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कौन सी है समुद्री मछली की सबसे महंगी किस्म

मेरठ

 26-10-2021 06:30 PM
मछलियाँ व उभयचर

विभिन्न संस्कृतियों में मछलियां सामाजिक, आर्थिक तथा धार्मिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती हैं। धरती पर मछलियों की एक विस्तृत विविधता देखने को मिलती है तथा इसी विविधता में से एक प्रजाति ब्लैकस्पॉटेड क्रोकर (Black Spotted Croaker) भी है।वैज्ञानिक तौर पर प्रोटोनीबिया डायकैंथस (Protonibea diacanthus) के नाम से विख्यात यह मछली मूल रूप से भारत-प्रशांत क्षेत्र की मूल निवासी है। इस मछली को समुद्री मछली की सबसे महंगी किस्म माना जाता है। पूर्वी एशिया (Asia) में यह प्रजाति बहुत बेशकीमती मानी जाती है, क्यों कि यह माना जाता है, कि इसके अंग औषधीय हैं, हालांकि इस बात की कोई पुष्टि अभी तक नहीं हो पायी है। सिंगापुर (Singapore), मलेशिया (Malaysia), इंडोनेशिया (Indonesia), हांगकांग (Hong Kong) और जापान (Japan) जैसे देशों में ये मछलियां सबसे महंगी मानी जाती हैं। ब्लैकस्पॉटेड क्रोकर की सबसे महंगी ज्ञात मछली मुंबई-पालघर समुद्र तट के पास दो भारतीय मछुआरों द्वारा पकड़ी गयी थी, जिसका वजन 30 किलो था। इन मछलियों का स्थानीय नाम घोल मछली है और इनका मूल्य लिंग पर निर्भर करता है। यदि 30 किलो वाली नर मछली है, तो उसका मूल्य 4-5 लाख होगा और यदि वह मादा मछली है, तो उसकी कीमत 1-2 लाख की हो सकती है। मछली के आंतरिक अंगों (जिसे भोट कहा जाता है) के आकार और मोटाई के अनुसार मूल्य भिन्न होता है। सतपति मुंबई में, भोट की कीमत लगभग 5-6 लाख प्रति किलोग्राम और मांस 500-600 रुपये प्रति किलोग्राम है। इस मछली को स्थानीय रूप से ओडिया में तेलिया के रूप में जाना जाता है। 2020 में, ओडिशा के मछुआरों ने लगभग 19.5 किलोग्राम वजन वाली एक मछली को पकड़ा था।एक दवा कंपनी ने नीलामी में इसे 8000 रुपये प्रति किलो में खरीदा था। इसी प्रकार से 2019 में, ओडिशा के एक और मछुआरे ने 10 किलोग्राम वजन वाली एक मछली को पकड़ा और उसे 10,000 रुपये प्रति किलो में बेचा।
ब्लैकस्पॉटेड क्रोकर,व्यावसायिक रूप से सबसे महत्वपूर्ण क्रोकर्स में से एक है, जो सर्दियों के मौसम में पश्चिम बंगाल तट से प्रवास करती है। इसके स्विम ब्लैडर (Swim bladder) का बाजार मूल्य उच्च है, इसलिए यह प्रजाति मछुआरों के बीच प्रमुख महत्व प्राप्त कर रही है। शुष्क स्विम ब्लैडर स्थानीय बाजारों में 40,000-50,000 रुपये प्रति किलो में बिक रहे हैं।हालांकि इन्हें पकड़ने में मछुआरों को जोखिम का सामना भी करना पड़ता है।मछुआरे एक बार में ही इन मछलियों को नहीं पकड़ पाते हैं। इसके अलावा इन मछलियों को पकड़ने के लिए बड़े जाल का उपयोग किया जाता है, जिससे अक्सर पेलाजिक (Pelagic – पेलाजिक ज़ोन खुले समुद्र या महासागर का वह हिस्सा है,जिसमें पानी का स्तंभ होता है, अर्थात समुद्र तट या समुद्र सतह के अलावा समुद्र का अन्य भाग) क्षेत्र में रहने वाली मछलियां उनके जाल से छूट जाती हैं। हालांकि इस जोखिम के बावजूद भी बंगाल की खाड़ी में पेलाजिक फिशिंग के डिमर्सल(Demersal) फिशिंग में बदलने के बाद क्षेत्र में सर्दियों के मौसम में होने वाली फिशिंग महत्वपूर्ण रूप से उभर रहीहै।
हिंद महासागर और प्रशांत महासागर की मूल निवासी इस प्रजाति ने गुजरात और महाराष्ट्र के तटों के आसपास मछली की नीलामी में रिकॉर्ड तोड़ कीमत हासिल की है। मछुआरे इसे 'समुद्री सोना'भी कहते हैं,क्योंकि यह उन्हें वित्तीय संकट से बाहर निकालने में मदद करती है। स्विम ब्लैडर इस मछली का सबसे बेशकीमती हिस्सा है, और यह एक कारण है, जिसकी वजह से यह मछली अत्यधिक कीमती मानी जाती है। इस हिस्से को सुखाया जाता है, तथा शराब और बीयर उद्योग में शुद्धिकरण के लिए उपयोग किया जाता है।मछली जितनी बड़ी होगी, उसका स्विम ब्लैडर भी उतना ही अधिक बड़ा होगा और इसलिए उसकी कीमत भी उतनी ही अधिक होगी। इस मछली के स्विम ब्लैडर की कीमत 50,000 रुपये प्रति किलो है।घोल मछली की त्वचा उच्च गुणवत्ता वाले कोलेजन (Collagen) का एक बड़ा स्रोत है, जिसका उपयोग भोजन और अनेकों कॉस्मेटिक उत्पादों के निर्माण के लिए भी किया जाता है। इसे पोर्सिन (Porcine) और बोवाइन जिलेटिन (Bovine gelatin) के लिए भी एक बढ़िया विकल्प माना जाता है। यदि यह मछली किसी के हाथ लग जाती है, तो यह उसके लिए किसी लॉटरी से कम बात नहीं है।मछली पकड़ने वाले समुदाय के बीच यह आकर्षण का केंद्र बन गयी है। इस मछली के महत्व का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि एक निम्न श्रेणी का घोल भी लगभग 8000- 10,000 रुपये प्रति किलो मिलता है। माना जाता है, कि इसके पेट में एक थैली होती है,जिसमें शक्तिशाली औषधीय गुण होते हैं। घोल मछली आंखों के स्वास्थ्य के लिए अच्छी मानी जाती है, क्यों कि इस मछली में कई विटामिन,खनिज,प्रोटीन होते हैं,जो आंखों की रोशनी बनाए रखने में मदद करते हैं। यह बढ़ती उम्र के साथ होने वाली झुर्रियों की समस्या को भी दूर करती है।घोल मछली शिशुओं की बुद्धिलब्धिमें सुधार करती है, क्यों कि इसमें ओमेगा -3 (Omega 3) मौजूद होता है। यह मस्तिष्क कोशिकाओं के विकास को उत्तेजित करती है।

सन्दर्भ
https://bit.ly/3B8VuF1
https://bit.ly/3EgDlap
https://bit.ly/3Cbskq8
https://bit.ly/3CaaS5t
https://bit.ly/3mbjnaD

चित्र संदर्भ

1. व्यक्ति के हाथ में ब्लैकस्पॉटेड क्रोकर (Black Spotted Croaker) मछली का एक चित्रण (tomscatch)
2. मृत पड़ी प्रोटोनीबिया डायकैंथस (Protonibea diacanthus) मछली का एक चित्रण (youtube)
3. प्रोटोनीबिया डायकैंथस (Protonibea diacanthus) मछली के टुकड़े करती महिला का एक चित्रण (youtube)

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