Post Viewership from Post Date to 09-Mar-2021 (5th day)
City Subscribers (FB+App) Website (Direct+Google) Email Instagram Total
2554 1 0 0 2555

***Scroll down to the bottom of the page for above post viewership metric definitions

भारत की ऊर्जा नीति ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों के विकास पर ध्यान केंद्रित करती है

मेरठ

 04-03-2021 10:10 AM
नगरीकरण- शहर व शक्ति
वर्तमान में भारत चीन (China), संयुक्त राज्य अमेरिका (United States) और यूरोपीय संघ (European Union) के बाद चौथा सबसे बड़ा वैश्विक ऊर्जा उपभोक्ता है। वहीं अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (International Energy Agency) द्वारा बताया गया कि भारत अगले दो दशकों में भारत की ऊर्जा मांग में वृद्धि का सबसे बड़ा हिस्सा होने के कारण यूरोपीय संघ (European Union) को दुनिया के तीसरे सबसे बड़े ऊर्जा उपभोक्ता के रूप में पछाड़ देगा। अपने इंडिया एनर्जी आउटलुक 2021 (India Energy Outlook 2021) में, अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी ने प्राथमिक ऊर्जा खपत को लगभग दोगुना कर 1,123 मिलियन टन तेल के बराबर बताया, क्योंकि सकल घरेलू उत्पाद 2040 तक 8.6 ट्रिलियन डॉलर तक फैल सकता है। 2040 तक, भारत की बिजली व्यवस्था यूरोपीय संघ की तुलना में अधिक है, और बिजली उत्पादन के मामले में दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी है; इसमें संयुक्त राज्य की तुलना में 30 प्रतिशत अधिक स्थापित नवीकरण क्षमता है। प्रति व्यक्ति कार स्वामित्व में पांच गुना वृद्धि के परिणामस्वरूप भारत दुनिया में तेल की मांग में वृद्धि करेगा। इसके अलावा, यह प्राकृतिक गैस के लिए सबसे तेजी से विकसित होने वाला बाजार बन जाएगा, जिसमें 2040 तक त्रिपक्षीय की अधिक मांग है।
भारत की ऊर्जा नीति काफी हद तक देश के विस्तार ऊर्जा घाटे से परिभाषित होती है और ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों, विशेष रूप से परमाणु, सौर और पवन ऊर्जा के विकास पर ध्यान केंद्रित किया। भारत ने 2017 में 63% समग्र ऊर्जा आत्मनिर्भरता प्राप्त की। 2019 में भारत में प्राथमिक ऊर्जा खपत 2.3% बढ़ी और 5.8% वैश्विक हिस्सेदारी के साथ चीन और संयुक्त राज्य अमेरिका के बाद तीसरी सबसे बड़ी है। वहीं कोयले से कुल प्राथमिक ऊर्जा की खपत (452.2 Mtoe; 55.88%), कच्चा तेल (239.1 Mtoe; 29.55%), प्राकृतिक गैस (49.9 Mtoe; 6.17%), परमाणु ऊर्जा (8.8 मिली; 1.09%), पन बिजली (31.6 Mtoe) ; 3.91%) और नवीकरणीय शक्ति (27.5 Mtoe; 3.40%) कैलेंडर (Calendar) वर्ष 2018 में 809.2 Mtoe (पारंपरिक बायोमास (Biomass) उपयोग को छोड़कर) है। भारत अपनी ऊर्जा मांगों को पूरा करने के लिए बड़े पैमाने पर जीवाश्म ईंधन आयात पर निर्भर है। 2030 तक, देश के कुल ऊर्जा खपत का 53% से अधिक ऊर्जा आयात पर भारत की निर्भरता अपेक्षित है। भारत की बिजली उत्पादन का लगभग 80% जीवाश्म ईंधन से है।
भारत में दुनिया में चौथी सबसे बड़ी स्थापित पवन ऊर्जा क्षमता है। 31 दिसंबर 2017 तक, पिछले वर्ष की तुलना में पवन ऊर्जा की स्थापित क्षमता 32,848 मेगावाट से बढ़कर 4148 मेगावाट हो गई है। पवन ऊर्जा भारत की कुल स्थापित बिजली उत्पादन क्षमता का लगभग 10% है। ऊर्जा संसाधनों की बढ़ती मांग के कारण अब कई क्षेत्रों में इनकी आपूर्ति कर पाना बहुत ही मुश्किल हो गया है। इन क्षेत्रों में उत्तर प्रदेश राज्य भी शामिल है जहां ऊर्जा संसाधनों की मांग तो बहुत अधिक है किंतु संसाधनों की कमी के कारण इनकी आपूर्ति नहीं की जा सकती है। पिछले 20 वर्षों में यहां बिजली की कमी 10-15% के दायरे में बनी हुई है। 2013 के आंकड़ों के अनुसार राज्य में बिजली की मांग और बिजली की आपूर्ति के बीच 43% का अंतर देखा गया था जिसके प्रभाव से यहां औद्योगिक निवेश भी बाधित हुए।
ऐसे में उत्तर प्रदेश सरकार को बिजली भारत के अन्य राज्यों से उच्च कीमतों पर खरीदनी पड़ती है। इससे राज्य विद्युत बोर्ड (Board) को भरी वित्तीय नुकसान पहुंचता है तथा यह शिक्षा और सार्वजनिक स्वास्थ्य जैसे सामाजिक विकास के क्षेत्रों में राज्य के व्यय को भी बाधित करता है। 1999 में उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य के बिजली क्षेत्र में सुधार करने के लिए बिजली क्षेत्र का पुनर्गठन और निजीकरण किया तथा इसे तीन स्वतंत्र सहयोगों- उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (Power Corporation Limited -यूपीपीसीएल), उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उद्योग निगम (State power industry corporation -यूपीआरवीयूएनएल) और उत्तर प्रदेश जल विद्युत निगम (Hydropower corporation -यूपीजेवीएनएल) में विभाजित किया हालांकि बिजली आपूर्ति व्यवस्था पर इसका कुछ खास असर नहीं पड़ा।
कई क्षेत्र जहां ऊर्जा की मांग बहुत अधिक है में, वैकल्पिक ऊर्जा संसाधनों का प्रयोग किया जा रहा है। इनकी मुख्य विशेषता यह है कि इनका बार-बार उपयोग किया जा सकता है अर्थात ये स्रोत नवीकरणीय हैं। इन स्रोतों में सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, जलविद्युत उर्जा, बायोमास (Biomass), जैव इंधन, ज्वारीय उर्जा आदि सम्मिलित हैं। उत्तर प्रदेश में इन नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों का प्रयोग किसी चुनौती से कम नहीं है। राज्य विद्युत अधिनियम, 2003 के तहत, विभिन्न राज्य-स्तरीय बिजली नियामकों ने एक नवीकरणीय ऊर्जा खरीद दायित्व निर्दिष्ट किया जिसके अनुसार ऊर्जा का एक प्रतिशत नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों से उत्पन्न किया जाना चाहिए। उत्तर प्रदेश के लिए यह लक्ष्य 5% निर्धारित किया गया था है जिसमें से 0.5% सौर ऊर्जा निर्धारित की गयी। परन्तु उत्तर प्रदेश इस लक्ष्य की प्राप्ति में असफल रहा। सौर ऊर्जा के माध्यम से बिजली के उत्पादन में उत्तर प्रदेश देश के अन्य राज्यों से बहुत पीछे है। यहां उत्पादित अधिकांश बिजली कोयले पर निर्भर है, जबकि कोयले की सीमित उपलब्धता और उच्च कीमतों ने यहां अनिश्चित बिजली की स्थिति को बहुत अधिक बढ़ा दिया है। इसलिए राज्य में ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों को विकसित करने की बहुत अधिक आवश्यकता है। राज्य नवीकरणीय ऊर्जा जैसे बायोमास (Biomass), सौर और जैव ईंधन में समृद्ध है, जिनमें से केवल बायोमास का ही अधिक प्रयोग किया जाता है। क्षेत्र में नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों की अपार संभावनाएं हैं और इनका उपयोग और वृद्धि निश्चित रूप से राज्य को अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने में मदद करेगा। राज्य में पवन ऊर्जा बिजली मांगों को पूरा करने में बहुत अधिक सहायता कर सकती है। इसके माध्यम से बहती वायु से ऊर्जा उत्पन्न की जाती है। 2022 तक भारत ने हवा से 60 गीगावॉट (GW) बिजली हासिल करने का लक्ष्य रखा है। भारत के दक्षिण, पश्चिम और उत्तर क्षेत्रों में पवन ऊर्जा से बहुत अधिक मात्रा में बिजली उत्पन्न की जा रही है। उत्तर प्रदेश के लिए पवन ऊर्जा संयंत्र ऊर्जा आपूर्ति में बहुत उपयोगी सिद्ध हो सकते हैं। दरसल पवन ऊर्जा भारत के दक्षिण, पश्चिम और उत्तरी क्षेत्रों में फैल गई है। पवन ऊर्जा की स्थिति आंध्र प्रदेश, गुजरात, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, तमिलनाडु और तेलंगाना राज्यों में केंद्रित है।
तमिलनाडु में लगभग 7.5 GW के साथ देश में सबसे अधिक स्थापित क्षमता है और इसके राज्य विनियम पवन ऊर्जा विकास के लिए बहुत अनुकूल हैं। महाराष्ट्र में लगभग 5 GW की दूसरी उच्चतम स्थापित क्षमता है, जिसके बाद गुजरात देश में लगभग 4 GW की तीसरी उच्चतम स्थापित क्षमता है। पवन फार्म (Farm) प्रतिष्ठानों में 25 से अधिक वर्षों के अनुभव के साथ, भारत अधिकांश आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन में काफी सक्षम है। हालाँकि, अभी भी वैश्विक अनुभवों से तकनीकी-आर्थिक हस्तक्षेपों को दूर करने की गुंजाइश है। मुख्य जोर क्षेत्रों में शामिल हैं: डिजाइन (Design) और इंजीनियरिंग (Engineering) पहलुओं में सुधार, प्रदर्शन निगरानी प्रणालियों और परिसंपत्ति प्रबंधन सेवाओं को बढ़ावा देना, मैक्रो और सूक्ष्म स्तर व्यवहार्यता अध्ययन दोनों का संचालन करना और अनुसंधान और विकास पर ध्यान केंद्रित करना।

संदर्भ :-
https://bit.ly/3qdkiGr
https://bit.ly/3qfc6W0
https://energypedia.info/wiki/Uttar_Pradesh_Energy_Situation
https://bit.ly/3rf6ywa
http://www.altenergy.org/renewables/renewables.html
https://bit.ly/3b9ttU2

चित्र संदर्भ:
मुख्य चित्र अक्षय ऊर्जा को दर्शाता है। (पिक्साबे)
दूसरी तस्वीर स्वच्छ ऊर्जा दिखाती है। (विकिमीडिया)
तीसरी तस्वीर अक्षय ऊर्जा क्लिपआर्ट को दिखाती है। (पिक्साबे)


***Definitions of the post viewership metrics on top of the page:
A. City Subscribers (FB + App) -This is the Total city-based unique subscribers from the Prarang Hindi FB page and the Prarang App who reached this specific post. Do note that any Prarang subscribers who visited this post from outside (Pin-Code range) the city OR did not login to their Facebook account during this time, are NOT included in this total.
B. Website (Google + Direct) -This is the Total viewership of readers who reached this post directly through their browsers and via Google search.
C. Total Viewership —This is the Sum of all Subscribers(FB+App), Website(Google+Direct), Email and Instagram who reached this Prarang post/page.
D. The Reach (Viewership) on the post is updated either on the 6th day from the day of posting or on the completion ( Day 31 or 32) of One Month from the day of posting. The numbers displayed are indicative of the cumulative count of each metric at the end of 5 DAYS or a FULL MONTH, from the day of Posting to respective hyper-local Prarang subscribers, in the city.

RECENT POST

  • जीवन की अलग अलग परिस्थितियों में व्हेल (Whales) मछलियों द्वारा निकाली जाने वाली ध्‍वनियां
    समुद्री संसाधन

     18-04-2021 12:09 PM


  • पर्यावास विखंडन (habitat fragmentation) क्या है? और प्रकृति तथा मानव विकास इसे कैसे प्रभावित करता है?
    नगरीकरण- शहर व शक्ति

     17-04-2021 02:10 PM


  • क्यों स्तनधारियों की तुलना में पक्षियों की उम्र लंबी होती है?
    पंछीयाँ

     16-04-2021 01:59 PM


  • अम्बिका देवी की भावुक कहानी
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     15-04-2021 02:11 PM


  • आवत पौनी परंपरा और पंच प्यारों का साहस बनाता है बैसाखी को बेहद खास पर्व।
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     14-04-2021 01:27 PM


  • दुनिया भर की विभिन्न संस्कृतियों में महत्व रखते हैं, सांप
    रेंगने वाले जीव

     13-04-2021 01:13 PM


  • मुसलमान रमजान के दौरान उपवास क्यों रखते हैं
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     12-04-2021 10:07 AM


  • पृथ्‍वी का एक अद्भूत स्‍वर्ग लद्दाख
    मरुस्थल

     11-04-2021 10:00 AM


  • नादिर अली ब्रास बैंड कंपनी और सेंट जॉन्स स्कूल तथा Labor omnia vincit
    उपनिवेश व विश्वयुद्ध 1780 ईस्वी से 1947 ईस्वी तक

     10-04-2021 10:24 AM


  • मस्तिष्क से संबंधित सबसे बड़ी समस्‍या अल्ज़ाइमर रोग (Alzheimer's disease)
    विचार 2 दर्शनशास्त्र, गणित व दवा

     09-04-2021 10:09 AM






  • © - 2017 All content on this website, such as text, graphics, logos, button icons, software, images and its selection, arrangement, presentation & overall design, is the property of Indoeuropeans India Pvt. Ltd. and protected by international copyright laws.

    login_user_id