प्रयागराज और लखनऊ के रिवरफ़्रंट बयां करते हैं आस्था, इतिहास और आधुनिक विकास की कहानी

नदियाँ
03-04-2025 09:22 AM
प्रयागराज और लखनऊ के रिवरफ़्रंट बयां करते हैं आस्था, इतिहास और आधुनिक विकास की कहानी

प्रयागराज में लंबे समय तक चला भव्य महाकुंभ आखिरकार संपन्न हो गया! लेकिन क्या आपको पता है कि यहां का रिवरफ़्रंट प्राचीन काल से ही प्रसिद्ध रहा है? यह इलाका, संगम क्षेत्र के आसपास स्थित है, जहाँ गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती नदियाँ मिलती हैं। वैदिक काल, यानी करीब 1000 ईसा पूर्व से ही इस जगह का गहरा ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व रहा है।

अगर आप प्रयागराज के इस इलाके को ध्यान से देखें, तो पाएंगे कि इसकी आबादी मुख्य रूप से एक ओर केंद्रित है। यहाँ बसावट पारंपरिक नियमों का पालन करते हुए पूर्व दिशा में फैली हुई है, जो भारत में रहने और शहर बसाने की पुरानी परंपराओं को दर्शाता है। दूसरी ओर, लखनऊ का गोमती रिवरफ़्रंट एक आधुनिक विकास परियोजना का हिस्सा है। हालाँकि गोमती नदी प्राचीन काल से लखनऊ के इतिहास से जुड़ी हुई है, लेकिन इसका व्यवस्थित सौंदर्यीकरण और शहरीकरण हाल ही में शुरू हुआ। वर्ष 2015 में इस परियोजना की नींव रखी गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य नदी के किनारों को सुंदर और विकसित बनाना था, ताकि लोग यहाँ सैर कर सकें और शहर को एक नया आकर्षण मिल सके।

इस लेख में हम इन दोनों रिवरफ़्रंट को विस्तार से समझेंगे। सबसे पहले, हम प्रयागराज के त्रिवेणी संगम के आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व को जानेंगे, जहाँ हर साल लाखों श्रद्धालु स्नान करने आते हैं। इसके बाद, हम लखनऊ के गोमती रिवरफ़्रंट के विकास और इसकी विशेषताओं पर चर्चा करेंगे, जो आधुनिकता और शहर नियोजन का एक अनोखा उदाहरण है।

प्रयागराज में स्थित त्रिवेणी संगम | चित्र स्रोत : wikimedia 

भारत के सबसे पवित्र और ऐतिहासिक घाटों में से एक त्रिवेणी संगम, प्रयागराज में स्थित है। यह वह स्थान है जहाँ गंगा, यमुना और पौराणिक सरस्वती नदी मिलती हैं। धार्मिक और आध्यात्मिक रूप से यह संगम बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। हर साल लाखों श्रद्धालु और पर्यटक यहाँ आते हैं, क्योंकि इसे मोक्ष प्राप्ति और पापों से मुक्ति का स्थान माना जाता है।

हिंदू धर्मशास्त्रों में वर्णन मिलता है कि त्रिवेणी संगम में स्नान करने से व्यक्ति के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। यही आस्था इस स्थान को दिव्यता से भर देती है। कई साधु-संत और श्रद्धालु यहाँ स्नान करके अपने जीवन को पवित्र बनाने की मान्यता रखते हैं।

त्रिवेणी संगम सिर्फ़ एक नदी का संगम नहीं, बल्कि कई पौराणिक कथाओं और धार्मिक मान्यताओं से जुड़ा हुआ स्थान भी है। कहा जाता है कि भगवान ब्रह्मा ने सृष्टि की रचना के बाद पहला यज्ञ यहीं पर किया था। यही कारण है कि इस स्थान को अत्यंत शुभ और शक्तिशाली माना जाता है।

भगवान राम से भी यह स्थान जुड़ा हुआ है। रामायण के अनुसार, जब भगवान राम वनवास में थे, तब उन्होंने त्रिवेणी संगम पर आकर प्रार्थना की थी। यही नहीं, संगम का संबंध समुद्र मंथन की कथा से भी है। मान्यता है कि, जब भगवान विष्णु के वाहन गरुड़ अमृत कलश लेकर आकाश में उड़ रहे थे, तब कुछ अमृत की बूँदें त्रिवेणी संगम में गिर गईं। यही कारण है कि यह स्थान हिंदू धर्म में इतना पवित्र माना जाता है।

त्रिवेणी संगम में एक नौका पर सैर | चित्र स्रोत : wikimedia 

त्रिवेणी संगम सिर्फ़ एक धार्मिक स्थान नहीं, बल्कि संस्कृति, परंपरा और आस्था का प्रतीक भी है। हर साल कुंभ और माघ मेले के दौरान यहाँ श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। ऐसा माना जाता है कि इन विशेष अवसरों पर संगम में स्नान करने से जीवन के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं और आत्मा शुद्ध हो जाती है।

लखनऊ में गोमती रिवरफ़्रंट | चित्र स्रोत : wikimedia 

आइए अब आपको लखनऊ के गोमती रिवरफ़्रंट की सैर पर ले चलते हैं:

गोमती रिवरफ़्रंट लखनऊ की सबसे खूबसूरत और आकर्षक जगहों में से एक है। यह गोमती नदी के किनारे फैला एक शानदार स्थल है, जहाँ लोग सैर-सपाटे और सुकून भरे पलों का आनंद ले सकते हैं।

यहाँ हरियाली से भरे बगीचे, खूबसूरत मंडप, आरामदायक बैठने की जगहें और साफ-सुथरे रास्ते मौजूद हैं। खाने-पीने के कई स्टॉल भी हैं, जहाँ घूमते-फिरते स्वादिष्ट व्यंजनों का मज़ा लिया जा सकता है। लगभग, 2 किलोमीटर तक फैला यह रिवरफ़्रंट लखनऊ के बीचों-बीच स्थित है, जो इसे शहरवासियों और पर्यटकों के लिए आसानी से पहुंचने योग्य बनाता है।

जो लोग सुबह-शाम टहलना पसंद करते हैं, उनके लिए यह जगह किसी जन्नत से कम नहीं। चारों ओर हरियाली, खूबसूरत मूर्तियाँ, रंग-बिरंगे फूलों की क्यारियाँ और संगीतमय   फ़व्वारे इस स्थान की सुंदरता में चार चाँद लगा देते हैं। साथ ही, गोमती नदी की बहती लहरें इस जगह को और भी शांतिपूर्ण और सुकून भरा बना देती हैं।

अगर आप गोमती रिवरफ़्रंट घूमने जा रहे हैं, तो इसके आसपास मौजूद इन ऐतिहासिक और दिलचस्प जगहों की सैर भी  ज़रूर करें:

  1. नवाब वाजिद अली शाह प्राणी उद्यान
  2. बड़ा इमामबाड़ा 
  3. ब्रिटिश रेजीडेंसी कॉम्प्लेक्स

अगर आप गोमती रिवरफ़्रंट जाना चाहते हैं, तो यहाँ पहुँचने के कई आसान रास्ते हैं:

 हवाई मार्ग – लखनऊ अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा यहाँ से करीब 26 किमी दूर है।

 रेल मार्ग – लखनऊ जंक्शन रेलवे स्टेशन 7 किमी की दूरी पर है।

 मेट्रो मार्ग – सबसे नजदीकी मेट्रो स्टेशन लेखराज मार्केट है, जो यहाँ से लगभग 2 किमी दूर स्थित है।

लखनऊ में गोमती नदी | चित्र स्रोत : wikimedia  

आइए, अब जानते हैं कि गोमती रिवरफ़्रंट विकास की ज़रूरत क्यों थी?

1. बाढ़ से बचाव के लिए तटबंधों का निर्माण:  1970 के दशक में लखनऊ में भीषण बाढ़ आई थी, जिससे शहर को भारी नुकसान हुआ। इस खतरे से निपटने के लिए गोमती नदी के दोनों किनारों पर ऊँचे तटबंध बना दिए गए। इससे शहर को बाढ़ से तो सुरक्षा मिली, लेकिन नदी के प्राकृतिक बाढ़ क्षेत्र में बड़ा बदलाव आ गया।

2. प्रदूषण की बढ़ती समस्या: गोमती में कुल 40 प्राकृतिक नाले गिरते थे, जिनमें से 23 प्रमुख थे। पहले ये नाले बारिश के पानी को नदी तक पहुँचाने और भूजल स्तर बनाए रखने में मदद करते थे। लेकिन समय के साथ ये नाले गंदगी और कचरे के अड्डे बन गए। आवासीय और औद्योगिक कचरे के कारण नदी का पानी गंभीर रूप से प्रदूषित हो गया।

3. शहरीकरण और नदी का सिकुड़ता दायरा: समय के साथ गोमती का बाढ़ क्षेत्र और आसपास की उपजाऊ ज़मीन पर शहर फैलने लगा। गोमती नगर और त्रिवेणी नगर जैसे बड़े आवासीय क्षेत्र बसाए गए। 1970 के दशक के बाद से नदी का जलस्तर लगातार गिरता गया, और 2016 तक स्थिति बहुत खराब हो चुकी थी।

गोमती रिवरफ़्रंट: नदी और लखनऊ के लिए नुकसानदायक कैसे बना?

1. प्राकृतिक संतुलन बिगड़ा: पहले गोमती नदी, अपने बाढ़ के मैदानों में उपजाऊ गाद (silt) जमा करती थी, जिससे खेतों को पोषण मिलता था। लेकिन तटबंधों और निर्माण कार्यों के कारण यह प्रक्रिया रुक गई। नतीजा यह हुआ कि, इस नदी के तल में गाद जमा होती रही और इसकी गहराई, 1960 की तुलना में 1.5 मीटर तक कम हो गई।

2. शहर में जलभराव की समस्या बढ़ी: पहले बारिश का पानी आसानी से नदी में चला जाता था। लेकिन तटबंधों ने जल निकासी प्रणाली बिगाड़ दी। अब बारिश का पानी शहर में ही जमा हो जाता है, जिससे कई इलाकों में भारी जलभराव होने लगा।

3. नदी का भूजल से संपर्क टूट गया: रिवरफ़्रंट प्रोजेक्ट के तहत नदी के किनारों पर 16 मीटर गहरी  मज़बूत दीवार ( डायफ़्राम वॉल (Diaphragm wall)) बनाई गई। इससे गोमती नदी अपने प्राकृतिक जलग्रहण क्षेत्र से कट गई। पहले नदी भूजल पर निर्भर थी, लेकिन अब उसका पानी धीरे-धीरे सूखने लगा है।

4. नदी का पारिस्थितिकी तंत्र (इकोसिस्टम) तबाह हो गया: रिवरफ़्रंट प्रोजेक्ट के दौरान नदी को कंक्रीट से पाट दिया गया, जिससे आर्द्रभूमि (wetlands) और प्राकृतिक खाइयाँ खत्म हो गईं। ये क्षेत्र पहले कई तरह के पेड़-पौधों और जीव-जंतुओं का घर थे।

गोमती रिवरफ़्रंट पर निर्माण कार्य | चित्र स्रोत : wikimedia

 2013-14 में किए गए एक अध्ययन में पाया गया कि रिवरफ़्रंट साइट के निचले हिस्से में पहले 8 तरह की मछलियाँ पाई जाती थीं। लेकिन प्रोजेक्ट के बाद वहाँ सिर्फ़ 1 मछली प्रजाति बची।

इसके अलावा, नदी के डाउनस्ट्रीम इलाके में मछलियों की कुल संख्या और उनका बायोमास (शारीरिक भार) 85% तक घट चुका है।

कुल मिलाकर गोमती रिवरफ़्रंट विकास से शहर को एक सुंदर पर्यटन स्थल तो मिला, लेकिन इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ी। इस परियोजना ने न सिर्फ़ गोमती नदी के इकोसिस्टम को तबाह कर दिया, बल्कि शहर के जलप्रबंधन को भी खराब कर दिया।

 

संदर्भ: 

https://tinyurl.com/2a2jazk5
https://tinyurl.com/28hsyt3z
https://tinyurl.com/2dfczbvo
https://tinyurl.com/23pbr8oq

मुख्य चित्र: 2019 में प्रयागराज में आयोजित कुंभ मेले में यमुना तट पर लोगों की भीड़ (WIkimedia) 

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