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बेरोजगारी के पैमाने के सही आकलन के लिए नीति निर्माताओं को रोजगार दर पर ध्यान देना चाहिए

रामपुर

 21-09-2022 10:49 AM
सिद्धान्त I-अवधारणा माप उपकरण (कागज/घड़ी)

सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी प्राइवेट लिमिटेड (Centre for Monitoring Indian Economy Pvt Ltd) के नवीनतम सर्वेक्षण में उत्तर प्रदेश की बेरोजगारी दर 3.9% आंकी गई है, जो राष्ट्रीय औसत 7.7% से काफी कम है। एक सरकारी प्रवक्ता ने कहा कि उत्तर प्रदेश ने रोजगार उपलब्ध कराने में 17 राज्यों से बेहतर प्रदर्शन किया है, जो रोजगार, निवेश आदि पर सरकार की नीतियों की पुष्टि करता है।2016-17 में बीजेपी के सत्ता में आने से पहले उत्तर प्रदेश में बेरोजगारी दर 17.5 फीसदी थी। निश्चित तौर पर सरकार द्वारा बेरोजगारी को कम करने के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं, जैसे उत्तर प्रदेश में अल्पसंख्यक समुदाय के युवाओं को अच्छी शिक्षा और बेहतर रोजगार के अवसर प्रदान करने के लिए मुस्लिम बहुल इलाकों में रोजगार मेलों के आयोजन करवाए जा रहे हैं। अल्पसंख्यक समुदाय के युवाओं का बेहतर भविष्य सुनिश्चित करने के लिए योगी सरकार अब रोजगार मेलों का आयोजन करवा रही है और भर्ती के लिए युवाओं से सीधे जुड़ने के लिए बड़ी कंपनियों को आमंत्रित किया जाएगा। हालांकि वर्तमान विवरण के अनुसार, 0.4% के साथ छत्तीसगढ़ में बेरोजगारी की दर सबसे कम है, जबकि हरियाणा में 37.3% के साथ सबसे अधिक बेरोजगारी है।संगठन द्वारा 28 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में सर्वेक्षण किया गया है। राजस्थान (31.4%) के मुकाबले उत्तर प्रदेश की बेरोजगारी दर 3.9% है। इसके अलावा, सरकार ने दावा किया है कि एमएसएमई (MSME) के माध्यम से 2 करोड़ लोगों को रोजगार से जोड़ा गया था, जबकि अन्य लगभग 2.5 करोड़ को MGNREGA, स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से रोजगार प्रदान किया गया था, और अन्य 25 लाख लोगों को एक जिला उत्पाद योजना के तहत रोजगार मिला था।
लेकिन केवल बेरोजगारी दर के पारंपरिक मीट्रिक को देखना भ्रामक साबित हो सकता है। बेरोजगारी के पैमाने का सही-सही आकलन करने के लिए नीति निर्माताओं को 'रोजगार दर' पर ध्यान देना चाहिए। लेकिन सवाल तो यह उठता है कि क्यों इतने सारे नीति निर्माता और विशेषज्ञ भारत में बेरोजगारी के पैमाने को समझने में विफल हो रहे हैं? इसका उत्तर बेरोजगारी के स्तर का आकलन करने के लिए उनके और आम जनता द्वारा उपयोग किए जा रहे गलत मीट्रिक (Metrics) में निहित है।उदाहरण के लिए उत्तर प्रदेश में 17 सितंबर को नीति निर्माताओं द्वारा बताया गया कि, बेरोजगारी दर वर्ष 2016 में 17 प्रतिशत से अधिक थी और घटकर चार से पांच प्रतिशत हो गई। यह सुनिश्चित करने के लिए, यह तथ्यात्मक रूप से सही था। सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (Centre for Monitoring Indian Economy) से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, मई-अगस्त 2016 की अवधि के दौरान उत्तर प्रदेश की बेरोजगारी दर 16.82% थी।
यह भी सच है कि मई-अगस्त 2021 की अवधि के लिए उत्तर प्रदेश की नवीनतम बेरोजगारी दर 5.41% रही। तो, ठीक 5 वर्षों में, यूपी की बेरोजगारी दर लगभग 17% से गिरकर 5.41% हो गई है। श्रम बल भागीदारी दर अनिवार्य रूप से काम करने की उम्र (15 वर्ष या अधिक) आबादी, जो नौकरी की मांग कर रहे हैं का प्रतिशत प्रदान करती है। यह एक अर्थव्यवस्था में नौकरियों के लिए "मांग" का प्रतिनिधित्व करता है।इसमें वे लोग शामिल हैं जो कार्यरत हैं और जो बेरोजगार हैं। बेरोजगारी दर और कुछ नहीं बल्कि श्रम बल के अनुपात के रूप में बेरोजगारों की संख्या है।तो 2016 और 2017 के दौरान यूपी में बेरोजगारी दर में तेज गिरावट को समझने के लिए उस अवधि के दौरान श्रम बल भागीदारी दर को देखना होगा। जैसा कि नीचे दी गई तालिका से पता चलता है, उस अवधि के दौरान उत्तर प्रदेश की श्रम बल भागीदारी दर 46.32% से गिरकर 38.4% हो गई, जिस अवधि में इसकी बेरोजगारी दर 17% से गिरकर केवल 3.75% हो गई। उत्तर प्रदेश की बेरोजगारी दर में गिरावट अनिवार्य रूप से श्रम बल भागीदारी दर में गिरावट के कारण है। क्योंकि मई 2016 और अप्रैल 2017 के बीच, उत्तर प्रदेश में नौकरियों की मांग में तेजी से गिरावट (लगभग 8 प्रतिशत अंक) आने के बाद, केवल 11 महीनों में 1.1 मिलियन से अधिक श्रम बल से बाहर हो गए। आश्चर्य नहीं कि इनमें से अधिकांश लोग, जिन्होंने काम की तलाश करना बंद कर दिया था, उन्हें तब तक बेरोजगारों में गिना जा रहा था जब तक कि उन्होंने श्रम शक्ति को संपूर्ण रूप से नहीं त्याग दिया।जैसे ही वे श्रम बल से बाहर निकले, बेरोजगार लोगों की संख्या में लगभग समान राशि, 1 मिलियन की गिरावट आई।
संक्षेप में, इसने 2016 और 2017 के बीच उत्तर प्रदेश में बेरोजगारी दर को कम कर दिया।दरसल बेरोजगारी दर में गिरावट तब आती है, जब श्रम बल भागीदारी दर गिर जाता है। लेकिन जब श्रम बल भागीदारी दर में बढ़ोतरी होती है तो बेरोजगारी दर में वृद्धि होना स्वभाविक हो जाता है। उत्तर प्रदेश की बेरोजगारी दर में तेज गिरावट नई नौकरियों की आपूर्ति में वृद्धि के परिणामस्वरूप नहीं हुई, बल्कि नौकरियों की मांग में तेज गिरावट के कारण निराश श्रमिकों ने काम की तलाश करना बंद कर दिया। एक और दिलचस्प मामला 2020 में कोविड (Covid) व्यवधान से उत्पन्न हुआ। विवरण दिखाता है कि सितंबर 2019 और अप्रैल 2020 के बीच, श्रम बल भागीदारी दर कैसे बढ़ा था और इसके परिणामस्वरूप बेरोजगारी दर में भी वृद्धि हुई थी। लेकिन एक बार जब कोविड लॉकडाउन (Lockdown) प्रभावी हुआ, तो श्रम बल भागीदारी दर में गिरावट के कारण बेरोजगारी दर तेजी से गिर गया।वास्तव में, उत्तर प्रदेश की बेरोजगारी दर कोविड महामारी की शुरुआत के बाद से एक साल में तेजी से गिर गई है,जनवरी-अप्रैल 2020 में लगभग 12% से, अप्रैल 2021 तक 5% से कम हो गई। लेकिन फिर, इसका मुख्य कारण श्रम बल भागीदारी दर में गिरावट थी। संक्षेप में, उत्तर प्रदेश श्रमिकों को श्रम बल में शामिल होने से भी निराश करके बेरोजगारी दर कम हो रहा है और इस प्रकार लाखों नई नौकरियों की आपूर्ति उत्पन्न करने के बजाय नौकरियों की मांग को कम कर रहा है।बेरोजगारी के कारण संकट को सही मायने में पकड़ने के लिए, नीति निर्माताओं को रोजगार दर को देखना चाहिए।

संदर्भ :-
https://bit.ly/3xj1DQ1
https://bit.ly/3eL6wLa
https://bit.ly/3xlqxyh

चित्र संदर्भ
1. मकान की छत डालते लोगों को दर्शाता एक चित्रण (wikimedia)
2. नया कौशल सीखते भारतीय युवाओ को दर्शाता एक चित्रण (flickr)
3. कॉल सेंटर में काम करते युवाओं को दर्शाता एक चित्रण (flickr)



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