साइबेरिया से मेरठ आते हैं, पीले आँखों वाला कबूतर

मेरठ

 18-12-2019 01:55 PM
पंछीयाँ

हमारी पृथ्वी ऐसे कितने ही जीवों से सुसज्जित हैं जो कि खूबसूरती की एक मिसाल हैं। प्रत्येक जीव अपने में एक विशेषता लिए हुए रहता है और यह विशेषता कई बार उस पंक्षी के निवास स्थान को प्रचलित कर देती है। जैसा कि प्रत्येक शर्दियों में भारत के मुख्यतः उत्तर के भागों में साइबेरिया से उड़ कर पंक्षी आते हैं जिनको की यहाँ की आम भाषा में साइबेरियन पंछी के नाम से जाना जाता है। मेरठ के सहतूत के बागानों में एक ऐसा ही पंछी है जो कि स्वतः ही खिचा चला आता है, वह पंछी है पीले आँखों वाला कबूतर।

आइये सबसे पहले ये जानने की कोशिश करते हैं कि आखिर पीले आँखों वाला कबूतर होता क्या है? पीले आँखों वाला कबूतर कोलम्बा इवेर्समैननी परिवार से सम्बंधित है। यह दक्षिण कजाकिस्तान, उज्बेकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान, तजाकिस्तान, अफगानिस्तान, उत्तर पूर्व इरान, उत्तर पश्चिम चीन आदि में रहता है। सर्दियों के समय यह कश्मीर, उत्तर पूर्व पाकिस्तान, राजस्थान आदि क्षेत्रों में विचरण करने आता है। इस पंछी का विवरण सबसे पहले फ़्रांसिसी पंछी विज्ञानी चार्ल्स लुसियन बोनापार्ट ने सन 1856 में किया था। पीले आँखों वाला कबूतर एक माध्यम आकार का पंछी है जो की लगभग 30 सेंटीमीटर की लबाई तक बढ़ता है और करीब यह 183 से 234 ग्राम तक का हो सकता है। यह कबूतर मुख्य रूप से भूरे रंग के होते हैं तथा इनके उपरी भाग में थोड़ा भूरा-पीला सर, इनके गले और स्तन पर गुलाबी और बैगनी रंग पाया जाता है।

इनके पंख पर काली पट्टी पायी जाती है जो की पूँछ तक जाती है। इनके पंखों के निचले हिस्से, दुम और नीचे के भाग सफ़ेद या हलके भूरे रंग के होते हैं। इनको पीले आँखों वाला कबूतर इस लिए कहते हैं क्यूंकि इनके आँखों के आस पास का हिस्सा पीले रंग का होता है। इन कबूतरों की चोंच भी पीली रंग की होती है और इनका पैर गुलाबी रंग के होते हैं। पीले रंग वाला कबूतर मुख्य रूप से मूक कबूतर होता है परन्तु यह मिलन के समय ऊ ऊ की आवाज निकालता है।

वर्तमान समय में यह कबूतर तेज़ी से विलुप्तता की ओर बढ़ रहा है जिसके की दो प्रमुख कारण है-
1. शिकार
2. उनके रहने वाले स्थानों की कमी

इन कबूतरों का शिकार एक बड़े पैमाने पर किया जाता है जिस कारण इसकी संख्या अत्यधिक कम हो रही है। वर्तमान काल में इस कबूतर की आबादी और भी कम हो रही है जिसका कारण है इसके मिलन या रहने वाले स्थानों पर कई परियोजनाओं के आगमन के कारण। भारत में राजस्थान के बीकानेर में स्थित पंछी अभ्यारण जोरबीर में ये पंछी बड़ी संख्या में आया करते थे जिनकी संख्या में बड़ी गिरावट देखी गयी थी।

अब इस अभ्यारण में आगंतुक पीले आँखों वाले कबूतरों का सालाना आगमन निम्नवत है-
2011-12 में 320, 13-14 में 500, 14-15 में 850 और 15-16 में 2000। ये पंछी विलुप्तप्राय प्राणियों में आता है जिसका मुख्य कारण है इसकी संख्या जो की दिन बदिन कम होते जा रही है।

सन्दर्भ:-
1.
https://en.wikipedia.org/wiki/Yellow-eyed_pigeon
2. https://bit.ly/2rv8LtV
3. https://www.hbw.com/species/yellow-eyed-pigeon-columba-eversmanni



RECENT POST

  • मेरठ में मौजूद शनिदेव की अष्‍टधातु की प्रतिमा का संक्षिप्‍त विवरण
    वास्तुकला 1 वाह्य भवन

     23-01-2021 12:13 PM


  • 7 वीं (मेरठ) डिवीजन का प्रथम विश्व युद्ध में अपरिहार्य भूमिका
    उपनिवेश व विश्वयुद्ध 1780 ईस्वी से 1947 ईस्वी तक

     22-01-2021 03:54 PM


  • बकरी पालन व्‍यवसाय का संक्षिप्‍त विवरण
    स्तनधारी

     21-01-2021 01:32 AM


  • पिछले वर्ष लॉकडाउन के तहत सड़क दुर्घटनाओ में देखी गई कमी
    य़ातायात और व्यायाम व व्यायामशाला

     20-01-2021 11:48 AM


  • विभिन्न वर्गों के लिए दिए जाते हैं, विभिन्न प्रकार के पासपोर्ट
    सिद्धान्त 2 व्यक्ति की पहचान

     19-01-2021 12:27 PM


  • बुलियन (bullion) और न्यूमिज़माटिक (Numismatic ) में अंतर
    सिद्धान्त I-अवधारणा माप उपकरण (कागज/घड़ी)

     18-01-2021 12:44 PM


  • जीवन को बेहतरीन बनाती है, निस्वार्थ भावना
    विचार 2 दर्शनशास्त्र, गणित व दवा

     17-01-2021 12:03 PM


  • कोरोना महामारी के तहत चमड़े के निर्यात में 10.89% की गिरावट
    वास्तुकला 2 कार्यालय व कार्यप्रणाली

     16-01-2021 12:26 PM


  • जैन धर्म के पवित्र मंदिर की दीवारों पर चित्रित दैवीय कलाकृतियाँ
    वास्तुकला 1 वाह्य भवन

     15-01-2021 12:54 AM


  • आखिर क्यों है कुंभ मेले में मकर संक्रांति के दिन का इतना महत्व
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     14-01-2021 12:24 PM






  • © - 2017 All content on this website, such as text, graphics, logos, button icons, software, images and its selection, arrangement, presentation & overall design, is the property of Indoeuropeans India Pvt. Ltd. and protected by international copyright laws.

    login_user_id