मेरठ के निकट स्थित हस्तिनापुर में मिले हैं महाभारत के पुख्ता प्रमाण

मेरठ

 24-11-2021 08:54 AM
छोटे राज्य 300 ईस्वी से 1000 ईस्वी तक

धर्मयुद्ध के नाम से लड़ा गया महाभारत का महायुद्ध कई मायनों में हमारे लिए महत्वपूर्ण है। एक ही परिवार के शक्तिशाली योद्धाओं के बीच लड़ा गया महाभारत स्पष्ट रूप से एक जमीनी विवाद था, जहां कौरवों ने पाडंवों को हस्तिनापुर में सुई की नोक के बराबर भूमि देने से भी इनकार कर दिया। जिसके परिणाम स्वरूप लड़ा गया, महाभारत हिंदू धर्म ग्रंथों में सबसे विध्वंशकारी युद्धों में दर्ज है। आज हमारे लिए यह जानना बेहद दिलचस्प होगा की इतिहास के सबसे भयानक युद्ध का गवाह और कारण रही हस्तिनापुर की जमीन आज किस स्थिति में हैं?
वर्तमान में उत्तर प्रदेश के दोआब क्षेत्र में स्थित हस्तिनापुर मेरठ से 37 किलोमीटर और दिल्ली से 110 किमी दूर है। हस्तिनापुर समुद्र तल से 202 मीटर (662 फीट) की औसत ऊँचाई पर स्थित है। हस्तिनापुर का इतिहास महाभारत के काल से शुरू होता है। यह शास्त्रों में गजपुर, हस्तिनापुर, नागपुर, असंदिवत, ब्रह्मस्थल, शांति नगर और कुंजरपुर आदि के रूप में वर्णित है। सम्राट अशोक के पौत्र, राजा सम्प्रति ने यहाँ अपने साम्राज्य के दौरान कई मंदिरों का निर्माण किया है। हालाँकि प्राचीन मंदिर और स्तूप आज यहाँ मौजूद नहीं हैं। मेरठ के निकट स्थित हस्तिनापुर में प्राचीन टीले की खुदाई पहली बार 1952 में एएसआई (भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण) के बी बी लाल द्वारा शुरू की गई थी, जिन्हे इस काम के लिए पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया था। हालांकि अभी भी हस्तिनापुर में महाभारत से संबंधित पुरातनता की खोज की जानी बाकी है। ब्रज बसी लाल (जन्म 2 मई 1921), जिन्हें बी.बी.लाल के नाम से जाना जाता है, एक जाने माने भारतीय पुरातत्वविद् हैं। उन्हें सन 2000 में भारत के राष्ट्रपति द्वारा पद्म भूषण पुरस्कार मिला, और 2021 में भारत के दूसरे सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया। 1950 और 1952 के बीच,बी.बी.लाल ने हिंदू महाकाव्य महाभारत में वर्णित स्थलों के पुरातत्व पर काम किया, जिसमें कौरवों की राजधानी हस्तिनापुर भी शामिल है। उन्होंने इंडो-गैंगेटिक डिवाइड और ऊपरी यमुना-गंगा दोआब (Indo- Gangetic Divide and the Upper Yamuna-Gangetic Doab.) में कई पेंटेड ग्रे वेयर (PGW) साइटों की खोज भी की। एएसआई (ASI) की ओर से बी.बी.लाल द्वारा 1950-52 में हस्तिनापुर (29°9'; 78°3', डीटी मेरठ, उत्तर प्रदेश) में जमीन की खुदाई की गई थी। हालाँकि आज हस्तिनापुर, जो उत्तर प्रदेश में मेरठ और मवाना के बीच स्थित है, अब एक भूला हुआ गाँव है। लेकिन 1952 की खुदाई से कुछ दिलचस्प खोजों का पता चला, जो एक ज्वलंत बहस का विषय बन गई, कि क्या उन्हें वास्तव में महाभारत काल के साथ जोड़ा जा सकता है! पुरातात्विक विदों द्वारा 'विदुर-का-टीला' की खुदाई के बाद, मेरठ के उत्तर-पूर्व में 37 किमी (23 मील) की दूरी पर विदुर के नाम पर कई टीलों के संग्रह प्राप्त हुए। जिसके पश्चात् इस स्थान का कौरवों और पांडवों की राजधानी हस्तिनापुर के प्राचीन शहर के अवशेष होने का निष्कर्ष निकाला गया था, जो गंगा बाढ़ से बह गया था। हस्तिनापुर के आसपास की पुरातात्विक खुदाई में, लगभग 135 लोहे की वस्तुएं मिलीं जिनमें तीर और भाला, शाफ्ट, चिमटा, हुक, कुल्हाड़ी और चाकू शामिल थे, जो एक फलते-फूलते लौह उद्योग के अस्तित्व का संकेत देते हैं। यहाँ ईंट-पंक्तिबद्ध सड़कों , जल निकासी व्यवस्था, और एक कृषि-पशुधन आधारित अर्थव्यवस्था के संकेत भी हैं। हस्तिनापुर के चित्रित ग्रे वेयर (पीजीडब्ल्यू) को 2800 ईसा पूर्व उससे भी पूर्व का माना जा रहा है। जिसे आज द्रौपदी-की-रसोईऔर द्रौपदी घाट के रूप में जाना जाता है। यहाँ खुदाई के परिणामस्वरूप तांबे के बर्तन, लोहे की मुहरें, सोने और चांदी से बने गहने, टेराकोटा डिस्क और कई आयताकार आकार के हाथीदांत पासे मिले हैं। यहां से प्राप्त चौपर का खेल अवशेष लगभग 3000 ईसा पूर्व के हैं। खुदाई के बाद से इन स्थानों में पर्यटक भी घूमने के लिए आते हैं। महाभारत के पाठ में दिए गए सप्तर्षि मंडल के आधार पर एवं मत्स्य और वायु पुराणों के अनुसार गंगा नदी में आई एक भारी बाढ़ ने हस्तिनापुर और निचक्षु को नष्ट कर दिया। जिसके बाद राजा परीक्षित (अर्जुन के पोते) के बाद पांचवें राजा, ने अपनी राजधानी को प्रयागराज से 50 किलोमीटर दूर कौशाम्बी में स्थानांतरित कर दिया। यहाँ बड़े पैमाने पर बाढ़ के स्तर के निश्चित पुरातात्विक साक्ष्य मौजूद हैं। मोटी मिट्टी की मिट्टी में गंगा की तबाही आज भी दिखाई देती है। हस्तिनापुर में महाभारत के संदर्भ में अधिक खोजबीन करने के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा मेरठ से लगभग 40 किमी दूर साइट पर खुदाई शुरू शुरू की जाएगी। यह 70 वर्षों में वहां की पहली बड़ी परियोजना साबित होगी। योजना का उद्द्येश्य इतिहास में 'महाभारत' को जमीन पर उतारने और पहले की खोजों को संरक्षित करने के लिए नए सबूतों की तलाश करना है।

संदर्भ
https://bit.ly/3l0443A
https://bit.ly/3nItLr9
https://bit.ly/3xeARXv
https://bit.ly/30RVfBz
https://bit.ly/3cLsiKh
https://en.wikipedia.org/wiki/Hastinapur

चित्र संदर्भ   
1. हड्डियों एवं लकड़ियों से निर्मित औजारों को दर्शाता एक चित्रण (asi.nic.)
2. महाभारत में कुरुक्षेत्र युद्ध के अंत में हस्तिनापुर पहुंचे युधिष्ठिर को दर्शाता एक चित्रण (wikimedia)
3. हस्तिनापुर के प्राचीन टीले को दर्शाता एक चित्रण (asi.nic.)
4. हस्तिनापुर में रेन गली (rain-gulley) का दृश्य जहां प्रारंभिक संचालन शुरू किया गया था, को दर्शाता एक चित्रण (asi.nic.)

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