter) का अध्ययन करने के लिए गणित का उपयोग किया जाता है। संगीत की रचना, सुनने के नए तरीकों की संरचना और संचार ने अमूर्त बीजगणित (abstract algebra) और संख्या सिद्धांत के संगीत अनुप्रयोगों को जन्म दिया है। हालांकि आधुनिक गणित में संगीत सिद्धांत इतना प्रचलित नहीं है, किंतु संगीत ध्वनि के आधार को ध्वनिकी (acoustics) का उपयोग करके गणितीय रूप से वर्णित किया जा सकता है और "संख्या गुणों की एक उल्लेखनीय सरणी" प्रदर्शित की जा सकती है। व्यवहारिक रूप से सप्तक (octave) के 7 स्वर, श्रुति शृंखला की 22 श्रुतियां, संवादी स्वर की 13 व 9 श्रुतियां, आवृत्ति व तार की लम्बाई, ताल व ठेके की मात्राओं के हिसाब आदि सभी आंकड़े वास्तव में गणित ही हैं। संगीत का हर रूप एक प्रकार की सुनियोजित योजना है, जिसके द्वारा संगीत का एक छोटा टुकड़ा बनाया जाता है। हालांकि शब्द "योजना" का उपयोग वास्तुकला में भी किया जाता है, जिससे अक्सर संगीत के रूप की तुलना की जाती है। वास्तुकार की तरह, संगीतकार को भी उक्त बिन्दुओं जैसे: जिसके लिए काम करना है, उपलब्ध साधन, अर्थव्यवस्था का अभ्यास , दोहराव और व्यवस्था का ध्यान रखना चाहिए। संगीत का पैमाना संगीत बनाने या उसका वर्णन करने में उपयोग की जाने वाली पिचों का एक असतत सेट होता है। प्रत्येक पिच एक विशेष आवृत्ति से मेल खाती है, जिसे हर्ट्ज़ (हर्ट्ज) में व्यक्त किया जाता है, जिसे कभी-कभी चक्र प्रति सेकंड cycles per second (cps) भी कहा जाता है। यदि यह पहिया 1 सेकंड में एक चक्कर पूरा करता है, तो हम कहते हैं कि उस पहिये की आवृत्ति "एक चक्कर प्रति सेकंड" या "एक हर्ट्ज" है। उदाहरण के रूप में यदि यह पहिया 1 सेकंड में 10 चक्कर लगाता है, तो इसकी आवृत्ति 10 हर्ट्ज (10 हर्ट्ज) होगी। किसी भी पिच का सप्तक (octave of any pitch) एक आवृत्ति को संदर्भित करता है, जो दी गई पिच से ठीक दुगनी होती है। आधे, एक चौथाई, आठवें और इसी तरह की आवृत्ति वाले पिचों को सबऑक्टेव्स (suboctaves) कहा जाता है। जब आवृत्ति को बैंडविड्थ (frequency bandwidth) के रूप में व्यक्त किया जाता है, तो एक ऑक्टेटव ए 2-ए 3, 110 हर्ट्ज (Htz) से तक फैलता है। अगला सप्तक 220 हर्ट्ज से 440 हर्ट्ज तक, तीसरा सप्तक 440 हर्ट्ज से 880 हर्ट्ज तक फैलता है, और इस प्रकार प्रत्येक क्रमिक सप्तक पिछले सप्तक की आवृत्ति सीमा से दोगुना होता है। प्रत्येक आवृत्ति के लिए, हमारे पास एक अलग ध्वनि (एक अलग नोट) होता है। उदाहरण के लिए, ए नोट 440 हर्ट्ज की आवृत्ति से मेल खाता है। जब आवृत्ति को 2 से गुणा किया जाता है, तो नोट वही रहता है। उदाहरण के लिए, A नोट (440 Hz) को 2 = 880 Hz से गुणा करने पर भी नोट A ही होता है। प्रत्येक नोट में एक संबद्ध लय होती है, और मानव मस्तिष्क इन लय को पिच (उच्च या निम्न) की श्रेणी में व्याख्या करता है। सामान्य तौर पर, मानव मस्तिष्क अंश और हर में छोटे मूल्यों से "सुखद" के रूप में ध्वनियों की व्याख्या करता है, जैसे कि 2/3, 4/5, 8/5, आदि सुनने में सुखद लगते हैं। चूंकि संगीत गणित की ही एक अभिव्यक्ति है, इसलिए आधुनिक मशीनों जैसे उन्नत कम्प्यूटरों के लिए भी संगीत के जटिल पहलुओं को समझना आसान हो गया है। आज तथाकथित कृत्रिम बुद्धिमत्ता (artificial intelligence) संगीत की रचना कर सकती है। हालांकि यह कई संगीतकारों के लिए एक डरावना सपना हो सकता है, लेकिन संगीत बनाने वाला एआई सॉफ्टवेयर (AI software) पिछले कुछ वर्षों में इतना उन्नत हो चूका है कि यह केवल तकनीकी दक्षता होने के साथ-साथ, एक व्यवहार्य उपकरण भी है। जो संगीत के निर्माण की रचनात्मक प्रक्रिया में संगीत निर्माताओं की सहायता कर रहा है। दरअसल संगीत बनाने या संगीतकारों की सहायता करने के लिए एआई काफी लंबे समय से चलन में है। 90 के दशक में, डेविड बॉवी (David Bowie) ने वर्बासाइज़ (VerbaSize) नामक एक ऐप विकसित किया, जिसने साहित्यिक स्रोत और संगीत के नए संयोजन बनाने के लिए शब्दों को बेतरतीब ढंग से पुन: व्यवस्थित किया, जिन्हें गीत के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता था। 2016 में, सोनी के शोधकर्ताओं ने द बीटल्स (The Beatles) की शैली में एक राग बनाने के लिए फ्लो मशीन्स (Flow Machine) नामक सॉफ़्टवेयर का उपयोग किया। अब, संगीत बनाने के लिए एआई सेवाओं का एक संपूर्ण उद्योग निर्मित हो चुका है, फ्लो मशीन (flow machine), आईबीएम वाटसन बीट (IBM Watson Bea), Google मैजेंटा के एनसिंथ सुपर (Google Magenta's EnSynth Super), जुकेडेक (Jukedeck), एम्पर म्यूज़िक (Amper Music) जैसे बड़े नाम शामिल हैं। इनमें से अधिकांश प्रणालियां गहन शिक्षण नेटवर्क (Deep Learning Network) का उपयोग करके काम करती हैं। यह एक प्रकार का एआई है, जो बड़ी मात्रा में डेटा के विश्लेषण पर निर्भर होता है। यह कॉर्ड्स, टेम्पो, लेंथ, और नोट्स (chords, tempo, length, and notes) आदि सभी प्रकार के इनपुट से सीखता है, ताकि यह अपनी धुन लिख सके।

संदर्भ
https://bit.ly/3wCM0RP
https://bit.ly/3DdDY4d
https://bit.ly/3c3I8jl
https://time.com/5774723/ai-music/

चित्र संदर्भ
1. वायलिन वादक को दर्शाता एक चित्रण (Vineyard Academy)
2. वायलिन तरंग के एक स्पेक्ट्रोग्राम को दर्शाता एक चित्रण (wikimedia)
3. पारंपरिक गीत "पॉप गोज़ द वीज़ल (Pop Goes the Weasel)" की धुन को दर्शाता एक चित्रण (wikimedia)
4.रोबोट को पियानो वादक के रूप में दर्शाता एक चित्रण (Inkl)



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