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आजकल जौनपुर में ट्रैफ़िक जाम एक गंभीर समस्या बनती जा रही है, खासकर मुख्य बाज़ार और बस स्टैंड के आसपास। गाड़ियों की बढ़ती संख्या और संकरी सड़कों के कारण ट्रैफ़िक जाम आम हो गया है, जिससे लोगों को देरी, प्रदूषण और तनाव का सामना करना पड़ता है। इस समस्या को हल करने के लिए, भारत में ट्रैफ़िक को और बेहतर तरीके से प्रबंधित करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल किया जा रहा है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस-पावर्ड ट्रैफ़िक मैनेज़मेंट सिस्टम (Artifical Intelligence Powered Traffic Management System),रियल-टाइम ट्रैफ़िक डेटा (real time traffic data) का विश्लेषण करते हैं और ट्रैफ़िक सिग्नल को स्वचालित रूप से नज़र रखते हैं, जिससे जाम कम होता है। दिल्ली और बेंगलुरु जैसे शहरों में ए आई ट्रैफ़िक को सुचारू बनाने, इंतजार का समय कम करने और प्रदूषण को घटाने में मदद कर रहा है।
आज हम भारत में ट्रैफ़िक प्रबंधन में ए आई (AI) की भूमिका पर चर्चा करेंगे। हम स्मार्ट सिस्टम और नई तकनीकों के बारे में जानेंगे। फिर हम बी ए टी सी एस (BATCS), आई टी एम एस (ITMS) और ओ डी वी ए एस (ODWAS) जैसे प्रमुख ए आई-पावर्ड ट्रैफ़िक कंट्रोल सिस्टम के बारे में बात करेंगे, जो ट्रैफ़िक को बेहतर तरीके से नियंत्रित करने और सड़क सुरक्षा को बढ़ाने में मदद करते हैं। इसके बाद, हम सार्वजनिक परिवहन और निजी परिवहन की तुलना करेंगे। अंत में, हम यह समझेंगे कि सार्वजनिक परिवहन अक्सर क्यों ज़्यादा प्रभावी और पर्यावरण के लिए बेहतर होता है।
ए आई का ट्रैफ़िक प्रबंधन में भूमिका
ए आई ने ट्रैफ़िक कंट्रोल को नया रूप देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, क्योंकि यह रियल-टाइम निगरानी, सिग्नल को बदलने और भविष्यवाणी करने में मदद करता है। इंटेलिजेंट ट्रैफ़िक मैनेज़मेंट सिस्टम (ITMS) ए आई की तकनीकों जैसे मशीन लर्निंग (Machine Learning), कंप्यूटर विज़न (computer vision) और इंटरनेट ऑफ़ थिंग्स (IoT) डिवाइस का उपयोग करते हैं ताकि ट्रैफ़िक को बेहतर तरीके से चलाया जा सके, जाम को कम किया जा सके और सुरक्षा को बढ़ाया जा सके। ये सिस्टम बड़ी मात्रा में ट्रैफ़िक डेटा का विश्लेषण करते हैं, पैटर्न (Pattern) पहचानते हैं, ट्रैफ़िक जाम का अनुमान लगाते हैं और ट्रैफ़िक को सुचारू रूप से चलाने के लिए कदम उठाते हैं।
वैश्विक इंटेलिजेंट ट्रैफ़िक मैनेज़मेंट सिस्टम बाज़ार इस बढ़ती हुई प्रवृत्ति को दर्शाता है, जहां बाज़ार का आकार 2024 में USD 12.91 बिलियन से बढ़कर 2034 तक लगभग USD 47.10 बिलियन होने का अनुमान है, जो 13.82% की वार्षिक वृद्धि दर से बढ़ेगा। स्मार्ट सिटी मिशन (Smart city mission) और बढ़ती हुई शहरीकरण के साथ, भारत इस विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।
भारत में ए आई (AI) और ट्रैफ़िक नियंत्रण
भारत में ट्रैफ़िक समस्याओं को हल करने के लिए ए आई का उपयोग तेज़ी से बढ़ रहा है। बेंगलुरु में अनुकूली ट्रैफ़िक सिग्नल नियंत्रण प्रणाली (Bengaluru Adaptive Traffic Control System (BATCS), पुणे एक्सप्रेसवे पर एकीकृत ट्रैफ़िक प्रबंधन प्रणाली (Pune Expressway’s Intelligent Traffic Management System (ITMS), पंजाब पुलिस के AI-आधारित समाधान, और सार्वजनिक परिवहन के लिए ओवरलोड डायनामिक वेट असेसमेंट सिस्टम (Onboard Driver Assistance Warning System (ODWAS) जैसे प्रयास यह दर्शाते हैं कि AI सड़क सुरक्षा बढ़ाने, ट्रैफ़िक जाम कम करने और ट्रैफ़िक व्यवस्था को बेहतर बनाने में कितनी मदद कर सकता है।
हाल के वर्षों में शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में ट्रैफ़िक का तेज़ी से बढ़ना, भारत के परिवहन क्षेत्र के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। ट्रैफ़िक जाम, सड़क दुर्घटनाएं और प्रदूषण जैसी समस्याएं गंभीर होती जा रही हैं, जिसके कारण पारंपरिक ट्रैफ़िक नियंत्रण तरीकों से आगे बढ़कर नए और उन्नत समाधानों की आवश्यकता महसूस हो रही है। चौराहों पर बढ़ती ट्रैफ़िक समस्याओं को देखते हुए, ए आई आधारित परिवहन प्रणाली (ITS) एक प्रभावी समाधान के रूप में उभरकर सामने आई है, जो इन चुनौतियों को बेहतर तरीके से हल कर सकती है।
भारत में ए आई से ट्रैफ़िक नियंत्रण की नई पहल
सार्वजनिक परिवहन बनाम निजी परिवहन – कौन बेहतर है?
भारत में ज़्यादातर लोग रोज़ाना सफ़र के लिए सार्वजनिक परिवहन (बस, ट्रेन, मेट्रो आदि) का इस्तेमाल करते हैं, हालांकि यह हमेशा आरामदायक नहीं होता। दूसरी ओर, निजी वाहन (कार, बाइक) सुविधा देते हैं लेकिन महंगे होते हैं। आइए दोनों की तुलना कुछ महत्वपूर्ण बिंदुओं पर करें –
क्यों सार्वजनिक परिवहन कारों से बेहतर है ?
आज के दौर में कारें सुविधाजनक और पसंदीदा यात्रा साधन बन गई हैं, लेकिन यह भी सच है कि वे प्रदूषण और ट्रैफ़िक जाम बढ़ाने में सबसे बड़ी भूमिका निभाती हैं। कारों की संख्या बढ़ने से पर्यावरण, अर्थव्यवस्था और जलवायु परिवर्तन पर बुरा असर पड़ रहा है। इसी वजह से, सरकार और शहरी योजनाकार सार्वजनिक परिवहन को एक बेहतर विकल्प के रूप में देख रहे हैं, जिससे यातायात की समस्या कम हो और शहरों में टिकाऊ (sustainable) यातायात प्रणाली विकसित की जा सके।
सार्वजनिक परिवहन न सिर्फ़ पर्यावरण के अनुकूल होता है, बल्कि यह लोगों को हरित (ग्रीन) और कुशल यात्रा साधनों को अपनाने के लिए प्रेरित करता है। आइए जानें कि सार्वजनिक परिवहन कारों से क्यों बेहतर है।
संदर्भ:
https://tinyurl.com/25ns3b3m
मुख्य चित्र: ट्रैफ़िक जाम और चिंतन करता एक रोबोट (flickr, wikimedia)
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