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वाणिज्यिक बकरी पालन के लाभ

मेरठ

 10-06-2020 10:45 AM
स्तनधारी

बकरियां भारत में मांस का मुख्य स्रोत हैं, इनका मांस सबसे पसंदीदा मांसों में से एक है और इसकी घरेलू मांग बहुत अधिक है। दरसल एक अच्छीन आर्थिक संभावनाओं के कारण, वाणिज्यिक उत्पादन के लिए बकरी पालन ने एक गहन और अति गहन प्रणाली के तहत पिछले कुछ वर्षों से गति पकड़ ली है। अच्छे आर्थिक प्रतिफल की क्षमता वाले बकरी और उसके उत्पादों की उच्च मांग को देखते हुए अनेक प्रगतिशील किसान, व्यापारी, पेशेवर, पूर्व सैनिक और शिक्षित युवा व्यावसायिक पैमाने पर बकरी पालन उद्योग को अपनाने की दिशा में प्रेरित हुए हैं। वहीं बाजार की उभरती हुई अनुकूल परिस्थितियाँ और उन्नत बकरी तकनीकों की आसान पहुँच भी उद्यमियों का ध्यान आकर्षित कर रही है। जिसके चलते देश के विभिन्न क्षेत्रों में कई वाणिज्यिक बकरी फार्म स्थापित किए गए हैं। मेरठ के पास स्थित मवाना में भी कई बकरी फार्म हाउस (Farm house) मौजूद हैं।

बकरी पालन भारत की अर्थव्यवस्था में भी प्रमुख भूमिका निभाता है। भारत में बकरी की कुल आबादी 70.25 मिलियन है, जिसमें से 1.5 करोड़ बकरी की आबादी के साथ उत्तर प्रदेश दूसरे स्थान पर है। बकरी पालन में मुख्य रूप से अच्छी नस्ल और संरक्षण प्रसार को देखा जाता है। यदि आप बकरी पालन व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं तो उससे पहले बकरी पालन व्यवसाय कैसे शुरू किया जाए इसके बारे में जानकारी होनी महत्वपूर्ण है। इससे आपको बकरियों और उनके पालन के तरीकों के बारे में अधिक जानने में मदद मिलेगी।

एक सफल बकरी पालन व्यवसाय की स्थापना के लिए निम्न उपायों का पालन करें:
उपयुक्त नस्लों का चयन करें:

बकरी पालन व्यवसाय शुरू करने से पहले यह तय करें कि आप किन बकरी उत्पादों का उत्पादन करना चाहते हैं। आप बकरियों से मांस, दूध, फाइबर या त्वचा का उत्पादन कर सकते हैं। अपने स्थानीय बाजार पर विचार करें, जहां आप अपने उत्पादों को आसानी से बेच सकते हैं। फिर अपने व्यवसाय के लिए सही नस्ल का चयन करें। निम्न कुछ बकरियों की नस्लों का विवरण है:
• सिरोही :- सिरोही बकरी की नस्ल को बकरी फार्म में पालन के लिए लाभदायक नस्ल माना जाता है। यह बकरी की नस्ल राजस्थान के सिरोही जिले से है। सिरोही नस्ल को राजस्थान राज्य के निकटवर्ती शहरों में मुख्य रूप से जयपुर, अजमेर और उत्तर प्रदेश में भी देखा जा सकता है। आमतौर पर बकरी की इस नस्ल को दूध के बजाए मांस उत्पादन के लिए पाला जाता है, क्योंकि ये मांस की तुलना में दूध (प्रति दिन औसतन 0.5 - 0.7 लीटर) का कम उत्पादन करती है। इनके शरीर का औसत वजन 30 (नर) और 33 (मादा) किलोग्राम होता है। आमतौर पर सिरोही बकरी एक साल में दो बार मेमने को जन्म देती है।
• जमुनपारी :- जामुनपारी बकरी की नस्ल उत्तर प्रदेश के इटावा जिले की देशी बकरी की नस्ल है, जो मुख्य रूप से मांस और दूध के उत्पादन के लिए एक लाभदायक नस्ल है। इस नस्ल में दूध देने की क्षमता बहुत अच्छी है। जामुनपारी बकरी सभी नस्लों में सबसे लंबी नस्ल है। यह नस्ल मध्य प्रदेश के मेरठ, मथुरा, भिंड और मुरैना जिले में भी पाई जा सकती है लेकिन अमिश्रित नस्ल केवल इटावा जिले के बटपुरा और चकरन मेरठ में पाई जा सकती है। जामुनपारी बकरियों के आमतौर पर कूल्हों पर लंबे बाल होते हैं और कान आमतौर पर 8-12 इंच लंबे होते हैं। नर और मादा दोनों के सींग होते हैं और इस नस्ल की बकरियाँ अधिकतम 125 (नर) और 90 (मादा) किलोग्राम तक का वजन प्राप्त कर सकता है।
• बारबारी :- बारबारी एक सुंदर मध्यम श्रेणी की बकरी की नस्ल है। इस नस्ल को इसके मांस उत्पादन के लिए भी पाला जाता है और इसके मांस की गुणवत्ता को बेहतर माना जाता है। बारबारी बकरियों को इसकी प्रारंभिक परिपक्वता के लिए भी जाना जाता है और इस नस्ल में तिगुना मेमने काफी आम है। ये उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले, पंजाब प्रांत के गुजराती और झेलम, सरगोधा जिले के कुछ हिस्से में पाए जा सकते है। इस नस्ल के कई प्रजनन स्थान उत्तर प्रदेश के मेरठ और इटावा जिले में पाए जाते हैं।
• बीटल :- बकरी की बीटल नस्ल को भी वाणिज्यिक बकरी फार्म में पालने के लिए बहुत ही लाभदायक नस्ल माना जाता है। इस नस्ल की जामुनपारी के बाद बहुत अच्छी दूध देने की क्षमता है। बीटल बकरी एक बड़ा पाशविक है और इसे दुग्धालय बकरी की नस्ल माना जाता है। वहीं चमड़े के सामान बनाने के लिए इनकी त्वचा बहुत अच्छी गुणवत्ता की होती है जिसकी बाजार में अच्छी मांग है। इस नस्ल का रंग हल्के भूरे रंग के पैच के साथ सफेद है। एक वयस्क नर बकरे का वजन 45 से 50 किलोग्राम के बीच होता है।

प्रशिक्षण प्राप्त करें:
क्या आपके निकटतम क्षेत्र में कोई पशुधन पालन प्रशिक्षण केंद्र है। यदि हाँ, तो उनके साथ संपर्क करने का प्रयास करें और बकरी पालन पर एक प्रशिक्षण पूरा करें। बकरी पालन व्यवसाय को सफलतापूर्वक चलाने के लिए यह बहुत आवश्यक है। बकरी पालन पर एक प्रशिक्षण से आप बकरी और उनके पालन के तरीकों के बारे में व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त कर सकेंगे। आप कुछ बुनियादी और आवश्यक बकरी देखभाल जैसे बकरी रोग, बकरी स्वास्थ्य परीक्षण, बकरियों की प्रत्येक किस्म की नस्लें, उनके घर में आवश्यक स्थान, भोजन, स्वास्थ्य प्रबंधन, बच्चों की देखभाल, गर्भवती बकरियों की देखभाल आदि के बारे में सीखेंगे। प्रशिक्षण, बकरी पालन पर बहुत सारी किताबें पढ़ने की कोशिश करें।

इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए एक व्यक्ति द्वारा बकरियों को पालने के फायदे के बारे में जरूर पता होना चाहिए, निम्न बकरी पालने के कुछ फायदे हैं:
• बकरियों में उच्च पाचनशक्ति होती है, इसलिए इन्हें किसी भी प्रकार का कच्चा या खराब गुणवत्ता वाला चारा खिलाया जा सकता है।
• बकरियों को सामाजिक प्राणी के रूप में जाना जाता है।
• बकरी पालन बच्चों, महिलाओं और कृषि श्रमिकों द्वारा भी किया जा सकता है।
• बकरी पालन बहुत कम प्रारंभिक निवेश लगाकर भी शुरू किया जा सकता है।
• बकरी का दूध मधुमेह, खांसी, दमा आदि सभी स्वास्थ्य समस्याओं को ठीक करने में सक्षम होता है।
• हालांकि बकरी का कोई धार्मिक निषेध नहीं है, इसलिए दुनिया भर में खपत के लिए ये अत्यधिक स्वीकार किए जाते हैं।
• बाजार में बकरी के दूध की अधिक मांग होती है।
• बकरियों के लिए आवास और अन्य प्रबंधन में कम खर्च लगता है। छोटे पैमाने पर उत्पादन में वे अपने मालिकों और अपने अन्य पशुधन के साथ अपने घरों को साझा करने में सक्षम रहते हैं।
• बकरियों को आसानी से संभाला भी जा सकता है।
• बाजार में न केवल बकरियों की उच्च मांग है, बल्कि इनसे मिलने वाले उत्पादों की भी उच्च मांग है। इन पर किया गया निवेश एक बेहतर आय प्रदान करता है।

वर्तमान में बकरी फार्म का वार्षिक सकल राजस्व 4 से 5 लाख रुपए और कुल वार्षिक खर्च 1.5 से 2 लाख रुपए है, जिससे वार्षिक आय 2 से 3 लाख रुपये तक प्राप्त हो जाती है। वहीं जो किसान बकरी पालन व्यवसाय स्थापित करते समय आर्थिक रूप से कमजोर होते हैं, उन्हें केंद्र और राज्य सरकार दोनों से सहायता मिलती है। किसानों के लिए ऋण और सब्सिडी (Subsidies) को रेखांकित करने के लिए कई योजनाएं हैं। किसान नाबार्ड (NABARD, National Bank for Agriculture and Rural Development) से सहायता प्राप्त कर सकते है, परियोजना के रूप और आकार के क्षेत्र के अनुसार ऋण और सब्सिडी मंजूर की जाती है।

चित्र सन्दर्भ:
1. मुख्य चित्र में हरियाली के मध्य एक पालतू बकरी है।
2. दूसरे चित्र में कोलोनियल काल के दौरान एक अज्ञात चित्रकार द्वारा बनाया गया भारतीय बकरी का चित्र है।
3. तीसरे चित्र में दो बकरियां दिखाई गयी हैं।
4. चौथे चित्र में पेड़ के पत्तों को कहती एक बकरी है।
5. अंतिम चित्र में ग्राम की सड़कों पर दिखाई गयी एक बकरी है।

संदर्भ :-
1. https://www.goatfarming.in/goat-farming-in-uttar-pradesh-information-guide
2. https://www.roysfarm.com/how-to-start-goat-farming-business/
3. http://www.animalbreedersfarm.com/goat-farming-service-provider-in-meerut/
4. https://icar.org.in/node/8040



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