कोरोना महामारी का सामना करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है, इंटरनेशनल रेड क्रॉस और रेड क्रिसेंट आंदोलन

रामपुर

 08-05-2021 09:03 AM
विचार 2 दर्शनशास्त्र, गणित व दवावास्तुकला 2 कार्यालय व कार्यप्रणाली
वर्तमान समय में पूरा विश्व विनाशकारी कोरोना महामारी से जूझ रहा है। इस महामारी का सामना करने के लिए कई संगठन या संस्थाएं आगे आयी हैं, जिनमें इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ रेड क्रॉस और रेड क्रिसेंट (International Federation of Red Cross and Red Crescent - IFRC) और भारतीय रेड क्रॉस (Indian Red Cross) भी शामिल हैं। ये दोनों इंटरनेशनल रेड क्रॉस और रेड क्रिसेंट आंदोलन का महत्वपूर्ण अंग हैं। इंटरनेशनल रेड क्रॉस और रेड क्रिसेंट आंदोलन,एक अंतर्राष्ट्रीय मानवीय आंदोलन है, जिसके लगभग 970 लाख स्वयंसेवक, सदस्य और कर्मचारी दुनिया भर में मौजूद हैं। इसकी स्थापना मुख्य रूप से मानव जीवन और स्वास्थ्य की रक्षा करने, सभी लोगों के लिए सम्मान सुनिश्चित करने, और मानव पीड़ा को रोकने या उसे कम करने के लिए की गयी थी। यह अंतर्राष्ट्रीय मानवीय आंदोलन तीन अलग-अलग संगठनों के साथ कार्य करता है, जो भले ही कानूनी रूप से एक-दूसरे से स्वतंत्र हैं, लेकिन सामान्य बुनियादी सिद्धांतों, उद्देश्यों, प्रतीकों, विधियों और शासी संगठनों के माध्यम से आंदोलन से जुड़े हुए हैं।

आंदोलन से सम्बंधित तीन महत्वपूर्ण संगठन इंटरनेशनल कमेटी ऑफ द रेड क्रॉस (International Committee of the Red Cross -ICRC), इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ़ रेड क्रॉस एंड रेड क्रिसेंट सोसाइटीज़,नेशनल रेड क्रॉस और रेड क्रिसेंट सोसाइटीज़ (National Red Cross and Red Crescent Societies) हैं। इंटरनेशनल कमेटी ऑफ द रेड क्रॉस,एक निजी मानवीय संस्था है, जिसकी स्थापना 1863 में जेनेवा (Geneva), स्विटज़रलैंड (Switzerland) में विशेष रूप से हेनरी डुनेंट (Henry Dunant) और गुस्ताव मोयनियर (Gustave Moynier) द्वारा की गयी थी। अंतर्राष्ट्रीय और आंतरिक सशस्त्र संघर्षों से पीड़ित लोगों के जीवन और उनके सम्मान की रक्षा के लिए बनाए गए अंतर्राष्ट्रीय मानवीय कानून के तहत ICRC की 25 सदस्यीय समिति को विशिष्ट अधिकार प्राप्त हैं। 1917, 1944 और 1963 में ICRC को नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। वहीं बात इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ़ रेड क्रॉस एंड रेड क्रिसेंट सोसाइटीज़ की करें, तो इसकी स्थापना 1919 में हुई थी,तथा वर्तमान समय में यह इस आंदोलन से जुड़े 190 नेशनल रेड क्रॉस और रेड क्रिसेंट सोसाइटीज़ के बीच समन्वय का कार्य करता है। 1963 में, फेडरेशन को ICRC के साथ संयुक्त रूप से नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

रेड क्रॉस आंदोलन का तीसरा अंग नेशनल रेड क्रॉस और रेड क्रिसेंट सोसाइटीज़ है, जो दुनिया के लगभग हर देश में मौजूद है। प्रत्येक इकाई अपने देश में अंतर्राष्ट्रीय मानवीय कानून के सिद्धांतों और अंतर्राष्ट्रीय आंदोलन के विधान या क़ानून के अनुसार काम करती है। विशिष्ट परिस्थितियों और क्षमताओं के आधार पर, नेशनल सोसाइटी उन अतिरिक्त मानवीय कार्यों को भी कर सकती है, जिन्हें अंतर्राष्ट्रीय मानवीय कानून द्वारा प्रत्यक्ष रूप से परिभाषित नहीं किया गया है। हर देश में आपातकालीन चिकित्सा सेवाएं प्रदान करके नेशनल रेड क्रॉस और रेड क्रीसेंट सोसाइटी संबंधित राष्ट्रीय स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली से महत्वपूर्ण रूप से जुड़ी होती है।भारत में इंडियन रेड क्रॉस सोसाइटी (IRCS) मानव जीवन और स्वास्थ्य की रक्षा के लिए कार्य कर रही है। चूंकि, यह इंटरनेशनल रेड क्रॉस और रेड क्रीसेंट आंदोलन का हिस्सा है, इसलिए यह रेड क्रॉस के मौलिक सिद्धांतों को भी साझा करती है।इस सोसाइटी का मिशन आपदाओं या आपात परिस्थितियों में राहत प्रदान करना तथा कमजोर लोगों और समुदायों के स्वास्थ्य और देखभाल को बढ़ावा देना है। पूरे भारत में इसकी 700 से भी अधिक शाखाएं हैं तथा यह ‘रेड क्रॉस’ को अन्य अंतर्राष्ट्रीय रेड क्रॉस सोसाइटियों के साथ एक प्रतीक के रूप में उपयोग करती है। इसकी शुरूआत 1920 से हुई थी, तथा यह तब से स्वैच्छिक रूप से मानव कल्याण का कार्य कर रही है। यह सोसाइटी भारत में सेंट जॉन एम्बुलेंस (St John Ambulance) संस्था के साथ निकटता से जुड़ी हुई है।


भारत में कोरोना महामारी की दूसरी लहर के बीच इंडियन रेड क्रॉस और इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ रेड क्रॉस और रेड क्रिसेंट लोगों की सुरक्षा के लिए चौबीसों घंटे काम कर रहे हैं। नई दिल्ली और मुंबई सहित ऐसे अनेकों शहर, जो कोरोना महामारी के कहर से अत्यंत प्रभावित हैं, में लगभग 46,000 से अधिक रेड क्रॉस कार्यकर्ता गंभीर रूप से ग्रसित लोगों को चिकित्सीय और भावनात्मक सहायता प्रदान कर रहे हैं, ताकि तालाबंदी के बीच स्वास्थ्य देखभाल प्रणालियों पर पड़ने वाले दबाव को कम किया जा सके। रेड क्रॉस गंभीर रूप से ग्रसित रोगियों को ऑक्सीजन सुविधा प्रदान कर रहा है, जो कि इस समय सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकता है।रेड क्रॉस एम्बुलेंस गंभीर रूप से ग्रसित रोगियों,जिनमें प्रवासी, एकल महिलाएं, माताएं, दिव्यांग लोग आदि शामिल हैं, को चिकित्सा सेवाएं देने के लिए परिवहन की सुविधा भी प्रदान कर रहा है।परिवारों के जोखिम को कम करने के लिए, इंडियन रेड क्रॉस शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में कोविड-19 का टीकाकरण कर रहा है। इसके स्वयंसेवक गांवों में मास्क, साबुन और स्वच्छता किट बांट रहे हैं।स्वयंसेवकों ने अभी तक प्रवासियों और बुजुर्गों सहित, 276,000 से भी अधिक लोगों को 310लाख से अधिक भोजन और राशन वितरित किया है। रेड क्रॉस ने मौजूदा हालात से निपटने के लिए लगभग 770,000 से अधिक लोगों को भावनात्मक सहायता प्रदान की है।

स्वयंसेवक, कोरोना महामारी के प्रसार को रोकने के लिए लोगों को सक्रिय रूप से जागरूक कर रहे हैं, तथा उपयुक्त स्वच्छता को कैसे बनाए रखा जा सकता है, इसका भी प्रदर्शन करते हैं। एंबुलेंस, ऑक्सीजन, टीकाकरण आदि आवश्यकताओं की पूर्ति करके रेड क्रॉस मानवीय पीड़ा को कम करने तथा कोरोना महामारी का सामना करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

संदर्भ:
https://bit.ly/3hdg80j
https://rdcrss.org/3eTbIc4
https://bit.ly/3ttM8jj

चित्र संदर्भ
1. स्वास्थ्य कर्मचारियों का एक चित्रण (Youtube)
2. रेड क्रॉस झंडे का एक चित्रण (Unsplash)
3 .रेडक्रॉस वाहन का एक चित्रण (Unsplash)



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