पाषाणकाल का विभाजन

रामपुर

 29-05-2018 02:24 PM
जन- 40000 ईसापूर्व से 10000 ईसापूर्व तक

सभ्यताओं की शुरुआत से पहले मानव एक यायावर जीवन जीता था जिसमें वह समय और मौसम के अनुसार अपने घर को बदलते रहता था। यदि मानव इतिहास को देखा जाए तो इसका एक महत्वपूर्ण हिस्सा है पाषाण काल। इस काल में मानव पर्वतों के कंदराओं में निवास करता था तथा वह शिकार पर मुख्य रूप से आश्रित हुआ करता था। पाषाणकाल को निम्नलिखित रूप से जाना जाता है- निम्न पुरापाषाणकाल, मध्य पुरापाषाणकाल, उच्च पुरापाषाणकाल, नव पाषाणकाल आदि। इन सभी कालों का विभाजन उस वक़्त के मानव के रहन-सहन और औजार बनाने की परंपरा के आधार पर बांटा गया है।

सबसे पहला काल निम्न पुरापाषाणकाल है जिसमें मानव अत्यंत ही शुरुवाती प्रकार के पत्थर के औजारों का प्रयोग किया करता था। ये औजार देखने में अत्यंत ही सामान्य और कम धारदार हुआ करते थे तथा आकार में भी ये काफी बड़े होते थे। निम्न पुरापाषाणकाल के उपरांत मध्य पुरापाषाणकाल का आगमन होता है। इस काल में मानव हथियारों में अधिक भिन्नताएं लाता है तथा इस काल के पत्थर के हथियार अधिक धारदार होते थे जो कि शिकार को आसान कर देते थे। उच्च पुरापाषाणकाल में हथियारों का आकार छोटा और सटीक हो गया। इस काल के दौरान औज़ार अधिक धारदार हुआ करते थे तथा हथियारों के प्रकारों में भी कई विभिन्नताएं आयीं। नव पाषाणकाल अपने नाम के अनुरूप था। इस काल में दरांती, छोटे पत्थर के औज़ार आदि का जन्म हुआ। इस प्रकार से मानव के पाषाण काल को विभाजित किया गया है।

मानव पाषाणकाल के दौरान ही चित्रकारी भी बड़े पैमाने पर किया करता था। इन चित्रकारियों में वह आस-पास उपस्थित वस्तुओं, जीवों व खुद की जिंदगी से जुड़ी अन्य चीजों का अंकन किया करता था। ये सभी चित्र मानव के इतिहास को और बेहतर तरीके से समझने में मददगार सिद्ध होते हैं। पूरे भारत भर में हम इन चित्रों को देख सकते हैं जो कि विभिन्न स्थानों पर गुफाओं या पहाड़ों की दीवारों पर उकेरे गए हैं। भारत का सबसे बड़ा चित्रित पुरास्थल भीमबेटका है जो कि भोपाल, मध्यप्रदेश में स्थित है। रामपुर में अभी तक किये गए तमाम अन्वेषणों में एक से भी पाषाणकालीन साक्ष्य हमें नहीं प्राप्त हुए हैं परन्तु रामपुर के आस-पास के क्षेत्रों में जैसे कि उत्तराखंड, बुंदेलखंड आदि की पर्वत श्रृंखलाओं में अनेकों पुरास्थल उपस्थित हैं जो कि अनेकों चित्रों का संग्रहण किये हुए हैं। उत्तराखंड के अल्मोड़ा का लाखुडियार, मिर्ज़ापुर का लेखानियादरी, बुंदेलखंड के चित्र प्रागैतिहासिक काल के विभिन्न आयामों को प्रस्तुत करते हैं।

यह जानना भी अत्यंत आवश्यक है कि करीब 10,000 ईसा पूर्व में कितने मानव पृथ्वी पर निवास किया करते थे? क्यूंकि यह आंकड़ा हमें मानव के विकास और आबादी का विषद विवरण प्रस्तुत करता है। 10,000 ईसा पूर्व में पृथ्वी पर कुल करीब 40,00,000 लोग निवास किया करते थे। अब आज के विवरणों का सहारा लिया जाए तो यह पता चलता है कि आज विश्व की आबादी 7 अरब है जो कि पाषाणकाल की आबादी से कई गुना ज्यादा है। अकेले भारत की आबादी 1.2 अरब है जिसमें से उत्तर प्रदेश की आबादी 20 करोड़ के करीब है तथा इसमें रामपुर की आबादी लगभग 24 लाख है। इससे यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि रामपुर की वर्तमान की आबादी 10,000 ईसा पूर्व में आधे से ज्यादा विश्व की आबादी के बराबर थी।

1. प्रेहिस्टोरिक ह्यूमन कॉलोनाईजेशन ऑफ़ इंडिया, वी. एन. मिश्र
2. प्री एंड प्रोटोहिस्ट्री ऑफ़ इंडिया, वी के जैन"
3. http://www.worldhistorysite.com/population.html



RECENT POST

  • कंटेनरों द्वारा निर्यात किया जाता है रामपुर व् मुरादाबाद के जरदोजी कारीगर द्वारा निर्मित क्रिसमस सजावट का सामान
    समुद्र

     03-12-2021 07:36 PM


  • कैसे भारत में फारस और अरब से लाए गए कुछ शब्दों का अर्थ बदल गया
    ध्वनि 2- भाषायें

     03-12-2021 11:00 AM


  • विदेश में ग्रेहाउंड रेसिंग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, रामपुर हाउंड
    निवास स्थान

     02-12-2021 08:44 AM


  • पाकिस्तान के चुनावी गणित को तुलनात्मक रूप से समझें
    आधुनिक राज्य: 1947 से अब तक

     01-12-2021 09:00 AM


  • अंग्रेजी शब्द कोष में cot आया है हिंदी के खाट या चारपाई और फ़ारसी चिहारपई से
    ध्वनि 2- भाषायें

     30-11-2021 10:29 AM


  • दिल्ली के सराई रोहिल्ला रेलवे स्टेशन का इतिहास
    मध्यकाल 1450 ईस्वी से 1780 ईस्वी तक

     29-11-2021 08:55 AM


  • 1994 में मिस वर्ल्ड का खिताब जीतने वाली दूसरी भारतीय महिला बनीं,ऐश्वर्या राय
    द्रिश्य 3 कला व सौन्दर्य

     28-11-2021 01:58 PM


  • भाग्य का अर्थ तथा भाग्य और तक़दीर में अंतर
    विचार 2 दर्शनशास्त्र, गणित व दवा

     27-11-2021 10:12 AM


  • भारत में भी अनुभव कर सकते हैं आइस स्केटिंग का रोमांच
    य़ातायात और व्यायाम व व्यायामशाला

     26-11-2021 10:18 AM


  • प्राचीन भारतीय परिधान अथवा वस्त्र
    ठहरावः 2000 ईसापूर्व से 600 ईसापूर्व तक

     25-11-2021 09:42 AM






  • © - 2017 All content on this website, such as text, graphics, logos, button icons, software, images and its selection, arrangement, presentation & overall design, is the property of Indoeuropeans India Pvt. Ltd. and protected by international copyright laws.

    login_user_id