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सूअर पालन भी बन सकता है लाखों का व्यवसाय

रामपुर

 21-01-2021 01:28 AM
स्तनधारी

पशुधन आम तौर पर जीविका अथवा लाभ के लिए पाले जाते हैं। पशुओं को पालना (पशु-पालन- Herding) आधुनिक कृषि का एक महत्वपूर्ण भाग है और व्यावसायिक तौर पर सूअर पालन (Pig Farming) का व्यवसाय काफी कम समय में अधिक लाभ देने वाला व्यवसाय है। परन्तु पहले के समय में सुअर पालन की समाज में एक खराब छवि बनी हुई थी, ऐसा इसलिए क्योंकि इस व्यवसाय को केवल सामाजिक रूप से पिछड़े वर्ग के लोगों द्वारा किया जाता था। लेकिन वर्तमान में परिदृश्य काफी बदल चुका है और अब भारत में व्यावसायिक सुअर पालन पिछड़े वर्ग के लोगों तक सीमित नहीं रह गया है। सुअर पालन न केवल एक लाभदायक व्यवसाय है बल्कि एक बहुत ही लोकप्रिय और आकर्षक व्यवसाय है। अब लोग सुअर पालन को एक बहुत ही फायदेमंद व्यवसाय के रूप में देखते हैं। हाल के वर्षों में सूअर पालन में अनेक नवयुवकों ने रूचि दिखाई है तथा ग्रामीण क्षेत्रों में लाभ की प्रत्याशा में जगह-जगह पर सूअर फार्म (Farm) भी खुल रहे हैं। रामपुर में कई परिवारों के पास सुअर पालन के बड़े फार्म मौजूद हैं और वे सफलतापूर्वक पीढ़ियों से अपना व्यवसाय चला रहे हैं।
इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है रामपुर के बिलासपुर में रहने वाले 36 वर्षीय किसान, श्री अमर सिंह, जिन्होंने सामाजिक अपेक्षाओं के विरुद्ध सूअर पालन का काम शुरू किया। अमर सिंह पिछले कई वर्षों से सूअर पालन करके लाखों की कमाई कर रहे चुके हैं, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में काफी सुधार हुआ। सूकर पालन कम कीमत पर और कम समय में अधिक आय देने वाला व्यवसाय है। अमर बताते हैं, “जब उन्होंने इस फार्म को शुरू किया था तो उनके पास 6 गर्भवती सूअर और 6 सूअर के बच्चें थे। आज उनके पास 300 सूअरों का फार्म है। जिससे वे लगभग 1500 अमेरिकी डॉलर (US) कमाते है। इससे एक फायदा यह भी है कि एक वयस्क मादा एक वर्ष में दो बार बच्चे पैदा करती है और एक बार में 6-12 बच्चों को जन्म देती है।“ परंतु इसके लिये अमर ने कड़ी महेनत भी की है, वे हमेशा अनुसंधान संस्थानों के विशेषज्ञों के साथ परामर्श करते है और उन्होंने बाजार के सर्वेक्षण से लेकर सूअर पालन की सारी जानकारी प्राप्त की है। इसके अलावा, उन्होंने आईसीएआर- भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (ICAR- Indian Veterinary Research Institute), इज़्ज़तनगर (Izatnagar) में सुअर पालन पर एक प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग लिया। वहां उन्होंने अच्छी सुअर पालन तकनीकों, उनका भोजन, प्रजनन, स्वच्छता, रोग प्रबंधन और टीकाकरण आदि के बारे में ज्ञान अर्जित किया। उनकी इस सफलता के लिये उन्हें भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR-Indian Council of Agricultural Research) सहित कई संगठनों ने एक दर्जन पुरस्कारों से सम्मानित किया है।
जैसा की हम देख सकते हैं कि सुअर पालन एक प्रकार से काफी लाभदायक व्यवसाय है और यदि आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों की मौजूदा बाधाओं को हटा दिया जाए तो सुअर पालन उनकी आर्थिक स्थिति को सुधारने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। बाजार में सुअर के मांस के अलावा, अन्य उत्पाद जैसे सुअर की चर्बी, खाल, बाल और हड्डियों का उपयोग कुछ विशिष्ट चीजें जैसे कि कपड़े (clothing), प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों के लिए सामग्री (ingredients for processed foods), चिकित्सा (medical), और सौंदर्य प्रसाधन (cosmetics) आदि में उपयोग किया जाता है। सूअरों को उर्वरक नस्लों कहा जा सकता है क्योंकि वे एक बार में 10-14 बच्चों को जन्म देते हैं। मादा सूअर आठ या नौ महीने की उम्र में जन्म देने के लिए तैयार होती हैं और अगर उन्हें ठीक से प्रबंधित किया जाता है तो वे साल में दो बार गर्भधारण कर सकती हैं। उनकी परवरिश की लागत अपेक्षाकृत कम है क्योंकि वे विभिन्न प्रकार के खाद्य पदार्थों खा सकते हैं, जैसे कि क्षतिग्रस्त अनाज, अप्रयुक्त सब्जियां और फल, रसोई अपशिष्ट और विभिन्न प्रकार के चारा और गन्ना आदि। इसके अलावा, वे 7–10 महीनों में 60-90 किलोग्राम तक हो सकते हैं। इसलिए, व्यावसायिक स्तर पर सुअर में लगाई गयी लागत की वापसी जल्द ही शुरू हो जाती है।
आज, सुअर पालन व्यवसाय कई देशों में लोकप्रिय है। यदि आप इस व्यवसाय को शुरू करना चाहते है तो सुनिश्चित कर ले कि आपके पास निम्न सभी आवश्यक सुविधाएं हैं:
• फार्म भूमि का चयन: सबसे पहले, आपको इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए एक बहुत अच्छे स्थान का चयन करना होगा। सूअरों के बेहतर पालन के लिए एक शांत और प्रदूषण मुक्त जगह का चयन करना अच्छा रहेगा जहां पानी की उपलब्धता और अच्छी परिवहन प्रणाली की सुविधा हो।
• सही नस्ल का चयन: सूअर पालन के सफल व्यवसाय के लिए सही नस्ल का चयन बहुत महत्वपूर्ण है। इसलिए, बुद्धिमानी से नस्ल चुनें। इसके लिये आप अपने क्षेत्र में मौजूदा विशेषज्ञों के साथ परामर्श करने का प्रयास करें, और अपने व्यवसाय के लिए सही नस्ल का चयन करने के लिए मदद मांगें। कुछ सामान्य और लोकप्रिय सुअर की नस्लें यॉर्कशायर (Yorkshire), लैंड्रेस (Landrace), ड्यूरोक (Duroc), हैम्पशायर (Hampshire), स्पॉटेड (Spotted), पोलैंड चीन (Poland China), घुँघरू (Ghungroo), नाइट हाउस (Knight houses), चेस्टर व्हाइट (Chester White) और बर्कशायर (Berkshire) हैं। इन सब में बड़े सफेद यॉर्कशायर मांस उत्पादन के लिए शीर्ष नस्ल है। एक वयस्क सुअर का वजन 200 से 400 किलो के आसपास होता है।
• सूअर के रहने का आवास: सूअर पालन के सफल व्यवसाय के लिए सभी आवश्यक सुविधाओं की उपलब्धता के साथ एक अच्छा आवास बनाना बहुत महत्वपूर्ण है। एक अच्छा आवास न केवल सूअरों को स्वस्थ रखता है, बल्कि उन्हें मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों से बचाने में भी मदद करता है।
• सूअरों का खाना: सूअरों को अच्छी गुणवत्ता और पौष्टिक भोजन खिलाना व्यावसायिक सुअर उत्पादन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। अच्छा भोजन न केवल सूअरों को स्वस्थ रखने में मदद करता है, बल्कि उन्हें बेहतर बढ़ने और तेजी से वजन बढ़ाने में भी मदद करता है।
• देखभाल: सूअर पालन के दौरान पशुओं की देखभाल काफी अहम होती है। सूअरों की देखभाल के दौरान सफाई नियमित रूप से करते रहना चाहिए और सूअर के अच्छे विकास के लिए उन्हें आहार के साथ-साथ औषधियों की जरूरत भी होती है, जो पशुओं के विकास के लिए उपयोगी होती हैं। सूअर पालन के दौरान कई तरह के रोग देखने को मिल जाते हैं, जिनकी उचित समय पर पहचान कर उनका उपचार कर देना चाहिए, या चिकित्सक की सलाह लेनी चाहिए।
आजकल भारत में कई सुअर पालन प्रशिक्षण केंद्र (pig farming training centers) और सुअर प्रजनन केंद्र (Pig breeding centers) स्थापित हैं। व्यावसायिक सूअर पालन व्यवसाय शुरू करने से पहले, आपको सूअरों और उनके प्रबंधन की विभिन्न नस्लों के तथ्यों को जानना आवश्यक है। व्यावसायिक सुअर पालन व्यवसाय के बारे में अधिक जानने के लिए आप किसी भी सुअर प्रशिक्षण पाठ्यक्रम (pig training courses) में भाग ले सकते हैं। सूअर पालन का व्यवसाय काफी ज्यादा कमाई करने वाला व्यापार है, यदि प्रबंधन ठीक हो तो। क्योंकि एक उन्नत नस्ल की मादा सुअर साल में 10-14 बच्चों को भी जन्म देती है तो वो बच्चे एक साल बाद बिकने के लिए तैयार हो जाते हैं। इस प्रकार सूअरों की संख्या के बढ़ने पर कमाई भी बढ़ती जाती हैं।
सुअर पालन के लिए बैंक से ऋण भी लिया जा सकता है। सुअर पालन के लिए बैंक ऋण में भूमि, पशुधन बाजार, पानी की उपलब्धता, पशु चिकित्सा सहायता, प्रजनन सुविधाएं, विपणन पहलू (marketing aspects), प्रशिक्षण सुविधाएं (training facilities), किसान के अनुभव और राज्य सरकार के क्षेत्रीय सुअर प्रजनन केंद्रों से उपलब्ध सहायता के प्रकार की जानकारी होती है। इसमें खरीदे जाने वाले जानवरों की संख्या और प्रकार, उनकी नस्ल, उत्पादन प्रदर्शन, लागत और अन्य प्रासंगिक निवेश और उत्पादन लागत की जानकारी भी शामिल है। इसके आधार पर, परियोजना की कुल लागत, लाभार्थी द्वारा प्रदान की जाने वाली अतिरिक्त राशि, बैंक ऋण की आवश्यकता, वार्षिक व्यय, आय, लाभ और हानि विवरण, पुनर्भुगतान अवधि, आदि पर की जानकारी प्राप्त की जाती है और परियोजना लागत में शामिल किया जा सकता है। वहीं सुअर पालन विकास योजनाओं के लिए बैंकों / नाबार्ड (NABARD) से प्राप्त वित्तीय सहायता के लिये विस्तृत परियोजना विवरण तैयार करना होगा। भूमि विकास, आवस का निर्माण और अन्य नागरिक संरचनाएं, प्रजनन भंडार की खरीद तथा उपकरण को आम तौर पर बैंक ऋण के तहत माना जाता है। इसके अलावा निवेश की अन्य वस्तुओं पर जरूरत के आधार पर विचार किया जाता है।

संदर्भ:
https://www.roysfarm.com/pig-farming/
https://www.agrifarming.in/commercial-pig-farming-business-india
https://blog.gfar.net/2016/06/29/the-pigs-the-rich-the-famous/
https://www.agrifarming.in/pig-farming-loan-subsidy-schemes-how-to-apply
चित्र संदर्भ:
मुख्य तस्वीर सूअरों को दिखाती है। (unsplash)
दूसरी तस्वीर में छोटे सूअर दिखाई देते हैं। (unsplash)
तीसरी तस्वीर में सुअर का मांस दिखाया गया है। (विकिमीडिया)
अंतिम तस्वीर में सुअर का फार्म हाउस दिखाया गया है। (विकिमीडिया)


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