Post Viewership from Post Date to 14-Mar-2024 (31st Day)
City Subscribers (FB+App) Website (Direct+Google) Email Instagram Total
2501 173 2674

***Scroll down to the bottom of the page for above post viewership metric definitions

मानव सभ्यता के इतिहास में क्या रहा है, गुप्त समाजों का इतिहास एवं योगदान?

रामपुर

 12-02-2024 09:44 AM
सिद्धान्त 2 व्यक्ति की पहचान

हमारी मानव सभ्यता के पूरे इतिहास में, मनुष्य हमेशा से ही अज्ञात चीजों की ओर आकर्षित होता रहा है। इसी प्रकार, ‘गुप्त समाज’ भी, जो आम लोगों की नज़रों से छिपे हुए, रहस्य में डूबे हुए, अक्सर गुप्त अनुष्ठानों और रहस्यमय ज्ञान से जुड़े हुए होते हैं। सहस्राब्दियों से हमारे सामाजिक रचना का हिस्सा रहे हैं। गुप्त समाजों का पता, हमारी सभ्यता की शुरुआत से ही लगाया जा सकता है। ये संगठन अक्सर सामाजिक परिवर्तन या तनाव के समय उभरते हैं, और आध्यात्मिक, सामाजिक और राजनीतिक आवश्यकताओं को पूरा करते हैं। जबकि, कुछ समाज, धार्मिक या आध्यात्मिक संस्कारों और शिक्षाओं के आसपास बने थे। तथा अन्य समाज, जैसे कि इलुमिनाटी(Illuminati) या फ्रीमेसन(Freemason), राजनीतिक, बौद्धिक यहां तक कि, क्रांतिकारी आंदोलनों से बने थे।
सामान्य तौर पर, गुप्त समाजों में कई सामान्य विशेषताएं होती हैं। वे आम तौर पर विशिष्ट होते हैं। वे पदानुक्रमित भी होते हैं, जिनमें सदस्य विभिन्न स्तरों या दीक्षा के “डिग्री(Degree)” के माध्यम से प्रगति करते हैं। इसके अलावा, उनकी गतिविधियां, सिद्धांत और अनुष्ठान गैर-सदस्यों से, और अक्सर निम्न-श्रेणी के सदस्यों से भी छिपाए जाते हैं।
फ्रीमेसनरी और इलुमिनाटी दो अलग-अलग समाज हैं, जिन्होंने सदियों से जनता का ध्यान आकर्षित किया है। फ्रीमेसनरी एक भाईचारे से संबंधित संगठन है, जो सदियों से मौजूद है। इसकी उत्पत्ति रहस्य में डूबी हुई है, लेकिन अधिकांश इतिहासकार इस बात से सहमत हैं कि, इसका उद्भव 16वीं सदी के अंत या 17वीं सदी की शुरुआत में हुआ था। यह संगठन भाईचारे, दान और सच्चाई के सिद्धांतों पर आधारित है, और इसके सदस्यों को फ्रीमेसन(Freemason) के रूप में जाना जाता है।
आरंभिक राजमिस्त्री या फ्रीमेसन पत्थर से काम करने वाले कारीगर थे। उन्होंने ज्ञान और कौशल साझा करने तथा अपने व्यापार को विनियमित करने के लिए, गिल्ड(Guilds) या समूह बनाए। जैसे-जैसे संगठन बढ़ता गया, इसने गैर-कारीगरों को शामिल करने के लिए अपनी सदस्यता का विस्तार किया, जिससे यह एक सामाजिक और परोपकारी समाज बन गया।
आज, फ्रीमेसनरी लाखों सदस्यों वाला एक वैश्विक संगठन है। इसके लॉज(Lodge) दुनिया के लगभग हर देश में पाए जा सकते हैं, और इसके सदस्यों में राजनेताओं, मशहूर हस्तियों और व्यापारिक नेताओं सहित जीवन के सभी क्षेत्रों के लोग शामिल हैं। जबकि, एक तरफ, इलुमिनाटी की स्थापना मई 1776 में बवेरिया(Bavaria), जर्मनी(Germany) में हुई थी। इसके संस्थापक, एडम वेइशॉप्ट(Adam Weishaupt) थे। वेइशॉप्ट कैथोलिक चर्च(Catholic Church) और सत्तारूढ़ बवेरियन सरकार के कट्टर आलोचक थे, और उनका मानना था कि, गुप्त समाज इन संस्थानों को उखाड़ फेंकने की कुंजी थे।
इलुमिनाटी के लक्ष्य काफ़ी महत्वाकांक्षी थे। वेइशॉप्ट एक ऐसे समाज का निर्माण करना चाहते थे, जो धर्म और अंधविश्वास से मुक्त हो और तर्क तथा विज्ञान पर आधारित हो। उनका मानना था कि, इलुमिनाटी एक नई विश्व व्यवस्था लाने में मदद कर सकती है, जिसमें शासक प्रबुद्ध होंगे और लोग स्वतंत्र होंगे। इलुमिनाटी शुरूआत में सदस्यों को आकर्षित करने में सफल रही, और यह जल्द ही एक शक्तिशाली संगठन बन गई। इसके सदस्यों में प्रमुख राजनेता, लेखक और वैज्ञानिक शामिल थे, और इसकी कई यूरोपीय देशों में शाखाएं थीं। हालांकि, इलुमिनाटी की सफलता अल्पकालिक थी। 1784 में, बवेरियन सरकार को इस संगठन के अस्तित्व का पता चला और तब इस पर प्रतिबंध लगा दिया गया। फ्रीमेसनरी और इलुमिनाटी के अलावा कुछ अन्य गुप्त समाज निम्नलिखित हैं। 1.बिल्डरबर्ग समूह(The Bilderberg Group): बिल्डरबर्ग समूह दरअसल, गुप्त समाज नहीं है। यह एक निजी, और केवल आमंत्रण पर आधारित सम्मेलन है। इसमें मुख्य रूप से उत्तरी अमेरिकी(North American) और यूरोपीय(European) अभिजात वर्ग शामिल हैं। बिल्डरबर्ग बैठकों की आधिकारिक वेबसाइट(Website) के अनुसार, इस सम्मेलन का उद्देश्य– एक अनौपचारिक मंच के रूप में कार्य करना है, जिसका लक्ष्य यूरोप(Europe) और उत्तरी अमेरिका(North America) के बीच संवाद को बढ़ावा देना है। 2. द ऑर्डर ऑफ स्कल एंड बोन्स(The Order of Skull and Bones): जहां तक गुप्त समाजों का सवाल है, संभवतः सबसे कम रहस्यमयी समाज, स्कल एंड बोन्स है। यह न्यू हेवन(New Haven) में स्थित येल विश्वविद्यालय(Yale University) के स्नातक लोगों का वरिष्ठ समाज है। येल विश्वविद्यालय के वाद-विवाद वाले गुप्त समाज– लिनोनिया(Linonia), ब्रदर्स इन यूनिटी(Brothers in Unity) और कैलीओपियन सोसायटी(Calliopean Society) के बीच विवाद छिड़ने के बाद, 1832 में, विलियम हंटिंगटन रसेल(William Huntington Russell) और अल्फोंसो टैफ्ट(Alphonso Taft) द्वारा इस समाज की स्थापना की गई थी। स्कल एंड बोन्स समाज को अनौपचारिक रूप से “बोन्स” के रूप में जाना जाता है, और इसके सदस्यों को “बोन्समेन(Bonesmen)” के रूप में जाना जाता है।
3. स्कारैबियन सीनियर सोसायटी(Scarabbean Senior Society): स्कारैबियन सीनियर सोसायटी, टेक्सास विश्वविद्यालय में एक सम्मानित गुप्त समाज है। इसके सदस्यों को “स्कारैब्स(Scarabs)” के नाम से जाना जाता है। इस समूह ने बड़े पैमाने पर गोपनीयता में काम किया है। हालांकि, कहा जाता है कि, यह समाज आज भी परिसर के आसपास महसूस की जाने वाली, कई स्वयंसेवी परंपराओं और छात्र जीवन के पहलुओं के लिए आंशिक रूप से जिम्मेदार है।
स्कारैबियन सीनियर सोसाइटी की स्थापना 1915 में, जॉन आयर्स(John Ayres), इलियट पार्क फ्रॉस्ट(Elliot Park Frost) और जॉर्ज हर्बर्ट क्लार्क(George Herbert Clarke) द्वारा की गई थी। वे क्षेत्र की स्थितियों में सुधार के लिए, छात्र नेताओं को एक साथ मिलकर काम करने के लिए जोड़ना चाहते थे।

संदर्भ
http://tinyurl.com/3ucwunez
http://tinyurl.com/23wafrp9
http://tinyurl.com/3srzvdrk

चित्र संदर्भ
1. फ्रीमेसनरी समाज के लोगों को दर्शाता एक चित्रण (picryl)
2. इलुमिनाटी के प्रतीक चिन्ह को दर्शाता एक चित्रण (wikimedia)
3. फ़्रीमेसन-कॉस्टयूम को दर्शाता एक चित्रण (wikimedia)
4. इलुमिनाटी के लोगो को दर्शाता एक चित्रण (wikimedia)
5. बिल्डरबर्ग समूह से संबंधित किताब को दर्शाता एक चित्रण (amazon)
6. द ऑर्डर ऑफ स्कल एंड बोन्स को दर्शाता एक चित्रण (flickr)



***Definitions of the post viewership metrics on top of the page:
A. City Subscribers (FB + App) -This is the Total city-based unique subscribers from the Prarang Hindi FB page and the Prarang App who reached this specific post. Do note that any Prarang subscribers who visited this post from outside (Pin-Code range) the city OR did not login to their Facebook account during this time, are NOT included in this total.
B. Website (Google + Direct) -This is the Total viewership of readers who reached this post directly through their browsers and via Google search.
C. Total Viewership —This is the Sum of all Subscribers(FB+App), Website(Google+Direct), Email and Instagram who reached this Prarang post/page.
D. The Reach (Viewership) on the post is updated either on the 6th day from the day of posting or on the completion ( Day 31 or 32) of One Month from the day of posting. The numbers displayed are indicative of the cumulative count of each metric at the end of 5 DAYS or a FULL MONTH, from the day of Posting to respective hyper-local Prarang subscribers, in the city.

RECENT POST

  • आइए देखें दुनिया के अलग-अलग देशों में ‘विश्व पृथ्वी दिवस’ मनाने के विभिन्न रंग
    जलवायु व ऋतु

     22-04-2024 09:55 AM


  • ये हैं दुनिया के सबसे ख़तरनाक पक्षी, जंगल का राजा शेर भी खाता हैं इनसे ख़ौफ़
    व्यवहारिक

     21-04-2024 09:44 AM


  • भगवान महावीर और प्रभु श्री राम में, क्या अनोखी समानता है?
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     20-04-2024 09:59 AM


  • क्या प्राचीन भारतीय ब्राह्मी लिपि पर था, यूनानी या ग्रीक लेखन व वर्णमाला का प्रभाव?
    ध्वनि 2- भाषायें

     19-04-2024 09:35 AM


  • विश्व धरोहर दिवस पर जानें, भारत व विश्व के अनूठे धरोहर स्थलों के बारे में
    वास्तुकला 1 वाह्य भवन

     18-04-2024 09:41 AM


  • राम नवमी विशेष: वैश्विक पटल पर प्रभु श्री राम की महिमा कैसे और किन कारणों से फैली?
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     17-04-2024 09:31 AM


  • प्राचीन ग्रीस, बेबीलोन व अन्य सभ्यताओं में हमारे देश की पहचान बना था हमारा कपास
    स्पर्शः रचना व कपड़े

     16-04-2024 09:27 AM


  • विश्व कला दिवस विशेष: कला की सुंदरता में कैसे चार चाँद लगा देती है, गणित
    द्रिश्य 3 कला व सौन्दर्य

     15-04-2024 09:31 AM


  • शेर या बाघ नहीं बल्कि ये है दुनिया के सबसे खूंखार जानवर, यहां देखें सभी को
    शारीरिक

     14-04-2024 09:13 AM


  • महिला, दलित व वंचितों के प्रति दमनकारी विचारों वाले ग्रंथों को आंबेडकर ने किया अस्वीकार
    सिद्धान्त 2 व्यक्ति की पहचान

     13-04-2024 08:52 AM






  • © - , graphics, logos, button icons, software, images and its selection, arrangement, presentation & overall design, is the property of Indoeuropeans India Pvt. Ltd. and protected by international copyright laws.

    login_user_id