कोविड-19 महामारी के चलते ताजी मछली के अलावा डिब्बाबंद खाद्य मछलियों की मांग में आई तेजी

रामपुर

 05-05-2021 09:10 AM
स्वाद- खाद्य का इतिहासपर्वत, चोटी व पठारनदियाँ
भोजन की समीक्षा में मछली पालन एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।विश्व भर में मछली, लोगों के आहार में प्रोटीन (Protein) के रूप में महत्वपूर्ण योगदान देती है। यह अनुमान लगाया गया है कि 15 से 20 प्रतिशत प्रोटीन जलीय जीवों से ही आता है। लेकिन वर्तमान समय में कोविड-19 (Covid-19) की वजह से कई देशों में तत्काल और विनाशकारी परिणाम देखे गए हैं, जिसमें सीमाओं का बंद करना, सामाजिक दूरी, तालाबंदी और प्रसार को रोकने के लिए किए गए अन्य उपायों ने मछली और समुद्री भोजन के व्यापार को लगभग बंद कर दिया है।उत्पादक देश भी कोविड-19 से प्रभावित हुए हैं, जिस वजह से उन्हें खाद्य पदार्थों को शीतगृह में जमा करना पड़ रहा है, क्योंकि प्रतिबंध के कारण वे अपने उत्पादों का उत्पादन कर तो रहे हैं, लेकिन परिवहन अवरोधों के कारण बढ़ी हुई माँग की आपूर्ति करने में असमर्थ हैं।

जनवरी से मई 2020 के दौरान एशिया (Asia) और यूरोप (Europe) में डिब्बाबंदी के लिए जमे हुए टूना मछली (Tuna)के आयात में उतार-चढ़ाव देखने को मिला । जनवरी 2020 में जमे हुए टूना के थाई (Thai) आयात 75000 टन (Tonnes)के उच्च स्तर पर था,जो कम प्रशुल्क पर संयुक्त राज्य अमेरिका (United States of America) के लिए डिब्बाबंद टूना निर्यात का वार्षिक कोटा भरने की जल्दबाजी के कारण हो सकता है।हालांकि, फरवरी और मार्च में आयात घटकर 35000 टन प्रति माह रह गया। 2019 की इसी अवधि की तुलना में 2020 की पहली तिमाही के दौरान संचयी आयात 8 प्रतिशत कम (145000 टन) था। अप्रैल और मई में आयात में प्रति माह 50000 टन की वृद्धि हुई, जब प्रमुख बाजारों से उपभोक्ता की मांग में वृद्धि होने लगी।

डिब्बाबंद सार्डिन (Sardines) और मैकेरल (Mackerel) उत्पादों का राष्ट्रीय भंडार अप्रैल 2020 में 35 मिलियन डिब्बे तक था। निर्यात, खुदरा और ऑनलाइन (Online) बाजारों के माध्यम से अवशोषित होने के अलावा, संसाधित डिब्बाबंद मछली का उपयोग सामाजिक सहायता उत्पादों में से एक के रूप में किया जा सकता है जो समुदाय की प्रोटीन की जरूरतों को पूरा करते हैं।वहीं उद्योग मंत्रालय द्वारा बताया गया कि इंडोनेशिया के विभिन्न क्षेत्रों मंल 718 मछली प्रसंस्करण व्यवसाय इकाइयाँ फैली हुई हैं। मछली प्रसंस्करण क्षेत्र का कुल उत्पादन 2019 में 1.6 मिलियन टन तक पहुंच गया,यानी इसमें 2016 की तुलना में 300 हजार टन की वृद्धि को देखा गया है।अपने सकारात्मक प्रदर्शन के बावजूद, मछली डिब्बाबंद उद्योग को कोविड-19 महामारी के प्रभाव को देखते हुए विभिन्न चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।इन चुनौतियों में डिब्बे, मसाले की कीमत में वृद्धि के साथ-साथ तालाबंदी से प्रभावित देशों से आयातित मछली के कच्चे माल की कमी भी शामिल है।
भारत की तटरेखा 8,000 किमी तक फैली हुई है, इसलिए यह कोई आश्चर्य की बात नहीं है कि यह दुनिया के सबसे बड़े मछली उत्पादकों में से एक है और मछली और मछली उत्पादों का एक शीर्ष निर्यातक है।फूड एंड एग्रीकल्चर ऑर्गनाइजेशन (Food and Agriculture Organization) की 2016 की स्टेट ऑफ वर्ल्ड फिशरीज एंड एक्वाकल्चर (State of World Fisheries and Aquaculture) की रिपोर्ट (Report) के अनुसार, 2014 में, भारत का कुल उत्पादन लगभग 9.6 मिलियन टन था, जिसमें समुद्री और अंतर्देशीय कुचक्र, साथ ही मत्स्यपालन उत्पादन भी शामिल था। हालांकि, खराब होने वाले सामानों के परिवहन के लिए विश्वसनीय घरेलू बुनियादी ढांचे की कमी कि वजह से भारतीयों द्वारा मुख्य रूप से ताजी मछली खाने का ही विकल्प चुना जाता है, जो कई क्षेत्रीय व्यंजनों के केंद्र में है। लेकिन वर्तमान समय में इस क्षेत्र ने काफी प्रगति कर ली है, जिस से भारत में भी कई उद्यमी मछलियों को डिब्बाबंद करके व्यवसाय को एक नया रूप दे सकते हैं। खाद्य पदार्थ को डिब्बाबंद करने की प्रक्रिया सर्वप्रथम फ्रांसीसी (Frenchman) निकोलस एपर्ट (Nicolas Appert) द्वारा पेश की गई थी। उन्होंने 1795 में,उबलते पानी में मछली के जार रखकर मछली को संरक्षित करने के तरीकों के साथ प्रयोग करना शुरू किया।नेपोलियन (Napoleonic) युद्धों के पहले वर्षों के दौरान, फ्रांसीसी सरकार ने बड़ी मात्रा में भोजन को संरक्षित करने का एक सस्ता और प्रभावी तरीका खोजने वाले व्यक्ति को 12,000 फ्रैंक पुरस्कार देने की घोषणा की। एपर्ट ने अपना आविष्कार प्रस्तुत किया और जनवरी 1810 में पुरस्कार जीत लिया।
डिब्बाबंद मछली एक ऐसी मछली होती है जिसे संसाधित किया जाता है, तथा एक वायुरोधी कंटेनर (Container) में सील किया जाता है। इसके बाद इसे अधिकतम ताप वाले उपकरण में गर्म किया जाता है। खाद्य पदार्थों को डिब्बाबंद करना भोजन को संरक्षित करने की एक विधि है, जोकि पदार्थों को एक से पांच साल तक का जीवन प्रदान करती हैं अर्थात एक से पांच साल तक वे पदार्थ संरक्षित रहते हैं। मछली में अम्लता उस स्तर की होती है, जिस पर रोगाणु पनप सकते हैं। इसलिए सार्वजनिक सुरक्षा के दृष्टिकोण से, कम अम्लता (4.6 से अधिक pH) वाले खाद्य पदार्थों को उच्च तापमान (116-130 डिग्री सेल्सियस) के तहत उन्हें जीवाणु रहित करने की आवश्यकता होती है।दरसल मछली को खराब होने और उन्हें लम्बे समय तक रोगाणुरोधी बनाए रखने के लिए संरक्षण तकनीकों की आवश्यकता होती है तथा इसके लिए डिब्बाबंद भोज्य पदार्थों को बनाया गया है। कोविड-19 के प्रकोप को देखते हुए फास्ट-मूविंग कंज्यूमर गुड (Fast-Moving Consumer Goods), सेवा क्षेत्र के साथ भागीदार करके भारत की जनसंख्या के लिए निरंतर खाद्य आपूर्ति सुनिश्चित करना चाहती है। भारतीय उपभोक्ताओं की आवश्यक खाद्य पदार्थों तक आसान पहुँच प्रदान करने के लिए अब वे ऑनलाइन फूड डिलीवरी ऐप (Online Food Delivery App) पर चुनिंदा उत्पाद बेच सकते हैं, और संकट के दौरान आबादी को घर में ही ठहरने में मदद कर सकते हैं।
न्यूनतम क्षमता पर काम करने वाली कई फास्ट-मूविंग कंज्यूमर गुड ब्रांड कंपनियां अब भारत में विविध उद्योगों के ऑनलाइन वादक के साथ मिलकर भारतीय उपभोक्ताओं को आवश्यक सामान उपलब्ध कराने के लिए तर्कपूर्ण समाधान पर काम कर रही हैं, जोकि भारत को आर्थिक मंदी से भी बाहर निकालने में सहायक हो सकती हैं। दीर्घकालिक दृष्टिकोण से यदि देखा जाएं तो तालाबंदी के अनिवार्य रूप से हटाए जाने के बाद भी सामाजिक दूरी को बनाए रखना आवश्यक है और यह उपभोक्ता की खरीदारी की आदतों को प्रभावित करेगा, जिसके परिणामस्वरूप उपभोक्ता अधिक डिब्बाबंद चीजें खरीदने के विकल्प का चयन करना सुरक्षित और आरामदायक हो सकता है।

संदर्भ :-
https://bit.ly/3tbayhw
https://bit.ly/3vBisSR
https://bit.ly/3vEfEnM
https://bit.ly/334mcjA
https://bit.ly/3t9vNjK
https://bit.ly/3gS0ur6
https://bit.ly/2QOYMfl

चित्र संदर्भ:-
1. डिब्बाबंद मछली का चित्रण (Wikimedia)
2. डिब्बाबंद मछली का एक चित्रण (Wikimedia)
3. भारतीय मछुआरों का एक चित्रण (Youtube)



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