इंडो-सारसेनिक (Indo Saracenic) वास्तुकला : भव्यता से भरपूर।

रामपुर

 20-04-2021 11:47 AM
वास्तुकला 1 वाह्य भवन


किसी भी प्राचीन तथा आधुनिक इमारत के निर्माण में उपयोग की गयी वास्तुकला ही उसे यादगार और विशिष्ट बनाती हैं। देश-विदेश की अनेक प्रसिद्ध सांस्कृतिक धरोहरों जैसे- ताजमहल, लालकिला और ऐसे ही अनेक अन्य बेहद लोकप्रिय इमारतें अपनी विशिष्ट वास्तुकला के आधार पर ही पूरी दुनिया में लोकप्रिय हैं। उत्तर प्रदेश का रामपुर जिला भी अपनी कुछ बेजोड़ वस्तुकलाओं के मद्देनज़र पूरी दुनिया में अद्वितीय है। यहाँ की अनेक इमारतों में कुछ ऐसी कलाकृतियां भी शामिल है, जो विश्व के किसी भी अन्य इमारत में देखने को नहीं मिलती। इससे पहले की आपको एक बेहद नायाब वास्तुकला से अवगत कराएं, हम यह जान लेते हैं की वास्तुकला क्या होती है? दरसल वास्तुकला मनुष्यों द्वारा उपयोग की जाने वाली एक ऐसी पद्धति है, जो किसी स्थान अथवा ढांचे को मनुष्य के निवास हेतु सर्वश्रेष्ठ बनाती है। यह भवनों को रहने, उनके लम्बे समय तक टिकने, और सुख-सुविधाओं के परिप्रेक्ष्य में बेहद सरल और टिकाऊ बनाती है। वास्तुकला का इस्तेमाल मौसमी खतरों, तथा जंगली जानवरों और विरोधियों से इमारत की रक्षा करने तथा भवनों को आकर्षक और भव्य रूप में प्रदर्शित करने के लिए किया जाता था।
इंडो-सारसेनिक (Indo Saracenic) वास्तुकला का निर्माण ब्रिटिश शाशकों द्वारा हिन्दू , मुग़ल तथा गौथिक (Gothic) वास्तुकलाओं के समग्र मिश्रण से किया गया। यह वास्तुकला सर्वप्रथम 1767 में मद्रास (वर्तमान के चेन्नई) में खोजी गयी, जहाँ 1768 में सर्वप्रथम चौपाक पैलेस (Chepauk Palace) का निर्माण किया गया। अंग्रेजी हुकूमत द्वारा अधीन भारत में इस कला का प्रयोग विभिन्न इमारतों में किया गया, जो आज भी विश्व भर में लोकप्रिय हैं। इनमे से कुछ प्रमुख इमारतें मद्रास हाई कोर्ट, विक्टोरिया टर्मिनस (अब छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस-मुंबई), विक्टोरिया मेमोरियल (कोलकाता), दिल्ली का सचिवालय भवन हैं। जो निश्चित ही अपने आप में अद्वितीय हैं। रामपुर की बात करें तो यहाँ के अनेक प्राचीन और उत्कृष्ट भवन इंडो सारसेनिक (Indo saracenic) वास्तुकला से प्रेरित हैं। बदलते समय अंतराल के दौरान शैली में कई सकारात्मक बदलाव किये गए, और इसे अधिक आकर्षक, भव्य, तथा मनमोहक रूप दिया गया। Check Link - https://bit.ly/3mXkBVK
गुंबद- यह किसी भी इमारत की चोटी पर प्याज के आकार की एक आकृति होती है। रामपुर के रजा पुस्तकालय में इस वास्तुकला का प्रत्यक्ष उदाहरण देखा जा सकता है।
मीनार-मीनार चिमनी के आकार की ऊंची आकृति होती है, जो कि भवन के चारों कोनो तथा दरवाजे के ठीक सामने स्थित होती है। रामपुर के पुस्तकालय तथा महलों को इसके उदाहरण के तौर पर लिया जा सकता है।
गुंबददार छतें-गुम्बद का वर्णन दिया जा चुका है। अर्थात इमारतों की छतों को प्याज के आकार का बनाया जाता था।
स्तूपिका, गुंबददार छतें, खुले गुंबददार इमारत आदि इस वास्तुकला के कुछ नायाब नमूने हैं। रामपुर जिले में भी इंडो-सारसेनिक शैली के कुछ बेहद उत्कृष्ट उदाहरण देखने को मिल जाते हैं। जिनमे से कुछ निम्नवत हैं:-
1. रामपुर शहर में नवाब गेट- नवाब गेट मूल रूप से इस्लामी वास्तुकला का नमूना है, परन्तु इसके एक बड़े हिस्से में इंडो-सारसेनिक शैली का इस्तेमाल गया है।
2. रामपुर में न्यायालयों और कार्यालयों के प्रवेश द्वार- इन जगहों पर भी इंडो-सारसेनिक शैली का भरपूर इस्तेमाल किया गया है।

भारत समेत विश्व के अनेक देशों में इस शैली का भरपूर मात्रा में इस्तेमाल किया जाता था। यह अपने आप में बेहद विशिष्ट है, यही कारण है की मुग़ल काल और ब्रिटिश काल में इस शैली का इस्तेमाल शानो-शोकत प्रदर्शित करने तथा समाज में अपना ओहदा स्थापित करने के परिपेक्ष्य में किया जाता था। जिनमे आकृति की विशिष्ट शैली, कारीगरों की निपुणता, तथा लकड़ी अथवा पत्थर पर की जाने वाली नक्काशी प्रमुख थी। चूँकि यह कला अपने आप में बेहद विशिष्ट है, परन्तु वर्तमान में इस कला में निपुण कारीगरों के अभाव तथा बेहद खर्चीली होने के कारण यह वास्तुकला विलुप्ति की कगार पर है। इस कला के साक्ष्य हमें प्राचीन इमारतों, किलों, भवनों के प्रवेश द्वार पर देखने को मिल जाती है, परन्तु नयी इमारतों के निर्माण में इस तरह की बेजोड़ कलाकारी का पूर्णतया अभाव दिखता है। भारत के अनेक पर्यटन स्थल इंडो-सारसेनिक शैली वास्तुकला के कारण विश्व की ऐतिहासिक धरोहरों में शामिल हैं। और भारत में कई स्थानों पर इस वास्तुकला से निर्मित इमारतें आज भी बेहद शान के साथ ज्यों की त्यों कड़ी हैं। जिसकी बारीकी से की गयी नक्काशियां मन को विस्मृत कर देती हैं और हृदय को अगाध गौरव से भर देती हैं।

संदर्भ:
● https://bit.ly/2RLxk2r
● https://bit.ly/3egv0bh
● https://bit.ly/3tAquLi
● https://bit.ly/3x53Uwa
● https://bit.ly/3uZyRjB

चित्र संदर्भ:
मुख्य चित्र नवाब गेट को दर्शाता है। (प्रारंग)
दूसरा चित्र सिविल लाइंस के पुलिस स्टेशन को दर्शाता है। (प्रारंग)
तीसरा चित्र नवाब गेट को दर्शाता है। (प्रारंग)


RECENT POST

  • स्वर्ण अनुपात – हमारे जीवन से संबंधित एक गणितीय अनुपात
    वास्तुकला 1 वाह्य भवन सिद्धान्त 2 व्यक्ति की पहचान

     12-05-2021 09:21 AM


  • 1,000% तक की अधिक कीमतों में बेचा जा रहा ऑक्सीजन सिलिंडर, जाने क्या हैं भारत में मूल्य निर्धारण के कुछ प्रमुख कानून?
    विचार 2 दर्शनशास्त्र, गणित व दवासंचार एवं संचार यन्त्र

     10-05-2021 09:48 PM


  • बहुमुखी गुणों का धनी महुआ का वृक्ष
    जंगलपेड़, झाड़ियाँ, बेल व लतायें बागवानी के पौधे (बागान)साग-सब्जियाँ

     10-05-2021 09:02 AM


  • गहरी भावनाओं को जाग्रत करती है, संवाद रहित शॉर्ट फिल्म “अम्ब्रेला”
    विचार 2 दर्शनशास्त्र, गणित व दवा

     09-05-2021 11:57 AM


  • कोरोना महामारी का सामना करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है, इंटरनेशनल रेड क्रॉस और रेड क्रिसेंट आंदोलन
    विचार 2 दर्शनशास्त्र, गणित व दवावास्तुकला 2 कार्यालय व कार्यप्रणाली

     08-05-2021 09:03 AM


  • रबीन्द्रनाथ टैगोर ने किस पारंपरिक शिक्षा प्रणाली को बदलकर रख दिया और क्यों तेजी से बढ़ रहा है गृहस्थ शिक्षा (Homeschooling) का प्रचलन।
    द्रिश्य 2- अभिनय कला विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)विचार 2 दर्शनशास्त्र, गणित व दवा

     07-05-2021 11:30 AM


  • प्राचीन नाट्यशास्त्र के दो प्रमुख अंग: रस तथा भाव
    ध्वनि 1- स्पन्दन से ध्वनि

     06-05-2021 09:28 AM


  • कोविड-19 महामारी के चलते ताजी मछली के अलावा डिब्बाबंद खाद्य मछलियों की मांग में आई तेजी
    स्वाद- खाद्य का इतिहासपर्वत, चोटी व पठारनदियाँ

     05-05-2021 09:10 AM


  • एक ऑनलाइन गेम में कोरोना महामारी साल 2005 में ही आ चुकी है: मिलिए वैज्ञानिकों की नयी दोस्त गणित से।
    विचार 2 दर्शनशास्त्र, गणित व दवाहथियार व खिलौने

     04-05-2021 09:42 AM


  • विलुप्ति के कगार पर खड़ी शहरों की जीवनदायीनी झीलें
    पर्वत, चोटी व पठारनदियाँजलवायु व ऋतु

     03-05-2021 07:48 AM






  • © - 2017 All content on this website, such as text, graphics, logos, button icons, software, images and its selection, arrangement, presentation & overall design, is the property of Indoeuropeans India Pvt. Ltd. and protected by international copyright laws.

    login_user_id