कोरोना जैसी महामारी में बीमा का योगदान

शहरीकरण - नगर/ऊर्जा
18-04-2020 10:20 AM
कोरोना जैसी महामारी में बीमा का योगदान

स्वास्थ्य किसी भी व्यक्ति की पूँजी होती है, यह एकमात्र ऐसा धन है जो कि मनुष्य को सुन्दर और आसान जीवन प्रदान करने का कार्य करता है। वर्तमान काल में स्वास्थ सम्बंधित सेवाओं में एक बड़ी रकम खर्च हो जाती है जिस कारण कई लोग गरीबी रेखा के नीचे पहुँच जाते हैं। ऐसे परिस्थितियों में सबसे महत्वपूर्ण जो क्रिया है वह है स्वास्थ्य बीमा। स्वास्थ्य बीमा या हेल्थ इंश्योरेंस (Health Insurance) एक ऐसा बीमा होता है जो कि किसी भी व्यक्ति के सम्पूर्ण स्वास्थ सम्बन्धी खर्चे के पूरे या एक हिस्से का वहन करता है। प्रत्येक स्वास्थ सम्बन्धी बीमा का एक मासिक प्रीमियम (Premium) भरना पडता है जिसके आधार पर ही किसी स्वास्थ सम्बन्धी समस्या होने पर उस बीमा से स्वास्थ्य पर हुए खर्चों का वहन किया जाता है। हेल्थ इंश्योरेंस एसोसिएशन ऑफ़ अमेरिका (Health Insurance Association of America) की माने तो यह स्वास्थ बीमा के अंतर्गत बिमारी, चोट, दुर्घटना, विकलांगता, आकस्मिक मृत्यु आदि को शामिल किया जाता है। ऐसी कोई भी स्थिति आये और व्यक्ति का बीमा उपलब्ध हो तो बीमा कंपनी (Company) को बीमा धारक को भुगतान करना पड़ता है। बीमा नियमों में कई ऐसे भी नियम होते हैं जो बीमाधारक को कई महामारियों आदि से सुरक्षा नहीं प्रदान करते ऐसे में व्यक्ति महामारी से सम्बंधित बीमा का भुगतान नहीं प्राप्त करता है। वर्तमान विश्व कोरोना (Corona) नामक महामारी से संकट में पड़ा हुआ है। यह बिमारी चीन (China) देश के वुहान (Wuhan) शहर से शुरू हुयी। यह बिमारी अब तक विश्व भर में अपनी पैठ जमा चुकी है जिससे करोडो लोग प्रभावित हो चुके हैं। इससे भारत में 10,000 से ज्यादा मामले आ चुके हैं अब ऐसे में यह प्रश्न उठाना लाजमी हो जाता है कि क्या आपका स्वास्थ्य बीमा आपको इस महामारी में कवर (Cover) प्रदान करेगा यदि आप इस बिमारी से संक्रमित होते हैं?

भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण आई आर डी आई (Insurance Regulatory and Development Authority of India, IRDAI) ने 4 मार्च (March) को कहा था कि कोरोना (Corona) बिमारी से ग्रसित लोगों को बीमा का लाभ मिलेगा, और इसके साथ ही आई. आर. डी. ए. आई. (IRDAI) ने बीमा कंपनियों को इस महामारी से सम्बंधित एक स्वास्थ्य योजना बनाने का भी सुझाव पेश किया था। अब इसमें एक यह समस्या है कि किसी भी संक्रामक रोग को शुरूआती 30 दिनों तक पॉलिसी (Policy) में कवर (Cover) नहीं किया जाता। लेकिन यह भी एक सत्य विषय है कि यदि यह महामारी में तब्दील हो गयी तो यह स्वास्थ बीमा में नहीं आएगा। जैसा कि हम जानते हैं अब यह बिमारी महामारी का रूप ले चुकी है तो ऐसे में आपका स्वास्थ बीमा इस से हुए खर्चे को कवर (Cover) नहीं करेगा। एक यह भी विषय विचारात्मक है कि भारत में अब तक 80 फीसद लोगो ने स्वास्थ बीमा नहीं करवाया है। यह 2014 में किये गए सर्वेक्षण से पता चला था। भारत के शहरी क्षेत्र में करीब 18 फीसद बीमा धारक थे जिसमे सरकारी वित्त पोषित 12 फीसद थे तथा वहीँ ग्रामीण क्षेत्र में 14 फीसद लोगों के पास बीमा थी जिसमे 13 फीसद सरकार द्वारा वित्त पोषित थी। ऐसे में यह एक सोचनीय विषय हो जाता है कि इस प्रकार की महामारियों से किस प्रकार से स्वास्थ बीमाओं का लाभ लिया जा सकता है।

चित्र (सन्दर्भ):
1.
मुख्य चित्र में बीमा द्वारा सुरक्षित एक परिवार और उनकी तरफ बढ़ते बीमारी या किसी भी प्रकार के स्वास्थ्य समस्याओं (हाथों के रूप में) का कलात्मक चित्रण है। (Pixabay)
2. दूसरे चित्र में बीमा, डॉक्टर और ए.टी.एम. के रूप में कवर को प्रदर्शित किया गया है। (Vecteezey)
सन्दर्भ
1.
https://en.wikipedia.org/wiki/Health_insurance
2. https://en.wikipedia.org/wiki/Health_insurance_in_India
3. https://bit.ly/2z3c2no

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