कोरोना महामारी के चलते ब्रिक्‍स BRICS देशों की बढ़ती प्रासंगिकता

मेरठ

 09-07-2021 08:25 AM
सिद्धान्त 2 व्यक्ति की पहचान

ब्रिक (BRIC) विकासशील देशों ब्राजील (Brazil), रूस (Russia), भारत (India) और चीन (China) का एक संगठन है। उम्मीद है की 2050 तक यह सभी देश विनिर्मित वस्तुओं, सेवाओं और कच्चे माल के प्रमुख आपूर्तिकर्ता बन जाएंगे। इनमें से चीन और भारत विनिर्मित वस्तुओं और सेवाओं के विश्‍व में प्रमुख आपूर्तिकर्ता होंगे, जबकि ब्राजील और रूस कच्चे माल के आपूर्तिकर्ताओं के रूप में समान रूप से प्रभावी हो जाएंगे। 2010 में दक्षिण अफ्रीका (South Africa) इस समूह में शामिल हुआ, जिसके बाद इसे ब्रिक्स (BRICS) के रूप में जाना जाने लगा। ब्रिक्स का उद्देश्य अधिक स्थायी, न्यायसंगत और पारस्परिक रूप से लाभकारी विकास के लिये समूह के साथ-साथ, अलग-अलग देशों के बीच सहयोग को व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाना है। ब्रिक्स द्वारा प्रत्येक सदस्य की आर्थिक स्थिति और विकास को ध्यान में रखा जाता है ताकि इससे संबंधित देश की आर्थिक ताकत के आधार पर संबंध बनाए जाएँ और जहाँ तक संभव हो सके प्रतियोगिता से बचा जाए। ब्रिक्स विभिन्न वित्तीय उद्देश्यों के साथ एक नए और आशाजनक राजनीतिक-राजनयिक इकाई के रूप में भी उभर रहा है जो वैश्विक वित्तीय संस्थानों में सुधार के मूल उद्देश्य से परे है। ब्रिक्स कोई अंतर्राष्ट्रीय अंतर-सरकारी संगठन नहीं है और न ही इसे किसी संधि के माध्‍यम से बनाया गया है।ब्रिक्स देशों के सर्वोच्च नेताओं का तथा अन्य मंत्रि स्तरीय सम्मेलन प्रतिवर्ष आयोजित किये जाते हैं। ब्रिक्स शिखर सम्मलेन की अध्यक्षता प्रतिवर्ष B-R-I-C-S क्रमानुसार सदस्य देशों के सर्वोच्च नेता द्वारा की जाती है। ब्रिक्‍स की संकल्‍पना वर्ष 2001 में गोल्डमैन सैक्स(Goldman Sachs) के अर्थशास्री जिम ओ’ नील (Jim O'Neill) द्वारा ब्राज़ील, रूस, भारत और चीन की अर्थव्यवस्थाओं के लिये विकास की संभावनाओं पर एक रिपोर्ट (Report) में की गई थी। वर्ष 2006 में चार देशों ने संयुक्त राष्ट्र महासभा की सामान्य बहस के अंत में विदेश मंत्रियों की वार्षिक बैठकों के साथ एक नियमित अनौपचारिक राजनयिक समन्वय शुरू किया। इस सफल बातचीत से यह निर्णय हुआ कि इसे वार्षिक शिखर सम्मेलन के रूप में देश और सरकार के प्रमुखों के स्तर पर आयोजित किया जाना चाहिये। पहला ब्रिक शिखर सम्मेलन वर्ष 2009 में रूस में हुआ और इसमें वैश्विक वित्तीय व्यवस्था में सुधार जैसे मुद्दों पर चर्चा की गयी। मार्च 2011 में दक्षिण अफ्रीका ने पहली बार चीन के सान्या में तीसरे ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लिया।
कई कंपनियां ब्रिक्‍स देशों को विदेशी विस्तार या प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) के अवसरों के स्रोत के रूप में भी परिभाषित करती हैं। होनहार अर्थव्यवस्था वाले देशों में विदेशी व्यापार का विस्तार होता है जिसमें निवेश करना होता है। ओ'नील की ब्रिक थीसिस (brick thesis) को वर्षों से चुनौती दी जा रही है, क्योंकि समय के साथ आर्थिक एवं भू-राजनीतिक परिदृश्‍य बदल रहे हैं। तर्कों में यह धारणा शामिल है कि ब्रिक देशों चीन, रूस और दक्षिण अफ्रीका में कच्चा माल असीमित है। इस विकास मॉडल की आलोचना करने वालों का कहना है कि वे जीवाश्म ईंधन, यूरेनियम (uranium) और अन्य महत्वपूर्ण और अत्यधिक उपयोग किए जाने वाले संसाधनों की सीमित मात्रा की उपेक्षा करते हैं। यह भी तर्क दिया गया है कि चीन जीडीपी (GDP) विकास और राजनीतिक ताकत में अन्य ब्रिक सदस्यों की अर्थव्यवस्थाओं को पीछे छोड़ रहा है,जो इसे एक अलग श्रेणी में खड़ा कर देता है। ब्रिक्स को प्रासंगिक बने रहने के लिए, उसे अपनी संस्थानों का बेहतर उपयोग करने की आवश्यकता है, जिन्‍हें इसने पिछले दो दशकों में स्थापित किया है। यह 2014 में स्थापित न्यू डेवलपमेंट बैंक (New Development Bank), हरित ऊर्जा पहल का समर्थन करने वाले अन्य बहुपक्षीय वित्तीय संस्थानों के साथ सहयोग कर सकता है और अनुसंधान केंद्र स्थापित कर सकता है जो संयुक्त राष्ट्र द्वारा स्थापित सतत विकास लक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित करेगा। स्वास्थ्य देखभाल अनुसंधान एक प्राथमिकता हो सकती है और दुनिया भर के विकासशील और सबसे कम विकसित देशों में नीतियों को कैसे लागू किया जाना चाहिए, इसका एक अलग दृष्टिकोण दे सकता है। वर्तमान में फैली महामारी ने वैश्वीकरण और वैश्विक शासन पर संकट खड़ा कर दिया है तथा इसने अंतर्राष्ट्रीय विवादों पर तीव्रता ला दी है, इसके साथ ही इसने चीन को एक वैश्विक शक्ति के रूप में मजबूत किया है और वैश्‍विक भू-पटल पर रूस के महत्व को बढ़ावा दिया है।कोविड-19 के उपचार हेतु वर्तमान समय में टीकाकरण एकमात्र विकल्‍प है।
कोविड-19 वैश्विक टीकाकरण बाजार में रूस, भारत, चीन और, कुछ हद तक, दक्षिण अफ्रीका महत्‍वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इन देशों ने वैक्सीन प्रौद्योगिकी (vaccine technology) विकसित करने के लिए मजबूत पहल की है और अपनी राष्ट्रीय नियामक क्षमता में काफी सुधार किया है।रूस पहला देश था जिसने अगस्त 2020 में कोविड-19 के लिए एक वैक्सीन के पंजीकरण की घोषणा की, जिसका नाम 1957 में लॉन्च किए गए पहले रूसी अंतरिक्ष उपग्रह के नाम पर “स्पुतनिक” (Sputnik) रखा गया। चीन, जो कि कोविड-19 पर सबसे अधिक वैज्ञानिक प्रकाशनों वाला देश है, ने दुनिया भर के राष्ट्राध्यक्षों से संपर्क किया और कोरोनोवायरस प्रकोप के प्रबंधन में वैश्विक समन्वय की मांग की। भारत, रूस और दक्षिण अफ्रीका ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर तर्क दिया है कि टीका एक वैश्विक सार्वजनिक आवश्‍यकता है।दूसरी ओर, ब्राजील ने विकसित देशों के साथ गठबंधन की ओर रूझान दिखाया। यह रूझान दोहा घोषणा (2001) (Doha Declaration (2001)) के समय भारत के साथ अतीत में अपनाए गए कदमों से भिन्न है। यह घोषणा बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा लिए गए रॉयल्टी (royalty) का भुगतान किए बिना जेनेरिक दवाएं (generic drugs) प्राप्त करने के प्रत्येक देश के अधिकार को मान्यता देती है। सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एसआईआई) (The Serum Institute of India (SII)) उत्पादित खुराक की संख्या में दुनिया में सबसे बड़ा टीका निर्माता है (1।5 अरब खुराक/वर्ष, 80% निर्यात कर रहा है) और कंपनी 165 देशों को औसतन 0।50 अमेरिकी डॉलर की आपूर्ति करती है। यह दुनिया में सबसे सस्ती में से एक है।हाल में हुई ब्रिक्‍स की वर्चुअल (virtual) या आभासी बैठक में चीन ने भारत के साथ एकजुटता व्यक्त की, और कहा कि समूह भारत की महामारी से लड़ने में सहायता करेगा। आने वाला दशक ब्रिक्स के लिए अत्‍यंत आवश्‍यक है। यह पहले से ही संघर्षरत समूह की सभी अर्थव्यवस्थाओं के साथ समस्याओं का सामना कर रहा है, जबकि चीन ब्रिक्स प्लस (BRICS Plus) का प्रस्ताव लाने का प्रयास कर रहा है, जिसमें बेल्ट एंड रोड (Belt and Road)पहल के सदस्य शामिल होंगे। भारत बेल्ट एंड रोड पहल का हिस्सा नहीं है, क्योंकि यह उन क्षेत्रों से होकर गुजरती है, जिन पर भारत अपना दावा करता है, जिस कारण अभी ब्रिक्स प्लस के इस विचार पर विराम लग गया है। अगर भारत को इस समूह में योगदान देना है, तो उसे ब्रिक्स संस्थानों के एक आमूलचूल बदलाव का प्रस्ताव देना होगा और ब्रिक्स प्लस के विचार के खिलाफ अपना रुख सख्त करना होगा, यदि यह बेल्ट एंड रोड पहल के साथ जुड़ा हुआ है।ब्रिक्स को एक संशोधनवादी समूह या वर्चस्व-विरोधी के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। इसके बजाय, समूह के सदस्य देशों ने वैश्विक आर्थिक व्यवस्था का लाभ उठाया है, जिसकी जड़ें ब्रेटन वुड प्रणाली (Bretton Wood system) में निहित हैं। समूह, हालांकि अपनी स्थापना के बाद से, वैश्विक समस्याओं को हल करने के लिए वैकल्पिक समाधान देने में एक मजबूत दृष्टिकोण रख सकता था।

संदर्भ:
https://bit.ly/3xiVOzJ
https://bit.ly/36cD3lM
https://bit.ly/3hu3CIm
https://bit.ly/3AnoLwF
https://bit.ly/3Ass8Cj
https://bit.ly/2V5Xn66

चित्र संदर्भ
1. 2021 में 13वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लोगो का एक चित्रण (wikimedia)
2. ब्रिक्स नेताओं का वर्तमान समूह, बाएं से दाएं: शी जिनपिंग, व्लादिमीर पुतिन, जायर बोल्सोनारो, नरेंद्र मोदी और सिरिल रामफोसा का एक चित्रण (wikimedia )
3. फाइजर-बायोएनटेक COVID-19 वैक्सीन का एक चित्रण (wikimedia)

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