लौकी से बनाए जा सकते हैं वाद्ययंत्र और पानी की बोतल

रामपुर

 13-06-2020 10:30 AM
साग-सब्जियाँ

गर्मियों का मौसम अपने साथ कई विशेष फलों और सब्जियों को लेकर आता है। ऐसे कई पौष्टिक फल और सब्जियां हैं, जिन्हें उगाने के लिए गर्मियों का मौसम उपयुक्त है। लौकी भी इन्हीं में से एक है जिसमें पानी की मात्रा उच्च होती है, जिससे हमारे शरीर को ठंडक मिलती है। बोतल लौकी विश्व के उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में आमतौर पर उगाया जाने वाला पौधा है। ऐसा माना जाता है कि यह दक्षिणी अफ्रीका में जंगली रूप में उत्पन्न हुआ था। साथ ही भारत में बोतल लौकी के आगमन से पहले अफ्रीका, एशिया, यूरोप और अमेरिका में हजारों वर्षों से लौकी की खेती की जाती थी।

लौकी के फलों में कई प्रकार के आकार होते हैं: वे विशाल और गोल, छोटे और बोतल के आकार के या पतले और धूर्त हो सकते हैं और वे एक मीटर से अधिक लंबे भी हो सकते हैं। गोल किस्मों को आमतौर पर कलाबाश (Calabash) लौकी कहा जाता है। बोतल लौकी विश्व के पहले खेती वाले पौधों में से एक थी जो मुख्य रूप से भोजन के लिए नहीं, बल्कि बर्तन के रूप में उपयोग के लिए उगाई जाती थी। क्योंकि बोतल के लिए उपयोग की जाने वाली लौकी को कलाबाश कहा जाता है, इस वजह से कई लोग उन्हें कभी कभी असंबंधित कलाबाश वृक्ष (क्रिसेंटिया कुजेट (Crescentia cujete)) के ठोस, खोखले फलों से भ्रमित कर लेते हैं, जिनके फल का उपयोग बर्तन, पात्र, संगीत वाद्ययंत्र बनाने के लिए भी किया जाता है।

यूरोप में वालहैफ्रीद स्ट्रैबो (Walahfrid Strabo) (808–849), रैहेनौ द्वीप, जर्मनी (Reichenau Island, Germany) के मठाधीश और कवि और कैरोलिंगियन राजाओं के सलाहकार, ने अपने होर्टुलस (Hortulus) में एक आदर्श बगीचे के 23 पौधों में से एक के रूप में लौकी की चर्चा की। लौकी का रहस्य यह है कि इस अफ्रीकी या यूरेशियन प्रजाति को अमेरिका में 8,000 साल पहले उगाया जा रहा था, हालांकि लौकी अमेरिका कैसे पहुंची इस को समझना थोड़ा कठिन है। आमतौर पर ऐसा माना जाता है कि बोतल लौकी को अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका से अटलांटिक महासागर में लाया गया था, लेकिन 2005 में शोधकर्ताओं के एक समूह ने यह बताया कि इसे खाद्य फसलों और पशुओं की तुलना में सबसे पहले घरेलू बनाया गया था। हालांकि बड़े या अच्छे आकार वाली लौकी का उपयोग वाद्ययंत्र बनाने के लिए किया जाता है। वहीं कई किसानों या यात्रियों द्वारा पानी संरक्षित करने के लिए भी लौकी के खोल का उपयोग किया जाता था। आप में से अधिकांश लोगों के मन में ये सवाल उठ रहा होगा कि लौकी से कैसे वाद्ययंत्र और बोतल बनाया जाता है।

इसके लिए सबसे पहले, एक परिपक्व लौकी का चयन करें और इसे धूप में सूखने के लिए रख दें। एक बार जब खोल कठोर हो जाता है, तो लौकी में एक छोटा सा छेद करें और उसके अंदर का गूदा और बीज को बाहर निकाल दें। इसके बाद इसे पानी से भरें और इसे तीन से चार दिनों के लिए सूखने के लिए रख दें। एक लंबी छड़ी का उपयोग करके उसके अंदर से अतिरिक्त गूदे को हटा दें, और खोल उपयोग के लिए तैयार है। लौकी के खोल का सबसे महत्वपूर्ण उपयोग, विशेष रूप से लम्बी समय के लिए बीज को संग्रह करने के लिए होता है। वहीं पारंपरिक संगीत वाद्ययंत्र बनाने के लिए उपयोग किए जाने वाली ये बोतल लौकी हावड़ा में किसानों द्वारा नहीं उगाई जा रही है। तानपुरा, सितार और अन्य तंयुक्त उपकरणों को बनाने में गोल लौकी का इस्तेमाल किया जाता है। यह किस्म 10 से 15 किलोग्राम तक बढ़ सकती है, लेकिन कुछ कंपनियां, सब्जी के बीज का विपणन करती हैं, तो कई उच्च नस्ल की किस्मों को वितरित करती हैं जिनकी उपज अधिक होती है और आकार में बड़ी होती हैं। इसलिए किसानों द्वारा इन उच्च नस्ल की किस्मों को उगाना पसंद किया जाता है।

कलकत्ता के लालबाजार, भवानीपुर, पाइकपारा और अन्य स्थानों के शोरूम और कार्यशालाओं के साथ संगीत वाद्ययंत्र के व्यापारी हावड़ा और हुगली के गांवों से गोल लौकी की आपूर्ति प्राप्त करते थे। हालांकि, शास्त्रीय संगीत में रुचि कम होने से इस तरह के पारंपरिक वाद्य यंत्रों की कम मांग, कीटों के बड़े हमले, खेती की बढ़ती लागत और कभी-कभी प्रतिकूल जलवायु परिस्थितियों ने किसानों को पिछली कई ऋतुओं से इन बोतल जैसे आकार वाली लौकियों को उगाने से रोक दिया है। वहीं कही किसानों का मानना है कि यदि राज्य सरकार कीटों से लड़ने में किसानों की मदद करें तो गोल लौकी की खरती उनके लिए आज भी लाभदायक हो सकती है। एक बीघा जमीन में कम से कम 500 बोतल लौकी निकाली जा सकती है। कभी-कभी, यह संख्या 1,000 भी छू लेती है।

वहीं आप खुद की बोतल लौकी भी उगा सकते हैं और उन्हें घर में पानी की बोतल और वाद्ययंत्र के लिए प्रयोग किया जा सकता है। पानी की बोतल के लिए डबल-हेडेड (double-headed) लौकी ज्यादा उपयुक्त होती है, क्योंकि आप उसके मध्यम हिस्से में रस्सी बांध कर कहीं भी लटका सकते हैं। वहीं एक व्यक्तिगत बोतल लौकी को आप दो छोटे मिट्टी के पात्र में 5 बीज लगाकर उगाए। आप बीज को अंकुर आने तक पानी में भी भिगोकर रख सकते हैं। एक बार जब आपकी लौकी फसल के लिए तैयार हो जाती है, तो आप इसे तैयार करके खा भी सकते हैं या इसे सुखा कर एक कटोरी, खाने या पानी ढोने वाले पात्र और एक पक्षी-घर बना सकते हैं।

चित्र सन्दर्भ:
1. मुख्य चित्र में बेल पर लगी हुई बोतल लौकी को दिखाया गया है। (Flickr)
2. दूसरे चित्र में लौकी की प्रजाति को दिखाया गया है। (Freepik)
3. तीसरे चित्र में बेल पर लगे हुए लौकी दिखाई गयी है। (Pickro)
4. चौथे चित्र में लौकी का फल दिखाया गया है। (picsql)
5. पांचवे चित्र में बेल पर लगे लौकी की खेती दिखाई गयी है। (youtube)
6. छठे चित्र में बर्तन के रूप में तैयार करने को लौकी दिखाए गए है। (Flickr)

संदर्भ :-
1. https://en.wikipedia.org/wiki/Calabash
2. https://www.telegraphindia.com/states/west-bengal/music-making-shells/cid/208492
3. https://www.downtoearth.org.in/news/food/the-humble-gourd-is-falling-out-of-favour-63492
4. https://petroform.wordpress.com/2015/04/30/grow-bottle-gourds-craft/



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