क्यों किया जाता है जीवों और मनुष्यों द्वारा आत्महत्या का कृत्य

रामपुर

 02-03-2020 12:00 PM
व्यवहारिक

मानसिक विकास ने मानव समाज को विकास की एक अनूठी गति प्रदान किया। मानसिक स्थिति के अनुरूप ही एक व्यक्ति अपने नियत कार्य को करने की ओर अग्रसर होता है। कई ऐसी बिन्दुएँ हैं जिनके कारण ही मनुष्य कई कार्य करने की ओर आकर्षित या लालायित होते हैं। आत्महत्या एक प्रकार से देखा जाए तो मानसिक कमजोरी या उथल पुथल को प्रदर्शित करती है। वर्तमान समय में देखा जाए तो यह एक प्रकार की विकट समस्या है और यह समस्या आज की नयी समस्या नहीं है बल्कि यह एक अत्यंत ही प्राचीन काल से चली आ रही समस्या है। यह भी सोचना काफी हद तक गलत है कि मात्र मनुष्य ही आत्महत्या करते हैं, कई ऐसे जानवर भी हैं जो कि आत्महत्या की ओर कदम बढाते हैं। इस लेख में हम आत्महत्या से जुडी सभी अनसुलझी पहेलियों पर ध्यान देंगे। यदि हम परंपरागत रूप से देखें तो आत्महत्या मात्र मनुष्य ही करते हैं ऐसी धारणा प्रत्येक व्यक्ति और काफी हद तक वैज्ञानिकों को भी थी।

हाल में ही हुए शोधों से जिन्हें मैनचेस्टर विश्वविद्यालय (The University of Manchester) के डॉ. डंकन विल्सन (Dr. Duncan Wilson) ने किया, से एक बात निकल कर आई जिससे यह पता चला कि 19वीं शताब्दी के दौरान कई ऐसी कहानियाँ मौजूद थीं जिनमे जीवों के आत्महत्या का ज़िक्र मिलता है। जिनमे कुत्ते, बिल्लियाँ, घोड़े आदि शामिल हैं। स्कॉटलैंड में एक प्रसिद्ध पुल भी मौजूद है जिसपर से कई दशकों से कुत्ते अपने आप को पुल के नीचे फेंकते हैं जिससे उनकी मौत हो जाती है। भारत के असम राज्य के दिमा हसो जिला में एक स्थान है ज़तिंगा जो कि एक पहाड़ी पर मौजूद है को पंछियों के कब्रगाह के रूप में देखा जाता है। यह एक ऐसा स्थान है जहाँ पर हजारों की संख्या में विदेशी पंछियाँ आकर, अपने आप को सड़कों या अन्य प्रकाश के श्रोतों पर मारकर या पटककर के आत्महत्या करते हैं। यह एक अत्यंत ही चिंतनीय विषय बन चुका है और इस विषय में हद तब हो गयी जब विदेशी पंछियों के साथ वहां के आम पंछी भी आत्महत्या की ओर अग्रसर होने लगें। इस विषय पर कई शोध हुए परन्तु कोई एक ठोस और वांछित तर्क नहीं मिल पाया। कई बार ऐसा होता है कि अकेले रहने, साथी खो जाने आदि के कारण बड़ी संख्या में पंछियों का व्यवहार बदल जाता है और इस कारण जीव अवसाद में पहुँच जाते हैं तथा खाना आदि का परित्याग कर देते हैं तथा अंततः वे मृत्यु की प्राप्ति कर लेते हैं।

मनुष्यों की बात करें तो यह एक गंभीर विषय है और इसका एक बड़ा ही वृहत आंकड़ा है। संयुक्त राज्य अमेरिका में करीब 12 मिनट में एक आत्महत्या हो जाती है और दुनिया भर में इसका आंकड़ा और भी बड़ा है। यह भी एक कथन है की दुनिया भर में युद्ध और ह्त्या आदि से ज्यादा व्यक्ति तो आत्महत्या से मर जाते हैं। आत्महत्या की बात करें तो मनुष्य में मानसिक स्राव आदि के कारण होता है। एक बड़ी आबादी इस लिए भी आत्महत्या की ओर कदम बढ़ाती है जिससे उसको लगता है कि मेरी मृत्यु के बाद परिवार के ऊपर संकट आदि नहीं आएगा परन्तु यह विचार एक मानसिक उथल-पुथल को प्रदर्शित करता है। आत्महत्या दिमागी उलझन के साथ-साथ स्वार्थ से भी जुड़ा हुआ होता है जो कि लोगों को इसके लिए बाध्य करता है। यह स्वार्थ इतना ज्यादा तगड़ा होता है कि लोग अन्य लोगों की परवाह किये बिना ही ऐसे कदम उठा लेते हैं जो कि आत्महत्या की ओर ले जाता है। दुनिया भर में कई ऐसी संस्थाएं भी हैं जो कि लोगों को आत्महत्या न करने के लिए प्रेरित करती हैं और वे मनुष्य की मानसिक स्थिति को सुधारने का कार्य करती है।

सन्दर्भ:-
1.
https://www.livescience.com/33805-animals-commit-suicide.html
2. https://www.atlasobscura.com/places/jatinga-bird-suicide
3. https://bit.ly/2TygLnX
4. https://bit.ly/2wfVdnX
5. http://www.assaminfo.com/tourist-places/29/jatinga.htm
6. https://indianhelpline.com/SUICIDE-HELPLINE/



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