सशस्त्र बल दे रहा है रोजगार के अवसर

मेरठ

 24-06-2019 12:08 PM
नगरीकरण- शहर व शक्ति

कुछ समय पहले हुई मेरठ सेना के एक जवान की दुखद मौत ने मेरठ छावनी के सामरिक स्थान पर प्रकाश डाला। अगर देखा जाये तो आज सशस्त्र बल दुनिया का सबसे बडा नियोक्ता भी बन गया है। विश्व आर्थिक गोष्ठी ने राज्य के नियंत्रण में चलने वाली और निजी स्वामित्व वाली कंपनियों को अन्तर्निहित करते हुए दुनिया के सबसे बड़े नियोक्ताओं की एक सूची जारी की। अमेरिका, चीन और ब्रिटेन दुनिया के सबसे बड़े नियोक्ताओं में से एक हैं जहां खुदरा, सैन्य, स्वास्थ्य और विनिर्माण उद्योग में कर्मचारी कार्यरत हैं। इनका संक्षिप्त विवरण इस प्रकार से है:
• संयुक्त राज्य अमेरिका रक्षा विभाग: यह रक्षा विभाग 3.2 लाख कर्मचारियों के साथ सबसे प्रमुख और सबसे बड़ा वैश्विक नियोक्ता है। इसमें सक्रिय सेवा कर्मचारी, राष्ट्रीय गार्डमैन और आरक्षक, और अन्य सेवाओं के कर्मचारी शामिल हैं।
• पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (People's Liberation Army): पीपुल्स लिबरेशन आर्मी चीन की कम्युनिस्ट पार्टी और पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना(People's Republic of China) के सशस्त्र बलों के रूप में कार्य करती है। इनकी पांच मुख्य शाखाएं सामरिक सहायता बल, नौसेना, वायु सेना, थल सेना, प्रक्षेपास्र सेना हैं। यह दूसरा सबसे बड़ा नियोक्ता है, जो 2.3 लाख कर्मचारियों को रोजगार देता है।
• वॉल-मार्ट (Walmart): यह पारिवारिक स्वामित्व वाला व्यवसाय है जो कि सबसे बड़ा निजी नियोक्ता है तथा दुनिया में तीसरा सबसे बड़ा नियोक्ता है। इसके अंतर्गत 2.1 लाख कर्मचारी कार्यरत हैं।
• मैकडॉनल्ड्स(McDonald's): यह दुनिया की सबसे बड़ी खाद्य श्रृंखला कंपनी है जिसके अंतर्गत 1.7 लाख कर्मचारी कार्य करते हैं तथा यह दुनिया का चौथा सबसे बड़ा नियोक्ता है।
• चीन राष्ट्रीय पेट्रोलियम निगम (CNPC): यह दुनिया का पांचवा सबसे बड़ा नियोक्ता है, जिसमें कुल 1.7 मिलियन कर्मचारी हैं।

दुनिया के सबसे बड़े नियोक्ताओं में विभिन्न कंपनियां, सेनायें और सरकारें शामिल हैं जिस का आंकड़ा निम्नलिखित है:
दुनिया के शीर्ष 10 में से 4 मुख्य नियोक्ता चीन से हैं, जो 5.6 लाख लोगों को रोजगार देते हैं।

भारत का सशस्त्र बल भी दुनिया के सबसे बड़े शीर्ष 10 नियोक्ताओं में अपना स्थान बना पाने में सफल हुआ है। रक्षा मंत्रालय देश का सबसे बड़ा भूस्वामी है, जिसके नियंत्रण में 17.3 लाख एकड़ भूमि निहित है। यह 62 छावनियों (मेरठ सहित) को आवरित करता है, जिसके अंतर्गत 2 लाख एकड़ भूमि आती है। सेना के नियंत्रण में 237 सैन्य स्टेशन भी हैं जबकि शेष जमीन पर एयरबेस (Air base), नेवल बेस(Naval base), डीआरडीओ लैब (DRDO Lab), फायरिंग रेंज (Fireing Range) आदि ने अपना स्थान बनाया हुआ है।

भारतीय सैन्य सेवाओं ने सैन्य विज्ञान, युद्ध कमान और रणनीति संबंधित तकनीकों में पेशेवर सैनिकों को प्रशिक्षित करने के उद्देश्य से भारत भर में कई अकादमियों और स्टाफ कॉलेजों की स्थापना की है जिनमें से कुछ प्रमुख संस्थान निम्नलिखित हैं:
• आर्मी वॉर कॉलेज, महू (Army War College)
• इन्फैंट्री स्कूल, महू (Infantry School)
• भारतीय सैन्य अकादमी, देहरादून (IMA)
• अधिकारी प्रशिक्षण अकादमी, चेन्नई (OTA)
• अधिकारी प्रशिक्षण अकादमी, गया (OTA)
• हाई एल्टीट्यूड वारफेयर स्कूल (High Altitude Warfare School), गुलमर्ग
• आर्मर्ड कॉर्प्स सेंट्रे एंड स्कूल (Armoured Corps Centre and School), अहमदनगर
• सैन्य वायु रक्षा कॉलेज, गोपालपुर(AADC)
• सैन्य अभियांत्रिकी कॉलेज (Army Air Defence College), पुणे
• मिलिट्री कॉलेज ऑफ़ टेलीकम्यूनिकेशन इंजीनियरिंग (Military College of Telecommunication Engineering), महू
• सेना चिकित्सा केंद्र (AMC) और स्कूल, लखनऊ
• आर्मी कैडेट कॉलेज(Army Cadet College), देहरादून
• राष्ट्रीय भारतीय सैन्य कॉलेज, देहरादून(RIMC)
• भारतीय नौसेना अकादमी (केरल)
• भारतीय नौसेना पोत अग्रानी, कोयंबटूर (INS Agrani, Coimbatore)
• भारतीय नौसेना पोत चिल्का (INS Chilka) चिल्का
• भारतीय नौसेना पोत द्रोणाचार्य (INS Dronacharya) कोच्चि
• कॉलेज ऑफ एयर वारफेयर (College of Air Warfare) हैदराबाद
• पायलट प्रशिक्षण प्रतिष्ठान (Pilot Training Establishment) इलाहाबाद
• वायु सेना प्रशासनिक कॉलेज (Air Force Administrative College) कोयंबटूर आदि
इन संस्थानों में विभिन्न सैन्य पदाधिकारियों को प्रशिक्षण दिया जाता है।

भारत की विभिन्न छावनियां और सैन्य स्टेशन भी सशस्त्र बल के अंतर्गत आती हैं किंतु वास्तव में ये एक दूसरे से भिन्न हैं। छावनियां अधिसूचित स्थान हैं जिन पर शासन संसद के अधिनियमों द्वारा चलाया जाता है जबकि सैन्य स्टेशनों को सरकार के कार्यकारी आदेशों द्वारा बनाया गया है और इनका कोई सांविधिक समर्थन नहीं है। छावनियों में उनकी श्रेणी के आधार पर सैन्य और नागरिक दोनों आबादी मिश्रित हो सकती है, जबकि सैन्य स्टेशनों की सुविधा केवल सैन्यकर्मियों को ही दी जाती है। लगभग 250 साल बाद जब देश में 62 से भी अधिक छावनियां विकसित हो चुकी हैं, सेना ने इन्हें समाप्त करने का विचार किया है। देश भर में छावनियों के रखरखाव पर खर्च होने वाले धन की बचत करने हेतु यह निर्णय लिया गया है। शीर्ष सेना पदानुक्रम का मानना है कि इस कदम से छावनियों के वार्षिक रखरखाव के लिये खर्च किये जा रहे रक्षा बजट पर दबाव कम होगा।

भारत की जनसंख्या अमेरिका (भारतीय आबादी का केवल एक चौथाई) से अधिक है किंतु इसके बाद भी अमेरिका का सशस्त्र बल भारत की अपेक्षा अधिक है। और इसी प्रकार चीन की सशस्त्र सेना भी भारत से कई अधिक प्रबल है जिस कारण यहां की सशस्त्र सेना अपने नागरिकों को इस क्षेत्र में अधिक रोजगार उपलब्ध करवा रही है। भारतीय सशस्त्र बल भी नागरिकों को रोजगार उपलब्ध करवा रहा है किंतु यह देखा गया है कि सशस्त्र बल की तुलना में भारतीय रेलवे लोगों को अधिक रोजगार के अवसर दे रहा है।

संदर्भ:
1. https://en.wikipedia.org/wiki/List_of_largest_employers
2. https://www.worldatlas.com/articles/the-world-s-largest-employers.html
3. https://en.wikipedia.org/wiki/Military_academies_in_India
4. https://bit.ly/2FsX76C
5. https://bit.ly/2WYkSxY



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