16 अक्टूबर को मनाया जा रहा है विश्व खाद्य दिवस

रामपुर

 16-10-2019 12:42 PM
आधुनिक राज्य: 1947 से अब तक

16 अक्टूबर के इस दिन को आप ‘विश्व खाद्य दिवस’ के रूप में मना रहे हैं। यह दिवस भारत सहित लगभग पूरे विश्व भर में मनाया जाता है। वर्ष 1945 में इसी दिन संयुक्त राष्ट्र द्वारा खाद्य और कृषि संगठन की स्थापना की गयी थी और इसके सम्मान में 1979 से यह दिवस हर वर्ष मनाया जा रहा है। इस दिवस का मुख्य उद्देश्य लोगों को भुखमरी और गरीबी की समस्याओं के बारे में सचेत करना व इनसे सम्बंधित कारणों के प्रति जागरूक करना है। विश्व खाद्य दिवस शुरू करने के पीछे मुख्य कारण पूरे विश्व को (विशेष रूप से संकट के दिनों में) खाद्य सुरक्षा प्रदान करना व इसे बढ़ावा देना है। इस दिवस को अब खाद्य अभियंता दिवस के रूप में भी जाना जाता है।

विश्व खाद्य दिवस भारत में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस दिन लोगों द्वारा आनुवांशिक संशोधन के मामले पर नुक्कड़ नाटक और अभिनय किये जाते हैं। भारत में, विश्व खाद्य दिवस के माध्यम से कई संगठन स्वस्थ भोजन खाने और शहरी भारत में फास्ट फूड (Fast food) से बचने के महत्व पर प्रकाश डालते हैं। सयुंक्त राष्ट्र अमेरिका में यह एक प्रथा के रूप मे मनाया जाता है जिसे वर्ष 1981 में स्थापित किया गया था। यहां इस दिन विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं जिसका एक महत्वपूर्ण उदाहरण विश्व खाद्य दिवस संडे डिनर (Sunday Dinner) है जिसे ऑक्सफैम (Oxfam) अमेरिका द्वारा कई अन्य गैर-लाभकारी संगठनों के सहयोग से प्रायोजित किया जाता है। यूनाइटेड किंगडम में फेयरशेयर (FareShare) नामक संस्था इस दिन लोगों को भोजन की बचत और भोजन की बर्बादी को समाप्त करने के प्रति जागरुक करती है। जर्मनी में, खाद्य और कृषि मंत्रालय, संघीय उपभोक्ता संरक्षण मंत्रालय आदि प्रेस कॉन्फ्रेंस (Press conference) के माध्यम से लोगों को इस दिवस के उद्देश के प्रति जागरुक करते हैं। एशिया में मेंटर एमिएबल प्रोफेशनल सोसाइटी (Mentor Amiable Professional Society) गरीब और ज़रूरतमंद लोगों को खाद्य पदार्थ देकर इस दिवस को मनाती है। इसी प्रकार अन्य देशों में भी विभिन्न प्रकार से इस दिवस के महत्व पर प्रकाश डाला जाता है तथा इसके उद्देश्यों के प्रति जागरूक करने का प्रयास किया जाता है।

इस दिवस के मुख्य लक्ष्यों को निम्न प्रकार से समझा जा सकता हैं:
कृषि खाद्य उत्पादन पर ध्यान केंद्रित करवाना और इसके प्रति राष्ट्रीय, द्विपक्षीय, बहुपक्षीय और गैर-सरकारी प्रयासों को प्रोत्साहित करना।
विकासशील देशों के बीच आर्थिक और तकनीकी सहयोग को प्रोत्साहित करना।
दुनिया में भूख की समस्या के बारे में जनता में जागरूकता बढ़ाना।
विकासशील देशों के लिए प्रौद्योगिकियों के हस्तांतरण को बढ़ावा देना।
भूख, कुपोषण और गरीबी के खिलाफ संघर्ष में अंतर्राष्ट्रीय और राष्ट्रीय एकजुटता को मज़बूत करना और खाद्य और कृषि विकास में उपलब्धियों पर ध्यान आकर्षित करना।

यह दिवस मुख्य रूप से खाद्य सुरक्षा पर केंद्रित है। अर्थात यह विश्व भर की आबादी को पर्याप्त और पौष्टिक भोजन उपलब्ध करवाने से सम्बंधित है। खाद्य सुरक्षा को सुनिश्चित करने में खाद्य मूल्य स्थिरता भी बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। क्योंकि खाद्यान्नों की निरंतर बढ़ती कीमत या अस्थिरता ऐसे लोगों को संकट में डाल देती है जो खाद्य पदार्थों को खरीदने में असमर्थ हैं। इस कारण भुखमरी का संकट उत्पन्न होता है तथा लोगों के लिए खाद्य सुरक्षा को सुनिश्चित कर पाना असम्भव हो जाता है। बढ़ती जनसंख्या, ग्लोबल वार्मिंग (Global warming) आदि ऐसे कारक हैं जो खाद्य पदार्थों के मूल्यों में अस्थिरता उत्पन्न करते हैं। खाद्य मूल्य अस्थिरता विकासशील देशों में खाद्य सुरक्षा के लिए एक बड़े खतरे का प्रतिनिधित्व करती है। इसके प्रभाव से सबसे अधिक नुकसन गरीबों को झेलना पडता (पड़ता) है। विश्व बैंक के अनुसार, 2010-2011 में बढ़ती खाद्य लागत ने लगभग 7 करोड़ लोगों को अत्यधिक गरीबी में धकेल दिया था। इससे किसान भी प्रभावित होते हैं क्योंकि मूल्य बढ़ने से उन्हें हर समय अपनी फसल की कीमत का अनुमान होना चाहिए नहीं तो कम या ज़्यादा फसल बोने से उन्हें भरी नुकसान झेलना पड़ सकता है। जब बाज़ार स्थिर होते हैं, तो किसानों को पर्याप्त लाभ होता है किंतु बाज़ारों में बढ़ती अस्थिरता न केवल उनके जीवन को बर्बाद करती है, बल्कि कृषि में आवश्यक निवेश को भी हतोत्साहित करती है।

अस्थिर रहने वाले खाद्य मूल्य दुनिया के सबसे गरीब देशों और लोगों को संकट में डालने का कारण बनते हैं। इसके लिए खाद्य मूल्य को अस्थिर करने वाले कारणों को पहचानना तथा इनके नकारात्मक प्रभावों को कम करना आवश्यक है। इसलिए भारत में, यह दिन कृषि के महत्व को भी दर्शा रहा है तथा इस बात पर ज़ोर देता है कि भारतियों द्वारा उत्पादित और खपत किये गए खाद्य पदार्थ सुरक्षित और स्वस्थ हैं। किंतु वर्तमान में खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमत पुनः खाद्य मूल्य अस्थिरता को इंगित कर रही है जो खाद्य संकट को भी जन्म दे सकती है। मुद्रास्फीति को कम करने के लिए सरकर द्वारा विभिन्न प्रयास किए जा रहे हैं किंतु इसका दुष्प्रभाव किसानों पर पड़ रहा है जो खाद्य पदार्थों का उत्पादन करते हैं। इसके समाधान के लिए सरकार को यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता है कि मुद्रास्फीति स्थिर बनी रहे।

संदर्भ:
1.
https://www.indiacelebrating.com/events/world-food-day/
2. https://africabusinesscommunities.com/news/food_prices_from_crisis_to_stability.html
3. https://www.ecology.com/2011/10/16/food-prices-crisis-stability/
4. https://bit.ly/33jwN8c



RECENT POST

  • बादामी गुफाएं और उनका गहराई
    खदान

     20-09-2020 09:32 AM


  • क्या मनुष्य में जीन की भिन्नता रोगों की गंभीरता को प्रभावित करती है?
    डीएनए

     18-09-2020 07:42 PM


  • बैटरी - वर्तमान में उपयोगी इतिहास की एक महत्वपूर्ण खोज
    नगरीकरण- शहर व शक्ति

     18-09-2020 04:55 AM


  • शतरंज की बिसात पर भारत
    हथियार व खिलौने

     17-09-2020 06:32 AM


  • क्यों चुप हो गए रामपुर के नंबर 1 वॉयलिन ?
    ध्वनि 1- स्पन्दन से ध्वनि

     16-09-2020 02:06 AM


  • ब्रह्माण्‍ड की सबसे चमकदार वस्‍तु सक्रिय आकाशगंगाएं
    द्रिश्य 3 कला व सौन्दर्य

     15-09-2020 02:00 AM


  • इस्लाम में कदर की अवधारणा से जुड़े विभिन्न मत
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     14-09-2020 05:10 AM


  • भारत में सबसे बड़ा बाघ आरक्षित वन है, श्रीशैलम वन्यजीव अभयारण्य
    स्तनधारी

     13-09-2020 04:33 AM


  • रोके जा सकते हैं आत्महत्या के प्रयास
    व्यवहारिक

     12-09-2020 11:00 AM


  • रामपुर में भी देखने को मिलती है गणित और इंजीनियरिंग की ये जादुई वास्तुकला
    वास्तुकला 1 वाह्य भवन

     11-09-2020 02:35 AM






  • © - 2017 All content on this website, such as text, graphics, logos, button icons, software, images and its selection, arrangement, presentation & overall design, is the property of Indoeuropeans India Pvt. Ltd. and protected by international copyright laws.

    login_user_id