रामपुर में उपलब्ध खान खनिज़ और उससे जुड़ी गतिविधियाँ

मेरठ

 02-01-2018 07:30 PM
खनिज

रामपुर हिमालय के तराई क्षेत्र में स्थित है। यहाँ पर कोसी नदी जो हिमालय से आती है अपने साथ सुफल और उपजाऊ जमीन के लिए जरूरती तोहफे भी लाती है। इसी कारण यहाँ की प्रकृति उर्वरकता है और कोसी से लाए जलोढ़ गाद और समकालीन कछारी तलीय मिट्टी यह और संपन्न है। यह मिट्टी खेती के लिए काफी अच्छी है मगर रामपुर में ज्यादा खान-खनिज़ नहीं पाए जाता। यहाँ का सबसे बड़ा खनिज़ का स्त्रोत है बालू। रामपुर में बालू खनन यह एक बहोत बड़ा उद्योग है। उत्तर प्रदेश माइनर मिनरल्स रूल्स (कन्सेशन,1963) के अनुसार रामपुर के लिए बालू खनन और मोरम खनन के लिए एक एकड़ सालाना का डेड रेंट 3000 रुपये और 1400 रुपये था और राजशुल्क मतलब रॉयल्टी 12 रुपये से लेकर 8 रुपये थी। रामपुर में बालू अच्छी मात्रा में उपलब्ध थी मगर अवैध बालू उत्खन की वजह से यहाँ उसकी मात्रा दिन ब दिन घटते जा रही है। इस वजह से नाही सिर्फ नदियों और बालू के किनारों का अपक्षरण होता है बल्कि प्राकृतिक जैविकता पर भी काफी बुरा असर होता है। उत्तर प्रदेश सरकार का डायरेक्टरेट ऑफ़ जियोलॉजी एंड माइनिंग विभाग उत्तर प्रदेश की खनिज़ सम्पति से सम्बंधित बहोत परिवर्तनात्‍मक कार्य कर रहा है। वर्त्तमान समय में उन्होंने खनिज़ अन्वेषण कार्यक्रम शुरू किया है जिसके तहत वे पुरे उत्तरप्रदेश के जिलो में उपलब्ध खनिज़ सम्पंदा का मुआयना करेंगे। रामपुर में भी वे बालू और मोरम के लिए अन्वेषण कर रहे हैं। उनके इस कार्यक्रम का आलेख्यपत्र उनकी वेबसाइट पर उपलब्ध है जो यहाँ पर जोड़ा गया है। इससे उनके पूर्ण कार्यक्रम की रूपरेषा और अबतक किया गया तथा आगे के कार्य की संपूर्ण जानकारी मिलती है। उसमे रामपुर को उन्होंने बालू और मुरुम की उपलब्धता के लिए अधोरेखित किया है। 1. डायरेक्टरेट ऑफ़ जियोलॉजी एंड माइनिंग, उत्तर प्रदेश: http://mineral.up.nic.in/ 2. डिस्ट्रिक्ट सर्वे रिपोर्ट फॉर सैंड माइनिंग, डिस्ट्रिक्ट उत्तर प्रदेश: http://rampur.nic.in/rampur%20sand.pdf 3. उत्तर प्रदेश माइनर मिनरल्स रूल्स (कन्सेशन,1963): http://ibm.gov.in/writereaddata/files/10262016093010Mineral%20digest%20UP.pdf 4. जियोलॉजी एंड मिनरल रिसोर्सेज ऑफ़ इंडिया, जियोलाजिकल सर्वे ऑफ़ इंडिया, मिनिस्ट्री ऑफ़ माइन्स, गवर्नमेन्ट ऑफ़ इंडिया

RECENT POST

  • प्रागैतिहासिक काल का एक मात्र भूमिगतमंदिर माना जाता है,अल सफ़्लिएनी हाइपोगियम
    वास्तुकला 1 वाह्य भवन

     03-07-2022 10:58 AM


  • तनावग्रस्त लोगों के लिए संजीवनी बूटी साबित हो रही है, संज्ञानात्मक व्यवहार थेरेपी
    विचार 2 दर्शनशास्त्र, गणित व दवा

     02-07-2022 10:02 AM


  • जगन्नाथ रथ यात्रा विशेष: दुनिया के सबसे बड़े रथ उत्सव से जुडी शानदार किवदंतियाँ
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     01-07-2022 10:22 AM


  • भारत के सबसे बड़े आदिवासी समूहों में से एक, गोंड जनजाति की संस्कृति व् परम्परा, उनके सरल व् गूढ़ रहस्य
    सिद्धान्त 2 व्यक्ति की पहचान

     30-06-2022 08:35 AM


  • सिंथेटिक कोशिकाओं में छिपी हैं, क्रांतिकारी संभावनाएं
    कोशिका के आधार पर

     29-06-2022 09:19 AM


  • मेरठ का 300 साल पुराना शानदार अबू का मकबरा आज बकरियों का तबेला बनकर रह गया है
    वास्तुकला 1 वाह्य भवन

     28-06-2022 08:15 AM


  • ब्लास्ट फिशिंग से होता न सिर्फ मछुआरे की जान को जोखिम, बल्कि जल जीवों को भी भारी नुकसान
    मछलियाँ व उभयचर

     27-06-2022 09:25 AM


  • एक पौराणिक जानवर के रूप में प्रसिद्ध थे जिराफ
    शारीरिक

     26-06-2022 10:08 AM


  • अन्य शिकारी जानवरों पर भारी पड़ रही हैं, बाघ केंद्रित संरक्षण नीतियां
    निवास स्थान

     25-06-2022 09:49 AM


  • हम में से कई लोगों को कड़वे व्यंजन पसंद आते हैं, जबकि उनकी कड़वाहट कई लोगों के लिए सहन नहीं होती
    स्वाद- खाद्य का इतिहास

     24-06-2022 09:49 AM






  • © - 2017 All content on this website, such as text, graphics, logos, button icons, software, images and its selection, arrangement, presentation & overall design, is the property of Indoeuropeans India Pvt. Ltd. and protected by international copyright laws.

    login_user_id