Machine Translator

आसानी से मेरठ में पाए जाने वाले भारतीय अजगर की विशेषताएँ एवं स्वभाव

मेरठ

 02-09-2019 02:44 PM
रेंगने वाले जीव

सांप और मनुष्यों का रिश्ता अत्यंत ही अजीब है, एक ओर मनुष्य इनसे डरते भी हैं और दूसरी ओर इनकी पूजा भी करते हैं। हिन्दू धर्म में सांप को भगवान शिव से जोड़ कर देखा जाता है तथा नाग पंचमी पर बाकायदा साँपों की पूजा भी की जाती है। साँपों में विषरहित और सबसे बड़े सांप की प्रजाति की बात की जाए तो वह होते हैं ‘अजगर’। दुनिया का सबसे विशाल अजगर ‘एनाकोंडा’ (Anaconda) को माना जाता है। विषैले सांप की बात की जाए तो ‘किंग कोबरा’ (King Cobra) दुनिया का सबसे बड़ा सांप है। हांलाकि विषधर सांप अपने शिकार को अपने ज़हर से मारते हैं तो वहीं पर अजगर अपने शिकार को जकड़ कर मारता है। यह आकार और मोटाई में अन्य साँपों से अत्यंत ज़्यादा बड़ा और बलिष्ट होता है।

भारत में पाए जाने वाले अजगर को ‘पायथन’ (Python) नाम से जाना जाता है। यह मूल रूप से भारत और दक्षिण पूर्वी एशियाई देशों में पाया जाता है। इस सांप को आम भाषा में इंडियन पायथन (Indian Python), ब्लैक टेल्ड पायथन (Black Tailed Python), इंडियन रॉक पायथन (Indian Rock Python) और एशियन रॉक पायथन (Asian Rock Python) के नाम से जाना जाता है। ये आकार में करीब 9.8 फुट के हो सकते हैं। ये सांप अत्यंत ही धीमे होते हैं तथा स्वभाव से ये बहुत ही शांत होते हैं। ये जल्द ही किसी पर आक्रमण नहीं करते हैं तथा यदि इनपर कोई आक्रमण करे तब भी ये इतनी आसानी से उसपर आक्रमण नहीं करते हैं। ये एक अच्छे तैराक ज़रूर होते हैं। ये एक बार में 100 अंडे तक दे सकते हैं। ये सांप आज लुप्तप्राय हैं जिसका मूल कारण है लोगों में शिक्षा की कमी तथा इनकी चमड़ी का व्यापर।

यदि इनका प्रदर्शन किसी चलचित्र में एक किरदार के रूप में हुआ है तो वह है रडयार्ड किपलिंग द्वारा लिखित कहानियों की श्रृंखला और उसी पर आधारित फिल्म (Film) जंगल बुक (Jungle Book) में। उस किरदार का नाम था ‘का’। इनका मुख्य भोजन छोटे पशु, बड़ी छिपकलियाँ, मेंढक और पंछी आदि हैं। जैसा कि ये जहरीले नहीं होते तो इनके काटने पर किसी व्यक्ति की जान तो नहीं जाती परन्तु व्यक्ति गहरे रूप से ज़ख्मी ज़रूर हो सकता है।

इनके जीवन के सबसे बड़े संकटों की बात की जाए तो ये सड़क दुर्घटना, खेतों में किसानों द्वारा और अपने बड़े आकार के कारण मार दिए जाते हैं। ये कभी-कभी लोगों द्वारा कम शिक्षा के चलते रसल्स वाईपर (Russel’s Viper) समझ कर भी मार दिए जाते हैं। विदेशी बाज़ार में इसकी चमड़ी की बड़ी मांग भी इसकी मृत्यु का कारण है। अन्य पायथन सांपों की तरह इन सांपों को भी पालने की परम्परा के चलते भी इनके ऊपर संकट के बादल मंडराते हैं।

मेरठ का इलाका इन साँपों के लिए अत्यंत ही सुगम है क्योंकि यहाँ पर इनके भोजन और रहने के लिए प्रचुर मात्रा में ज़मीन उपलब्ध है, तो यहाँ पर आये दिन ये अजगर दिखाई दे जाता है। बारिश के दौरान भी इन साँपों के दिखाई देने के आसार बढ़ जाते हैं, कारण कि इस समय इनके लिए प्रचुर मात्रा में भोजन उपलब्ध हो जाता है।

संदर्भ:-
1.
https://en.wikipedia.org/wiki/Python_molurus
2. http://www.indiansnakes.org/content/indian-rock-python
3. https://bit.ly/2Ufem1p
4. https://bit.ly/2Lc5XHM
5. https://en.wikipedia.org/wiki/Kaa



RECENT POST

  • रक्षाबंधन और कोविड-19, रक्षाबंधन के बदलते रूप
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     31-07-2020 04:14 PM


  • रोपकुंड कंकाल झील
    नदियाँ

     31-07-2020 05:31 PM


  • ध्यान की अवस्था को संदर्भित करता है कायोत्सर्ग
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     31-07-2020 06:06 PM


  • क्या रहा समयसीमा के अनुसार, अब तक प्रारंग और मेरठ का सफर
    शुरुआतः 4 अरब ईसापूर्व से 0.2 करोड ईसापूर्व तक

     31-07-2020 08:25 AM


  • क्यों दी जाती है बकरीद पर कुर्बानी
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     31-07-2020 06:09 PM


  • एक सिक्के के दो पहलू: शहरीकरण बनाम स्वचालन
    नगरीकरण- शहर व शक्ति

     30-07-2020 03:50 AM


  • सौर ऊर्जा : अमृत ऊर्जा
    नगरीकरण- शहर व शक्ति

     29-07-2020 09:00 AM


  • कैसा होगा हज 2020?
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     28-07-2020 06:13 PM


  • क्या रहा मेरठ की वनस्पतियों के अनुसार, अब तक प्रारंग का सफर
    शारीरिक

     27-07-2020 08:00 AM


  • बायोरेमेडिएशन के लिए एक प्रभावी उपकरण ‘कवक’
    फंफूद, कुकुरमुत्ता

     27-07-2020 07:43 PM






  • © - 2017 All content on this website, such as text, graphics, logos, button icons, software, images and its selection, arrangement, presentation & overall design, is the property of Indoeuropeans India Pvt. Ltd. and protected by international copyright laws.