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महामारी के दौर में कलाकारों द्वारा बनाए गए मास्टरपीस

मेरठ

 15-02-2021 10:10 AM
सिद्धान्त 2 व्यक्ति की पहचान
कला के विभिन्न स्वरूप होते हैं और इन्हीं स्वरूपों को आकार देने वाला कलाकार अपनी कल्पना को उपलब्ध साधनों के माध्यम से दुनिया के सम्मुख प्रस्तुत करता है। फिर चाहे वह चित्रकारी हो, नक्काशी हो या हीरे को तराश कर सुंदर आभूषण बनाने की कला हो। हीरा मूल रूप से एक साधारण पत्थर की भाँति होता है किंतु जौहरी नामक कलाकार इसे इसके वास्तविक स्वरूप से एक कीमती रत्न में परिवर्तित कर देता है। पिछले वर्ष 2020 में हैदराबाद के एक जौहरी कोट्टी श्रीकांत ने 7,801 हीरों से जड़ी एक अंगूठी बना कर विश्व रिकॉर्ड बनाया था जिसे मेरठ के एक जौहरी हर्षित बंसल ने 12,638 हीरों से जड़ी एक और अंगूठी बनाकर अपना नाम कर लिया। इस अंगूठी को बंसल ने मारीगोल्ड डायमंड अंगूठी (Marigold Diamond Ring) नाम दिया है। यह अद्भुत अंगूठी 165.45 ग्राम की है जिसमें 38.08 कैरेट के हीरे लगे हैं। इस अंगूठी को गिनीज़ वल्ड रिकॉर्ड (Guinness World Record) में भी दर्ज किया गया है।
कोरोना (Corona) संकट के समय जहाँ एक ओर पूरा विश्व इस रोग से लड़ रहा है वहीं दूसरी ओर कई कलाकार और उनकी कला धुंधली होती जा रही है। एक कला को सीखने करने के लिए निरंतर अभ्यास, अनुकूल वातावरण और दृढ़ निश्चय की आवश्यकता होती है और कला की अभिव्यक्ति के लिए अवसर तथा रंगमंच की। परंतु इस कोरोनाकाल में कलाकार अपनी कला को प्रस्तुत करने में असमर्थ से हो गए हैं। रोगमुक्त रहने के लिए अलगाव में रहते हुए कलाकारों की रचनात्मक शैली को अवसर की कमी का सामना करना पड़ रहा है। हालाँकि कुछ कलाकार अलगाव को चुनौती मानकर विकल्प खोज निकालते हैं। भीड़-भाड़ से दूर वह अपनी रचना में अधिक ध्यान केंद्रित कर पाते हैं। उदाहरण के लिए चित्रकार अल्फ्रेड वॉलिस (Alfred Wallis) जो अपने सेंट आइवेस घर (St Ives Home) में रहकर अपनी कलाकारी को अपनी स्मृतियों के माध्यम से चित्रित करने पर विचार करते हैं। इसके अलावा जॉर्जिया ओ'कीफ़े (Georgia O'Keefe) और फ्रीडा काहलो (Frida Kahlo) आदि कलाकार लम्बे समय तक अपने स्टूडियो (Studio) में ही रहकर अपनी कला को अधिक समय देते हैं। इन जैसे कलाकारों का मानना है कि हमारे पास जितने भी संसाधन मौजूद हैं उनका उचित उपयोग करके अपनी रचनात्मक शैली को दुनिया के सामने प्रस्तुत किया जा सकता है। पिछले कई वर्षों में भी ऐसी परिस्थितियाँ रही हैं जब कलाकारों को अलगाव में रहकर अपनी कला को निखारने का समय मिला। उदाहरण के लिए सोवियत काल के दौरान, मॉस्को (Moscow) में कार्यरत कलाकारों को कला बनाने और दिखाने के लिए अपने अपार्टमेंट (Apartment) का उपयोग करना पड़ता था, क्योंकि राज्य उनको स्वतंत्रता से ऐसा करने की अनुमति नहीं देता था। वादिम ज़खारोव (Vadim Zakharov), आंद्रेई मोनास्टिरस्की (Andrei Monastirski) और इल्या काबाकोव (Ilya Kabakov) सहित कई कलाकार ऐसे ही अभ्यास का हिस्सा थे। क्वारंटाइन (Quarantine) के समय जब कई लोग अपना काफी समय खाली रहते हुए गुजारते हैं वहीं कई प्रसिद्ध कलाकार, लेखक, चित्रकार, वैज्ञानिक आदि इस समय में अपनी कल्पनाओं को रचनात्मक रूप देते हैं।
वर्ष 1606 में शेक्सपियर ने कथित तौर पर किंग लीयर (King Lear) और उनकी कई अन्य कृतियों की रचना उस समय की जब लंदन (London) में प्लेग (plague) वापस लौट आया था। जिस कारण वह आइसोलेशन (isolation) या अलगाव में रह रहे थे। सर आइजैक न्यूटन 1965 में शहर में चलते प्लेग के खतरे से बचने के लिए कैंब्रिज (Cambridge) छोड़कर अपने लिंकनशायर (Lincolnshire) के वूलस्ट्रॉर्प (Woolsthorpe) फार्म हाऊस (Farm House) में रहने लगे। इसी दौरान उन्होने गुरुत्वाकर्षण के सिद्धांत और अपने गति के नियमों और कैलकुलस (Calculus) का आधार तैयार किया। वर्ष 1816 में इंडोनेशिया (Indonesia) के माउंट तंबोरा (Mount Tambora) में बड़े पैमाने पर ज्वालामुखी विस्फोट के कारण दूर-दूर के क्षेत्र जब धुएँ में लिप्त हो गए थे ऐसी स्थिति में मैरी शेल्ली (Mary shelly) ने अपनी रोमांचकारी विज्ञान कथा पुस्तक को विश्व के सम्मुख प्रस्तुत किया।
ऐसे ही कई कलाकारों के नाम इतिहास में दर्ज हैं जिन्होंने विपरीत परिस्थियों व चुनौतियों का सामना करते हुए अपनी कला से विश्वभर में ख्याति प्राप्त की। ऐसे ही कुछ प्रसिद्ध कलाकार निम्नवत हैं:
फ्रीडा काहलो (Frida Kahlo)बचपन से ही पोलियो की बीमारी से ग्रसित थे और 18 वर्ष की आयु में हुई एक बस दुर्घटना ने इनके जीवन को और भी अधिक चुनौतीपूर्ण बना दिया। बाद में भी इनके जीवन में कई ऐसी परिस्थितियाँ आई जिससे कोई भी व्यक्ति मानसिक रूप से टूट सकता है किंतु फ्रीडा काहलो ने अपनी पीड़ा को कला का रूप दिया और विश्वभर में अपनी मकाबे रचनात्मकता से प्रसिद्ध हुए। उन्होंने सर्वप्रथम वर्ष 1925 में चित्रकारी करना आरम्भ किया था।
जोसेफ बेय्यस (Joseph Beuys) (1921-1986) ने 1970 के दशक के प्रारंभ में वह व्यापक रूप से यूरोप (Europe) में जर्मनी (Germany) के प्रमुख वैचारिक कलाकारों में से एक थे। वर्ष 1974 में अमेरिका (America) की अपनी पहली यात्रा के दौरान, उन्होंने आई लाइक अमेरिका एंड अमेरिका लाइक्स मी (I Like America and America Likes Me), लाइव परफॉर्मेंस पीस - और एक्शन (a live performance piece — or Action) का अनावरण किया, जो उनके सबसे प्रसिद्ध कार्यों में से एक बन गए।
इवोन हिचेंस (Ivon Hitchens) (1893-1979) ब्रिटिश (British) देश के युद्ध के बाद के अमूर्त चित्रों के लिए जाने जाते हैं। यह चित्र ख़ास सुंदर और भड़कीले रंगों से बनाए जाते हैं। प्रथम विश्व युद्ध और 1940 में उनके लंदन स्टूडियो को बम से उड़ा दिया गया था, इन दो घटनाओं ने इनके जीवन में महत्वपूर्ण मोड़ लिया। छह एकड़ के वुडलैंड (Woodland) से घिरे, ग्रीनलाईव्स (Greenlives) और आस-पास के क्षेत्रों को इनकी पेंटिंग से चित्रित किया गया था।

वासुदेव संतू गायतोंडे (1924-2001), जॉर्जिया ओ'कीफ़े (Georgia O'Keeffe), विन्सेन्ट वैन गॉग (Vincent van Gogh), यायोई कुसमा (Yayoi Kusama), पॉल सेज़ने (Paul cezanne) आदि ऐसे ही कलाकार थे जिन्होंने अपने जीवन में आने वाली चुनौतियों को अवसर में परिवर्तित कर दिया और हमेशा के लिए दूसरों के लिए प्रेरणा स्त्रोत बन कर उभरे।
संदर्भ:
https://bit.ly/2LOtmTV
https://bit.ly/3tYgUlN
https://bit.ly/2Nqi34O
https://bit.ly/3qoOUFG
चित्र संदर्भ:
मुख्य तस्वीर में हीरे की अंगूठी दिखाई देती है जो मेरठ के एक व्यक्ति द्वारा बनाई गई है जो गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज हुई है। (प्रारंग)
दूसरी तस्वीर में फ्रीडा काहलो को दिखाया गया है। (विकिमीडिया)
तीसरी तस्वीर इवोन हिचेंस की कला को दर्शाती है 1. डार्क ईवनिंग 2. स्प्रिंग लाइट और 3. फार्महाउस। (प्रारंग)
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