कैसे अम्लीय वर्षा पर्यावरण और मनुष्यों को नुकसान पहुंचा सकती है

मेरठ

 22-10-2021 03:50 PM
जलवायु व ऋतु

जहां अम्लीय वर्षा पर्यावरण के लिए अविश्वसनीय रूप से हानिकारक हो सकती है और लंबे समय तक पर्याप्त जोखिम में कई पौधों और जानवरों को मारने की क्षमता रखती है, लेकिन यह मनुष्य को सीधे नुकसान नहीं पहुंचा सकती है। वास्तव में, अमेरिका (America)ईपीए (EPA) के अनुसार, "अम्लीय वर्षा में चलना, या यहाँ तक कि अम्लीय वर्षा से प्रभावित झील में तैरना, मनुष्यों के लिए सामान्य वर्षा में चलने या गैर-अम्लीय झीलों में तैरने से अधिक खतरनाक नहीं है"। अब सवाल यह उठता है कि क्या अम्लीय वर्षा के संपर्क में आकर हमारी त्वचा जल सकती हैं? दरसल बहुत प्रबल अम्ल हमारी त्वचा को जला सकता है, और कुछ धातुओं को भी नष्ट कर सकता है। लेकिन ऐसा होने के लिए, इस प्रकार के अम्ल का पीएच बहुत कम होना चाहिए,यानिपीएच 1 के आसपास होना चाहिए।दूसरी ओर, अम्लीय वर्षा में तुलनात्मक रूप से बहुत कमजोर अम्ल होता है, और आमतौर पर इसका पीएच 4.2 से 4.4 तक होता है। हालांकि कम पीएच वाली अम्लीय वर्षा अतीत में दर्ज की गई है।इसे परिप्रेक्ष्य में रखने के लिए, सिरका का पीएच लगभग 2.2 और नींबू के रस का पीएच लगभग 2.3 होता है। यहां तक कि अम्लीय वर्षा में सबसे कम दर्ज किया गया पीएच अभी भी सिरका या नींबू के रस जितना ही मजबूत रहा था।4.2 से 4.4 की सीमा में अम्लता के साथ, अम्लीय वर्षा आपकी त्वचा को जलाने के लिए पर्याप्त नहीं है। आपको यह जानने में भी दिलचस्पी हो सकती है कि सामान्य "स्वच्छ" बारिश भी थोड़ी अम्लीय होती है, आमतौर पर इसका पीएच 5 और 5.5 के बीच होता है। वास्तव में अम्लीय वर्षा से संबंधित मानव स्वास्थ्य में समस्याएं उसमें मौजूद प्रदूषकों (सल्फर डाइऑक्साइड (Sulfur dioxide) और नाइट्रस ऑक्साइड (Nitrous oxides)) से आती हैं,जिनके कारण मुख्य रूप से वर्षा अम्लीय होती है।अन्य संबंधित प्रदूषक जैसे सल्फेट (Sulfate) और नाइट्रेट (Nitrate) अणु भी हमको नुकसान पहुंचा सकते हैं। जब ये प्रदूषक हवा में होते हैं, तो हमारे फेफड़ों में इनके अंदर जाने की संभावना होती है। निम्न पंक्तियों से आप पता लगा सकते हैं कि अम्ल वर्षा मनुष्यों को किस प्रकार प्रभावित करती है :
1. अम्लीय वर्षा उत्पन्न करने वाले प्रदूषकों को सांस लेने से फेफड़ों की गंभीर बीमारियां हो सकती हैं :नाइट्रसऑक्साइड (Nitrous oxides) और सल्फर डाइऑक्साइड (Sulfur dioxides) अम्लीय वर्षा उत्पन्न करने के लिए जिम्मेदार प्रमुख प्रदूषक हैं। यदि हम अधिक मात्रा में, या लगातार कम मात्रा के साथ समय की अवधि में उनके संपर्क में आते हैं, तो उनके गंभीर स्वास्थ्य प्रभाव हो सकते हैं। ये कण इतने महीन होते हैं, कि ये हमारे शरीर में आसानी से सांस द्वारा हमारे फेफड़ों में गहराई तक चले जा सकते हैं। ऐसे कण आसानी से घर के अंदर के वातावरण में भी अपना रास्ता बना सकते हैं।इस प्रकार के महीन कण गंभीर स्वास्थ्य जटिलताओं से जुड़े होते हैं।
2. ये प्रदूषक कुछ गंभीर हृदय रोग भी उत्पन्न कर सकते हैं :नाइट्रस और सल्फर डाइऑक्साइड, साथ ही नाइट्रेट और सल्फेट उत्पाद भी गंभीर हृदय रोग का कारण बन सकते हैं। विभिन्न अध्ययनों ने सल्फर डाइऑक्साइड के साथ स्थानिक-अरक्तता संबंधी हृदय रोग, हृदय की विफलता और अतालता जैसे हृदय रोगों से मनुष्यों और जानवरों में रुग्णता और मृत्यु दर में वृद्धि से संबंध दिखाया है।
3. अम्लीय वर्षा खाद्य श्रृंखला और मानव फसलों को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती है :मनुष्यों पर अम्ल वर्षा का एक अप्रत्यक्ष प्रभाव खाद्य श्रृंखला को होने वाली संभावित क्षति है। यदि गंभीर रूप से देखा जाएं तो ये बारिश अकाल का कारण बन सकती है, क्योंकि पौधों और जानवरों पर लोग भोजन के लिए भरोसा करते हैं।अम्लीय वर्षा पौधों को प्रभावित करती है, विशेष रूप से, मिट्टी से महत्वपूर्ण पोषक तत्वों को निकालकर, एल्यूमीनियम (Aluminum) और अन्य जहरीली धातुओं को मुक्त करके, और कुछ पौधों की पत्तियों के मोमीक्यूटिकल्स (Waxy cuticles) को नुकसान पहुंचाकर।प्रदूषण और क्षति कभी-कभी लंबे समय तक बढ़ने और जीवित रहने की क्षमता को कम कर देती है। दुख की बात तो यह है कि अम्लीय वर्षा दुनिया भर में अपेक्षाकृत आम है, विशेष रूप से उत्तर पूर्वी संयुक्त राज्य अमेरिका, पूर्वी यूरोप (Europe) में, और तेजी से विकासशील देशों जैसे चीन (China) और भारत में तेजी से बढ़ रही है।ऐतिहासिक रूप से, यूरोप में, एक विशेष रूप से बुरी तरह प्रभावित भौगोलिक क्षेत्र तथाकथित "ब्लैक ट्राएंगल (Black Triangle)" है। चेक गणराज्य (Czech Republic), जर्मनी (Germany) और पोलैंड (Poland) के क्षेत्रों में 1970 और 1980 के दशक के दौरान बहुत भारी अम्लीय वर्षा हुई थी।इस क्षेत्र के कुछ हिस्सों में, पूरे जंगल नष्ट हो गए, और यहां तक ​​कि रेलवे ट्रैक (Railway tracks) भी अम्लीय वर्षा से गंभीर रूप से खराब हो गए थे। इसका प्रतिरोध करने के लिए, सख्त नियम बनाए गए, विशेष रूप से, लंबी दूरी की ट्रांसबाउंडरी वायु प्रदूषण (Transboundary Air Pollution) पर 1979 का सम्मेलन, जिसमें अन्य कार्यों के अलावा, कोयले से चलने वाले बिजली स्टेशनों से प्रदूषण उत्सर्जन में कटौती करना अनिवार्य था।ये उपाय तब से बहुत प्रभावी साबित हुए हैं और इस क्षेत्र में अम्लीय वर्षा को काफी कम कर दिया है।
संयुक्त राज्य अमेरिका में, मिडवेस्टर्न (Midwestern) कोयला जलाने वाले बिजली संयंत्रों से उत्सर्जन के कारण, उत्तरपूर्वी अमेरिका और पूर्वी कनाडा (Canada) के कुछ हिस्से 1960 के दशक से 1980 के दशक में अम्लीय वर्षा से बुरी तरह प्रभावित हुए थे। यह अनुमान लगाया गया है कि कहीं न कहीं इन क्षेत्रों में 90% मीठे पानी की धाराएँ आज भी भारी रूप से अम्लीकृत हैं। 1990 स्वच्छ वायु अधिनियम जैसे नियमों के लिए धन्यवाद, इस क्षेत्र में अम्ल वर्षा के प्रभाव में नाटकीय रूप से गिरावट आई है। लेकिन अम्लीय वर्षा से होने वाले नुकसान से उबरने में समय लगता है, और इन क्षेत्रों में मिट्टी ने हाल ही में स्थिर होने के संकेत दिखाए हैं। वहीं वर्ष 2000 के आसपास से, बीजिंग (Beijing) और नई दिल्ली जैसे कुछ एशियाई शहरों में बारिश में नाइट्रिक और सल्फ्यूरिक एसिड का स्तर लगातार बढ़ रहा है।इस स्तर में लगातार वृद्धि के मुख्य चालक बिजली की बढ़ती मांग, और तेजी से बढ़ते विनिर्माण और इस्पात उत्पादन क्षेत्र हैं।जबकि चीन (China) और भारत में कुछ प्रदूषण नियंत्रण नियम मौजूद हैं, इन देशों में कोयला-बिजली की मांग में वृद्धि से आने वाले वर्षों में इन देशों में अम्ल वर्षा की समस्या होने की संभावना है। कुछ अध्ययनों के अनुसार, चीन 2007 से अपने सल्फर डाइऑक्साइड उत्सर्जन को 75% तक कम करने में सक्षम रहा, लेकिन भारत में 50% की वृद्धि हुई है।वहीं उस समय इस बात के प्रमाण बढ़ रहे हैं कि भारत में अम्लीय वर्षा की घटनाएं बढ़ रही हैं। कई विशेषज्ञों ने इस घटना को देश में बढ़ते औद्योगीकरण से जोड़ा।वहीं भारत मौसम विज्ञान विभाग (India Meteorological Department) ने पुणे और नागपुर से बारिश के नमूनों में अम्लता में वृद्धि की जांच की। जिसमें पाया गया कि नमूने अम्लीय थे तथा उनका पीएच मान 5--pH से कम था।भारत के अधिकांश हिस्सों में, वातावरण में क्षारीय धूल बारिश में एसिड की मात्रा को बेअसर कर देती है। लेकिन "असम के मोहनबाड़ी में बारिश का पानी प्रकृति में अधिक अम्लीय है क्योंकि इस क्षेत्र में तटस्थ पदार्थों की कमी थी।प्रदूषण और क्षति कभी-कभी लंबे समय तक विकसित होने और जीवित रहने की क्षमता को कम कर देती है। इसलिए यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम पर्यावरण में प्रदूषण फैलाने वाले तत्वों को नियंत्रित रूप से उपयोग करके प्रदूषण को कम करें।

संदर्भ :-

https://bit.ly/3b3dAxD
https://bit.ly/3Ch1T24
https://bit.ly/3nebOzr
https://bit.ly/3DYNFDA

चित्र संदर्भ
1. मूर्तियों पर अम्ल वर्षा के प्रभाव को दर्शाता एक चित्रण (wikimedia)
2. रिफाइनरियों से SO2 उत्सर्जन होने से अम्ल बादल बढ़ सकते हैं, जिसको दर्शाता एक चित्रण (wikimedia)
3.अम्लीय वर्षा से प्रभावित हुए वृक्षों को दर्शाता एक चित्रण (youtube)

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