N95 श्वासयंत्र के विकल्प में घर में ही एक प्रभावी मास्क कैसे बनाएं ?

मेरठ

 08-04-2020 05:10 PM
विचार 2 दर्शनशास्त्र, गणित व दवा

कोरोनावायरस (coronavirus) के बढ़ते प्रकोप में N95 श्वासयंत्र (Respirator) काफी प्रभावी सिद्ध हो रहा है, लेकिन जितना भयावह कोरोना वायरस है उतना ही लाभदायक ये N95 श्वासयंत्र है। ये श्वासयंत्र चेहरे के चारों ओर कसकर बंध जाता है और हवा से 95% वायुवाहित कणों और विषाणुओं को फ़िल्टर (filter) करने में सक्षम है, जो अन्य सुरक्षात्मक उपकरण (जैसे - सर्जिकल मास्क, Surgical Mask) नहीं कर सकते हैं। N95 मास्क के कई निर्माता मेरठ में भी मिल सकते हैं और इंडियामार्ट (Indiamart) जैसी वेबसाइटों (website) पर इनकी मांग में काफी वृद्धि को देखा गया है। लेकिन ये श्वासयंत्र 21 वीं सदी का सबसे महत्वपूर्ण स्वास्थ्य उपकरण कैसे बन गया है? इस श्वासयंत्र का आविष्कार 1910 में उन चिकित्सकों द्वारा किया गया था जो विश्व को उस वक्त उत्पन्न हुई महामारी से बचाना चाहते थे।

पहले के समय में लोगों द्वारा यह माना जाता था कि जीवाणु और विषाणु हवा के माध्यम से फैल कर लोगों को संक्रमित करते थे, तभी लोगों ने अपने चेहरे को ढंकने के लिए मास्क में सुधार करना शुरू किया। उदाहरण के लिए, पुनर्जागरण युग के चित्रों में देखा जा सकता है कि लोग बीमारी से बचने के लिए रूमाल से अपनी नाक ढकते थे। वहीं 1720 की मार्सिले (Marseille) (जो बुबोनिक महामारी (Bubonic Epidemic) का उपरिकेंद्र था) की एक चित्रकारी में यह दिखाया गया है कि क़ब्र खोदनेवाले और लोगों द्वारा अपने चेहरे को चारों ओर कपड़े से ढका हुआ था, जबकि वह महामारी पिस्सू के काटने और चूहों द्वारा फैलती थी। वहीं 1600 के दशक में यूरोप के चिकित्सकों द्वारा एक महामारी से लड़ने के लिए चिड़िया के मुंह जैसे मास्क का आविष्कार किया गया था। इस मास्क में पक्षी की चोंच की तरह एक लंबी चोंच बनाई गई थी, जिसमें सुगंधित जड़ी बूटियाँ रखी जाती थी और इसके किनारे में दो नथुने मौजूद थे। वहीं सूक्ष्मजैविकी (Microbiology) के आधुनिक क्षेत्र में उन्नति के साथ यह जाना गया कि ये महामारी हवा से नहीं बल्कि कीटों और चूहों द्वारा फैलाई जा रही है।

वहीं चिकित्सकों द्वारा 1897 में पहला सर्जिकल मास्क (surgical mask) पहनना शुरू किया गया था। उनके द्वारा अपने चहरे पर आमतौर पर उपयोग किया जाने वाला रुमाल बांधा जाता था, जिसका मुख्य कारण वायुवाहित बीमारी को छानना नहीं था बल्कि सर्जरी (surgery) के दौरान घावों पर चिकित्सक की खांसी या छींकने की बूंदों को पड़ने से रोकने के लिए किया जाता था और वर्तमान समय में भी इनका उपयोग इसलिए ही किया जाता है। 1910 में मंचूरिया (जिसे हम अब उत्तरी चीन के रूप में जानते हैं) में उत्पन्न हुई महामारी, से लड़ने के लिए चीनी इंपीरियल कोर्ट द्वारा लीन-तह वू नाम के एक चिकित्सक को बुलाया गया था। लीन-तह वू ने जब यह पता लगाया कि ये महामारी वायुवाहित है, तो उन्होंने कई परतों वाले एक ठोस मास्क का आविष्कार किया।

ऐसे ही वर्तमान समय में उपयोग किया जाने वाला N95 श्वासयंत्र वू के डिजाइन (design) का वंशज है। ये श्वासयंत्र दरअसल वायुमंडल में मौजूद खतरनाक गैसों और कणों (जिसमें धुएं, वाष्प, गैस और कण जैसे धूल और वायुजनित सूक्ष्मजीव शामिल हैं) को फिल्टर कर इन्हें पहनने वालों को स्वच्छ हवा प्रदान करता है। ये श्वासयंत्र दो मुख्य श्रेणियों में आते हैं: पहला एयर-प्यूरिफाइंग रेस्पिरेटर (air-purifying respirator), जिसमें दूषित वायु को छानकर स्वच्छ और शुद्ध हवा प्राप्त की जाती है। दूसरा एयर-सप्लाईड रेस्पिरेटर (air-supplied respirator), जिसमें सांस लेने वाली हवा की वैकल्पिक आपूर्ति की जाती है। प्रत्येक श्रेणी के श्वासयंत्र को अलग-अलग तकनीकों से हानिकारक वायुजनित दूषित पदार्थों को कम करने या समाप्त करने के लिए नियोजित किया जाता है।

वहीं एक सर्जिकल मास्क एक ढीला-ढाला, उपयोग करके फैंकने योग्य मास्क होता है जो पहनने वाले के मुंह और नाक के बीच एक भौतिक अवरोध प्रदान करता है और तत्काल वातावरण में संभावित संदूषक होता है। यदि ठीक से पहना जाए, तो एक सर्जिकल मास्क जीवाणु और विषाणु युक्त बड़े-कण की बूंदों, स्प्रे या छींटे को रोकने में मदद करता है। सर्जिकल मास्क पहनने वाले की लार और श्वसन स्राव के जोखिम को कम करके अन्य लोगों को संक्रमण से बचाता है। लेकिन एक सर्जिकल मास्क, हवा में मौजूद बहुत छोटे कणों को फ़िल्टर या अवरोधित नहीं करता है जो कि खांसी, छींक या कुछ निश्चित चिकित्सा प्रक्रियाओं द्वारा प्रेषित होते हैं। वर्तमान समय में जहां पूरा विश्व कोरोनावायरस जैसी महामारी से लड़ रहा है, ऐसी आपातकालीन स्थिति में चिकित्सकों को N95 श्वासयंत्र और सर्जिकल मास्क की कमी का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे समय में हम लोगों को इन उपकरणों को चिकित्सों के लिए छोड़ देना चाहिए और स्वयं के लिए खुद घर में मास्क बना कर उपयोग करना चाहिए।

निम्न घर पर मास्क बनाने की प्रक्रिया है :
सामग्री:
• कपड़ा, जैसे कि सूती, खीसा या माइक्रोफाइबर (microfiber) का कपड़ा
• इलास्टिक बैंड (Elastic band) या दो रबर बैंड
• कैंची
• सिलाई मशीन
प्रक्रिया:
• कपड़े को 2 आयतों में काटें, 12 इंच x 6 इंच (या छोटे सिर वालों के लिए 11 इंच x 5 इंच)।
• इसके बाद दोनों आयतों को एक साथ सिल लें; फिर नीचे के किनारों को भी सिल दें।
• एक तरफ के किनारे को मोड़ कर इलास्टिक बैंड रखकर मोड़ दें और सिलाई करना शुरू करें ताकि इलास्टिक किनारे के मोड़ के अंदर ही रहे।
• एक बार जब आप सिलाई शुरू कर देते हैं, तो इलास्टिक को कस कर खींचें और बाकी के मुड़े हुए किनारे को सिलाई करके बंद कर दें।
• इसी प्रक्रिया को कपड़े के दूसरी तरफ दोहराएं और ध्यान रहें मजबूती के लिए सिलाई को कई बार दोहराएं।

वहीं 2013 में किए गए एक अध्ययन में श्लैष्मिक ज्वर (influenza) के प्रसार को रोकने के लिए घर में बनाए गए सूती के कपड़े के मास्क की क्षमता का पता लगाया गया था। जिसमें शोधकर्ताओं ने पाया कि सर्जिकल मास्क की तुलना में सूती कपड़े से बना मास्क एक तिहाई प्रभावी था, केवल इतना ही नहीं घर के बने मास्क में रोगियों द्वारा निष्कासित सूक्ष्मजीवों की संख्या को कम करने की भी क्षमता देखी गई है।

संदर्भ :-
1.
https://www.fastcompany.com/90479846/the-untold-origin-story-of-the-n95-mask
2. https://en.wikipedia.org/wiki/Respirator
3. https://www.businessinsider.in/international/news/how-to-make-an-effective-face-mask-at-home/articleshow/74864756.cms
चित्र सन्दर्भ:
1.
pexels.com - respirators
2. picseql.com - face mask
3. youtube.com - home-made mask
4. picseql.com - homemade face mask



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