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भगवान विष्णु के सातवें अवतार श्रीराम का जन्मोत्सव, 'राम नवमी' के रूप में मनाया जाता है, जो पंचांग अर्थात हिंदू कैलेंडर में चैत्र माह के नौवें दिन पर पड़ता है। राम नवमी का यह त्योहार आमतौर पर मार्च या अप्रैल में होने वाली चैत्र नवरात्रि के अंत का प्रतीक भी है। यह धर्म, सदाचार और बुराई पर अच्छाई की जीत का उत्सव है, जो नैतिक मूल्यों को बनाए रखने के महत्व की याद दिलाता है। हमारे अपने शहर लखनऊ में, राम नवमी अत्यंत हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है, और भक्त मंदिरों में जाकर प्रार्थनाएं, भजन व कीर्तन और सत्संग आदि में भाग लेते हैं। तो आइए, आज राम नवमी के त्योहार की शुरुआत और इतिहास को समझते हुए जानते हैं कि श्रीराम की जन्मभूमि अयोध्या में यह त्योहार कैसे मनाया जाता है। इसके साथ ही, हम राम नवमी के दौरान पर्यटन के लिए, भारत में कुछ ऐसे बेहतरीन स्थानों के बारे में जानेंगे, जो अपने राम नवमी के उत्सव के लिए जाने जाते हैं। इसके अलावा, हम राम नवमी के दौरान किए जाने वाले कुछ महत्वपूर्ण अनुष्ठानों और प्रथाओं एवं इस त्योहार के दौरान बनने वाले कुछ लोकप्रिय व्यंजनों के बारे में जानेंगे।
राम नवमी की शुरुआत और इतिहास:
राम नवमी के इस त्योहार को मनाने की परंपरा प्राचीन काल से ही चली आ रही है। वाल्मीकिकृत रामायण एवं अन्य पौराणिक ग्रंथों में भगवान राम के जन्म का उल्लेख मिलता है, जिसके अनुसार राजा दशरथ को कोई संतान न होने पर, ऋषि वशिष्ठ के परामर्श पर उन्होंने वे पुत्र कामेष्टि यज्ञ करते हैं। अंततः, उन्हें पुत्र प्राप्ति का सौभाग्य प्राप्त होता है। उनकी बड़ी रानी कौशल्या के गर्भ से श्रीराम का जन्म होता है, जबकि अन्य दो रानियों कैकेयी से भरत तथा सुमित्रा से शत्रुघ्न और लक्ष्मण का जन्म होता है। और तभी से बड़ी ही धूमधाम से राम नवमी का त्योहार मनाया जाता है।
अयोध्या में राम नवमी के त्योहार का उत्सव:
प्रभु श्री राम की जन्मभूमि अयोध्या को भारत के सबसे पवित्र शहरों में से एक माना जाता है। भगवान राम की जन्मस्थली होने के कारण, अयोध्या में राम नवमी को अत्यंत हर्ष और उल्लास के साथ मनाया जाता है। राम नवमी के दौरान, यहां मंदिर, घर, दुकानें दीयों और मोमबत्तियों की भव्य कतारों से जगमगाते हैं। इसके साथ ही यहां पंडाल लगाए जाते हैं, एक भव्य जुलूस निकाला जाता है, जहाँ लोग झंडा लेकर जय श्री राम के नारे लगाते हैं। इस दिन लोग ढोल के साथ भजन और कीर्तन करते हैं। राम नवमी के दौरान, भक्तिमय संगीत और ढोल की निरंतर धारा बहती रहती है।
राम नवमी के दौरान भारत में दर्शनीय स्थल:
सीतामढ़ी, बिहार (Sitamarhi, Bihar): देवी सीता की जन्मस्थली के रूप में प्रसिद्ध, सीतामढ़ी में भी राम नवमी का आनंद बड़े उत्साह के साथ लिया जा सकता है। राम नवमी के दौरान, विशेष रूप से जानकी मंदिर की सुंदरता को देखने के लिए बड़ी संख्या में भक्त सीतामढ़ी आते हैं। सीतामढ़ी में, घरों को दीपों से रोशन किया जाता है, और पवित्र गीतों का जाप पूरे सीतामढ़ी में गुंजायमन होता है। यहां विभिन्न राज्यों से लोग अनुष्ठानों में भाग लेने और पूरी भक्ति के साथ राम नवमी का आनंद लेने के लिए आते हैं। त्योहार के दौरान लगने वाले छोटे मेले इस खूबसूरत जगह का आकर्षण और भी बढ़ा देते हैं।
भद्राचलम, तेलंगाना (Bhadrachalam, Telangana) : गोदावरी नदी के तट पर स्थित, अपने 17वीं सदी पुराने सीता रामचन्द्रस्वामी मंदिर के लिए प्रसिद्ध भद्राचलम, तेलंगाना का एक छोटा सा शहर है, और भारत में राम नवमी देखने के लिए सबसे अच्छी जगहों में से एक है। इसे दक्षिण अयोध्या भी कहा जाता है। भद्राचलम में इस दिन को भगवान राम और देवी सीता के विवाह की वर्षगांठ 'सीताराम कल्याणम' के रूप में मनाया जाता है। हालाँकि, यह उत्सव यहाँ नौ दिनों तक चलता है, नवमी आखिरी दिन राम और सीता के विवाह के साथ मनाई जाती है।
रामेश्वरम, तमिलनाडु (Rameswaram, Tamil Nadu) : भारत के पवित्र शहरों में से एक और विशेष रूप से रामायण से जुड़े होने के लिए प्रसिद्ध रामेश्वरम में राम नवमी का उत्सव अत्यंत धूमधाम से मनाया जाता है।हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, माना जाता है कि रामेश्वरम वही स्थान है, जहां वानरसेना ने "राम सेतु" बनाया था और जहां राम ने रावण को मारने का पाप धोने के लिए भगवान शिव की पूजा की थी।
राम नवमी की पूर्वसंध्या के दौरान, रामेश्वरम में श्री कोठंडारामस्वामी मंदिर की सुंदरता देखने लायक होती है। इस मंदिर को रोशनी और फूलों से अच्छी तरह सजाया जाता है, और यहां राम और सीता के विवाह समारोह को प्रस्तुत किया गया है। भक्त विवाह समारोह में शामिल होकर, भगवान राम के नाम का जाप करते हुए आध्यात्मिकता से सराबोर हो जाते हैं।
वोंटिमिट्टा, आंध्र प्रदेश (Vontimitta, Andhra Pradesh): वोंटिमिट्टा आंध्र प्रदेश का एक छोटा सा शहर है, जहां राम नवमी का उत्सव बड़े ही उत्साह से मनाया जाता है। यह शहर अपने 450 साल पुराने श्री कोडंडाराम स्वामी मंदिर के लिए प्रसिद्ध है, जिसका निर्माण दो लुटेरों वोंटुडु और मित्तुडु ने किया था, जो, माना जाता है कि, मंदिर के निर्माण के बाद पत्थर में बदल गए थे। वे बाद में भगवान राम के अनुयायी बन गए। तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम द्वारा आयोजित, यहां राम नवमी उत्सव 9 दिनों के वार्षिक ब्रम्होत्सवम के हिस्से के रूप में मनाया जाता है।
शिरडी, महाराष्ट्र (Shirdi, Maharashtra): राम नवमी की पूर्व संध्या पर, घरों से लेकर बाज़ारों तक, शिरडी में सभी स्थानों को चमचमाती रोशनी और रंगीन झंडों से सजाया जाता है। शिरडी में राम नवमी का उत्सव विभिन्न समारोहों के साथ जारी रहता है, जिसमें द्वारकामाई में झंडा बदलना, गेहूं की नई बोरी बदलना और भी बहुत कुछ शामिल है! यहां यह उत्सव 3 दिनों तक चलता है।
राम नवमी के दौरान किए जाने वाले महत्वपूर्ण अनुष्ठान:
प्रार्थना और रामायण पाठ: राम नवमी के दिन भक्त जल्दी उठकर, स्नान आदि से निवृत होकर भगवान राम की पूजा-अर्चना करते हैं। इस दिन रामायण के छंदों का पाठ किया जाता है।
उपवास: कई भक्त भक्ति और शुद्धि के प्रतीक के रूप में राम नवमी पर उपवास रखते हैं। इस दौरान, जहां कुछ लोग पूरे दिन का उपवास करते हैं, वहीं कुछ अन्य केवल फलाहार भी करते हैं।
भगवान राम की मूर्ति का अभिषेकम: इस दिन घरों और मंदिरों में दूध, शहद और घी से भगवान राम की मूर्ति का अभिषेक किया जाता है। ऐसा माना जाता है कि प्रभु श्री राम का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
कीर्तन और भजन: भगवान राम के प्रति प्रेम और भक्ति व्यक्त करने के लिए भक्ति गीत और भजन गाए जाते हैं, जिससे एक जीवंत और आध्यात्मिक वातावरण बन जाता है।
प्रसादम: पूजा के बाद, भक्त प्रसाद साझा करते हैं। यह सामुदायिक जुड़ाव और साझाकरण को बढ़ावा देता है।
शोभा यात्राएँ: कई शहरों में भव्य जुलूस निकाले जाते हैं, जिनमें रामायण के दृश्यों को प्रदर्शित किया जाता है।
सुंदरकांड का पाठ: राम नवमी पर भगवान राम के प्रति हनुमानजी की अटूट भक्ति पर ध्यान केंद्रित करते हुए, जगह-जगह सुंदरकांड का पाठ किया जाता है।
राम नवमी पर बनने वाले कुछ लोकप्रिय व्यंजन:
आलू-पूरी: राम नवमी के उत्सव को मनाने के लिए, लोग अपने घरों में आलू-पूरी बनाते हैं। आलू की चटपटी सब्ज़ी के साथ पूरी का स्वाद लोगों के जश्न को दर्शाता है।
सिंघारा-पूरी: सिंघारा पूरी आलू और सिंघाड़े के आटे से बनाई जाती है। विशेष रूप से व्रत के दौरान, आलू की सब्ज़ी या दही के साथ इसका आनंद लिया जाता है।
सूजी का हलवा: सूजी का हलवा, शुद्ध घी और सूखे मेवों की प्रचुर मात्रा के साथ बनाया जाता है, जो उत्तर भारत में अधिकांश घरों में भोजन का मुख्य व्यंजन होता है।
काले चने: सूखे मसालों के साथ पकाए गए काले चने, इस त्योहार की विशेषता हैं।
चावल की खीर: एक अन्य व्यंजन जो विशेष रूप से नवमी के त्योहार के दौरान बनाया जाता है वो चावल की खीर है, जिसका पूरी के साथ आनंद लिया जाता है।
संदर्भ:
मुख्य चित्र: प्रभु श्री राम के जन्म का दृश्य और राम नवमी का उत्सव (Wikimedia, flickr)
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