महात्मा गांधी जी ने स्वतंत्रता के लिए चुना था पत्रकारिता को माध्यम

रामपुर

 02-10-2019 10:00 AM
ध्वनि 2- भाषायें

भारत में पत्रकारिता का आरंभ नवयुग के समय में हो गया था, और इसी समय भारतीयों के मन में राष्ट्रीय चेतना जागृत हो रही थी। वहीं राष्ट्र की चेतना को जागृत करने वाले सभी प्रमुख लोगों ने इस कार्य के लिए पत्रकारिता को अपना माध्यम बनाया था। पत्रकारिता को उस दौर में ब्रिटिश साम्राज्य के विरूद्ध जनमत को जागरूक करने के माध्यम से सामने लाया गया था। वहीं इस माध्यम का उपयोग महात्मा गांधी जी ने भी किया था।

यंग इंडिया 1919 से 1931 तक महात्मा गांधी द्वारा प्रकाशित अंग्रेजी में एक साप्ताहिक पत्र या पत्रिका थी। गांधी जी ने इस पत्रिका में विभिन्न उद्धरण लिखे थे, जिन्होंने कई लोगों को प्रेरित किया। उन्होंने आंदोलनों के आयोजन में अहिंसा के प्रयोग के बारे में अपनी अनूठी विचारधारा और विचारों को फैलाने के लिए यंग इंडिया पत्रिका का इस्तेमाल किया और अंग्रेजों से भारत की आजादी की स्वतंत्रता पर विचार करने, संगठित करने और योजना बनाने के लिए पाठकों से आग्रह किया।

जिस वर्ष इस पत्रिका की स्थापना की गई थी उस समय भारत में काफी आक्रोश फैला हुआ था। प्रथम विश्व युद्ध के नाम पर नागरिक स्वतंत्रता पर रोक लगाने वाला सख्त रौलट एक्ट (Rowlatt Act), जिसकी वजह से जलियांवाला बाग हत्याकांड को अंजाम दिया गया, यह सारी घटना इस पत्रिका के साप्ताहिक प्रमुख सरोकार थे। गांधी जी ने इस पत्रिका को अंग्रेजी में इसलिए लिखा था ताकि वे किसानों और श्रमिकों के अलावा भारत की शिक्षित जनता वर्ग (विशेष रूप से मद्रास प्रेसीडेंसी में) तक भी अपने विचारों को प्रस्तुत कर सकें।

वहीं 1933 में गांधीजी ने अंग्रेजी में एक ओर साप्ताहिक अखबार हरिजन को प्रकाशित किया। हरि का अर्थ है "ईश्वर या भगवान" और जन का अर्थ है "लोग" महात्मा गाँधी ने "हरिजन" शब्द का प्रयोग हिन्दू समाज के उन समुदायों के लिये करना शुरु किया था जो सामाजिक रूप से बहिष्कृत माने जाते थे। इस दौरान 11 फरवरी 1933 को यरवदा जेल से गांधी जी ने गुजराती में हरिजन बंधु, और हिंदी में हरिजन सेवक को भी प्रकाशित किया। सभी तीन पत्रिका भारत और विश्व की सामाजिक और आर्थिक समस्याओं पर केंद्रित थी। इन अखबारों में गांधी जी को सामाजिक और आर्थिक समस्याओं पर ध्यान केंद्रित करते हुए पाया गया।

गांधी जी के लिए पत्रकारिता जीवन की खोज का एक साधन था। उनकी लेखनी साधिका के जीवन के अनुभवों की सर्वोत्कृष्टता थी। यह उनके पाठकों को उनकी सच्चाई का अनुसरण करने के लिए समझाने का एक प्रयास था जिसे उन्होंने सत्याग्रह का नाम दिया था। उन्होंने कभी भी बिना सोच विचार के और किसी को भी अपमानित करने के लिए एक शब्द नहीं लिखा था। उन्होंने दक्षिण अफ्रीका में सत्याग्रह की सच्ची तस्वीर और भारत में स्वतंत्रता संग्राम के बारे में पाठकों को बताया। लेकिन इसके अलावा, पत्रकारिता ने सत्य के साधक द्वारा किए गए सामूहिक प्रयोग की झलक को भी दर्शाया।

संदर्भ :-
1.
https://www.hindustantimes.com/india-news/a-newspaper-with-a-view/story-3ahbm3g8GbCY07P3f2OCuN.html
2. https://en.wikipedia.org/wiki/Young_India
3. https://www.mkgandhi.org/articles/indianopinionyindiaharijan.htm
4. https://en.wikipedia.org/wiki/Harijan#Harijan,_Mohandas_Gandhi's_publication



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