जौनपुर में बढ़ती ट्रैफ़िक समस्याएँ – कैसे ए आई ला सकता है इन परेशानियों का समाधान ?

नगरीकरण- शहर व शक्ति
02-04-2025 09:15 AM
जौनपुर में बढ़ती ट्रैफ़िक समस्याएँ – कैसे ए आई ला सकता है इन परेशानियों का समाधान ?

आजकल जौनपुर में ट्रैफ़िक जाम एक गंभीर समस्या बनती जा रही है, खासकर मुख्य बाज़ार और बस स्टैंड के आसपास। गाड़ियों की बढ़ती संख्या और संकरी सड़कों के कारण ट्रैफ़िक जाम आम हो गया है, जिससे लोगों को देरी, प्रदूषण और तनाव का सामना करना पड़ता है। इस समस्या को हल करने के लिए, भारत में ट्रैफ़िक को और बेहतर तरीके से प्रबंधित करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल किया जा रहा है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस-पावर्ड ट्रैफ़िक मैनेज़मेंट सिस्टम (Artifical Intelligence Powered Traffic Management System),रियल-टाइम ट्रैफ़िक डेटा (real time traffic data) का विश्लेषण करते हैं और ट्रैफ़िक सिग्नल को स्वचालित रूप से नज़र रखते हैं, जिससे जाम कम होता है। दिल्ली और बेंगलुरु जैसे शहरों में ए आई ट्रैफ़िक को सुचारू बनाने, इंतजार का समय कम करने और प्रदूषण को घटाने में मदद कर रहा है।

आज हम भारत में ट्रैफ़िक प्रबंधन में ए आई (AI) की भूमिका पर चर्चा करेंगे। हम स्मार्ट सिस्टम और नई तकनीकों के बारे में जानेंगे। फिर हम बी ए टी सी एस (BATCS), आई टी एम एस (ITMS) और ओ डी वी ए एस (ODWAS) जैसे प्रमुख ए आई-पावर्ड ट्रैफ़िक कंट्रोल सिस्टम के बारे में बात करेंगे, जो ट्रैफ़िक को बेहतर तरीके से नियंत्रित करने और सड़क सुरक्षा को बढ़ाने में मदद करते हैं। इसके बाद, हम सार्वजनिक परिवहन और निजी परिवहन की तुलना करेंगे। अंत में, हम यह समझेंगे कि सार्वजनिक परिवहन अक्सर क्यों ज़्यादा प्रभावी और पर्यावरण के लिए बेहतर होता है।

आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग | चित्र स्रोत : wikimedia 

ए आई का ट्रैफ़िक प्रबंधन में भूमिका

ए आई ने ट्रैफ़िक कंट्रोल को नया रूप देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, क्योंकि यह रियल-टाइम निगरानी, सिग्नल को बदलने और भविष्यवाणी करने में मदद करता है। इंटेलिजेंट ट्रैफ़िक मैनेज़मेंट सिस्टम (ITMS) ए आई की तकनीकों जैसे मशीन लर्निंग (Machine Learning), कंप्यूटर विज़न (computer vision) और इंटरनेट ऑफ़ थिंग्स (IoT) डिवाइस का उपयोग करते हैं ताकि ट्रैफ़िक को बेहतर तरीके से चलाया जा सके, जाम को कम किया जा सके और सुरक्षा को बढ़ाया जा सके। ये सिस्टम बड़ी मात्रा में ट्रैफ़िक डेटा का विश्लेषण करते हैं, पैटर्न (Pattern) पहचानते हैं, ट्रैफ़िक जाम का अनुमान लगाते हैं और ट्रैफ़िक को सुचारू रूप से चलाने के लिए कदम उठाते हैं।

वैश्विक इंटेलिजेंट ट्रैफ़िक मैनेज़मेंट सिस्टम बाज़ार इस बढ़ती हुई प्रवृत्ति को दर्शाता है, जहां बाज़ार का आकार 2024 में USD 12.91 बिलियन से बढ़कर 2034 तक लगभग USD 47.10 बिलियन होने का अनुमान है, जो 13.82% की वार्षिक वृद्धि दर से बढ़ेगा। स्मार्ट सिटी मिशन (Smart city mission) और बढ़ती हुई शहरीकरण के साथ, भारत इस विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।

भारत में ए आई (AI) और ट्रैफ़िक नियंत्रण

भारत में ट्रैफ़िक समस्याओं को हल करने के लिए ए आई का उपयोग तेज़ी से बढ़ रहा है। बेंगलुरु में अनुकूली ट्रैफ़िक सिग्नल नियंत्रण प्रणाली (Bengaluru Adaptive Traffic Control System (BATCS), पुणे एक्सप्रेसवे पर एकीकृत ट्रैफ़िक प्रबंधन प्रणाली (Pune Expressway’s Intelligent Traffic Management System (ITMS), पंजाब पुलिस के AI-आधारित समाधान, और सार्वजनिक परिवहन के लिए ओवरलोड डायनामिक वेट असेसमेंट सिस्टम (Onboard Driver Assistance Warning System (ODWAS) जैसे प्रयास यह दर्शाते हैं कि AI सड़क सुरक्षा बढ़ाने, ट्रैफ़िक जाम कम करने और ट्रैफ़िक व्यवस्था को बेहतर बनाने में कितनी मदद कर सकता है।

दिल्ली में ट्रैफ़िक जाम | चित्र स्रोत : wikimedia 

हाल के वर्षों में शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में ट्रैफ़िक का तेज़ी से बढ़ना, भारत के परिवहन क्षेत्र के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। ट्रैफ़िक जाम, सड़क दुर्घटनाएं और प्रदूषण जैसी समस्याएं गंभीर होती जा रही हैं, जिसके कारण पारंपरिक ट्रैफ़िक नियंत्रण तरीकों से आगे बढ़कर नए और उन्नत समाधानों की आवश्यकता महसूस हो रही है। चौराहों पर बढ़ती ट्रैफ़िक समस्याओं को देखते हुए, ए आई आधारित परिवहन प्रणाली (ITS) एक प्रभावी समाधान के रूप में उभरकर सामने आई है, जो इन चुनौतियों को बेहतर तरीके से हल कर सकती है।

भारत में ए आई  से ट्रैफ़िक नियंत्रण की नई पहल

  • बेंगलुरु का बी ए टी सी एस(Bengaluru Adaptive Traffic Control System (BATCS) सिस्टम – बेंगलुरु में ट्रैफ़िक की गंभीर समस्या को हल करने के लिए बेंगलुरु अनुकूली ट्रैफ़िक नियंत्रण प्रणाली शुरू की गई है। यह ए आई से चलने वाला सिस्टम 165 चौराहों पर ट्रैफ़िक सिग्नल को ज़रूरत के हिसाब से बदलता है, जिससे जाम कम होता है और लोग जल्दी अपनी मंज़िल तक पहुंच सकते हैं। इसे सी-डी ए सी(C-DAC) संस्था के साथ मिलकर तैयार किया गया है।
    पुणे एक्सप्रेसवे का आई टी एम एस(Pune Expressway’s Intelligent Traffic Management System (ITMS) सिस्टम – महाराष्ट्र के पुणे एक्सप्रेसवे पर ए आई -आधारित आई टी एम एस(एकीकृत ट्रैफ़िक प्रबंधन प्रणाली) लगाई गई है। यह सिस्टम ट्रैफ़िक नियम तोड़ने वालों की पहचान करता है, सड़क पर गाड़ियों की आवाजाही को बेहतर बनाता है और सफ़र को ज़्यादा सुरक्षित बनाता है।
  • पंजाब पुलिस का ए आई इस्तेमाल – पंजाब पुलिस ने ट्रैफ़िक को सुरक्षित बनाने के लिए ए आई तकनीक का इस्तेमाल शुरू किया है। यह सिस्टम हादसों वाले इलाकों की पहचान करता है, ट्रैफ़िक नियमों के उल्लंघन पर नजर रखता है और दुर्घटनाएं रोकने के लिए ज़रूरी कदम उठाता है।
  • ओ डी डबल्यू एस (Onboard Driver Assistance Warning System (ODWAS) सिस्टम – भारत सरकार ने अप्रैल 2022 में ऑनबोर्ड ड्राइवर असिस्टेंस वार्निंग सिस्टम नाम की योजना शुरू की। यह सिस्टम बस और दूसरे सार्वजनिक वाहनों में लगाया गया है। इसमें सेंसर लगे होते हैं जो गाड़ी के आसपास और ड्राइवर की गतिविधियों को देखते हैं और दुर्घटनाओं से बचाने के लिए समय पर चेतावनी देते हैं।
ट्रैफ़िक मैनेजमेंट सेंटर (Traffic Management Centre), बैंगलोर | चित्र स्रोत : wikimedia 

सार्वजनिक परिवहन बनाम निजी परिवहन – कौन बेहतर है?

भारत में ज़्यादातर लोग रोज़ाना सफ़र के लिए सार्वजनिक परिवहन (बस, ट्रेन, मेट्रो आदि) का इस्तेमाल करते हैं, हालांकि यह हमेशा आरामदायक नहीं होता। दूसरी ओर, निजी वाहन (कार, बाइक) सुविधा देते हैं लेकिन महंगे होते हैं। आइए दोनों की तुलना कुछ महत्वपूर्ण बिंदुओं पर करें –

  • खर्च – सार्वजनिक परिवहन निजी वाहनों की तुलना में सस्ता होता है। इसमें एक ही वाहन में कई लोग सफ़र करते हैं, जिससे प्रति व्यक्ति खर्च कम हो जाता है। निजी वाहन खरीदने के लिए एक बड़ी रकम लगती है और इसका पूरा खर्च आपको ही उठाना पड़ता है। हालांकि, पुराना वाहन खरीदकर इस खर्च को कम किया जा सकता है।
  • रखरखाव – सार्वजनिक परिवहन का फ़ायदा यह है कि इसमें सफ़र करने वाले को वाहन के रखरखाव की कोई चिंता नहीं होती। सफ़ाई, मरम्मत, पेट्रोल-डीज़ल जैसे खर्च निजी वाहन मालिक को ही उठाने पड़ते हैं। हालांकि, कुछ कंपनियां ग्राहकों को मुफ़्त सर्विस जैसी सुविधाएं भी देती हैं।
  • सुरक्षा – सुरक्षा आज के समय में एक बड़ा मुद्दा है। सार्वजनिक परिवहन में आमतौर पर ज़्यादा लोग होते हैं, जिससे यह सुरक्षित माना जाता है, लेकिन अगर आप अकेले सफ़र कर रहे हों, तो यह असुरक्षित भी हो सकता है। इसके अलावा, सार्वजनिक वाहनों में भीड़ की वजह से बीमारियों के फैलने का खतरा भी रहता है। निजी वाहन में आप खुद गाड़ी चलाते हैं, जिससे सुरक्षा बेहतर होती है।
  • यात्रियों की संख्या – अगर आपका ग्रुप बड़ा है, तो बस या मेट्रो जैसी सार्वजनिक परिवहन सेवाएं बेहतर हैं क्योंकि निजी वाहन में सीमित सीटें होती हैं।
  • समय की सुविधा – सार्वजनिक परिवहन सरकारी नियमों और आम लोगों की ज़रूरत के हिसाब से चलता है, इसलिए यह हमेशा आपके समय के अनुसार उपलब्ध नहीं होता। अगर आप तय समय पर सफ़र करना पसंद करते हैं और यात्रा में समय बर्बाद नहीं करना चाहते, तो निजी वाहन ज़्यादा सुविधाजनक रहेगा।
  • रूट पर नियंत्रण – सार्वजनिक परिवहन तय रास्तों पर ही चलता है और यह ज़रूरी नहीं कि वह आपके पिकअप पॉइंट (Pickup Point) या मंज़िल के पास से गुज़रे। कई बार आपको रास्ते में वाहन बदलने की ज़रूरत भी पड़ सकती है। जबकि निजी वाहन में आपको पूरी आज़ादी होती है, आप अपनी ज़रूरत के हिसाब से कहीं भी जा सकते हैं।
चित्र स्रोत : wikimedia 

क्यों सार्वजनिक परिवहन कारों से बेहतर है ?

आज के दौर में कारें सुविधाजनक और पसंदीदा यात्रा साधन बन गई हैं, लेकिन यह भी सच है कि वे प्रदूषण और ट्रैफ़िक जाम बढ़ाने में सबसे बड़ी भूमिका निभाती हैं। कारों की संख्या बढ़ने से पर्यावरण, अर्थव्यवस्था और जलवायु परिवर्तन पर बुरा असर पड़ रहा है। इसी वजह से, सरकार और शहरी योजनाकार सार्वजनिक परिवहन को एक बेहतर विकल्प के रूप में देख रहे हैं, जिससे यातायात की समस्या कम हो और शहरों में टिकाऊ (sustainable) यातायात प्रणाली विकसित की जा सके।

सार्वजनिक परिवहन न सिर्फ़ पर्यावरण के अनुकूल होता है, बल्कि यह लोगों को हरित (ग्रीन) और कुशल यात्रा साधनों को अपनाने के लिए प्रेरित करता है। आइए जानें कि सार्वजनिक परिवहन कारों से क्यों बेहतर है।

 

संदर्भ: 

https://tinyurl.com/5n8kzf5u 

https://tinyurl.com/2yb6ktrd 

https://tinyurl.com/25ns3b3m 

मुख्य चित्र: ट्रैफ़िक जाम और चिंतन करता एक रोबोट  (flickr, wikimedia)  

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