नौकरी ढूँढ़ते समय निश्चित करें कार्यजीवन संतुलन तथा एकीकरण

मेरठ

 08-07-2021 10:00 AM
वास्तुकला 2 कार्यालय व कार्यप्रणाली

कोरोनावायरस (Coronavirus) महामारी के कारण पिछले वर्षों में कई लोगों ने अपनी नौकरी को खो दिया है। अप्रैल में 70 लाख नौकरियों के नुकसान के साथ, भारत की बेरोजगारी दर अप्रैल में बढ़कर लगभग 8% हो गई, जो पिछले चार महीनों में सबसे अधिक है।फरवरी और मार्च में मामूली नौकरी छूटने के बाद, भारत में महामारी की दूसरी लहर ने अप्रैल में पूरे श्रम बाजार को गिराकर रख दिया,जिससे कम से कम 7.35 मिलियन नौकरियां छिन गईं।सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (Centre for Monitoring Indian Economy) के आंकड़ों से पता चलता है कि कर्मचारियों की संख्या, दोनों वेतनभोगी और गैर-वेतनभोगी की मार्च में 398.14 मिलियन से गिरकर अप्रैल में 390.79 मिलियन हो गई और लगातार तीसरे महीने नौकरियों में गिरावट को देखा गया। जनवरी में, भारत में कार्यरत लोगों की संख्या 400.7 मिलियन थी।कोविड के मामलों में एक दम से वृद्धि के एक महीने में ही कई नौकरी छूटी है, क्योंकि महामारी के मामलों में वृद्धि के कारण देश के कई हिस्सों में व्यापार और गतिशीलता पर अंकुश लगाया गया था।अप्रैल में रोजगार दर और श्रम बल भागीदारी दर में भी गिरावट देखी गई, और बेरोजगार लोगों की संख्या में तेज वृद्धि को देखा गया, केवल इतना ही नहीं ये बेरोजगार लोग सक्रिय रूप से रोजगार की तलाश भी नहीं कर रहे हैं। मार्च के विपरीत, दूसरी लहर का व्यापक प्रभाव अप्रैल में महसूस किया गया। जबकि 2020 में राष्ट्रीय तालाबंदी लगाने के विपरीत,इस बार तालाबंदी राष्ट्रीय नहीं थी। राज्यों और क्षेत्रों ने कार्यभार संभाला और आंशिक या पूर्ण प्रतिबंध लगाए और व्यवहार में, इसने आर्थिक गतिविधियों को कम कर दिया, और संक्रमण फैलने के कारण वास्तविक भय को उत्पन्न किया।पहला स्थान जहां हम संक्रमण के भय का प्रभाव देखेंगे वह श्रम बाजार है।
भारत के 450 मिलियन प्रबल कार्यबल में से 90% से अधिक अनौपचारिक हैं, जिन्हें कम वेतन वाले श्रमिक ठेकेदारों के स्तरों के माध्यम से नियुक्त किया जाता है और स्वास्थ्य बीमा या पेंशन जैसे कोई सामाजिक सुरक्षा लाभ नहीं प्रदान की जाती है।लगभग एक चौथाई अनौपचारिक श्रमिक प्रवासी आम तौर पर अपने गांवों से देश के दूर के हिस्सों में बड़े शहरों में ईंट भट्टों, परिधान कारखानों, आतिथ्य में या निर्माण स्थलों पर काम करने के लिए यात्रा करते हैं।लेकिन एक अच्छी बात तो यह है कि शहरी भारत में वेतनभोगी नौकरियां पिछले साल की तरह प्रभावित नहीं हो रही हैं क्योंकि व्यवसायों ने लचीलापन विकसित किया है और उन्होंने 2020 में पहले ही कर्मचारियों की संख्या में काफी कमी कर दी थी, हालांकि मानव संसाधन में और कटौती से उनके संचालन और राजस्व पर असर पड़ेगा। वर्षों से, भारत में अनौपचारिक श्रमिकों ने उच्च मजदूरी, विनियमित काम के घंटे और बेहतर रहने की स्थिति की मांग की है, लेकिन अब तक उनकी आवाज काफी हद तक अनसुनी की गई है।जब कोच्चि (Kochi) स्थित सेंटर फॉरमाइग्रेशन एंड इनक्लूसिवडेवलपमेंट (Centre for Migration and Inclusive Development) ने अनौपचारिक श्रमिकों को स्वास्थ्य बीमा और पेंशन योगदान की पेशकश करने वाली औपचारिक नौकरियों से जोड़ने का फैसला किया, तब उन्होंने लगभग 1,500 रिक्तियों की सूची निकली, लेकिन कुछ ही लोग इसके लिए सामने आए। केरल में एडयार स्मॉल स्केल इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (Edayar Small Scale Industries Association) में, कई नकद-आदत वाले कर्मचारी स्थानीय कंपनियों में औपचारिक उद्घाटन के बारे में संशय में हैं,दरसल इसमें कर्मचारी के दैनिक वेतन से कुछ पैसा बचत खाते में डाल दिया जाता है। लेकिन दैनिक श्रमिक पूरी मजदूरी चाहते हैं और नियोक्ता यह बताने में सक्षम नहीं हैं कि ये कटौती उनके नाम पर बचत के रूप में जमा की जाएगी। जैसा कि महामारी के कारण अधिकांश लोग घर से कार्य करने के लिए विवश हो चुके हैं, उनके लिए इस समय कार्य और जीवन के मध्य संतुलन बनाए रखना अत्यधिक आवश्यक हो चुका है। कार्य-जीवन संतुलन शब्द का पहली बार उपयोग किए हुए कई साल बीत गए हैं। तब से, इसका व्यापक रूप से अधिक अवकाश या पारिवारिक समय की आवश्यकता से लेकर आत्म-देखभाल तक सभी चीजों को संदर्भित करने के लिए उपयोग किया गया था।शब्द के आलोचकों का कहना है कि यह काम और जीवन के बीच एक कृत्रिम अलगाव उत्पन्न करता है, जैसे कि काम जीवन का हिस्सा नहीं है। जबकि दूसरों का कहना है कि यह गलत तरीके से शून्य-योग समीकरण का तात्पर्य है जिसमें आप काम करते समय जीवन खो देते हैं, और जीवन जीते हुए काम खो देते हैं।हाल के वर्षों में कार्य-जीवन एकीकरण की अवधारणा अधिक लोकप्रिय हो गई है।कार्य-जीवन संतुलन एक व्यक्ति द्वारा अपने पेशेवर और व्यक्तिगत जीवन को दिए जाने वाले समय की मात्रा है। कार्यस्थल को अच्छी तरह से बनाए रखने और कार्य के बाहर अपने जीवन में पूर्णता बनाए रखने के लिए एक कार्य-जीवन संतुलन को प्रोत्साहित किया जाता है। वहीं जीवन को संतुलित करने के लिए कार्य-जीवन एकीकरण एक शानदार तरीका है, जिससे आप अपने जीवन के सभी क्षेत्रों में समान समय और ध्यान दे सकते हैं।
यदि देखा जाएं तो कार्य-जीवन एकीकरण का अभ्यासी परिवार के साथ नाश्ता करने और बच्चों को स्कूल छोड़ने का विकल्प चुन सकता है, फिर सुबह 9 बजे से दोपहर तक काम कर सकता है, फिर दोपहर का भोजन कर सकता है और व्यायामशाला जा सकता है, फिर दोपहर में एक कार्य बैठक में भाग ले सकता है, फिर बच्चों को स्कूल से लेने जाने का विकल्प चुन सकता है और रात का खाना बनाकर, और सोने से कुछ घंटे पहले ईमेल (E-mail) का जवाब दे सकता है।अपने स्वयं के कार्यदिवस को आकार देने की क्षमता रखने वाले पेशेवरों के लिए, कार्य-जीवन एकीकरण द्वारा प्रदान किया जाने वाला लचीलापन आदर्श है। लेकिन जो लोग बच्चों, बुजुर्ग माता-पिता और अन्य गतिविधियों में उलझे रहते हैं, उनके लिए कार्य-जीवन एकीकरण का अभ्यास करना सबसे अच्छा तरीका है।लेकिन कार्य-जीवन एकीकरण एक ढलान भी साबित हो सकता है, खासकर उद्यमियों के लिए। जब आपके काम की सूची अंतहीन होती है, तो आप अपने स्वास्थ्य, समुदाय, और परिवार को प्राथमिकता दिए बिना और सबके बीच समान स्तर बनाए बिना जीवन के हर पहलू में काम को प्राथमिकता देते हैं।कार्य और घर के बीच एक विभाजन को बनाए रखना स्वयं का लक्ष्य हो सकता है, लेकिन यह हमेशा साध्य नहीं होता है, जिसका अर्थ है कि यदि संतुलन बिगड़ गया तो आपका भाव भी प्रभावित होगा (जैसे कि जब आपको अधिक काम करना होगा)। निजी जीवन के साथ काम करना आपके दिन-प्रतिदिन को कम उबाने वाला बना सकता है। अपने 9 से 5 के काम और घर-आधारित दोनों कर्तव्यों को साथ मिलाकर, आप अपने कार्यों का प्रबंधन इस तरह से कर पाएंगे जो आपकी आवश्यकताओं के अनुरूप हो। कार्य-जीवन संतुलन के सर्वोत्तम अभ्यासों ने कई लोगों को तनाव में ला दिया है क्योंकि वे विभिन्न प्रकार की भूमिकाओं को भरने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। जबकि कुछ कर्मचारियों ने तब भी अतिरिक्त तनाव महसूस किया जब वे संतुलन हासिल करने में विफल रहे, यह देखते हुए कि उन्हें अपने काम में सफल होने के लिए कार्यालय के काम, बैठकों, आवागमन और यात्रा के लिए काफी समय देना पड़ता है। एकीकरण के विचार पर ध्यान केंद्रित करने से कर्मचारियों को यह पहचानने में मदद मिलती है कि क्या महत्वपूर्ण है और फिर वहां से अद्वितीय व्यवसाय पथ चुना जा सकता है।कार्य-जीवन एकीकरण के कुछ उदाहरण, जैसे काम जल्दी खत्म करके घर से ईमेल (Email) का जवाब देना; कार्यालय में योग, व्यायाम और पैदलक्लब (Club) में शामिल होना; अपने बच्चे को स्कूल के बाद कार्यालय पर लाया जा सकता है; अपने पसंद की किसी ऐसी कार्यप्रणाली में भाग लेना जो आपके व्यवसाय द्वारा प्रायोजित हो।कार्य जीवन एकीकरण को वास्तव में निम्नलिखित उपायों का उपयोग करके हम अपने जीवन में उपयोग कर सकते हैं :
1) एक सूची बनाएं :- यह सुनिश्चित करने के लिए कि आप काम के बाहर प्राथमिकताओं पर ध्यान केंद्रित करने के लिए अपने दिन से पर्याप्त समय निकाल रहे हैं। जैसे, "पारिवारिक रात्रिभोज" या "व्यायामशाला में व्यायाम" जैसी गतिविधियों के लिए सूची तैयार करें।
2) अपने दोस्तों और परिवार के साथ समन्वय करें :- अपने करीबियों से बात करके उनके लिए समय निर्धारित करें, कार्य-जीवन का एकीकरण आपके पारिवारिक जीवन को समृद्ध और सुगम बनाने के लिए है, न की कठिन।
3) कुछ सीमाओं के प्रति प्रतिबद्ध रहे :- कार्य-जीवन एकीकरण के सबसे तजरबाकार व्यक्ति को भी कभी-कभी नौकरी की सभी ज़िम्मेदारियों से दूर रहने की ज़रूरत है। आपके मस्तिष्क और शरीर को नियमित रूप से काम से आराम की आवश्यकता होती है।
हालांकि, वर्तमान पीढ़ी के पेशेवर एक ऐसा पेशा खोजने में अधिक रुचि रखते हैं जो उनकी 'जीवन शैली' का समर्थन करता है। ये पीढ़ियाँ अपने मन चाहे जीवन के बारे में सोच रही हैं और उस अनुभव का समर्थन करने वाली नौकरी और नियोक्ता की तलाश करती हैं। ‘मिलेनियल’ (Millenial) कहलाई जाने वाली इस पीढ़ी पर हाल की गैलप रिपोर्ट (Gallup Report) से पता चलता है कि इसके 21% लोग कहते हैं कि उन्होंने पिछले एक साल के भीतर अपनी नौकरियां बदली हैं, जो इससे पिछली पीढ़ी के मुकाबले तीन गुना है।आपके मन में यह सवाल ज़रूर आया होगा कि मिलेनियल को नौकरियां बदलना इतना उपयुक्त क्यों लगता है? इसके कई संभावित कारण हो सकते हैं, जिनमें से एक उनकी कार्यस्थल में कम अनुबंधित होना हो सकता है। गैलप ने पाया है कि केवल 29% मिलेनियल अपने काम के प्रति निष्ठावान हैं, जिसका अर्थ है कि 10 में से केवल तीन ही भावनात्मक और व्यवहारिक रूप से अपनी नौकरी और कंपनी से जुड़े हुए रहते हैं। यह संभव है कि कई मिलेनियल वास्तव में नौकरियों को बदलना नहीं चाहते हैं, लेकिन उनकी कंपनियां उन्हें रहने के लिए कोई आकर्षक कारण नहीं दे रही हैं।

संदर्भ :-
https://bit.ly/3qPDUlT
https://bit.ly/3hJSCGL
https://bit.ly/36p5xbT
https://bit.ly/2TyYScF
https://bit.ly/2SSVIQD
https://bit.ly/3jOYIsc
https://bit.ly/3hLp8bN

चित्र संदर्भ
1. नौकरी को संदर्भित करता एक चित्रण (flickr)
2. लिंग के आधार पर अनौपचारिक रोजगार में नियोजित का हिस्सा दर्शाता एक चित्रण (wikimedia)
3. योजना के चार्ट का एक चित्रण (flickr)
4. बैठक में भारतीय कारोबारी महिलाओं का एक चित्रण (flickr)



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