चीन से प्राप्त हुए भगवान श्री कृष्‍ण के ये अनमोल चित्र

मेरठ

 03-09-2018 04:08 PM
धर्म का उदयः 600 ईसापूर्व से 300 ईस्वी तक

भगवान श्री कृष्ण की 200 ईसा पूर्व से पहले की मूर्तियों के अभाव से पुरातत्त्ववेत्ता और इतिहासकार वर्षों से परेशान होते आये हैं। कुषाण काल (200 ईसा पूर्व) से सम्बंधित मथुरा-वृन्दावन से उभरने वाली शुरूआती पत्थर की मूर्तियों से भी देवी पूजा (महिषासुर मर्दिनी) एवं बौद्ध और जैन प्रतीकों की लोकप्रियता ही प्राप्त होती है। इसलिए कुछ वर्षों पहले (2010 में) चीन के खोतान प्रांत में हुई एक खोज के बारे में जानना आज और भी दिलचस्प हो जाता है। यह खोज थी एक प्राचीन कालीन की जिस पर भारत की सबसे पुरानी समझी जाने वाली लिपि ‘ब्राह्मी’ के अक्षर ‘खोतानी’ भाषा (जिसपर प्राचीन संस्कृत और कश्मीरी का भी प्रभाव है) में लिखे हुए हैं। और यही नहीं, इस कालीन पर भगवान श्री कृष्ण की हस्तनिर्मित आकृति भी आसानी से देखी जा सकती है। तो चलिए देखें इस कालीन के कुछ दुर्लभ चित्र और जानें इसके बारे में गहराई से।

सन 2008 में खोतान जिले की लोप काउंटी के पुलिस विभाग ने इन कालीनों को 2 लुटेरों से बरामद किया। लुटेरों ने कुछ और भी कालीन चुराना क़ुबूल किया परन्तु वे पहले ही उन्हें बेच चुके थे इसलिए उन्हें हासिल नहीं किया जा सका। अन्वेषण के बाद दोनों कालीन तीसरी से पांचवी शताब्दी के माने गए।

1.पहला कालीन:


प्रस्तुत कालीन में ब्राह्मी लिपि के कुछ अक्षरों को नीले रंग में बुना हुआ देखा जा सकता है जिन्हें पढ़ने पर वे कहते हैं ‘हा दी वा’। इस कालीन में कम से कम 33 मनुष्यों की आकृति देखी जा सकती है। कालीन की किनारी काफी मोटी है तथा उसपर काफी जटिल सजावटी आकृतियाँ बनायीं गयी हैं और साथ ही कुछ पशु रूपों को भी देखा जा सकता है। सभी दर्शाए गए व्यक्तियों की आँखें एवं नाक को काफी विशिष्ट रूप से बनाया गया है, शरीर सामान्य परन्तु कमर काफी मोटी बनायी गयी है। चौकोर चहरे संभावित रूप से बुनाई की तकनीक का नतीजा हैं। हाथ और पैर असामान्य रूप से बड़े दिखाई देते हैं तथा सभी के पैर नंगे हैं। साथ ही नीचे दिए गए चित्रों में आप श्री कृष्ण को देख सकते हैं, उनकी पहचान उनके नीले रंग से की जा सकती है। एक चित्र में श्री कृष्ण के हाथ में एक गेंद दिखाई पड़ती है जो हो सकता है मक्खन की गेंद हो। तथा दूसरे चित्र में श्री कृष्ण को हाथ में गोवर्धन पर्वत उठाए देखा जा सकता है और उनके नज़दीक एक स्त्री बांसुरी बजाते भी देखी जा सकती है।




2. दूसरा कालीन:


इस कालीन में भी पहली कालीन से मिलते-जुलते काफी लक्षण नज़र आते हैं जैसे मोटी और जटिल किनारियाँ, पशु रूप, ब्राह्मी लिपि आदि। साथ ही इसमें दो व्यक्तियों को कालीन के बीचोबीच एक दूसरे के सापेक्ष ऊपर और नीचे बनाये हुए देखा जा सकता है जिससे वे साथ दौड़ते या उड़ते हुए प्रतीत होते हैं। इनके सिरों के नज़दीक नीले और पीले रंग से ब्राह्मी लिपि में कुछ लिखा दिखाई पड़ता है जिसे पढ़ने पर वह कहता है ‘स्पवता मेरी सुमा होडा’। यह खोतानी भाषा में लिखा गया है तथा इसे नीचे दिए गए चित्र में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है।

इन सभी बातों और खोज पर गौर करके पता चलता है कि श्री कृष्ण के सबसे पुराने साक्ष्यों में से कुछ कालीन के रूप में भी मौजूद हैं तथा उस समय भी श्री कृष्ण की किंवदंतियों का प्रचलन था।

संदर्भ:

1.https://www.insa.nic.in/writereaddata/UpLoadedFiles/IJHS/Vol51_4_2016_Art12.pdf
2.https://www.brepolsonline.net/doi/abs/10.1484/J.JIAAA.1.103269?journalCode=jiaa&

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