कैसे हुई प्रेम के प्रतीक के रूप में दिल की विचारधारा की उत्पत्ति

मेरठ

 14-02-2020 04:11 AM
विचार 2 दर्शनशास्त्र, गणित व दवा

हालांकि कुछ लोग मानते हैं कि वेलेंटाइन डे (Valentine’s Day) आधुनिक ग्रीटिंग कार्ड (Greeting Card) उद्योग का निर्माण है, लेकिन वास्तव में इसका इतिहास इतना पुराना है कि अधिकांश लोगों को इसकी उत्पति का ज्ञान ही नहीं है। रोम (Rome) के संत वेलेंटाइन को 496 में पोप गेलैसियस (Pope Gelasius) द्वारा कैथोलिक कैलेंडर (Catholic Calendar) में डाला गया था, जिसको 14 फरवरी को मनाया जाना था, तथा इस दिन से वेलेंटाइन डे को भी मनाया जाने लगा।

17वीं शताब्दी के मध्य तक, इंग्लैंड (England) में वेलेंटाइन डे का उत्सव उन लोगों के लिए प्रथागत था, जो इसके अनुष्ठान का खर्च उठा सकते थे। शुरुआती अंग्रेज़ी, फ्रेंच (French) और अमेरिकी वेलेंटाइन में दिए जाने वाले कार्ड पर हस्तलिखित पंक्तियाँ वर्तमान समय की तुलना में काफी अधिक होती थी। लेकिन समय के साथ, निर्माताओं ने उन्हें चित्रों से अलंकृत करना शुरू कर दिया।

फिर, 18वीं शताब्दी के अंत में इंग्लैंड में पहले वाणिज्यिक वेलेंटाइन कार्ड पेश किए गए, जो मुद्रित, उत्कीर्णित या लकड़ियों से बने और कभी-कभी हाथ से रंगे होते थे। उन्हें प्यार के पारंपरिक प्रतीकों - फूलों, दिलों, पक्षियों आदि जैसे पद्य के साथ जोड़ा जाता था। वेलेंटाइन कार्ड में हमारे द्वारा हमेशा दिल के आकार की सजावट देखी जाती है। ये दिल का आकार आज प्रेम का सार्वभौमिक प्रतीक है।

वर्तमान समय में हम इसे अपने चारों ओर देखते हैं, खासकर हमारे द्वारा उपयोग किये जाने वाले सोशल नेटवर्क (Social Network) पर दिल के इमोटिकॉन (Emoticon) के रूप में। लोग किसी को या किसी चीज़ को अपनी श्रद्धा व्यक्त करने के लिए हर दिन लाखों डिजिटल (Digital) दिल, सोशल मीडिया साइट्स और वेब (Web) पर भेजते हैं। लेकिन मानव दिल तो इस दिल के आकार से भिन्न है, तो इस आकृति की उत्पत्ति आखिर कैसे हुई? दिल की आकृति, एक आधुनिक परिभाषा के अनुसार, एक विचारधारा है जिसका उपयोग भावना, स्नेह और प्रेम के मूल के रूप में अपने रूपक या प्रतीकात्मक अर्थ में "प्यार की भावना" को व्यक्त करने के लिए किया जाता है। कुछ सिद्धांत ये बताते हैं कि दिल के प्रतीक का जोड़ सिल्फ़ियम (Siplhium) नामक एक प्राचीन पौधे से भी है।

सिल्फ़ियम साइरीन (Cyrene) के ग्रीक उपनिवेश के पास उत्तरी अफ्रीकी तट पर पाई जाने वाली एक विशाल सौंफ़ की एक प्रजाति थी। विभिन्न प्राचीन लेखकों और कवियों द्वारा इसके सुरक्षात्मक गुणों का उल्लेख किया गया है, जैसे इसे मसाले और औषधि के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। वहीं इस सिद्धांत के अलावा, कुछ शोधकर्ताओं का मानना है कि दिल का आकार अन्य पौधों से उत्पन्न हुआ था जैसे कि आइवी (Ivy) या लिली (Lily) की पत्तियों से। वहीं कुछ लोगों का ये अनुमान है कि मानव शरीर के कुछ हिस्सों के आकार के अनुसार इसकी आकृति बनाई गई थी। ऐतिहासिक रूप से, दिल के आकार का पहला ज्ञात चित्रण 1250 के दशक में बनाया गया था। यह एक फ्रांसिसी पांडुलिपि "रोमन डी ला पॉयर" (Roman de la Poire) में एक बड़े अक्षर "एस" (S) की एक सजावट में उपयोग किया गया था। इसमें एक प्रेमी अपनी प्रेमिका को अपना दिल देता हुआ नज़र आता है और इस दिल की आकृति काफी हद तक आज के प्रचलित दिल के समान थी।

1305 में, प्रसिद्ध इतालवी चित्रकार ज्योत्तो (Giotto) ने स्क्रोवेनी चैपल (Scrovegni Chapel) में चैरिटी (Charity) का चित्रण किया जिसमें उन्हें यीशु को अपना दिल देते हुए चित्रित किया है। इस दिल के आकार में पाइन (Pine) शंकु का उल्टा आकार देखने को भी मिलता है। बाद के समय से चित्रों में दिल के प्रतीकों के प्रतिनिधित्व पर ज्योत्तो के चित्रण का बहुत प्रभाव पड़ा था। 14वीं शताब्दी के अंत तक, आमतौर पर दिल के वर्तमान आकार को उल्टा ही दिखाया गया था। लेकिन 15वीं शताब्दी के पूर्वार्ध में यह परंपरा बदल गई।

इस दौरान एक और बदलाव हुआ, जिसने हृदय प्रतीक को वर्तमान समय में दिखाई देने वाले दिल का आकार दिया था। चूँकि मानव हृदय को लंबे समय से ही भावना और आनंद से जोड़ा जाता था, इस आकार को अंततः रोमांस (Romance) और मध्ययुगीन प्रेम के प्रतीक के रूप में चुन लिया गया। धार्मिक कला में सैक्रेड हार्ट ऑफ़ क्राइस्ट (Sacred Heart of Christ) और खेलने वाले ताश में चार में से एक के रूप में चित्रित होने के बाद यह पुनर्जागरण के दौरान विशेष रूप से लोकप्रिय हुआ था। 18वीं और 19वीं शताब्दी तक, यह प्रेम पत्रों और वेलेंटाइन डे कार्डों में एक आवर्ती का रूप बन गया, जिसे हम आज अपनी श्रद्धा को व्यक्त करने के लिए आमतौर पर भी इस्तेमाल करते हैं।

संदर्भ:
1.
https://en.wikipedia.org/wiki/Heart_symbol
2. https://bit.ly/2Uo0BPX
3. https://www.history.com/news/what-is-the-origin-of-the-heart-symbol
4. https://bit.ly/2ucnbAu



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