100 लाख लोगों की आजीविका से सम्बंधित है सजावटी मछली उद्योग

रामपुर

 17-07-2020 06:31 PM
मछलियाँ व उभयचर

वर्तमान समय में ऐसे कई जीव हैं जिन्हें घरेलू पशु के रूप में या घरों में सजाने के लिए उपयोग किया जाता है। मछलियां भी इन्हीं जीवों में से एक हैं, जिन्हें सजावटी जीव के तौर पर एक्वेरियम (Aquarium) में रखा जाता है। मेरठ में भी मछली का अस्तित्व मुख्य रूप से एक घरेलू पशु / घरेलू सजावटी मछली के रूप में है, किंतु यहाँ की टंकियों में पाई जाने वाली मछलियाँ देशी नहीं बल्कि विदेशी हैं। सजावटी मछली उद्योग भारत में 100 लाख लोगों की आजीविका से सीधे जुड़ा हुआ है। सजावटी मछलियों को पालने के कई फायदे हैं, जैसे यह युवा और बूढ़े लोगों को खुशी देता है, मन को शांत करने में सक्षम बनाता है, और इस प्रकार स्वस्थ जीवन में योगदान देता है। इसकी सहायता से बच्चे प्रकृति के बारे में अधिक जानकारी प्राप्त करते हैं और अपने समय का सदुपयोग करते हैं। इसके अलावा यह स्वरोजगार के अवसर भी पैदा करता है।

सजावटी मछलियों के पालन को जलीय पालन कहा जाता है। सजावटी मछली पालन विभिन्न विशेषताओं की आकर्षक, रंगीन मछलियों का पालन है, जिन्हें एक सीमित जलीय प्रणाली में पाला जाता है। किसान और शौकीन मुख्य रूप से इनका पालन करते हैं। सजावटी मछलियों को जीवित गहने भी कहा जाता है। दुनिया भर में 30,000 से अधिक मछली प्रजातियां हैं, जिनमें से लगभग 800 सजावटी मछलियों की हैं। एक्वेरियम मछलियों को मुख्य रूप से दो समूहों में वर्गीकृत किया जाता है, जैसे अंडोत्पन्न (Oviparous) और सजीव वाहक (Ovo-viviparous)। एक्वैरियम प्रजातियों में से अधिकांश अंडोत्पन्न हैं और इनमें सामान्य रूप से बाहरी निषेचन होता है। व्यावसायिक रूप से महत्वपूर्ण स्वदेशी प्रजातियां रेटीक्यूलोटेड लोच (Reticulated loach), ज़ेबरा मछली (Zebra fish), ग्लासफिश (Glassfish), हनी गौरामी (Honey gourami), पेंसिल गोल्ड लाबियो (Pencil gold labeo) आदि हैं। इसी प्रकार व्यावसायिक रूप से महत्वपूर्ण विदेशी अंडोत्पन्न प्रजातियां ऑस्कर (Oscar), बाला शार्क (Bala shark)/सिल्वर शार्क (Silver Shark), ज़र्द मछली (Goldfish), कोइ कार्प (Koi carp), फायरमाउथ सिक्लिड (Firemouth cichlid) आदि हैं। भारत में कई प्रकार की मछलियां हैं, जिनमें से कई सजावटी प्रयोजनों की हैं। 2016 की रैंकिंग (Ranking) के अनुसार अंतर्राष्ट्रीय सजावटी मछली व्यापार में 16 लाख अमेरिकी डॉलर (Dollar) के साथ भारत का योगदान नगण्य था तथा यह पूरे विश्व में 31 वीं रैंक पर था। विकासशील देशों के निर्यात में 60% के योगदान के साथ कुल विश्व सजावटी मछली व्यापार का 1500 करोड अमेरिकी डॉलर से अधिक होने का अनुमान लगाया गया। सजावटी मछलियों की बढ़ती मांग के साथ उद्योग में 8% की वृद्धि होने की उम्मीद है।

भारतीय सजावटी मछली क्षेत्र में मीठे पानी और समुद्री मछली प्रजातियों दोनों के व्यापक मछली संसाधनों पर विचार करते हुए, विकास की जबरदस्त गुंजाइश है। आने वाले वर्षों में भारत में सजावटी मछली किस्मों का उत्पादन बढ़ने की गुंजाइश है, और यह दुनिया के सजावटी मछली व्यापार में अग्रणी देशों में से एक बन सकता है। भले ही अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में भारतीय स्वदेशी सजावटी मछली की अच्छी मांग है, लेकिन कई कारणों से इनका निर्यात सीमित मात्रा में किया जाता है। इनमें से सबसे महत्वपूर्ण कारक स्थिरता है, जबकि एक अन्य कारक देसी मछलियों के प्रजनन में रूचि का कम होना है। यद्यपि देश में चयनित स्वदेशी सजावटी मछलियों के लिए प्रजनन तकनीक वैज्ञानिक रूप से पूर्ण की गई है, लेकिन उनका बड़े पैमाने पर उत्पादन शुरू होना बाकी है। यदि सरकारी संस्थान बड़े पैमाने पर सुविधाएं स्थापित कर सकते हैं और प्रजनकों को विशेष प्रशिक्षण और सहायता प्रदान कर सकते हैं, तो देश से निर्यात बढ़ाने के लिए अधिक स्वदेशी सजावटी मछली का उत्पादन किया जा सकता है। देश में 5,000 मछलीघर खुदरा दुकानों और उत्पादन इकाइयों की एक समान संख्या के माध्यम से सजावटी मछली उद्योग लगभग 50,000 लोगों को रोजगार प्रदान करता है। विशेषज्ञ के अनुसार, घरेलू मछलीघर बाजार अगले 10 वर्षों में, 300 करोड़ से बढ़कर 1,200 करोड़ रुपये होने की उम्मीद है।

पर्यावरण मंत्रालय द्वारा घोषित सजावटी मछली व्यापार पर नए नियम 300 करोड़ रुपये के घरेलू उद्योग को प्रभावित करने की ओर अग्रसर है, जिसमें आगे अभूतपूर्व वृद्धि हो सकती है। मंत्रालय ने 158 प्रजातियों के प्रदर्शन और बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया है और टैंक आकार, पानी की मात्रा और स्टॉकिंग (Stocking) घनत्व पर नियम लाने के अलावा टैंक में मछलियों के स्वास्थ्य की निगरानी के लिए पूर्णकालिक मत्स्य विशेषज्ञ की नियुक्ति को अनिवार्य कर दिया है। इसका प्रभाव बढ़ते निर्यात क्षेत्र में भी महसूस किया जाएगा। नियमों में स्पष्टता की कमी है, और इसने प्रजनकों, व्यापारियों, थोक विक्रेताओं, निर्यातकों और शौकियों में घबराहट पैदा की है। कोविड (COVID-19) संकट के मद्देनजर भारत जोकि दुनिया में चौथा सबसे बडा मछली निर्यातक देश है, में मछली की मांग में कमी के कारण लगभग 5-10 प्रतिशत की गिरावट आयी है। बीमारी से लडने के लिए लगायी गयी तालाबंदी से शिपमेंट (Shipments) प्रभावित हुए हैं। मत्स्य मंत्रालय के अनुसार देशों में तालाबंदी के कारण सुस्त वैश्विक मांग से देश के निर्यात पर असर पड़ा है। लेकिन, अब स्थिति में सुधार होने लगा है और निर्यात में सामान्य स्थिति जल्द आने की उम्मीद है।

संदर्भ:

https://thefishsite.com/articles/pretty-lucrative-indias-surge-in-ornamental-fish-farming
https://bit.ly/2CbNDyb
https://vikaspedia.in/agriculture/fisheries/fish-production/culture-fisheries/ornamental-aquaculture/overview-of-ornamental-industry
https://bit.ly/2WrWMJE


चित्र सन्दर्भ:

मुख्य चित्र में सजावटी मछली के तौर पर पाली जाने वाली कार्प मछलियों के एक झुण्ड को दिखाया गया है
दूसरे चित्र में दो सजावटी मछलियों को दिखाया गया है।
तीसरे चित्र में गोल्डन फिश को दिखाया गया है।
अंतिम चित्र में विभिन्न सजावटी मछलियां द्रस्यायमान हैं।



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