रामपुर की अनोखी भोजन शैली

मेरठ

 15-11-2019 01:01 PM
स्वाद- खाद्य का इतिहास

क्या आपने कभी घास के हलवे या मछली के हलवे के बारे में सुना है? ये सुनने में थोड़ा सा आश्चर्यचकित करता है, लेकिन हाल ही में यूट्यूब (Youtube) के एक चैनल (Channel) द टाइमलिनर्स (The Timeliners) द्वारा एक वीडियो "रामपुर के हलवे" प्रकाशित किया गया था। जिसमें दिखाया गया कि कुणाल कपूर (रसोइये/बावर्ची/शाहकार) रामपुर के व्यंजनों के बारे में जानने के लिए रामपुर के भ्रमण पर निकलते हैं और तब इसमें देखा गया कि रामपुर में हलवे को केवल आटे का उपयोग करके ही नहीं बनाया जाता है, बल्कि और भी कई व्यंजनों का उपयोग करके बनाया जा सकता है। जी हाँ, रामपुर में घास; मछली; अदरक और आदि का हलवा भी बनाया जाता है।

रामपुर में विभिन्न और स्वादिष्ट व्यंजनों को बनाया जाता है, चूंकि अवधी और रामपुरी दोनों ही व्यंजन मुगल व्यंजनों का विस्तार हैं, इसलिए वे बहुत समान भी हैं। यदि अंतर है तो इस बात का कि रामपुर के व्यंजनों में गुलाब या केवड़ा पानी जैसे किसी भी इत्र का उपयोग नहीं किया जाता है। इसके अलावा मसालों का उपयोग भी अधिक सूक्ष्म किया जाता है। पिछले कुछ समय में रामपुरी भोजन वास्तव में लगभग गायब सा हो गया था, लेकिन इसे दोबारा पुनर्जीवित करने और बढ़ावा देने के लिए काफी प्रयास किया गया है।

साथ ही काफी काम लोग इस बारे में जानते हैं कि वे रामपुर के खानसामे ही थे जिन्होंने सबसे पहले मटन को नरम करने के लिए पपीता और लौकी का उपयोग किया था। वहीं भोजन पर वरक का उपयोग भी रामपुर के खानसामों का आविष्कार था और रामपुर के प्रसिद्ध हलवे को सजाने के लिए इसका उपयोग किया जाता है। खानसामों द्वारा आज भी कई व्यंजन पकाने के लिए मिट्टी के बर्तन का उपयोग किया जाता है। अब सावाल यह उठता है कि रामपुर के व्यंजन मुगलई, अफगानी, लखनवी, कश्मीरी और अवधी व्यंजन से कैसे प्रभावित हैं?

दरसल बरेली हारने के बाद, नवाब फैज़ुल्लाह खान ने 1774 में रोहिल्ला साम्राज्य के रूप में ब्रिटिश संरक्षण में रामपुर (पहले मुस्तफाबाद) की स्थापना की। हालाँकि संधि में यह कहा गया था कि नवाब और उनके उत्तराधिकारियों को कभी भी गौरव के इतिहास की किताबों में जगह नहीं मिलेगी, लेकिन इसने कलाकारों के पलायन करने और समान रूप से संरक्षित होने के लिए रामपुर को एक सुरक्षित आश्रय स्थल बना दिया था। वहीं 1858 के बाद, रामपुर मुगल और अन्य शाही अदालतों में से अधिकांश शाही खानसामों के लिए 'भिन्नता' के रूप में प्रमुखता से उभरा, जो काम पाने में असमर्थ थे और शाही अदालत में उन्हें कलात्मक स्वतंत्रता का इस्तेमाल करने दिया गया था। नवाबों के पास कई विशेष रसोइयों के होने से उन्होंने स्वयं के व्यंजनों को विकसित करना शुरू कर दिया, जो कि उस समय तक मुख्य रूप से पश्तून शैली के थे।

रामपुर की शाही रसोई ने एक प्रारूप पर काम किया जो उन दिनों आदर्श था। जैसे चावल का एक विशेषज्ञ केवल चावल के व्यंजनों को पकाता था और वे मांस और अन्य व्यंजनों को नहीं बनाता था। उस समय नवाब अक्सर अपने खानसामों को नए व्यंजन बनाने के लिए प्रोत्साहित करते थे, जिससे कई नए व्यंजन उभर कर सामने आते थे, उदाहरण के लिए मीठे चवाल, दूधिया चावल आदि।

संदर्भ:
1.
https://bit.ly/2NDI26G
2.https://bit.ly/34ON71x
3.https://www.mydigitalfc.com/fc-supplements/elan/rampur-and-mahaseer
4.https://indianexpress.com/article/lifestyle/food-wine/the-rise-and-revival-of-the-ancient-rampuri-cuisine/



RECENT POST

  • सदियों से फैशन के बदलते रूप को प्रदर्शित करती हैं, फ़यूम मम्मी पोर्ट्रेट्स
    द्रिश्य 3 कला व सौन्दर्य

     28-11-2020 07:10 PM


  • वृक्ष लगाने की एक अद्भुत जापानी कला बोन्साई (Bonsai)
    पेड़, झाड़ियाँ, बेल व लतायें

     28-11-2020 09:03 AM


  • गंध महसूस करने की शक्ति में शहरीकरण का प्रभाव
    गंध- ख़ुशबू व इत्र

     27-11-2020 08:34 AM


  • विशिष्ट विषयों और प्रतीकों पर आधारित है, जैन कला
    द्रिश्य 3 कला व सौन्दर्य

     26-11-2020 09:05 AM


  • सेना में बैंड की शुरूआत और इसका विस्‍तार
    द्रिश्य 2- अभिनय कला

     25-11-2020 10:26 AM


  • अंतिम ‘वस्तुओं’ के अध्ययन से सम्बंधित है, ईसाई एस्केटोलॉजी
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     24-11-2020 08:13 AM


  • क्वांटम कंप्यूटिंग को रेखांकित करते हैं, क्वांटम यांत्रिकी के सिद्धांत
    विचार 2 दर्शनशास्त्र, गणित व दवा

     22-11-2020 10:22 AM


  • धार्मिक महत्व के साथ-साथ ऐतिहासिक महत्व से भी जुड़ा है, श्री औघड़नाथ शिव मन्दिर
    वास्तुकला 1 वाह्य भवन

     22-11-2020 08:16 PM


  • हिन्‍दू-मुस्लिम की एकता का प्रतीक हज़रत शाहपीर की दरगाह
    वास्तुकला 1 वाह्य भवन

     21-11-2020 06:25 AM


  • व्यवसायों और उद्यमशीलता को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित करते हैं, प्रवासी नागरिक
    सिद्धान्त 2 व्यक्ति की पहचान

     20-11-2020 09:33 PM






  • © - 2017 All content on this website, such as text, graphics, logos, button icons, software, images and its selection, arrangement, presentation & overall design, is the property of Indoeuropeans India Pvt. Ltd. and protected by international copyright laws.

    login_user_id