Post Viewership from Post Date to 14-Apr-2022
City Subscribers (FB+App) Website (Direct+Google) Email Instagram Total
2025 99 2124

***Scroll down to the bottom of the page for above post viewership metric definitions

युद्ध को समझने के लिए गणित के विभिन्न उपयोग

जौनपुर

 14-03-2022 08:46 AM
विचार 2 दर्शनशास्त्र, गणित व दवा

युद्ध अक्सर बिना किसी स्वरूप या कारण के यादृच्छिक घटनाओं और हमलों की श्रृंखला की तरह लग सकते हैं। आश्चर्यजनक रूप से, भौतिक विज्ञानी शॉन गौर्ले (मियामी विश्वविद्यालय (Sean Gourley, University of Miami) और शोधकर्ताओं के एक समूह ने एक गणितीय समीकरण को पाया, जिसका उपयोग न केवल पिछले युद्धों को पूरी तरह से रूप देने के लिए किया जा सकता है, बल्कि यह भविष्य में होने वाले हमलों और चल रहे संघर्षों के रुझानों की भविष्यवाणी भी कर सकता है। दरसल शॉन ने विभिन्न स्रोतों से एक आधारभूत आंकड़े को बनाने की उम्मीद में परियोजना को शुरू किया था, ताकि वे होने वाली घटनाओं के बारे में प्रत्येक खबरों को सटीक रूप से एकत्र कर सकें। लेकिन उन्हें और उनके समूह को यह उम्मीद नहीं थी कि वे युद्ध में होने वाले हमलों के एक स्वरूप को खोज लेंगे, जो एक बहुत ही सरल समीकरण से संबंधित थे। गौर्ले बताते हैं कि युद्ध और विद्रोह के भीतर के प्रचलन का पता लगाना कई शैक्षणिक विषयों को अधिव्यापन करता है। युद्ध पर उनके शोध में पाया गया कि सभी संघर्षों में 2.5 के आसपास ढलान (स्लोप (Slope)) के साथ नीचे की ओर रुझान था।यह हमले में मारे गए लोगों की संख्या से किसी दी गई मृत्यु दर में हुए हमलों की संख्या से संबंधित है।पहले तो यह विवरण यादृच्छिक लग रहा था, लेकिन उन्होंने पाया कि जब एक लघुगणकीय पैमाने पर आयोजित किया गया, तो यह लगभग पूर्ण अवरोही प्रवृत्ति में परिणत हुआ। उन्होंने सबसे पहले इराक (Iraq) के युद्ध पर गौर किया, लेकिन जैसे-जैसे उन्होंने पिछले अन्य युद्धों में गहराई से अध्ययन करना शुरू किया, तो उन्होंने पाया कि इतिहास के लगभग प्रत्येक युद्धों में एक ही सटीक परिणाम मिलें। जैसे-जैसे उन्होंने अधिक से अधिक युद्धों के विवरण को आयोजित किया, तो सभी विवरण 2.5 की ढलान के आसपास एकत्र हुए, अर्थात् प्रत्येक ज्ञात मानव संघर्ष में किसी न किसी प्रकार की समानता थी। जिसका समीकरण इस प्रकार है:

P(x)=Cx -α
यहां “P” घटना की संभावना है; “x” मृत्यु दर की संख्या है; “C” एक स्थिरांक है; और “α” संघर्ष की प्रवृत्ति रेखा का ढलान है।यह आश्चर्यजनक रूप से सरल समीकरण है जो सिद्धांतिक रूप में कभी भी हुआ होगा या होने वाले मानव संघर्ष का वर्णन करता है।जैसा कि उन्होंने इन संख्याओं के बारे में अधिक सोचा, उन्होंने निर्धारित किया कि α वास्तव में एक युद्ध में विद्रोह की संरचना है। इस समीकरण का उपयोग करते हुए, गौर्ले बताते हैं कि सरकारों और सैन्य संगठन α मान को बदलकर रणनीति को विकसित करने के तरीके के आधार को समझने में सक्षम हो सकते हैं, जिससे संभावित रूप से एक युद्ध को समाप्त किया जा सकता है।वहीं एक युद्ध जो चलता रहता है, वह 2.5 की ढलान में एकत्रित होता रहता है, इसलिए उस प्रवृत्ति को उच्च या निम्न के साथ आगे बढ़ाने के किसी तरीके को खोजने से इसका समाधान किया जा सकता है। α को बढ़ाने का अर्थ होगा विद्रोही समूहों को खंडित करना और उन्हें कमजोर बनाना, जिससे अंत में एक युद्ध को युद्ध विराम की ओर ले जाना है।वहीं α को कम करने का अर्थ होगा समूहों को एक साथ धकेलना, उन्हें मजबूत और अधिक ताकतवर बनाना, लेकिन उन्हें पराजित होने में सक्षम करता है।इस परियोजना का लक्ष्य अंतः संघर्षों को समाप्त करना होना चाहिए और गणितीय योजना और गणना के माध्यम से उन युद्धों को रोकने के रास्ते को खोजना थोड़ा आसान हो सकता है। ऐसे ही यदि हम ग्रीस (Greece) की बात करें तो वहां राज्य में वर्चस्व को बनाए रखने के लिए कई युद्ध हुए। जिनमें से एक लियुकट्रा का युद्ध (Battle of Leuctra) था। यह युद्ध थीबन के नेतृत्व में बोएओटियन और स्पार्टन्स और उनके सहयोगियों के बीच लड़ी गई थी।ग्रीक राज्य में सेनाओं में मुख्य रूप से हॉपलाइट (Hoplites - प्राचीन ग्रीस के एक भारी सशस्त्र वाले पैदल सैनिक) शामिल थे।इन लोगों ने कुख्यात सिपाहियों के झुंड से बने गठन में लड़ाई लड़ी, जिसमें सिपाही क्रम बद्ध रूप से एक दीवार बनाकर अपने विरोधी सेना का सामना करती थी। सबसे पहली पंक्ति में सबसे शक्तिशाली और सबसे अनुभवी सैनिकों को खड़ा किया जाता था, ताकि पहली पंक्ति वाले सैनिक डर कर भागने का प्रयास न करें। साथ ही युद्ध के आरंभ होने पर कई सैनिक बुरी तरह से घायल होते थे और सैनिकों के बड़ी मात्रा में नुकसान किसी एक सेनाओं के गठन को कमजोर करके उन्हें पराजय कर देता था। इस युद्ध की शैली के लिए एक सरल प्रारूप को सबसे पहले लैंचेस्टर (Lanchester) द्वारा तैयार किया गया था, जिसमें वे बताते हैं कि सेनाओं के बीच लड़ाई आमने-सामने होती थी।इसका मतलब यह है कि प्रत्येक आदमी केवल अपने विपरीत संख्या यानि एक ही सैनिक से लड़ेगा, और अन्य सैनिक जो लड़ नहीं रहे हैं, वे मोर्चे पर भरने के लिए अपनी बारी का इंतजार करते हैं।सैनिकों की संख्या को समय (t) में निरंतर रहने की अनुमति देते हुए, स्पार्टन सैनिकों, S (t), और थेबन सैनिकों, T (t) के परिवर्तन की दर के समीकरणों को इस प्रकार लिखा जा सकता है:
= - K T N, (1)
= - K s N. (2)
जैसा कि हम यह समझ चुके हैं कि एक सैनिक एक समय में विरोधी के केवल एक ही सैनिक से लड़ सकता है। यदि प्रत्येक सैनिक समान मात्रा में एक दूसरे को मारते हैं और मारे जाते हैं, तो युद्ध के अंत में बचने वाले सैनिकों की संख्या बड़ी और छोटी सेना के बीच का अंतर है। रैखिक कानून दुश्मन के कब्जे वाले क्षेत्र में बिना किसी लक्ष्य के आग लगाने पर भी लागू होता है।दुर्घटना की दर लक्ष्य क्षेत्र में उपलब्ध लक्ष्यों के घनत्व के साथ-साथ हथियारों की शूटिंग की संख्या पर निर्भर करती है।यदि दो बल, एक ही भूमि क्षेत्र पर कब्जा कर रहे हैं और एक ही हथियार का उपयोग करते हुए, एक ही लक्ष्य क्षेत्र में बेतरतीब ढंग से गोली मारते हैं, तो वे दोनों समान दर में नुकसान को भुगतेंगे, जब तक छोटी सेना को संपूर्ण रूप से समाप्त नहीं किया जाता है, वहीं इस संख्य को छोटी सेना द्वारा अधिक मात्रा में बड़ी सेना पर अधिक संख्या में गोली चलाने से संतुलित किया जा सकता है।

संदर्भ :-
https://bit.ly/3KwCXHO
https://bit.ly/34wIVce
https://bit.ly/3KBBb8c

चित्र सन्दर्भ
1. वियतनाम के ऊपर मंडरा रहे हैलीकोप्टर को दर्शाता एक चित्रण (flickr)
2. गणित सीख रहे छात्रों को दर्शाता चित्रण (picryl)
3. ग्रीस - एपामिनोंडास पेलोपिडास के जीवन को बचाते हुए दर्शाता एक चित्रण (flickr)
4. वियतनाम युद्ध को दर्शाता चित्रण (wikimedia)



***Definitions of the post viewership metrics on top of the page:
A. City Subscribers (FB + App) -This is the Total city-based unique subscribers from the Prarang Hindi FB page and the Prarang App who reached this specific post. Do note that any Prarang subscribers who visited this post from outside (Pin-Code range) the city OR did not login to their Facebook account during this time, are NOT included in this total.
B. Website (Google + Direct) -This is the Total viewership of readers who reached this post directly through their browsers and via Google search.
C. Total Viewership —This is the Sum of all Subscribers(FB+App), Website(Google+Direct), Email and Instagram who reached this Prarang post/page.
D. The Reach (Viewership) on the post is updated either on the 6th day from the day of posting or on the completion ( Day 31 or 32) of One Month from the day of posting. The numbers displayed are indicative of the cumulative count of each metric at the end of 5 DAYS or a FULL MONTH, from the day of Posting to respective hyper-local Prarang subscribers, in the city.

RECENT POST

  • शानदार शर्की वास्तुकला की गवाही देती हैं, अटाला सहित जौनपुर की अन्य खूबसूरत मस्जिदें
    वास्तुकला 1 वाह्य भवन

     28-06-2022 08:21 AM


  • फैशन जगत में अपना एक नया स्‍थान बना रहा है मछली का चमड़ा
    मछलियाँ व उभयचर

     27-06-2022 09:29 AM


  • शरीर पर घने बालों के साथ भयानक ताकत और स्वभाव वाले माने जाते थे गोरिल्ला
    शारीरिक

     26-06-2022 10:13 AM


  • सिकुड़ते प्राकृतिक आवासों के बीच, गैर बर्फीले क्षेत्रों के अनुकूलित हो रहे हैं, ध्रुवीय भालू
    निवास स्थान

     25-06-2022 09:58 AM


  • क्या वास्तव में फ्रोज़न खाद्य पदार्थ की बढ़ती लोकप्रियता ने बदल दिया है भारतीय खाद्य उद्योग को?
    स्वाद- खाद्य का इतिहास

     24-06-2022 09:52 AM


  • सामाजिक व् राजनीतिक अन्याय के विरोध का रचनात्मक, शक्तिशाली रूप है, हिप-हॉप या रैप संगीत
    ध्वनि 1- स्पन्दन से ध्वनि

     23-06-2022 09:39 AM


  • पश्चिमी देशों में योग की लोकप्रियता का श्रेय किसे जाता है?
    विचार 2 दर्शनशास्त्र, गणित व दवा

     22-06-2022 10:25 AM


  • हथियारों के रूप में कीड़ों का उपयोग
    तितलियाँ व कीड़े

     21-06-2022 10:02 AM


  • क्यों युवा पीढ़ी कर रहे हैं समाचार पढ़ने से परहेज
    संचार एवं संचार यन्त्र

     20-06-2022 09:02 AM


  • पानी वाली भैंस और गैंडे के बीच संघर्ष को दिखाता वीडियो
    व्यवहारिक

     19-06-2022 12:17 PM






  • © - 2017 All content on this website, such as text, graphics, logos, button icons, software, images and its selection, arrangement, presentation & overall design, is the property of Indoeuropeans India Pvt. Ltd. and protected by international copyright laws.

    login_user_id