क्या लखनऊ वासी जानना चाहेंगे कि दुनिया की मिलियनों टन चॉकलेट, कौन खा जा रहा है ?

स्वाद- खाद्य का इतिहास
28-03-2025 09:28 AM
क्या लखनऊ वासी जानना चाहेंगे कि दुनिया की मिलियनों टन चॉकलेट, कौन खा जा रहा है ?

अगर आप लखनऊ में रहते हैं, तो बचपन से ही चॉकलेट (chocolate) का स्वाद आपकी यादों का हिस्सा रहा होगा! लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि सिर्फ़ भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया चॉकलेट की दीवानी है? आश्चर्यजनक रूप से, साल 2022 में दुनियाभर में 8.13 मिलियन टन चॉकलेट खाई गई! इसका मतलब है कि हर व्यक्ति ने औसतन 1 किलोग्राम चॉकलेट का आनंद लिया। लेकिन क्या आपने कभी यह जानने की कोशिश की कि इस मीठे जादू के पीछे सबसे बड़ा योगदान किसका है? आज के इस दिलचस्प लेख में हम दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में चॉकलेट खाने के पैटर्न को विस्तार से समझेंगे! इस संदर्भ में, हम संयुक्त राज्य अमेरिका (USA), यूरोप (Europe), मध्य पूर्व (Middle East) और एशिया प्रशांत (Asia Pacific) क्षेत्रों में चॉकलेट की खपत के रुझान और पैटर्न के बारे में जानेंगे। आखिर में, हम उन कंपनियों पर नज़र डालेंगे जो वैश्विक चॉकलेट बाज़ार में अग्रणी हैं। इनमें नेस्ले, मार्स इनकॉर्पोरेटेड, मोंडेलज़ यूनाइटेड किंगडम, फ़ेरेरो जैसी कंपनियां शामिल हैं, जो दुनिया भर में चॉकलेट का व्यापार करती हैं और करोड़ों लोगों तक इसकी मिठास पहुंचाती हैं।

कोको पाउडर | चित्र स्रोत : Wikimedia

क्या आपने कभी सोचा है कि जिस चॉकलेट को आप बड़े शौक से खाते हैं, उसका कच्चा माल यानी कोको (Cocoa) कहाँ से आता है ? दुनिया में कई देश कोको का उत्पादन करते हैं, लेकिन कुछ देश इस उद्योग में सबसे आगे हैं। आइए जानते हैं, किन देशों का इस बाज़ार पर दबदबा है।

देश2022 उत्पादन (टन में)
आइवरी कोस्ट2.2M
घाना1.1M
इंडोनेशिया667K
इक्वाडोर337K
कैमरून300K
नाइजीरिया280K
ब्राजील274K
पेरू171K
डोमिनिकन गणराज्य76K
अन्य386K


सबसे बड़े कोको उत्पादक देश:- 

साल 2022 में, आइवरी कोस्ट (Ivory Coast) ने 2.2 मिलियन टन कोको का उत्पादन किया, जिससे यह दुनिया का सबसे बड़ा उत्पादक बना। यह अकेले ही वैश्विक उत्पादन का लगभग एक-तिहाई हिस्से उत्पादित करता है। इसके बाद घाना (1.1 मिलियन टन) और इंडोनेशिया (Indonesia (667,000 टन)) का नंबर आता है। दक्षिण अमेरिका (South America) में, इक्वाडोर (Ecuador (337,000 टन)) और ब्राज़ील (274,000 टन) प्रमुख उत्पादक हैं। 

पकने की विभिन्न अवस्थाओं में कोको की फलियाँ | चित्र स्रोत : Wikimedia

इस क्रम को आप नीचे दी गई तालिका से समझ सकते हैं:

हालांकि आइवरी कोस्ट और पश्चिमी अफ्रीका में कोको उत्पादन लंबे समय से विवादों में रहा है। दरअसल जो किसान मूल रूप से इसकी खेती करते हैं, उन्हें इसका बहुत कम लाभ मिलता है। एक साधारण चॉकलेट बार की कीमत में से किसान को सिर्फ़ 5% हिस्सा ही मिलता है। ज़्यादातर किसान प्रतिदिन केवल $1.20 (करीब 100 रुपये) कमाते हैं। साथ ही, लगभग एक-तिहाई कोको उत्पादन उन जंगलों में होता है, जिन्हें संरक्षित किया जाना चाहिए। इसका मतलब यह है कि कोको खेती के कारण वनों की कटाई हो रही है, जिससे पर्यावरण पर बुरा असर पड़ रहा है। इंडोनेशिया, जो दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कोको उत्पादक है, 2022 में 667,000 टन कोको उगाया। यहाँ कोको का 95% उत्पादन छोटे किसानों के द्वारा किया जाता है। 
लेकिन इन किसानों को कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है, जैसे –

  • उनका कम वेतन कम होता है!
  • जलवायु परिवर्तन में वृद्धि होती है!
  • इनके पेड़ पुराने यानी बूढ़े हो रहे हैं, जिससे उत्पादन घट रहा है

इन सभी कारणों से इंडोनेशिया में कोको खेती पहले की तुलना में कम लाभदायक होती जा रही है।

इक्वाडोर और ब्राजील दक्षिण अमेरिका के सबसे बड़े कोको उत्पादक देश रहे हैं। 1900 के दशक की शुरुआत में इक्वाडोर (Ecuador) दुनिया का सबसे बड़ा कोको उत्पादक था। लेकिन फसल की बीमारियों और वैश्विक बाज़ार में बदलाव के कारण इसका दबदबा कम हो गया।

कोको बीन्स | चित्र स्रोत : Wikimedia

आज, इक्वाडोर अपने "सिंगल-ओरिजिन (Single Origin) हाई-क्वालिटी चॉकलेट के लिए मशहूर है। इसके कोको खेत, अमेज़न (Amazon) के घने वर्षावनों में देखे जा सकते हैं, जहाँ बेहतरीन चॉकलेट बनाने के लिए उन्नत किस्म के कोको की खेती होती है। 

पूरी दुनिया में लोग चॉकलेट को अलग-अलग वजहों से पसंद करते हैं। 
आइए जानते हैं कि किन देशों में चॉकलेट की खपत सबसे ज़्यादा होती है और इसके पीछे क्या कारण हैं?

1. अमेरिका (USA): चॉकलेट का दूसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता:- स्विट्ज़रलैंड (Switzerland) के बाद, अमेरिका दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चॉकलेट उपभोक्ता है। यहां एक औसत व्यक्ति सालाना करीब 19.8 पाउंड चॉकलेट खा जाता है, यानी हर हफ़्ते लगभग तीन बार चॉकलेट का सेवन करता है।

अमेरिका में सबसे ज़्यादा पसंद की जाने वाली चॉकलेट:

- मिल्क चॉकलेट (सबसे लोकप्रिय)

- डार्क चॉकलेट (धीरे-धीरे लोकप्रिय हो रही है)

- व्हाइट चॉकलेट (कम लेकिन एक खास वर्ग में पसंद की जाती है)

चॉकलेट से जुड़े अन्य पसंदीदा उत्पादों में शामिल हैं:

  • आइसक्रीम
  • कुकीज़
  • केक

जानकार मानते हैं कि भविष्य में चॉकलेट की खपत और अधिक बढ़ेगी, इसके प्रमुख कारणों में शामिल हैं:-

  • डार्क चॉकलेट की बढ़ती लोकप्रियता – सेहत के लिए फायदेमंद मानी जाती है।
  • हिस्पैनिक आबादी में वृद्धि – इस समुदाय में चॉकलेट खाने का ट्रेंड ज़्यादा है।
  • प्रीमियम चॉकलेट की मांग बढ़ रही है – लोग अब बेहतर क्वालिटी वाली चॉकलेट पसंद कर रहे हैं।

चॉकलेट की सबसे ज़्यादा खपत यूरोप में होती है। यहां हर व्यक्ति औसतन 5 किलोग्राम चॉकलेट सालाना खाता है, जो वैश्विक औसत 0.9 किलोग्राम से काफ़ी ज़्यादा है।

यूरोप में चॉकलेट खाने वाले टॉप 3 देश:

1. स्विट्ज़रलैंड – 11 किलोग्राम प्रति व्यक्ति प्रति वर्ष

2 . जर्मनी – 9.1 किलोग्राम प्रति व्यक्ति प्रति वर्ष

3. एस्टोनिया – 8.3 किलोग्राम प्रति व्यक्ति प्रति वर्ष

यूरोप में चॉकलेट सिर्फ़ खाने की चीज़ नहीं, बल्कि एक संस्कृति का हिस्सा बन चुकी है। साथ ही यूरोप के अलावा मध्य पूर्व में भी चॉकलेट का बाज़ार बहुत तेजी के साथ बढ़ रहा है। 2022 में इसकी कुल कीमत 13.8 बिलियन अमेरिकी डॉलर थी! 2028 तक इसकी कीमत बढ़कर 14.07 बिलियन अमेरिकी डॉलर होने का अनुमान है।

चित्र स्रोत : Wikimedia

इस बढ़त के पीछे मुख्य कारणों में शामिल हैं:

- चॉकलेट के स्वास्थ्य लाभों को लेकर जागरूकता बढ़ रही है।

- शहरीकरण तेज़ी से हो रहा है, जिससे पश्चिमी जीवनशैली को अपनाया जा रहा है।

आइए अब मध्य पूर्व में चॉकलेट के सबसे बड़े बाज़ारों पर एक नज़र डालते हैं:

1. यू ए ई (संयुक्त अरब अमीरात (UAE)) – यह मध्य पूर्व का सबसे बड़ा बाज़ार है, जहां अंतरराष्ट्रीय चॉकलेट ब्रांडों की बहुत मांग है। यहां बड़ी प्रवासी आबादी रहती है, जो चॉकलेट की खपत को बढ़ा रही है।

2. सऊदी अरब (Saudi Arabia) – बड़ी आबादी और मज़बूत अर्थव्यवस्था के कारण यह बाज़ार तेजी से बढ़ रहा है।

3. इज़राइल (Israel)– इज़राइल छोटा लेकिन तेज़ी से बढ़ता बाज़ार है। यहां लोगों की आय बढ़ रही है और चॉकलेट के स्वास्थ्य लाभों के बारे में जागरूकता बढ़ रही है।

चित्र स्रोत : Wikimedia

आइए अब एक नज़र एशिया-प्रशांत में चॉकलेट के बढ़ते हुए बाज़ार, उपभोग पैटर्न और रुझानों पर डालते हैं: 

1. एशिया-प्रशांत में चॉकलेट की बढ़ती खपत: पश्चिमी देशों की तुलना में एशिया-प्रशांत क्षेत्र में चॉकलेट की खपत अभी भी सीमित है। लेकिन, हाल के वर्षों में इसमें तेज़ी से बढ़ोतरी हो रही है। पश्चिमी जीवनशैली का प्रभाव और चॉकलेट के स्वास्थ्य लाभों को लेकर बढ़ती जागरूकता इसकी प्रमुख वजहें हैं। खासकर चीन और भारत इस बाज़ार में सबसे तेजी से बढ़ने वाले देशों में शामिल हैं।

2. बदलते रुझान: फेयर ट्रेड और फ्लेवर इनोवेशन:- फ़ेयर ट्रेड चॉकलेट (fair trade chcolates) की मांग और नए-नए फ्लेवर की खोज बाज़ार को आगे बढ़ा रही है। अभी तक मिल्क चॉकलेट सबसे ज़्यादा पसंद की जाती थी, लेकिन डार्क और कंपाउंड चॉकलेट की लोकप्रियता भी तेजी से बढ़ रही है। डार्क चॉकलेट का स्वाद लंबे समय तक बना रहता है, जिससे यह लोगों की पहली पसंद बनती जा रही है।

कई एशियाई देशों में चॉकलेट को अब भी एक लक्ज़री प्रोडक्ट माना जाता है। इसका मुख्य कारण उत्पादन में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल की ऊंची कीमतें हैं, जिनकी वजह से चॉकलेट के दाम बढ़ जाते हैं। इस बाज़ार में एक सामान्य चॉकलेट बार की कीमत 2 से 20 अमेरिकी डॉलर तक होती है, जो इसे आम लोगों की पहुंच से थोड़ा दूर कर सकती है। डार्क चॉकलेट को सेहत के लिए फ़ायदेमंद माना जाता है, इसलिए लोग इसे कन्फेक्शनरी प्रोडक्ट्स (confectionary products) में हेल्दी विकल्प के तौर पर देखने लगे हैं। भारत इस क्षेत्र में चॉकलेट का सबसे बड़ा उपभोक्ता बनता जा रहा है। 2022 में, लगभग 44% भारतीय उपभोक्ता हेल्दी चॉकलेट के लिए ज़्यादा पैसे खर्च करने को तैयार थे।

अगर आप चॉकलेट पसंद करते हैं, तो आपने भी किटकैट, स्निकर्स, कैडबरी या नुटेला जैसे ब्रांड जरूर खाए होंगे। लेकिन क्या आप जानते हैं कि ये सभी चॉकलेट किन बड़ी कंपनियों के प्रोडक्ट हैं? 
आगे हम दुनिया की टॉप 5 चॉकलेट कंपनियों के बारे में जानेंगे, जो सालाना अरबों डॉलर की कमाई करती हैं:

चित्र स्रोत : Wikimedia

1. नेस्ले (Nestle (वार्षिक राजस्व: $102.59 बिलियन)):- नेस्ले, जो एक स्विस कंपनी है, 1866 से चॉकलेट मार्केट में टॉप पर बनी हुई है। किटकैट, एयरो और मिल्कीबार जैसे पॉपुलर ब्रांड इसी के प्रोडक्ट हैं। ये कंपनी सिर्फ़ स्वाद ही नहीं, बल्कि क्वालिटी और इनोवेशन पर भी पूरा ध्यान देती है। इसके अलावा, नेस्ले टिकाऊ खेती और स्वस्थ प्रोडक्ट ऑप्शन पर भी ध्यान केंद्रित करती है, ताकि बदलते कस्टमर की ज़रूरतों को पूरा कर सके।

2. मार्स इनकॉर्पोरेटेड (वार्षिक राजस्व: $45 बिलियन):- मार्स एक अमेरिकन कंपनी है, जिसने 1911 में अपनी शुरुआत की थी। इसके फेमस ब्रांड्स में स्निकर्स, मार्स बार और M&M's शामिल हैं। कंपनी ने मिल्की वे और स्निकर्स जैसे प्रोडक्ट लॉन्च करके बाज़ार में बड़ी पहचान बनाई। मार्स की खासियत है कि यह अपनी कोको सप्लाई चेन में क्वालिटी और इथिकल सोर्सिंग को बनाए रखती है, ताकि उपभोक्ताओं को बेस्ट चॉकलेट मिल सके।

3. मोंडेलेज़ यू के (Mondelez United Kingdom (वार्षिक राजस्व: $36.016 बिलियन)):मोंडेलेज़ यू के, मोंडेलेज़ इंटरनेशनल की सहायक कंपनी है और इसकी शुरुआत 1824 में कैडबरी के साथ हुई थी। कैडबरी, टोबलरोन और मिल्का इसके सबसे लोकप्रिय ब्रांड्स हैं। यह सिर्फ़ चॉकलेट ही नहीं, बल्कि बिस्किट, गम और कैंडी के प्रोडक्शन में भी आगे है। कंपनी लगातार नए फ्लेवर्स और बेहतर टेक्सचर के साथ इनोवेटिव प्रोडक्ट्स लाने पर काम कर रही है।

चित्र स्रोत : Flickr

4. क्राफ़्ट हाइन्ज़ (Kraft Heinz (वार्षिक राजस्व: $26.64 बिलियन)):- क्राफ़्ट हेंज़ दुनिया की सबसे बड़ी फूड कंपनियों में से एक है। यह कैडबरी, मिल्का, टोबलरोन, लिंड्ट और घिरार्देली जैसे ब्रांड्स की मालिक है। इस कंपनी का ध्यान हेल्दी चॉकलेट ऑप्शन्स और सस्टेनेबिलिटी इनिशिएटिव्स पर है। अपनी रणनीतियों की वजह से यह घरेलू और इंटरनेशनल दोनों मार्केट में मज़बूती से टिकी हुई है।

5. फ़ेरेरो (Ferrero (वार्षिक राजस्व: $17 बिलियन)):- फ़ेरेरो एक इटैलियन कंपनी है, जिसे 1946 में शुरू किया गया था। यह अपने नुटेला, फ़ेरेरो रोचर और किंडर चॉकलेट के लिए मशहूर है। इस ब्रांड की खासियत है कि यह प्रीमियम इंग्रीडिएंट्स और अच्छी पैकेजिंग पर पर अपना ध्यान केंद्रित करता है। फ़ेरेरो ने अपने प्रोडक्ट्स में नए फ्लेवर और वेराइटी जोड़कर मार्केट में अपनी मज़बूत पकड़ बनाई है। साथ ही, यह टिकाऊ सोर्सिंग और क्वालिटी को लेकर भी पूरी तरह कमिटेड है।

 

संदर्भ: 

https://tinyurl.com/2ynz4aw4
https://tinyurl.com/2868degr
https://tinyurl.com/22m4jd4s
https://tinyurl.com/254qjfg7

मुख्य चित्र स्रोत : Wikimedia 

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