काफी लाभदायक है सुअर पालन का व्यवसाय

रामपुर

 10-06-2020 10:50 AM
स्तनधारी

पहले के समय में सुअर पालन की समाज में एक खराब छवि बनी हुई थी, ऐसा इसलिए क्योंकि इस व्यवसाय को केवल सामाजिक रूप से पिछड़े वर्ग के भारतीय लोगों द्वारा किया जाता था। लेकिन वर्तमान में परिदृश्य काफी बदल गया है और भारत में व्यावसायिक सुअर पालन पिछड़े वर्ग के लोगों तक सीमित नहीं रहा है। सुअर पालन न केवल एक लाभदायक व्यवसाय है बल्कि एक बहुत ही लोकप्रिय और आकर्षक व्यवसाय है। सुअर का उपयोग व्यापक रूप से सुअर के मांस के लिए किया जाता है, लेकिन इनका पालन करना इतना आसान नहीं है। एक लाभदायक सुअर फार्म (Farm) बनाने के लिए बहुत समय और पैसा लगता है। साथ ही एक अच्छा सुअर फार्म बनाने के लिए कुछ तरीकों का पालन करने की आवश्यकता होती है, जो नीचे वर्णित हैं।

इसके लिए सबसे पहले एक घास और मिट्टी सहित एक बहुत बड़ा क्षेत्र होना आवश्यक है। फिर उसमें एक विशाल बाड़ की भी ज़रूरत होती है ताकि सुअर आराम से दूर तक घूम सकें और बाड़ की मदद से सूअरों के खोने और भागने का खतरा कम रहता है। बाड़ के लिए किसानों द्वारा बहुत मजबूत लकड़ी और मोटे कोने के खंभे का उपयोग करना चाहिए क्योंकि वयस्क सुअर बहुत मजबूत हो जाते हैं और वे बाड़ को नष्ट करने की कोशिश कर सकते हैं। वहीं खलिहान में सुअर पालन काफी आसान होता है और बस किसान को ये बात ध्यान में रखनी चाहिए कि सुअर पालन के लिए खलिहान यदि बजरी का बना हो तो काफी अच्छा होता है।

बाजार में सुअर के मांस के अलावा, अन्य उत्पाद जैसे सुअर की चर्बी, खाल, बाल और हड्डियों का उपयोग कुछ विशिष्ट चीजें बनाने में उपयोग किया जाता है। वहीं सुअर पालन के कुछ फायदे भी हैं:
• सुअर में अधिकतम चारा विपर्यय की क्षमता होती है, यानी वे मुर्गे को छोड़कर मांस उत्पादक जानवरों के किसी भी अन्य वर्ग की तुलना में चारे के दिए गए वजन से सजीव वजन बढ़ाते हैं।
• सुअर अनाज, चारा, क्षतिग्रस्त चारे और कचरे का सेवन करके भी एक मूल्यवान पौष्टिक मांस का उत्पादन करते हैं। हालांकि खराब अनाज, कचरे और अन्य असंतुलित राशन का सेवन करने से पाचन क्षमता कम हो जाती है।
• सुअर पालन व्यवसाय को शुरू करने के लिए इमारतों और उपकरणों में एक छोटे से निवेश की आवश्यकता होती है।

व्यवसायिक सुअर पालन व्यवसाय में सफल होने के लिए, एक व्यक्ति के पास बजट के आधार पर एक उचित सुअर पालन व्यवसाय योजना होनी चाहिए। वर्तमान समय में भारत में कई सुअर पालन प्रशिक्षण केंद्र और सुअर प्रजनन केंद्र मौजूद हैं। साथ ही सुअर पालन व्यवसाय में प्रवेश करने से पहले उनकी विभिन्न नस्लों और उनके प्रबंधन के तथ्यों को जानना सबसे महत्वपूर्ण है। विश्व भर में सुअर की कई नस्लें उपलब्ध हैं। आप शुरुआत करने के लिए पहले स्थानीय नस्लों को चुन सकते हैं, लेकिन आकार में छोटे होने की वजह से वे वांछित उत्पादन नहीं दे पाते हैं। कुछ सामान्य और लोकप्रिय सुअर की नस्लें हैं: यॉर्कशायर, स्पॉटेड, पोलैंड चीन, लैंड्रेस, हैम्पशायर, ड्यूक, चेस्टर व्हाइट, घुँघरू, नाइट हाउस और बर्कशायर सुअर। इन सब में बड़े सफेद बड़े सफेद यॉर्कशायर मांस उत्पादन के लिए शीर्ष नस्ल है। एक वयस्क सुअर का वजन 200 से 400 किलो के आसपास होता है।

रामपुर में कई परिवारों के पास बड़े सुअर पालन के फार्म मौजूद हैं और वे सफलतापूर्वक पीढ़ियों से अपना व्यवसाय चला रहे हैं। ऐसे ही रामपुर के बिलासपुर में रहने वाले अमर द्वारा काफी सफलतापूर्वक सुअर का व्यवसाय किया गया। लगभग 300 सूअरों के घरों वाले इनके फार्म में सफाई का स्तर त्रुटिहीन होता है। सफाई सुअर के स्वस्थ्य और उनके बच्चों के लिए एक उच्च भूमिका निभाती है, इससे सूअर के बच्चों की मृत्यु दर बहुत कम होती है। साथ ही वे स्वयं ही सुअर का भोजन (मकई, सोयाबीन, चावल की भूसी, गेहूं की भूसी, नमक और खनिज) तैयार करते हैं, जो सुअर के भोजन की लागत को कम करता है और अधिक लाभ प्रदान करता है। दूसरी ओर वे बाजार में वयस्क या परिपक्व सूअरों को बेचने के बजाय, 2 महीने के सुअर को लगभग 3000 रुपये में बेचते हैं। औसतन, वे अपने सूअर फार्म से लगभग 100,000 रुपये महीना कमा लेते हैं जो कि भारतीय मानकों द्वारा एक अच्छी कमाई है।

जैसा की हम देख सकते हैं कि सुअर पालन एक प्रकार से काफी लाभदायक व्यवसाय है और यदि आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों की मौजूदा बाधाओं को हटा दिया जाए तो सुअर पालन उनकी आर्थिक स्थिति को सुधारने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। सुअर पालन के लिए बैंक से ऋण भी लिया जा सकता है। सुअर पालन के लिए बैंक ऋण में भूमि, पशुधन बाजार, पानी की उपलब्धता, पशु चिकित्सा सहायता, प्रजनन सुविधाएं, विपणन पहलू, प्रशिक्षण सुविधाएं, किसान के अनुभव और राज्य सरकार के क्षेत्रीय सुअर प्रजनन केंद्रों से उपलब्ध सहायता के प्रकार की जानकारी होती है। इसमें खरीदे जाने वाले जानवरों की संख्या और प्रकार, उनकी नस्ल, उत्पादन प्रदर्शन, लागत और अन्य प्रासंगिक निवेश और उत्पादन लागत की जानकारी भी शामिल है।

इसके आधार पर, परियोजना की कुल लागत, लाभार्थी द्वारा प्रदान की जाने वाली अतिरिक्त राशि, बैंक ऋण की आवश्यकता, वार्षिक व्यय, आय, लाभ और हानि विवरण, पुनर्भुगतान अवधि, आदि पर की जानकारी प्राप्त की जाती है और परियोजना लागत में शामिल किया जा सकता है। वहीं सुअर पालन विकास योजनाओं के लिए बैंकों / नाबार्ड (NABARD) से प्राप्त वित्तीय सहायता एक विस्तृत परियोजना विवरण तैयार करती है। भूमि विकास, छप्पर का निर्माण और अन्य नागरिक संरचनाएं, प्रजनन भंडार की खरीद, उपकरण, आय सृजन के बिंदु तक चारे की लागत को आम तौर पर बैंक ऋण के तहत माना जाता है। इसके अलावा निवेश की अन्य वस्तुओं पर जरूरत के आधार पर विचार किया जाता है, बशर्ते कि संतोषजनक जानकारी ऐसी वस्तुओं की आवश्यकता को उचित ठहराए। सूअरों को प्रभावी ढंग से पालने के लिए किसानों को सूअरों के लिए सही आश्रय बनाना चाहिए। उन्हें उचित भोजन और उचित चिकित्सा सुरक्षा देनी चाहिए। सूअरों का ठीक से ख्याल रखे बिना, अच्छी कमाई होना संभव नहीं है। इसलिए, पैसा कमाने के लिए किसानों को हमेशा अपने सूअरों की देख रेख करनी चाहिए। वैसे तो सुअर पालन एक आसान काम नहीं है लेकिन यह बहुत ही आकर्षक व्यवसाय है। बड़े खेत बनाने के लिए किसानों को बहुत काम करना पड़ता है और काफी पैसा लगाना पड़ता है।

चित्र सन्दर्भ:
1. मुख्य चित्र में मादा सूअर और उसके बच्चे दिखाए गए हैं जो एक फार्म में हैं।
2. दूसरे चित्र में अपने पालतू सूअर को खाना खिलाता एक व्यक्ति दिख रहा है।
3. तीसरे चित्र में खाने की क्यारी में खाना मिक्स करता हुआ एक व्यक्ति दिखाई दे रहा है।
4. अंतिम चित्र में आरामरत एक सूअर दिखाया गया है।

संदर्भ :-
1. https://www.roysfarm.com/pig-farming/
2. https://www.agrifarming.in/commercial-pig-farming-business-india
3. https://blog.gfar.net/2016/06/29/the-pigs-the-rich-the-famous/
4. https://www.agrifarming.in/pig-farming-loan-subsidy-schemes-how-to-apply



RECENT POST

  • आज का पेनुमब्रल चंद्र ग्रहण
    जलवायु व ऋतु

     04-07-2020 07:21 PM


  • भारतीय उपमहाद्वीप के लुभावने सदाबहार वन
    जंगल

     03-07-2020 03:10 PM


  • विशालता और बुद्धिमत्ता का प्रतीक भगवान विष्णु का वाहन गरुड़ है
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     03-07-2020 01:53 AM


  • मुरादाबाद के पीतल की शिल्प का भविष्य
    द्रिश्य 3 कला व सौन्दर्य

     02-07-2020 11:48 AM


  • रामपुर में इत्र की महक
    गंध- ख़ुशबू व इत्र

     01-07-2020 01:13 PM


  • पृथ्वी के सबसे बड़े खतरों में से एक है 'क्षुद्रग्रह' का पृथ्वी से टकराना
    खनिज

     30-06-2020 06:30 PM


  • क्या है, भारतीय इतिहास में मुद्रा शास्त्र की भूमिका
    म्रिदभाण्ड से काँच व आभूषण

     29-06-2020 12:30 PM


  • हिंदी फिल्म अकेले हम और हॉलीवुड की फिल्म द गॉडफ़ादर के मध्य का सम्बन्ध
    ध्वनि 1- स्पन्दन से ध्वनि

     28-06-2020 12:30 PM


  • रामपुर का लजीज यखनी पुलाव
    स्वाद- खाद्य का इतिहास

     27-06-2020 10:10 AM


  • मनुष्य के अस्तित्व में अकेलेपन की भूमिका
    व्यवहारिक

     26-06-2020 09:45 AM






  • © - 2017 All content on this website, such as text, graphics, logos, button icons, software, images and its selection, arrangement, presentation & overall design, is the property of Indoeuropeans India Pvt. Ltd. and protected by international copyright laws.