
मेरठ में ट्रैफ़िक जाम एक गंभीर समस्या बन गया है। तंग सड़कें और बढ़ते वाहन अक्सर जाम की स्थिति पैदा कर देते हैं, जिससे लोगों को देरी, प्रदूषण और रोज़मर्रा के तनाव का सामना करना पड़ता है। इस समस्या का समाधान करने के लिए भारतीय सरकार कई उपायों पर काम कर रही है। जैसे सड़कें चौड़ी करने, फ्लाईओवर बनाने और बेहतर ट्रैफ़िक सिग्नल्स के निर्माण जैसे प्रोजेक्ट्स से गाड़ियों का आना-जाना आसान बनाने की कोशिश की जा रही है। इसके साथ ही, सरकार पब्लिक ट्रांसपोर्ट और इलेक्ट्रिक गाड़ियों को भी बढ़ावा दे रही है, ताकि ट्रैफ़िक और प्रदूषण दोनों कम हो सके। इन प्रयासों से लोगों का सफ़र आसान और सुरक्षित बनाया जा सकता है।
आज हम 2024-25 में भारत के उन शहरों के बारे में जानेंगे, जहाँ सबसे धीमा ट्रैफ़िक है और जाम की समस्या सबसे ज़्यादा देखी जा रही है। फिर, हम जानेंगे कि भारत में ट्रैफ़िक जाम के मुख्य कारण क्या हैं और इस समस्या का हल क्या हो सकता है, जैसे बेहतर सड़क योजना और पब्लिक ट्रांसपोर्ट का उपयोग बढ़ाना। अंत में, हम यह भी देखेंगे कि भारतीय सरकार पब्लिक ट्रांसपोर्ट को बढ़ावा देने और पूरे देश में बेहतर कनेक्टिविटी बनाने के लिए क्या कदम उठा रही है।
2024-25 में भारत के सबसे धीमे ट्रैफ़िक वाले शहर
शहरीकरण की तेज़ रफ्तार और बढ़ते विकास के साथ ट्रैफ़िक जाम एक बड़ी वैश्विक समस्या बन गई है। दुनिया भर में लोग अधिक समय तक यात्रा करने की वजह से प्रभावित हो रहे हैं, जिससे अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ रहा है और लोगों में निराशा बढ़ रही है। टॉम्स ट्रैफ़िक इंडेक्स 2024 (Tom’s Traffic Index 2024) के अनुसार, पिछले एक साल में 76% शहरों में औसत गति में गिरावट आई है।
सड़कों का लेआउट (Layout)—जिसमें हाईवे (highway), मुख्य सड़कें, तंग गली, एकतरफ़ा सड़के और जटिल चौराहे शामिल हैं—इसके साथ ही अप्रत्याशित घटनाएँ जो ट्रैफ़िक फ्लो (traffic flow) को प्रभावित करती हैं, ने दुनिया भर में यातायात को बहुत धीमा कर दिया है।
आइए डालते हैं, वैश्विक रैंकिंग पर नज़र
दुनिया भर में, कोलंबिया का शहर बरांक्विला(Barranquilla) पिछले साल सबसे धीमी औसत गति के लिए रिकॉर्ड में आया, जिसकी औसत गति केवल 10.3 मील प्रति घंटा थी, यानी लगभग 35 मिनट में 6 मील की दूरी तय की जा रही थी। लंदन, जो पहले वैश्विक और यूरोपीय रैंकिंग में शीर्ष पर था, अब पांचवे स्थान पर आ गया है, जहां औसत गति 11.2 मील प्रति घंटा दर्ज़ की गई है।
भारत में ट्रैफ़िक की स्थिति
पिछले कुछ वर्षों में, भारतीय शहरों में ट्रैफ़िक की समस्याएँ और बढ़ गई हैं | खासतौर पर, भारत के तीन शहर टॉम टॉम ट्रैफ़िक इंडेक्स (Tom Tom Traffic Index 2024) में दुनिया के पांच सबसे धीमे शहरों में शामिल हो गए हैं।
भारत के आई टी (IT) राजधानी, बेंगलुरु, जो सबसे अधिक जाम के लिए प्रसिद्ध है, पिछले साल की तुलना में 10 किलोमीटर की यात्रा में 50 सेकंड का इज़ाफ़ा हुआ है, अब 34 मिनट और 10 सेकंड में 10 किलोमीटर की यात्रा होती है। हालांकि, यह शहर अब कोलकाता से पीछे है, जहाँ औसत समय 10 किलोमीटर के लिए 34 मिनट और 33 सेकंड है।
बेंगलुरु में ट्रैफ़िक जाम बढ़ने की वजह निजी गाड़ियों की संख्या में वृद्धि है। अब सड़कों पर 2.5 मिलियन से अधिक कारें हैं, जो दिल्ली से भी ज़्यादा हैं। हर दिन 2,000 नए वाहन पंजीकरण होते हैं, जिससे इन्फ्रास्ट्रक्चर पर और दबाव बढ़ता है।
पुणे चौथे स्थान पर है, जहां औसत समय 33 मिनट और 27 सेकंड है, यह भारत में बढ़ती शहरी ट्रैफ़िक समस्याओं को दिखाता है। हैदराबाद, जो वैश्विक स्तर पर 18वें स्थान पर है, औसतन 31 मिनट और 30 सेकंड में 10 किलोमीटर की यात्रा करता है, और इसके चलते लोग हर साल 85 घंटे जाम में बर्बाद करते हैं। चेन्नई, जो 31वें स्थान पर है, वहां 10 किलोमीटर की यात्रा में औसतन 30 मिनट और 20 सेकंड लगते हैं, यानी हर साल 94 घंटे ट्रैफ़िक में बर्बाद होते हैं।
भारत में ट्रैफ़िक जाम के कारण
भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती हुई अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। भारतीयों की औसत आय में बढ़ोतरी के साथ ही निजी वाहनों की संख्या भी तेज़ी से बढ़ रही है।
हालाँकि भारत में सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध है, लेकिन यह देश की विशाल जनसंख्या के लिए पर्याप्त नहीं है। खासकर मेट्रो शहरों में अक्सर सार्वजनिक परिवहन सेवाएँ भीड़-भाड़ से भरी होती हैं। इस कारण लोग शांति से यात्रा करने के लिए अपने निजी वाहनों का उपयोग कर रहे हैं, और नतीजतन, सड़कों पर अधिक वाहन आ रहे हैं।
भारत में ट्रैफ़िक जाम के समाधान और कैसे स्कॉटलैंड की रणनीतियों हो सकती हैं प्रेरणादायक
स्कॉटलैंड ने ट्रैफ़िक जाम और प्रदूषण को कम करने के लिए कई प्रभावी कदम उठाए हैं। ये कदम भारत में भी लागू किए जा सकते हैं, ताकि ट्रैफ़िक की समस्या को सुलझाया जा सके। आइए जानते हैं स्कॉटलैंड की उन रणनीतियों के बारे में, जिन्हें भारत में लागू किया जा सकता है:
1. कार ट्रैफ़िक कम करने के लिए एक मार्गदर्शन योजना (Car Traffic Reduction Route Map)
स्कॉटलैंड ने 20% तक कार ट्रैफ़िक को कम करने के लिए एक मार्गदर्शन योजना बनाई है। इसका उद्देश्य कारों के उपयोग को कम करना है, क्योंकि कारों से होने वाले प्रदूषण के कारण वातावरण पर बुरा असर पड़ता है।
भारत में कैसे लागू कर सकते हैं:
2. बस पार्टनरशिप फ़ंड (Bus Partnership Fund)
स्कॉटलैंड ने यह योजना बनाई थी कि वह 500 मिलियन पाउंड का निवेश करेंगे ताकि बसों को प्राथमिकता दी जा सके। इसका उद्देश्य बसों को ट्रैफ़िक से बचाना था, ताकि लोग आराम से यात्रा कर सकें।
भारत में कैसे लागू कर सकते हैं:
3. सक्रिय यात्रा (Active Travel) को बढ़ावा देना
स्कॉटलैंड ने सक्रिय यात्रा के लिए बजट बढ़ाया, जिसमें साइकिल और पैदल यात्रा को बढ़ावा दिया गया। इसका उद्देश्य प्रदूषण कम करना और ट्रैफ़िक को घटाना था।
भारत में कैसे लागू कर सकते हैं:
4. सार्वजनिक परिवहन के लिए समान किराया (Flat-fare Ticketing)
स्कॉटलैंड ने सार्वजनिक परिवहन के लिए एक समान किराया प्रणाली बनाई, ताकि यह अधिक सुलभ और किफ़ायती हो।
भारत में कैसे लागू कर सकते हैं:
5. नई सड़कों का निर्माण रोकना (Halt All Road-building Programmes)
स्कॉटलैंड ने यह पाया कि नई सड़कें बनाने से ट्रैफ़िक बढ़ता है, क्योंकि ज़्यादा सड़कें उपलब्ध होने पर गाड़ियों की संख्या भी बढ़ जाती है। इसलिए उन्होंने नए सड़क निर्माण पर रोक लगाने का फैसला किया।
भारत में कैसे लागू कर सकते हैं:
भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय संपर्क को मज़बूत करने के लिए उठाए गए कदम
भारत में सड़कों पर लगभग 260 मिलियन दो-पहिया वाहन और 50 मिलियन कारें हैं। देश की जनसंख्या के हिसाब से हर 1000 लोगों में 185 दो-पहिया वाहन और 34 कारें हैं। दुनिया में, भारत में प्रति 1000 लोगों पर कारों की संख्या कम है, लेकिन दो-पहिया वाहनों की संख्या बहुत अधिक है। जर्मनी और यूके जैसे विकसित देशों में कारों की संख्या ज़्यादा होती है, जबकि भारत और श्रीलंका जैसे देशों में दो-पहिया वाहनों की संख्या अधिक देखने को मिलती है।
1. रेलवे नेटवर्क: वर्तमान में, भारतीय रेलवे नेटवर्क 68,103 किलोमीटर लंबा है, जो 2014 में 65,810 किलोमीटर था। भारतीय रेलवे एशिया का सबसे बड़ा और दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा रेलवे नेटवर्क है। रेलवे के विस्तार और आधुनिकीकरण के लिए भारतीय सरकार ने 2.55 लाख करोड़ रुपये का बजट दिया है।इसके अलावा, सरकार तीन प्रमुख रेलवे गलियारों का निर्माण करने की योजना बना रही है:
इन योजनाओं से देश की आर्थिक वृद्धि को बढ़ावा मिलेगा।
2. सड़क नेटवर्क: भारत में सड़क नेटवर्क की लंबाई लगभग 66.71 लाख किलोमीटर है, जो दुनिया में दूसरे स्थान पर है। भारत के सड़क नेटवर्क को तीन प्रमुख श्रेणियों में बांटा गया है:
भारत सरकार ने राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण में एक विशेष योजना बनाई है, जिसके तहत 2014-15 से लेकर 2023-24 तक राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क को 60% बढ़ाया गया है। 2023 में यह नेटवर्क 1,46,145 किलोमीटर तक पहुंच चुका है।
3. टोलिंग व्यवस्था: भारत में बढ़ते सड़क नेटवर्क और यातायात को ध्यान में रखते हुए, टोल प्रबंधन और स्मार्ट ट्रांसपोर्टेशन सिस्टम्स (Smart Transportation System) को बेहतर बनाया जा रहा है। भारतीय हाईवे मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड (IHMCL) और नेशनल इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन (NETC) FASTag के माध्यम से अब टोल का भुगतान डिजिटल तरीके से किया जा सकता है, जिससे यात्रा करना और भी आसान हो गया है।
4. मेट्रो नेटवर्क: 2023 तक, भारत के 20 शहरों में लगभग 874 किलोमीटर मेट्रो रेल चल रही है और 986 किलोमीटर मेट्रो का निर्माण जारी है। भारत जल्द ही दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मेट्रो नेटवर्क बना लेगा, जिससे यातायात और कनेक्टिविटी में और सुधार होगा।
संदर्भ:
मुख्य चित्र: मेरठ साउथ आर आर टी एस (RRTS) स्टेशन बोर्ड (Wikimedia)
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