Post Viewership from Post Date to 27-Jan-2021 (5th day)
City Subscribers (FB+App) Website (Direct+Google) Email Instagram Total
1702 3 0 0 1705

***Scroll down to the bottom of the page for above post viewership metric definitions

7 वीं (मेरठ) डिवीजन का प्रथम विश्व युद्ध में अपरिहार्य भूमिका

मेरठ

 22-01-2021 03:54 PM
उपनिवेश व विश्वयुद्ध 1780 ईस्वी से 1947 ईस्वी तक

प्रथम विश्व युद्ध में ब्रिटिश अधीन भारत प्रत्यक्ष तौर पर भले ही शामिल नहीं था, लेकिन युद्ध में बड़ी भूमिका जरूर निभाई थी। प्रथम विश्व युद्ध में भारतीय सैनिकों ने अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया था, इन्होंने विश्व युद्धों में दुश्मनों के नाकों चने चबवा दिए थे। युद्ध के लिए अंग्रेज़ी शासकों द्वारा कई भारतीय सेनाओं की टुकड़ियाँ तैयार की गयीं और युद्ध के लिए विभिन्न देशों या स्थानों में भेजा गया। इन सैन्य ईकाईयों में 7 वां (मेरठ) डिवीजन (Division) भी शामिल था। यह ब्रिटिश भारतीय सेना का एक इंफैंट्री (Infantry) सैन्य डिवीजन था जिसने प्रथम विश्व युद्ध के दौरान अपनी सक्रिय सेवा दी। मेरठ डिवीजन पहली बार भारतीय सेना सूची में 1829 में सर जेस्पर निकोलस की कमान में दिखाई दिया था।
प्रथम विश्व युद्ध के प्रारम्भ होने पर अगस्त 1914 में मूल मेरठ डिवीजन को बदलकर 7 वें (मेरठ) डिवीजन के रूप में संगठित किया गया। 1914 में 7 वीं (मेरठ) डिवीजन भारतीय अभियान सैन्यदल ए (Force A) का हिस्सा था, जिसे फ्रांस में लड़ने वाले ब्रिटिश अभियान दल को मजबूत करने के लिए भेजा गया था। इसने भारतीय सैन्य-दल के हिस्से के रूप में एक पैदल सेना डिवीजन का गठन किया, जबकि मेरठ घुड़सवार ब्रिगेड (Brigade) को भारतीय घुड़सवार सैन्य-दल में दूसरे भारतीय घुड़सवार डिवीजन का हिस्सा बनाने के लिए अलग कर दिया गया था। जबकि फ्रांस में 7 वें ब्रिटिश डिवीजन के साथ भ्रम से बचने के लिए, डिवीजन और उनके ब्रिगेड को मेरठ डिवीजन के नाम से जाना जाता था। लेकिन हिंद महासागर में काम कर रहे जर्मन हमलावरों एमडेन और कोनिग्सबर्ग की गतिविधियों और परिवहन जहाजों की धीमी गति के कारण भारत से रवानगी विलंबित हो गई। अक्टूबर-नवंबर 1914 में यह डिवीजन आखिरकार ला बस्सी, पहले मेसिन्स और अर्मेनिएटेस के युद्ध में शामिल हुई। 7 वीं (मेरठ) डिवीजन ने 39 वें रॉयल गढ़वाल राइफल्स के साथ पश्चिमी मोर्चे पर प्रथम विश्व युद्ध लड़ने के लिए गए थे। इसके बाद 20 सितंबर को इस सैन्य संगठन को बॉम्बे से पश्चिमी मोर्चे के लिए रवाना किया गया। 7 वें मेरठ डिवीजन क्षेत्र का गठन 7 वीं (मेरठ) डिवीजन के क्षेत्र की जिम्मेदारियों को संभालने के लिए सितंबर 1914 में किया गया था। इसने मूल डिवीजन को नियंत्रित करने के लिए ब्रिगेड बनाना शुरू किये जिसमें 14 वीं (मेरठ) कैवलरी ब्रिगेड (Cavalry brigade), बरेली और दिल्ली ब्रिगेड और देहरादून ब्रिगेड शामिल थीं। 1918 में यह डिवीजन आगरा, अल्मोड़ा, बरेली, भीम ताल, चकराता, चंबाटिया, देहरादून, दिल्ली, गंगोरा, कैलाणा, लैंसडौन, मेरठ, मुरादाबाद, मुट्टा, रानीखेत, रुड़की और सितोली में पदों और स्टेशनों के लिए उत्तरदायी था जिसे 1920 में विखंडित कर दिया गया था।
ब्रिटिश भारतीय सेना ने प्रथम विश्व युद्ध के दौरान यूरोपीय, भूमध्यसागरीय और मध्य पूर्व के युद्ध क्षेत्रों में अपने अनेक डिवीजनों और स्वतन्त्र ब्रिगेडों का योगदान दिया था। दस लाख भारतीय सैनिकों ने विदेशों में अपनी सेवाएं दी थीं जिनमें से 62,000 सैनिक मारे गए थे और अन्य 67,000 घायल हो गए थे। युद्ध के दौरान कुल मिलाकर 74,187 भारतीय सैनिक शहीद हुए थे। प्रथम विश्व युद्ध के दौरान भारतीय सेना का गठन कर इसके सात अभियान बलों को विदेशों में भेजा गया था जिनमें पहले अभियान बल के तहत 7वें मेरठ डिवीजन को भी शामिल किया गया था तथा मार्च 1915 में न्यूवे चैपल (Neuve chapelle) की लड़ाई में हमले का नेतृत्व करने के लिए चुना गया था। नए उपकरणों के साथ परिचितता की कमी से अभियान बल को युद्ध करने में बाधा उत्पन्न हुई। वे महाद्वीपीय मौसम के आदी नहीं थे और इसलिए ठंड को सहने में उन्हें काफी संघर्ष करना पड़ा जिस वजह से उनके मनोबल में कमी आयी। मनोबल में कमी आने से कई सैनिक लड़ाई के क्षेत्र से भाग गए और डिवीजन को अंततः अक्टूबर 1915 में मेसोपोटामिया भेजा गया जहां उन्हें किचनर की सेना के नए ब्रिटिश डिवीजनों द्वारा बदल दिया गया। जर्मनों को रोकने के लिए लाहौर और मेरठ डिवीजनों को पश्चिमी मोर्चे (यूरोप में) पर रखा गया था। भारत द्वारा पुरुषों और युद्ध सामग्रियों के रूप में बहुत योगदान दिया गया। यहां के सैनिकों द्वारा दुनिया भर के कई युद्ध क्षेत्रों में सेवा दी गयी जिनमें फ्रांस और बेल्जियम, अरब, पूर्वी अफ्रीका, गैलीपोली, मिस्र, मेसोपोटामिया, फिलिस्तीन, फारस, रूस और यहां तक कि चीन भी शामिल हैं। युद्ध के अंत तक 11,00,000 भारतीय सैनिकों में से 75,000 सैनिक शहीद हो गये थे।

संदर्भ :-
https://en.wikipedia.org/wiki/Indian_Army_during_World_War_I
https://en.wikipedia.org/wiki/7th_Meerut_Divisional_Area
https://en.wikipedia.org/wiki/7th_(Meerut)_Division
https://bit.ly/2rcNcxm
चित्र सन्दर्भ:
पहली तस्वीर मेसोपोटामिया में 7 वीं (मेरठ) डिवीजन मैन खाइयों के भारतीय सैनिकों को दिखाती है।(Wikipedia)
दूसरा चित्र दिखाता है अक्टूबर 1918 में लेबनान में नाहर अल-कल्ब (डॉग नदी) में मेरठ मंडल. (wikipedia)
तीसरी तस्वीर में मेरठ कैवलरी ब्रिगेड, फेंग्स, फ्रांस के पास मार्च करती है।(wikipedia)


***Definitions of the post viewership metrics on top of the page:
A. City Subscribers (FB + App) -This is the Total city-based unique subscribers from the Prarang Hindi FB page and the Prarang App who reached this specific post. Do note that any Prarang subscribers who visited this post from outside (Pin-Code range) the city OR did not login to their Facebook account during this time, are NOT included in this total.
B. Website (Google + Direct) -This is the Total viewership of readers who reached this post directly through their browsers and via Google search.
C. Total Viewership —This is the Sum of all Subscribers(FB+App), Website(Google+Direct), Email and Instagram who reached this Prarang post/page.
D. The Reach (Viewership) on the post is updated either on the 6th day from the day of posting or on the completion ( Day 31 or 32) of One Month from the day of posting. The numbers displayed are indicative of the cumulative count of each metric at the end of 5 DAYS or a FULL MONTH, from the day of Posting to respective hyper-local Prarang subscribers, in the city.

RECENT POST

  • 70 साल बाद भारत में फिर से दिखाई देगा, चीता
    स्तनधारी

     05-03-2021 10:05 AM


  • भारत की ऊर्जा नीति ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों के विकास पर ध्यान केंद्रित करती है
    नगरीकरण- शहर व शक्ति

     04-03-2021 10:10 AM


  • वास्तविक संचालित उड़ान भरने वाला एकमात्र स्तनधारी है चमगादड़
    शारीरिक

     03-03-2021 10:18 AM


  • भाषा-संचार का माध्यम और इससे जुड़े विभिन्न तथ्य
    व्यवहारिक

     02-03-2021 10:33 AM


  • जापान के सबसे लोकप्रिय व्यंजनों में से एक है, जापानी करी
    स्वाद- खाद्य का इतिहास

     01-03-2021 09:59 AM


  • परमहंस योगानंद (बाबाजी) के शिक्षण से प्रभावित थे, रोजर हॉजसन
    ध्वनि 1- स्पन्दन से ध्वनि

     28-02-2021 03:09 AM


  • एवियन इन्फ्लूएंजा या बर्ड फ्लू की उत्पत्ति और इसके प्रभाव
    पंछीयाँ

     27-02-2021 10:08 AM


  • अपेक्षाकृत अधिक समय तक क्यों जीवित रहते हैं, अधिकांश पेड़?
    व्यवहारिक

     26-02-2021 10:05 AM


  • पारा- एक उपयोगी किंतु विषाक्त तत्व
    खनिज

     25-02-2021 10:26 AM


  • इलेक्ट्रिक बस
    य़ातायात और व्यायाम व व्यायामशाला

     24-02-2021 10:15 AM






  • © - 2017 All content on this website, such as text, graphics, logos, button icons, software, images and its selection, arrangement, presentation & overall design, is the property of Indoeuropeans India Pvt. Ltd. and protected by international copyright laws.

    login_user_id