क्यों मिलते हैं वेस्टइंडीज़ क्रिकेटरों के नाम भारतीय नामों से?

मेरठ

 21-05-2019 10:30 AM
उपनिवेश व विश्वयुद्ध 1780 ईस्वी से 1947 ईस्वी तक

ये बात तो आपने सुनी ही होगी कि दुनिया में आप कहीं भी जाओ भारतीय आपको हर जगह मिल जाएंगे, ये बात ऐसे ही नहीं कही जाती है। आज हम आपको वेस्‍टइंडीज़ के कुछ खिलाड़ियों के बारे में बताते हैं जो असल में भारतीय मूल के हैं। वेस्टइंडीज़ (गुयाना, त्रिनिदाद, जमैका आदि) का नाम हर किसी ने सुना है। वेस्टइंडीज़ की ही वो धरती है, जहां 1845 और 1917 के बीच कुल 1,43,939 भारतीयों को भारतीय ठेका प्रणाली (गिरमिटिया प्रणाली) के तहत त्रिनिदाद भेजा गया था। इनमें से अधिकांश गिरमिटिया मजदूर उत्तर भारत के उत्तर प्रदेश और बिहार क्षेत्रों के खेतिहर और श्रमिक वर्गों में से थे, जिनमें से कुछ संख्या में बंगाल और दक्षिण भारत के विभिन्न क्षेत्रों से भी श्रमिक लिये गये थे। इसमें लगभग 85% अप्रवासी हिंदू और 14% मुसलमान थे।

यही कारण है कि वर्तमान में वेस्टइंडीज में काफी भारतीय मूल के लोग रहते हैं और आपको यहां तमाम लोगों (खासकर वेस्टइंडीज़ क्रिकेटरों के) के नाम भारतीय नामों से मिलते जुलते मिल जाएंगे। जैसे कि वेस्टइंडीज़ क्रिकेट टीम के अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेटर ‘देवेन्द्र बीशू’ जो कि असल में भारतीय मूल के हैं। देवेन्द्र बीशू वेस्टइंडीज़ टीम में एक स्पिनर (Spinner) हैं, परंतु इनके परिवार की जड़ों का पता लगाया जाये तो पता चलता है कि इनका संबंध भारत से जुड़ा हुआ है। कहा जाता है कि 19वीं शताब्दी के मध्य में उनके पूर्वजों को गुयाना में गन्ने के बागानों में गिरमिटिया मजदूरों के रूप में काम करने के लिए ब्रिटिश भारत से भेजा गया था।

उन दिनों, गरीब भारतीयों ने आजीविका कमाने के लिए कैरिबिया जाने का फैसला लिया और हज़ारों पुरुषों और महिलाओं ने अपनी रज़ामंदी से ठेकेदारों के साथ रोज़गार समझौतों पर हस्ताक्षर करने के बाद एक नए जीवन की शुरुआत करने के लिए लंबी समुद्री यात्रा शुरू की और इस प्रकार कैरिबियन, श्रीलंका, मलेशिया, म्यांमार आदि में भारतीय प्रवासियों का आगमन हुआ। भारतीय-गुयाना या इंडो-गुयाना में आये ज्यादातर भारतीय गिरमिटिया मजदूर, उत्तर भारत के उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड के भोजपुर तथा अवध क्षेत्र से थे, जिसमें अल्पसंख्यक दक्षिण भारत के मजदूर भी शामिल थे।

इस गिरमिटिया श्रम प्रणाली की शुरुआत 5 मई, 1838 को हुई थी, और 396 भारतीयों को कलकत्ता से ब्रिटिश गुयाना में भेजा गया था। इन प्रवासियों को 'ग्लैडस्टोन कुलीज़' (Gladstone Coolies) के नाम से जाना जाता था। 2012 की जनगणना से पता चलता है कि गुयाना में इंडो-गुयाना सबसे बड़ा जातीय समूह है। जो संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा और यूनाइटेड किंगडम जैसे देशों में इंडो-गुयाना प्रवासी के रूप में रह रहे हैं। देवेन्द्र बीशू के अलावा वेस्टइंडीज़ क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान रामनरेश सरवन, बल्‍लेबाज एलविन कालीचरन, 60 के दशक में पूरी दुनिया के सबसे महान बल्‍लेबाज कहे जाने वाले रोहन कान्हाई, दिनेश रामदीन और शिवनारायण चंद्रपॉल वेस्टइंडीज़ से भारतीय मूल के क्रिकेटर हैं।

जब सन 1845 में भारतीय मजदूरों का पहला जत्था कैरेबियाई धरती पर पहुंचा था, इस दिन को श्रद्धांजलि देने के लिए 30 मई को त्रिनिदाद और टोबैगो सहित कई जगहों पर भारतीय आगमन दिवस या इंडियन अराइवल डे (Indian Arrival Day) के तौर पर मनाया जाता है। परंतु 1994 तक इस दिन पर आधिकारिक सार्वजनिक अवकाश नहीं मिलता था और इसे ‘आगमन दिवस’ ही कहा जाता था। 1995 में, इसे ‘भारतीय आगमन दिवस’ का नाम दिया गया और प्रत्येक वर्ष 30 मई को ये दिवस मनाया जाता है। साथ ही साथ ये दिन त्रिनिदाद और टोबैगो के विभिन्न समुद्र तटों पर फेटेल रज़ैक (Fatel Razack - भारत के गिरमिटिया मजदूरों को त्रिनिदाद ले जाने वाला पहला जहाज) के आगमन की महत्वपूर्ण घटना की याद दिलाता है।

संदर्भ:
1. https://bit.ly/2mtrFev
2. https://www.nalis.gov.tt/Resources/Subject-Guide/Indian-Arrival-Day
3. https://en.wikipedia.org/wiki/Indo-Guyanese
4. https://bit.ly/2VD1iSi
5. https://www.sportskeeda.com/cricket/5-west-indies-cricketers-indian-origin

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