द्विपादवाद अर्थात मनुष्यों का दो पैरों पर चलने का इतिहास

रामपुर

 25-10-2021 12:11 PM
स्तनधारी

विभिन्न संस्कृतियों में "दो पैरों पर खड़ा होने" अथवा "अपने पैरों पर चलने" की कहावत प्रसिद्ध है। भारत में भी यदि किसी व्यक्ति के संदर्भ में यह कहा जाता है की "वह अपने पैरों पर खड़ा हो गया" तो इसका सांकेतिक अर्थ यह होता है की "जीवन में वह आदमी सफल हो गया"। यहाँ पर यह जानना बेहद ही रोचक विषय होगा की वास्तविकता में आदमी को दो पैरों पर चलने में कब और कैसे सफलता प्राप्त हुई?
दो पैरों पर चलना इंसानों का एक गुण है जो उसे दूसरे सभी जीवों अथवा जानवरों से अलग करता है। शाब्दिक रूप से दो पैरों पर चलने के लिए "द्विपादवाद (bipedalism) " शब्द का प्रयोग किया जाता है, और दो पैरों पर चलने वाले हमारे सभी पूर्वजों के लिए होमिनिन (Hominin) शब्द का प्रयोग किया जाता है। वे पूर्वज जो दो पैरों पर सीधे चलते थे, वे कुछ स्तर तक समझदार होते थेऔर किसी भी वस्तु को उपकरण के रूप में प्रयोग करना जानते थे। 'होमिनिड' मानव, चिंपैंजी, गोरिल्ला, और उनके सभी तत्काल पूर्वजों सहित सभी आधुनिक और विलुप्त हो चुके महान वानरों को दिया गया शब्द है। आणविक और पैलियोन्टोलॉजिकल (Molecular and paleontological) साक्ष्यों के आधार पर चिंपैंजी को आज से पांच से सात मिलियन साल पहले रहने वाले आधुनिक मनुष्यों के बीच अंतिम सामान्य पूर्वज माना जाता है। चिंपैंजी किसी भी प्रजाति की तुलना में मनुष्यों से अधिक निकटता से संबंधित माना जाता है, जिसे होमिनिन (hominin) कहा जाता हैं। वर्तमान में हमारे पास तीन वर्णित पीढ़ियां, अर्डिपिथेकस (Ardipithecus), ऑरोरिन (Aurorin) और सहेलथ्रोपस (Sahelanthropus) दर्ज है। जिनमें से अर्डिपिथेकस को कपाल, दंत और पोस्टक्रानियल (postcranial) अवशेषों द्वारा बहुत अच्छी तरह से दर्शाया गया है। सभी तीन प्रजातियों को कम कैनाइन आकार और दो पैरों पर चलने की क्षमता के आधार पर होमिनिन होने का तर्क दिया जाता है। दो पैरों पर सीधे चलने का गुण भी होमिनिड वंश को परिभाषित करता है। द्विपादवाद ने पहले होमिनिड्स को बाकी चार पैरों वाले वानरों से अलग कर दिया। 20वीं शताब्दी तक वैज्ञानिक यह सोचते थे कि बड़े दिमागों ने होमिनिड्स को अद्वितीय बना दिया है। किन्तु यह सोच 1920 के दशक में बदलनी शुरू हुई जब एनाटोमिस्ट रेमंड डार्ट (Anatomist Raymond Dar) ने दक्षिण अफ्रीका में टोंग चाइल्ड के नाम से जानी जाने वाली खोपड़ी की खोज की। ताउंग चाइल्ड का दिमाग छोटा था, शोधकर्ताओं ने सोचा कि लगभग तीन मिलियन वर्षीय ताउंग केवल एक वानर था। लेकिन बच्चे की खोपड़ी में फोरामेन मैग्नम जो इसे इंसान के समरूप बनता है फोरामेन मैग्नम (foramen magnum), ऐसा छिद्र होता है जिसके माध्यम से रीढ़ की हड्डी सिर को छोड़ती है, एक वानर की तुलना में खोपड़ी के नीचे आगे की ओर स्थित होता है, यह दर्शाता है कि ताउंग ने अपना सिर सीधा रखा और इसलिए संभवतः सीधा चला अतः वह एक आधुनिक मनुष्य का पुर्वज था जो दो पैरों पर चलने लगा था।
ऐसे कई कारण हैं जो होमिनिन को दो पैरों पर चलने में सक्षम बनाते हैं। जैसे हमारी खोपड़ी सीधे हमारी रीढ़ के ऊपर संतुलित होती है, हमारे पास एक घुमावदार रीढ़ और एक चौड़ा, कप के आकार का श्रोणि है, जिसमें छोटे इलियाक ब्लेड और एक बड़ा कूल्हे का जोड़ है। ये विशेषताएं शरीर के ऊर्ध्वाधर ट्रंक के समर्थन के साथ-साथ स्थिर रूप से खड़े होने और चलने या दौड़ने दोनों के दौरान पैरों के माध्यम से वजन को कुशलतापूर्वक स्थानांतरित करने की सुविधा प्रदान करती हैं। हाल के दशकों में, मानवविज्ञानियों ने यह निर्धारित किया है कि द्विपादवाद की जड़ें बहुत प्राचीन हैं। 2000 में, केन्या में काम करने वाले पैलियोएंथ्रोपोलॉजिस्ट (paleoanthropologists) ने छह मिलियन साल पुराने ऑरोरिन टुगेनेंसिस (Aurorin tugenensis) के दांत और जांघ की दो हड्डियों को देखा। जांघ की हड्डियों का आकार पुष्टि करता है कि, ऑरोरिन द्विपाद था। द्विपादवाद के लिए सबसे व्यापक सबूत के साथ सबसे पुराना होमिनिड 4.4 मिलियन वर्षीय अर्दीपिथेकस रैमिडस (Ardipithecus ramidus) माना जाता है। वर्ष 2009 में, शोधकर्ताओं ने प्रजातियों के विश्लेषण ने 15 से अधिक वर्षों के परिणामों की घोषणा की और दुनिया को अर्डी नामक लगभग पूर्ण कंकाल से परिचित कराया। हालाँकि शुरुआती होमिनिड्स सीधे चलने में सक्षम थे, लेकिन वे आज के मानव जितने आधुनिक नहीं थे । उनके भीतर कई आदिम विशेषताएं भी थी जैसे लंबी, घुमावदार उंगलियां और पैर की उंगलियां और साथ ही लंबी भुजाएं और छोटे पैर - जो इंगित करते हैं कि उन्होंने पेड़ों में समय बिताया। यह 1.89 मिलियन वर्ष पहले होमिनिड्स लंबे हो गए और उनके लंबे पैर विकसित हुए जिससे वह पूरी तरह से स्थलीय जीव बन गए।

संदर्भ
https://bit.ly/3nnaAC0
https://bit.ly/3GaYe8J
https://bit.ly/3B5xcvp
https://bit.ly/3vF8Nvz

चित्र संदर्भ
1. शिकार पर निकले आदिमानवों का एक चित्रण (wikimedia)
2. दो पैरों पर खड़े चिंपाज़ी का एक चित्रण (istock)
3. टोंग चाइल्ड के नाम से जानी जाने वाली खोपड़ी का एक चित्रण (wikimedia)
4. ऑरोरिन टुगेनेंसिस जीवाश्म को संदर्भित करता एक चित्रण (wikimedia)



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