क्या भारत में की जा सकती है तितलियों की कृषि?

मेरठ

 18-01-2020 10:00 AM
तितलियाँ व कीड़े

रंग-बिरंगी तितलियों के पीछे किसका बचपन नहीं भागा होगा? ये रंग-बिरंगी तितलियां देखने में बड़ी मनमोहक लगती हैं। वहीं वर्तमान समय में अनुसंधान सुविधाओं, विश्वविद्यालयों, चिड़ियाघरों, कीट-व्याधियों, प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों, तितलियों के प्रदर्शन, संरक्षण संगठनों, प्रकृति केंद्रों, व्यक्तियों को तितली भंडार की आपूर्ति के उद्देश्य से नियंत्रित वातावरण में तितलियों और पतंगों के प्रजनन का व्यवसाय एक नया चलन है।

कुछ तितली और कीट प्रजनक अपने बाज़ार को थोक ग्राहकों तक सीमित रखते हैं जबकि अन्य प्रजनक खुदरा गतिविधि के रूप में छोटी मात्रा में भंडार की आपूर्ति करते हैं। कुछ छोटे पैमाने और बड़े पैमाने वाले प्रजनक अपने व्यवसायों को स्कूलों के लिए तितलियों या पतंगों के प्रावधान तक सीमित रखते हैं। अन्य कुछ व्यवसायक अंतिम संस्कार, धर्मशाला, स्मारक कार्यक्रमों और शादियों जैसे कार्यक्रमों में तितलियाँ प्रदान करते हैं। वहीं इस तरह के तितली प्रजनन कार्यक्रम जैव विविधता को प्रभावित नहीं करते हैं।

तितली की कृषि में प्यूपा (Pupa) का प्रजनन किया जाता है और फिर उसे स्थानीय प्रदर्शनी या चिड़ियाघर और विदेशों में लाइव (Live) प्रदर्शनियों के लिए बेचा जाता है। तितली कृषिक्षेत्र आमतौर पर जंगल के करीब स्थित होते हैं और ग्रामीण समुदायों को एक वैकल्पिक, स्थायी आय प्रदान करते हैं। फिलीपींस (Philippines), कोस्टा रिका (Costa Rica), युगांडा (Uganda), केन्या (Kenya) और तंज़ानिया (Tanzania) सहित दुनिया भर में कई उष्णकटिबंधीय देशों में तितली कृषिक्षेत्र स्थापित किए गए हैं।

उष्णकटिबंधीय देशों में अधिकांश प्रकार की कृषि के लिए वनों को काटने की आवश्यकता होती है और यह ही प्रजातियों के विलुप्त होने का एक प्रमुख कारण है। लेकिन दूसरी ओर तितली की कृषि के लिए अक्षुण्ण जंगल की आवश्यकता होती है। इस प्रकार जीवों के आवासों के संरक्षण के लिए आर्थिक प्रोत्साहन प्रदान होता है। चूंकि तितलियों को जंगल से सीमित निष्कर्षण के साथ बाड़ों में पाला जाता है, इसलिए जंगली आबादी के स्वास्थ्य पर खेती का नगण्य प्रभाव पड़ता है।

तितली की कृषि की प्रक्रिया निम्नलिखित है :-
• तितली की कृषि में एक छोटे से जालीदार बाड़े को तैयार किया जाता है। इसे तितली की नियोजित प्रजातियों के लिए खाद्य पौधे के साथ लगाया जाता है। एक मादा तितली को प्रजनन पिंजरे में रखा जाता है ताकि वह खाद्य पौधे पर अंडे दे सके।
• हाल ही में दिए गए अंडों को किसान द्वारा कीट मुक्त डिब्बों में रखा जाता है, जिसमें वे 10-14 दिनों में टूट जाते हैं।
• अंडे के टूटने के बाद इससे निकलने वाले कीट को नर्सरी (Nursery) में उनके विशेष खाद्य पौधे में स्थानांतरित कर दिया जाता है। बढ़ते हुए कीट की किसानों द्वारा प्यूपा बनने तक देखभाल की जाती है।
• कीट प्यूपा बनने तक उपयुक्त पत्ती या छड़ी से चिपका रहता है और प्यूपा बनने पर अपनी त्वचा को छोड़ देता है। इसके बाद किसान द्वारा तितलियों को बेचा जाता है।

हालांकि भारत में तितलियों की कृषि में कानून द्वारा प्रतिबंध लगाया हुआ है। वास्तव में जहां तितलियों की कृषि से लाभ होता है वहीं इसके कई नुकसान भी हैं। जैसे इस तरह की कृषि से जहां एक तरफ स्थानीय समुदायों की आय में विविधता लाई जा सकती है, वहीं दूसरी ओर प्रतिबंध के बिना मुनाफे के लिए कई उष्णकटिबंधीय तितलियों की विविधता जोखिम में आ सकती है। भारतीय वन्यजीव संरक्षण अधिनियम ने तितलियों की 412 प्रजातियों को सूचीबद्ध किया है और संरक्षित प्रजातियों की अनुसूची का हिस्सा बनाया हुआ है।

भारत में तितलियों के पार्क और उद्यानों की शुरुआत विभिन्न प्रकार के कीट और खाद्य पौधों के साथ की गई है जो तितलियों को आकर्षित करते हैं और तितलियों के लिए अनुकूल आवासों के उद्धार में सहायता करते हैं। इसके विपरीत, तितली घर या व्यावसायिक कृषि के मुकाबले तितली उद्यान तितलियों को खुली हवा में रहने देने में मदद करते हैं, जहां केवल देशी तितलियों को प्राकृतिक रूप से निवास/यात्रा के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।

वहीं वर्तमान में भारत में देश भर में स्थित दस तितली पार्क हैं, जो मुख्य रूप से सरकार द्वारा स्थापित किए गए हैं। सबसे पहले तितली पार्क की स्थापना बैंगलोर में की गई थी, जिसके बाद शिमला, पुणे, चंडीगढ़, सिक्किम, गोवा, मैसूर, ओडिशा, श्रीरंगम और हाल ही में नई दिल्ली के लोधी गार्डन में की गई। हालांकि, निर्यात के लिए तितली की कृषि वर्तमान में भारत में संभव नहीं है, लेकिन कृषि-पारिस्थितिक तंत्र के भीतर पर्यावरण की रक्षा के साधन के रूप में अधिक से अधिक तितलियों के मुद्रीकरण और मूल्य निर्धारण की क्रियाविधि का विस्तार करने की संभावना है।

संदर्भ:
1.
https://en.wikipedia.org/wiki/Commercial_butterfly_breeding
2. https://www.angkorbutterfly.com/butterflyfarming.html
3. https://ijair.org/index.php/issues?view=publication&task=show&id=919

RECENT POST

  • टोक्सोप्लाज़मोसिज़ गोंडी- एक ऐसा  परजीवी जो चूहों और इंसानों को भयमुक्त कर सकता है
    कोशिका के आधार पर

     29-11-2022 10:37 AM


  • प्राचीन काल में अनुमानित तरीके से, इस तरह होता था, शरीर की ऊंचाई और जमीन का मापन
    सिद्धान्त I-अवधारणा माप उपकरण (कागज/घड़ी)

     28-11-2022 10:24 AM


  • अरब की भव्य इमारतें बहुत देखी होंगी आपने, पर क्या कभी अरबी शादी भी देखी ?
    सिद्धान्त 2 व्यक्ति की पहचान

     27-11-2022 12:21 PM


  • प्रदूषण और कोहरा मिलकर बड़ा रहे है, हमारे शहरों में अँधेरा
    नगरीकरण- शहर व शक्ति

     26-11-2022 10:53 AM


  • भारतीय किसानों को अधिक दूध के साथ-साथ अतिरिक्त लाभ भी पंहुचा सकती हैं, चारा फसलें
    भूमि प्रकार (खेतिहर व बंजर)

     25-11-2022 10:49 AM


  • किसी भी व्यवसाय के सुख-दुःख का गहराई से विश्लेषण करती पुस्तक
    विचार 2 दर्शनशास्त्र, गणित व दवा

     24-11-2022 11:07 AM


  • पहनावे और सुगंध का संयोजन, आपको भीड़ में भी सबसे अलग पहचान दिलाएगा
    गंध- ख़ुशबू व इत्र

     23-11-2022 10:50 AM


  • कैसे कर रहे हैं हमारे देश के आदिवासी समुदाय पवित्र वनों का संरक्षण?
    जंगल

     22-11-2022 10:45 AM


  • भारतीय बाजार में टेलीविजन की बढ़ती मांग को पूरा करेंगे, भारतीय टेलीविज़न निर्माता
    संचार एवं संचार यन्त्र

     21-11-2022 10:37 AM


  • शून्य-गुरुत्वाकर्षण में इस टी-हैंडल की हरकतें आपको भी हैरान कर देंगी
    विचार 2 दर्शनशास्त्र, गणित व दवा

     20-11-2022 12:54 PM






  • © - 2017 All content on this website, such as text, graphics, logos, button icons, software, images and its selection, arrangement, presentation & overall design, is the property of Indoeuropeans India Pvt. Ltd. and protected by international copyright laws.

    login_user_id