मेरठ से प्रारम्भ हुआ था, भारत की आजादी का प्रथम बिगुल

रामपुर

 25-04-2020 09:50 AM
वास्तुकला 1 वाह्य भवन

परतंत्रता का दंश किसी भी अन्य दंश से सबसे ज्यादा कष्टदायक होता है, भारत देश ने यह दंश अंग्रेजों द्वारा दी गयी सैकड़ो साल की गुलामी के रूप में झेला था। इस दंश ने हमारे कई वीर सपूतों को मृत्यु की नींद सुला दिया था। जलियावाला वाला बाग़ हत्याकांड कौन भूल सकता है भला। भारत भर में अनेकों ऐसे स्थान है जहाँ पर भारतीय जांबाजों को बड़ी संख्या में ब्रिटिश शासन द्वारा बेरहमी से मार दिया गया था। बुलंद शहर में स्थित काला आम चौराहा वास्तव में कत्ले आम के नाम से आया है जहाँ पर अनेकों वीर सिपाहियों को मौत के घाट उतार दिया गया था।

मेरठ से शुरू हुआ 1857 का ग़दर देश की आजादी की पहली लड़ाई के रूप में जाना जाता है। यह ऐसा पहला वाकया था जब भारतीयों ने अंग्रेजों के खिलाफ बिगुल फूंक दिया था। इस विद्रोह के बीज को मंगल पाण्डेय के नेतृत्व में बोया गया था जिसे कि आज पूरा भारत जानता है। इस विद्रोह की आग में हजारों की संख्या में लोगों की हत्या की गयी। इसी विद्रोह में कुल 2 हजार भारतीयों ने जांबाजी के साथ अंग्रेजों से जंग में भागीदरी ली थी, जिनके नामों को हम आज तक नहीं जान सके। इन जवानों का नाम इतिहास के पन्नों में नहीं लिखा गया है, ये ऐसे जवान थें जिनको ब्रिटिश सरकार के सिपाहियों ने तोपों के आगे बाँध कर बारूद से उड़ा दिया था। लेकिन मातृभूमि के लिए दिए गए उनके बलीदान ने स्वतंत्रता के बीज को बो दिया। आज मेरठ को काबा की तरह पूजा जाना चाहिए, क्यूंकि यह वही स्थान है जहाँ से स्वतंत्रता की अलख को यहाँ के जांबाज सिपाहियों ने जगाया था।

मेरठ भारत के उस हिस्से से जुड़ा हुआ है जो कि 1857 की क्रान्ति के दौरान राजनैतिक गतिविधियों का केंद्र बिंदु बन चुका था। मेरठ की क्रान्ति की शुरुआत कालीपल्टन मंदिर से शुरू हुयी थी, माल रोड (Mall Road) के पास ही बंगला (Bungalow) संख्या 158 स्थित है, (जिसमे की एक छोटे मस्जिद का निर्माण भी कराया गया था को माना जाता है) जो कि आखिरी मुग़ल राजा बहादुर शाह जफ़र द्वारा प्रयोग में लाया गया था। बहादुर शाह जफ़र के योगदान को 1857 की क्रान्ति में भुलाया नहीं जा सकता है, इन्होने ही दिल्ली में बैठे इस विद्रोह की दिशा को आगे बढाने का कार्य किया था और बाद में अंग्रेजों द्वारा बंदी बना लिए जाने के बाद मेरठ के इसी घर में कैद कर के रखे गए थे कालांतर में उनको यहाँ से रंगून भेज दिया गया था जहाँ पर उनकी मृत्यु हो गयी थी। माल रोड के साथ ही साथ लाल बलुए पत्थर से निशानियाँ बनायी गयी हैं जो कि 1857 की क्रान्ति के विभिन्न कार्यकलापों की जानकारियाँ प्रदान करती हैं। इसी सड़क पर आगे जाने पर एक दो मंजिला महल स्थित है, जिसमें रानी विक्टोरिया (Queen Victoria) के तीसरे बेटे राजकुमार आर्थर (Prince Arthur) जो कि कैनोट के ड्यूक थे (Duke of Cannaught) सन 1886 से 1890 के दौरान यहाँ रहते थे। वर्तमान समय में यह महल इलाहबाद बैंक (Allahabad Bank) के रूप में परिवर्तित हो चुका है। संत जॉन चर्च (St. John's Church) भी मेरठ का अन्य महत्वपूर्ण स्थान है जिसके पास ही दोनों तरफ खपरैल से बनी सैनिक छावनियां स्थित हैं।

संत जॉन चर्च उत्तर भारत का सबसे प्राचीनतम चर्च है। इसी चर्च के सामने ब्रिटिश शासन ने कई भारतीय सिपाहियों को बिना औजार के इकठ्ठा होने के लिए बुलाया था ताकि उन सब का कोर्ट मार्शल (Court Martial) किया जा सके। यहाँ पर ही उन सिपाहियों के पैर में बेड़ियाँ पहना कर उनको 10 साल की कठोर सजा सुनाई गयी और उसके अगले दिन ही भारतीय सैनिकों ने विद्रोह की अलख को जला दिया था। इसी स्थान के पास संत जॉन कब्रिस्तान भी स्थित है, जिसमें 1857 में मारे गए 9 अंग्रेजों की भी कब्र स्थित है।

मेरठ में 1857 की क्रान्ति से सम्बंधित एक राज्य पुरातत्व विभाग और सरकार द्वारा एक संग्रहालय की भी स्थापना की गयी है। इस संग्रहालय में मेरठ की क्रान्ति से सम्बंधित अनेकों साक्ष्यों को रखा गया है। परन्तु यदि हम वर्तमान की बात करें तो इस संग्रहालय की स्थिति अत्यंत ही दयनीय हो चुकी है। यह संग्रहालय वर्तमान समय में देखरेख और कम कर्मचारी होने के कारण काल के गाल में समाहित हो रहा है। असली समस्या यह है कि यहाँ पर कई प्रतियाँ रखी गयी हैं जो की स्वतंत्रता के प्रथम संग्राम की साक्षी है और यदि ऐसे ही स्थिति बनी रही तो संभवतः ये प्रतियाँ जल्द ही पूर्ण रूप से नष्ट हो जाएंगी।

चित्र (सन्दर्भ):
1. मुख्य चित्र में शहीद स्मारक पार्क स्थित मंगल पांडेय की प्रतिमा का दृश्य है।, Prarang
2. दूसरे बुलंदशहर के काला आम चौराहे को दर्शाया गया है।, Youtube
3. तीसरे चित्रे में मॉल रोड, मेरठ स्थित कोठी नंबर 158 दिखाई रही है। Prarang
4. चतुर्थ चित्र में संत जॉन चर्च है। Prarang
5. अंतिम चित्र में राजकीय स्वतंत्रता संग्राम संग्रहालय दिखाई है। Prarang

सन्दर्भ:
1. https://bit.ly/3aBgcjJ
2. https://bit.ly/3bwGnJs
3. https://meerut.prarang.in/posts/850/postname
4. https://bit.ly/2KsPcbs



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