निरंतर विकसित होती तकनीकी का पारिस्थितिकी पर प्रभाव

रामपुर

 10-08-2019 11:06 AM
जलवायु व ऋतु

पारिस्थितिकी तंत्र को जीव व मानव व वनस्पतियों के मध्य होने वाले सम्बन्ध को कहते हैं। अति सूक्ष्म कीड़ों की जल में उपज, समुद्र में कैसे पेड़ और जीव जीते हैं और मरू और ज़मीन पर जीव किस प्रकार से रहते हैं, आदि को समझने में पारिस्थितिकी तंत्र मदद प्रदान करता है। यह जैविक और अजैविक दोनों प्रकार के तथ्यों को समेट कर रखता है। पारिस्थितिकी को यदि विषय के रूप में देखा जाए तो यह जीव विज्ञान की शाखा है। जीव विज्ञान, विज्ञान की एक आम शाखा है जो कि जीवों का अध्ययन करती है। जीवों को अन्य और कई शाखाओं के आधार पर पढ़ा जा सकता है जैसे कि बायो केमेस्ट्री (Biochemistry), मोलिक्यूलर बायोलॉजी (Molecular Biology), सेलुलर बायोलॉजी (Cellular Biology) आदि में। पारिस्थितिकी एक बहुविषयक विज्ञान है क्यूंकि यह उन सभी जीवों और वनस्पतियों आदि के विषय में चर्चा करता है जो कि पृथ्वी की कक्षा में उपलब्ध हैं। उपरोक्त कथन से यह भी कहा जा सकता है कि पारिस्थितिकी एक समग्र विज्ञान है जो कि पुरानी धारणा वाले विज्ञान जैसे कि जीव विज्ञान का पूरक है और जो कि अब पारिस्थितिकी का ही एक भाग है।

वर्तमान काल को यदि देखा जाए तो यह तकनीकी काल के रूप में जाना जा सकता है। वर्तमान काल में विभिन्न क्षेत्रों में विभिन्न तकनीकी विकास हमें देखने को मिलते हैं। अब यह समझना महत्त्वपूर्ण हो जाता है कि वास्तविकता में तकनीकी का प्रभाव किस प्रकार से पारिस्थितिकी तंत्र पर पड़ता है। जैसा कि वर्तमान काल में मानव तकनीकी का प्रयोग लम्बे समय तक करता है और वह ज़्यादा ऊर्जा का प्रयोग करता है, तो ऐसे में इसका प्रभाव पारिस्थितिकी तंत्र पर नकारात्मक और सकारात्मक दोनों प्रकार से पड़ता है। तकनीकी के और भी विकसित होने से जब कम ऊर्जा और खपत पर कार्य को पूर्ण किया जाता है तो अवश्य ही प्रकृति पर उसका सकारात्मक प्रभाव पड़ता है क्यूंकि यह वातावरण को कम क्षति पहुंचाता है। तकनीकी के ही सहारे नदियों और तलाबों में जाने वाले कचरे को रोका जाना संभव है तथा नदियों में जाने वाले गंदे पानी को तकनीकी के ही सहारे साफ़ किया जा सकता है अतः यह एक सकारात्मक प्रभाव है तकनीकी का। पेड़ों और पौधों को बिना काटे तकनीकी दृष्टिकोण से अच्छी कृषि और लकड़ी की अलग पूरक वस्तुओं की खोज से भी तकनीकी द्वारा पारिस्थितिकी को संयमित किया जाना संभव है।

उपरोक्त कथनों में हमने तकनीकी के सकारात्मक प्रभावों को देखा, अब हम इसके कुछ नकारात्मक पहलुओं पर नज़र डालेंगे। वर्तमान काल में जो सबसे बड़ी समस्या है वो है अत्यधिक मात्रा में व्यय की जाने वाली ऊर्जा। आज लगभग प्रत्येक वस्तु ऊर्जा के ही ऊपर आधारित है और यह पारिस्थितिकी तंत्र के लिए एक अत्यंत ही सोचनीय विषय है। विभिन्न उद्योगों में तकनीकी के प्रयोग से भी पृथ्वी की पारिस्थितिकी में अत्यंत बदलाव आये। इसका कारण है कि इनसे निकलने वाली गैसें और रसायन पृथ्वी की पारिस्थितिकी के लिए अत्यंत ही हानिकारक हैं।

यह विषय भी अत्यंत महत्वपूर्ण है कि क्या तकनीकी और पारिस्थितिकी एक साथ मिल कर कार्य कर सकते हैं? जी हाँ, यह संभव है। आये दिन हम देखते हैं कि तकनीकी के बेहतर प्रयोग से पारिस्थितिकी में कई सकारात्मक बदलाव आये हैं।

संदर्भ:
1. https://www.sciencedaily.com/terms/ecology.htm
2. https://itchybrainscentral.com/example-essays/ecology-impact-technology
3. http://www.manusablog.com/en/news/the-impact-of-technology-on-ecology/
4. https://www.the-vital-edge.com/technology-ecology/



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